गुरुवार, 7 मार्च 2024
शिव धूणा सूरतगढ़ सालों से गर्म:अजब नागलोक:ब्रह्मा विष्णु महेश प्रतिमाएं:
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| विशाल ओम सृष्टि का प्रतीक और उस पर भी शेष नाग की छत्र छाया |
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| अखेनाथ यानि शिव का धूणा निरंतर जल रहा है। इस धूणे के पास में यहां ब्रह्मा विष्णु महेश की प्रतिमाएं स्थापित हैं। श्रद्धालु धूणे की भभूति मस्तक पर लगाते हैं। |
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| कुटिया में शिव लिंग स्थापित है और उस पर भी लेटा है एक काला नाग, प्रतिमा रूप में। इस कुटिया में वीर बजरंग बली,मां दुर्गा और मां करणी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं |
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| बाबा लहरी नाथ की कई घुमाव लिए हुए गुफा है, जिसमें वो ध्यान लगाते हैं। |
धूणे के तीन ओर ब्रह्मा विष्णु महेश की प्रतिमाओं के अनूठे दर्शन
बाबा लहरीनाथ की त्रिवेणी संग कुटिया में यह अद्भुत लोक और उस पर नाग की छत्र छाया में ओम
कान्हाराम को हुआ आदेश तेरा नाम लहरीनाथ है, जा केर की झाड़ी के पास अखेनाथ का धूणा लगाले
लहरीनाथ तंबूरे में शिव आवो शिव आवो में अपने शरीर के बाहर धुन में लीन था और आभास हुआ कि शिव नृत्य कर रहे हैं-
यह अद्भुत संयोग 20 मिनट तक चला
इस मंदिर में शिव लिंग,वीर बजरंग बली, मां दुर्गा और मां करणी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं
करणीदानसिंह राजपूत
चमत्कारी शिव मंदिर सूरतगढ़:आस्था का चमत्कार- करणीदानसिंह राजपूत
बीकानेर रोड सार्वजनिक निर्माण विभाग निरीक्षण गृह के पीछे पेड़ों से घिरा है यह मंदिर:
श्रद्धालुओं के अलावा हजारों पक्षी तोते कबूतर चिडिय़ां चुगते हैं दाना और अठखेलियां करती विचरण करती है गिलहरियां:
मन की शांति का प्रतीक:
यह मंदिर हरियाले पेड़ों से घिरा हुआ हे जहां शांति जरूर मिलती है। श्रद्धालु चुग्गा चौक पर दाना डालते रहते हैं। हजारों पक्षी तोते कबूतर चिडिय़ां चुगते हैं दाना और अठखेलियां करती विचरण करती है गिलहरियां।
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Updated 10 मार्च 2021.
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भगवान शिवधूणा संतआश्रम सूरतगढ़: सीताराम गौ शाला
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| संत आश्रम सूरतगढ़ में भगवान शिव का अखंड धूणा- फोटो करणीदानसिंह राजपूत |
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| संत राम दास शिव धूणे के पास विराजे हुए |
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| आस्थावान संत रामदास, भीमराज तावणिया, त्रिलोकचंद अग्रवाल, महावीर प्रसाद मुद्गल,सुरेश मिश्रा |
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| निर्माणाधीन ठाकुरजी का मंदिर |
मंगलवार, 5 मार्च 2024
RAS अविगर्ग पहले थे विकास गर्ग:भ्रष्टाचार उजागर हुआ तब नाम बदला.
* करणीदानसिंह राजपूत *
* विकास गर्ग सूरतगढ़ राजकीय महाविद्यालय में संविदा पर पढाते रहे और बीएड में संगरिया में करीब 7 माह हाजिरी लगती रही। हाजिरी 2004 में लगती रही। इस फर्जीवाड़े से तैयार दस्तावेज से परीक्षा महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय से 2005 में दी गई और सी.सै.विद्यालय में स्कूली लैक्चरार लगे तथा करीब 80 लाख रू.का भुगतान उठाया जबकि इसके पात्र नहीं थे। यह फर्जीवाड़ा सूरतगढ़ से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक "ब्लास्ट की आवाज" में भी छपा।आर ए एस की परीक्षा बाद में दी थी और उतीर्ण होने पर नौकरी लगने के बाद जब यह मामला उजागर हुआ तब विकास गर्ग से नाम बदला और अवि गर्ग रख लिया। विकास गर्ग नाम था उस समय भी अवि के नाम से मोबाइल सिम ले रखी थी। अविगर्ग अभी स्वायत्त शासन विभाग में बीकानेर में उपनिदेशक पोस्ट पर नियुक्त हैं। सेठ रामदयाल राठी सी.सै. स्कूल सूरतगढ़ में लैक्चरार रहे। आर ए एस पोस्ट पर संगरिया हनुमानगढ़ पीलीबंगा में रहे।
* अब थानेदारों के पकड़े जाने के बाद लग रहा है कि यह भ्रष्टाचार भी जांच के दायरे में आएगा।
5 मार्च 2024.
* करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
सोमवार, 4 मार्च 2024
मुख्यमंत्री ने की जनसुनवाई:परिवेदनाओं का तुरंत निस्तारण का निर्देश.
जयपुर, 4 मार्च 2024.
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास (ओटीएस) पर जनसुनवाई की। उन्होंने आमजन की परिवेदनाओं को सुनते हुए अधिकारियों को त्वरित निस्तारण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से भी आत्मीय मुलाकात की।
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पूनम/रवीन्द्र
रविवार, 3 मार्च 2024
अतिक्रमण हटाते वक्त मौका मजिस्ट्रेट ईओ को भी मौजूद रखे.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 3 मार्च 2024. अतिक्रमण हटाने का कार्य अधिशासी अधिकारी की उपस्थिति में ही होना चाहिए। असल में अतिक्रमण हटाने की स्थिति में ईओ जानबूझकर उपस्थित होने से बचते हैं और अधिनस्थ कर्मचारियों को आगे करते हैं।
* अतिक्रमण हटाने का कार्य महत्वपूर्ण है मगर पेचीदा होता है और अधिशासी अधिकारी की उपस्थिति के निर्देश भी उच्च स्तर पर दिए जाते रहे हैं। जब भी झगड़ा फसाद होता है तब पहला सवाल पूछा जाता है कि ईओ वहां पर था या नहीं था। यह इसलिए जरूरी होता है कि कागजात और मौके की स्थिति में अनेक बार अंतर होता है। ऐसी स्थिति में ईओ ही बताता है कि कौनसा अतिक्रमण कितना हटाना है। ईओ की मौजूदगी नहीं होने पर विवाद होते हैं। चुने जनप्रतिनिधि या शिकायत कर्ता तो रड़क के लिए किसी का भी अतिक्रमण तुड़वाने का प्रयास कर सकता है इसलिए सरकारी अधिकारी " अधिशासी अधिकारी" का मौके पर होना जरूरी होता है।
👍 अतिक्रमण हटाने के समय मौका मजिस्ट्रेट और पुलिस बल हो तब संपत्ति का अधिकारी मौजूद न हो,तो यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वह मजिस्ट्रेट से बड़ा नहीं होता है।
👍 मौका मजिस्ट्रेट ईओ को उपस्थित रखे और उसको कार्यवाही पूरी होने तक मौके पर रहने के लिए पाबंद भी रखे।
अतिक्रमण हटाने के समय मौका मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पुलिस बल भी रखा जाता है ताकि किसी भी प्रकार से झगड़ा न हो,कानून और शांति की व्यवस्था बनी रहे।०0०
* करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार.( राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़।
94143 81356
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शनिवार, 2 मार्च 2024
कैलाश मेघवाल और निहालचंद मेघवाल के टिकट युद्ध पर लोगों की निगाहें.जीतेगा कौन?
* करणीदानसिंह राजपूत *
राजस्थान की श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर इसबार भाजपा टिकट के लिए युद्ध जैसा माहौल बना है। कैलाश मेघवाल लोकप्रियता में आगे बढते हुए वर्तमान सांसद निहाल चंद मेघवाल को टक्कर देते हुए बराबर जैसी राजनीतिक हालात पैदा कर चुके हैं। दोनों का व्यापक जनाधार है जिसमें एक नाम तय करना नेताओं के लिए मुश्किल तो रहेगा।
निहालचंद मेघवाल से कामकाज को लेकर जनता में कुछ नाराजगी बढी है और उनको चाहने वाले कुछ पीछे हैं। आठ विधानसभा क्षेत्रों में कैलाश मेघवाल को 32.75 प्रतिशत और निहालचंद मेघवाल को 29.75 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं लेकिन ये पसंद नापसंद इतनी ऊंची नीची नहीं है कि केवल इस आधार पर टिकट नहीं मिल सके।
निहालचंद अभी सांसद हैं और कुल मिलाकर पांचवीं बार जीते हुए हैं। पिछली जीत भी बहुत अच्छी 4 लाख से अधिक मतों से रही थी जिसका दबदबा तो रहेगा मगर पांचवीं बार चुने जाने पर संभव है इसबार नये चेहरे को मौका देने की नीति के तहत टिकट निहालचंद को नहीं मिले। निहाल चंद वर्तमान में सांसद हैं तो कैलाश मेघवाल राजस्थान भाजपा में अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष हैं। दोनों ही पावरफुल स्टेज पर हैं।
👍 निहालचंद मेघवाल के पिता बेगाराम श्रीगंगानगर से दो बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। इस सूची में दो बार श्री बेगाराम चौहान का नाम है।
भाजपा श्रीगंगानगर सीट पर नया प्रयोग कर सकती है। ऐसी स्थिति में टिकट निहालचंद को नहीं मिल पाए,ऐसा संभव हो सकता है लेकिन नये चेहरे में टिकट कैलाश मेघवाल के अलावा किसी और नये चेहरे को मिल जाए तो आश्चर्य होगा। भाजपा जीत की पकायत के साथ नया प्रयोग करती है तो यह मान कर ही चलती है कि वोट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मिलते हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव 2023 में श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों में मोदी का यह जादू चल नहीं पाया। श्रीगंगानगर सीट पर इसबार भाजपा टिकट तय करने से पहले आठों विधानसभाओं में कांग्रेस की वर्तमान हालात पर विचार भी होगा। यह मानना चाहिए। यह भी मानना चाहिए कि श्रीगंगानगर सीट पर बदलाव की मांग चल रही है। यह बदलाव की मांग निहालचंद मेघवाल की टिकट पर अंतिम समय में भी असर डाल सकती है। अभी राजनीति में श्रीगंगानगर से दिल्ली तक निहालचंद मेघवाल पूरी तरह से पावरफुल है।०0०
2 मार्च 2024.
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकारिता 60 वर्ष. राजनीतिक लेखन व समीक्षक,
( राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
94143 81356
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