गुरुवार, 7 मार्च 2024

कालवा वापसी के 15 दिन का काम:गति की मांग: आचार संहिता का डर.




* करणीदानसिंह राजपूत *

नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा की सस्पेंशन से बहाली 20 फरवरी 2024 को हुई जिसके 15 दिन बीतने पर परिणाम की चींटी चाल पर हैरानी हो रही है। संघ और भाजपा के पार्षद ही काम की गति और अपने ही कामों फाईलों पर इंतजार में है।पट्टों की नोटिस जारी हुई पूर्ण हो चुकी फाईलों पर भी इंतजार है और लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लगने का भय सता रहा है कि उनका काम अटक जाएगा।पट्टों की गति जिस पर भाजपा पार्षद ही हैरान हैं कि इस चींटी चाल से तो 100-150 पट्टे ही बड़ी मुश्किल से हस्ताक्षर होंगे और मिलेंगे या नहीं मिलेंगे का कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा।भाजपा पार्षद अपने वार्ड के पट्टों पर क्या बोलें,उनके नजदीकी वोटरों को देरी होना परेशान कर रहा है।

👌 राजस्थान की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की 100 दिन की कार्ययोजना बनी और उसके कार्यों की समीक्षा भी हो गई। यहां चुनाव आचार संहिता के लगने का लगभग समय मार्च दूसरा सप्ताह संभावित माना जा रहा तो फिर यहां भी कोई कार्ययोजना बनाई जाती। साफ सफाई बाजार के अतिक्रमण पर चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा और अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा का ध्यान ही नहीं।एक भी निरीक्षण नहीं। बस,एक सफलता हुई है कि अनूपगढ़ से स्थानांतरित होकर पूजा शर्मा अपने घर सूरतगढ़ आ गई। 20 फरवरी को ही पूजा शर्मा ने यहां कार्यभार ग्रहण किया। कर्मचारियों की ड्युटी बाबत सरकार के निर्देश और आदेश का पालन नहीं कर रही। 

👍 चुभती हुई बातों में जो हालात बयान हो रहे हैं कि कार्यवाहक अध्यक्ष परसराम भाटिया ने पट्टे और अन्य कार्य युद्ध स्तर पर किये। यह बात जब भाजपा के कार्यकर्ता कहे तो विचारणीय हालात हैं।

👍 पट्टों की जो फाईलें पूर्ण होने के बाद अखबारों में सूचनाएं दी गई और कोई आपत्ति नहीं आई उनको शिविर के चक्कर में रोके रखना उचित नहीं। लोगों को आचार संहिता का भय लग रहा है तो वह निर्रथक नहीं है। कितने पट्टे दे दिए गए कि संख्या ही गिनती में आएगी, शिविर की गणना का बखान नहीं होता।





** 20 फरवरी को पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया और ओमप्रकाश कालवा के बयान थे कि बड़े लोगों के अतिक्रमण तोड़े जाएंगे।भूमाफिया को पनपने नहीं दिया जाएगा। झुग्गी झोंपडियों को उजाड़ा नहीं जाएगा। पट्टों का काम तेजी से होगा। 

👍 अतिक्रमण केवल 1 ही तोड़ा गया। एक पखवाड़े में अतिक्रमण ही नहीं मिले या इस पर कोई दबाव हो गया? पट्टे मामले में जब संघ के कार्यकर्ता और भाजपा पार्षद ही हैरान हो रहे हैं तो कामकाज का तरीका बदलकर तेजी लाई जानी चाहिए ताकि लोकसभा चुनाव आचार संहिता से पहले कुछ कह पाने की स्थिति तो बन जाए।०0०





















शिव धूणा सूरतगढ़ सालों से गर्म:अजब नागलोक:ब्रह्मा विष्णु महेश प्रतिमाएं:


 सूरतगढ़ में है शिव का धूणा। मुख्य द्वार के दोनों ओर शिव लिंग बने हुए दिखाई देते हैं। दाहिनी ओर शिव लिंग है जो ऊर्जा का प्रतीक ही नहीं यही माना जाता है कि संपूर्ण संसार की गर्मी निकलती है ओर उसे ठंडा करने के लिए बाईं ओर जलेरी बनी हुई है जिसमें जल है।



विशाल ओम सृष्टि का प्रतीक और उस पर भी शेष नाग की छत्र छाया

अखेनाथ यानि शिव का धूणा निरंतर जल रहा है। इस धूणे के पास में यहां ब्रह्मा विष्णु महेश की प्रतिमाएं स्थापित हैं। श्रद्धालु धूणे की भभूति मस्तक पर लगाते हैं।

कुटिया में शिव लिंग स्थापित है और उस पर भी लेटा है एक काला नाग, प्रतिमा रूप में। इस कुटिया में वीर बजरंग बली,मां दुर्गा और मां करणी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं

बाबा लहरी नाथ की कई घुमाव लिए हुए गुफा है, जिसमें वो ध्यान लगाते हैं।

अखेनाथ यानि शिव का धूणा : नाग प्रतिमाओं के अद्भुत लोक में धूणा
धूणे के तीन ओर ब्रह्मा विष्णु महेश की प्रतिमाओं के अनूठे दर्शन
बाबा लहरीनाथ की त्रिवेणी संग कुटिया में यह अद्भुत लोक और उस पर नाग की छत्र छाया में ओम
कान्हाराम को हुआ आदेश तेरा नाम लहरीनाथ है, जा केर की झाड़ी के पास अखेनाथ का धूणा लगाले
लहरीनाथ तंबूरे में शिव आवो शिव आवो में अपने शरीर के बाहर धुन में लीन था और आभास हुआ कि शिव नृत्य कर रहे हैं-
यह अद्भुत संयोग 20 मिनट तक चला
इस मंदिर में शिव लिंग,वीर बजरंग बली, मां दुर्गा और मां करणी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं
करणीदानसिंह राजपूत

चमत्कारी शिव मंदिर सूरतगढ़:आस्था का चमत्कार- करणीदानसिंह राजपूत





बीकानेर रोड सार्वजनिक निर्माण विभाग निरीक्षण गृह के पीछे पेड़ों से घिरा है यह मंदिर:
श्रद्धालुओं के अलावा हजारों पक्षी तोते कबूतर चिडिय़ां चुगते हैं दाना और अठखेलियां करती विचरण करती है गिलहरियां:
मन की शांति का प्रतीक:

    इस चमत्कारी शिव मंदिर को किन श्रद्धालुओं ने बनवाया और कैसे चमत्कारी शिव मंदिर नाम दिया गया। यह विषय आस्थावान लोंगों कें लिए गौण हो जाता है। श्रद्धा और विश्वास से जब पूजन होता है तो बहुत कुछ मिल जाता है जो किसी को मालूम नहीं पड़ता। यही आस्था और विश्वास लोगों को इस मंदिर में प्रवेश कराता है। मैंने अनेक लोगों को इस मंदिर में शिव लिंग पर जलाभिषेक करते दुग्धाभिषेक करते देखा है। उनको भी देखा है जो बेलपत्र चढ़ाते हैं और चंदन का त्रिपुंड बनाते हैं। पति के जीवन की दीर्घायु की कामना। अपने लिए अच्छे वर की अभिलाषा। हर श्रद्धालु की अपनी अपनी कामना अपनी अपनी मन्नौतियां। मंदिर में ही परिक्रमा में एक खेजड़ी है जिसके तने पर श्रद्धालु मन्नौतियों की रोली बांधते रहते हैं।
    यह मंदिर हरियाले पेड़ों से घिरा हुआ हे जहां शांति जरूर मिलती है। श्रद्धालु चुग्गा चौक पर दाना डालते रहते हैं। हजारों पक्षी तोते कबूतर चिडिय़ां चुगते हैं दाना और अठखेलियां करती विचरण करती है गिलहरियां।
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Updated 10  मार्च 2021.
अपडेट 25 जुलाई 2022.
अपडेट 7 मार्च 2024

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भगवान शिवधूणा संतआश्रम सूरतगढ़: सीताराम गौ शाला



* करणीदानसिंह राजपूत *
2 नवंबर 2011.

संत आश्रम सूरतगढ़ में भगवान शिव का अखंड धूणा- फोटो करणीदानसिंह राजपूत
संत राम दास शिव धूणे के पास विराजे हुए



आस्थावान संत रामदास, भीमराज तावणिया, त्रिलोकचंद अग्रवाल, महावीर प्रसाद मुद्गल,सुरेश मिश्रा

निर्माणाधीन ठाकुरजी का मंदिर


भगवान शिवधूणा संतआश्रम सूरतगढ़:
अखंड धूणे का मंगलकारी प्रभाव पाने को श्रद्धालु लगाते हैं धोक

सूरतगढ़ में शिवबाड़ी के पास में करीब 33 वर्षों से एक छोटी सी कच्ची कुटिया वाले संत आश्रम में शिव का अखंड धूणा धधक रहा है। धूणे को सुबह प्रज्ज्वलित किया जाता है और पूजा पाठ के बाद राख में अग्रि को दबा दिया जाता है, जो निरंतर इतने वर्षों से धधकती हुई श्रद्धा और आस्था बनी हुई है।
भक्त जन आते हैं और इस अखंड धूणे को धोक लगाते हैं। इसकी भस्मी का तिलक लगाते हैं तो अनेक अपने घर ले जाते हैं। श्रद्धा से इस भस्मी को प्रसाद के रूप में ग्रहण भी करते हैं। यह माना जाता है कि भगवान शिव के धूणे की भस्म को प्रसाद में ग्रहण करने वालों को स्वास्थ्य व दीर्घायु मिलती है। भगवान शिव स्वयं भी भस्म को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया करते थे।
    संत आश्रम में पवित्र धूणे में एक लंबा त्रिशूल लगा है तो कई चिमटे लगे हुए हैं। इसी धूणे वाली कुटिया में संत रामदास विराजते थे जिनका आशीर्वाद लेने को भक्तजन शुभ समझते थे।
    संत आश्रम की स्थापना लेख की दिनांक से तेतीस चौंतीस साल पहले हुई तब आसपास में बस्ती नहीं थी और दूर से केवल शिवबाड़ी ही नजर आती थी। इससे जुड़े भक्तजन भीमराज तावणियां और महावीर मुद्गल व अन्य जानकारों से बातचीत में इस धूणे की स्थापना का इतिहास इस तरह है। 
शिव बाड़ी के पास एक छोटा सा पीपल का पेड़ लगा था जो आज इस धूणे के पास में विशाल वृक्ष बन चुका है।
    अयोध्या से आए संत भीमदास ने इस पीपल के पास में एक कुटिया बनाई और शिव का धूणा जलाया। वे उस समय करीब पैंतालीस पचास साल के थे। सन् 1977-78 में धूणे की स्थापना के बाद वे करीब दो साल तक यहां धूणा तपते रहे। वे उपरी बदन उघाड़ा रखते थे तथा रामायण का पाठ करते और सुनाते। भक्त जनों की ओर से आने वाली किसी भी वस्तु और सामग्री का संग्रह नहीं करते थे। योग साधना करते तथा अन्नाहार नहीं लेते थे। फल व दूध उनका भोजन था।
    उस पहुंचे हुए संत भीमदास की महिमा आसपास फैलने लगी और अनेक भक्तजन धूणे पर पहुंचने लगे। उस समय नन्द किशोर मिश्रा,महावीर मुद्गल, रेख सिंह, भीमराज तावणियां, मनीराम सिंवाल,जगदीश ठाकराणी व कई और नियमित जाने लगे। भीमराज तावणियां ने बताया कि संत भीमदास की कुटिया को संत आश्रम कहा जाने लगा था। संत भीमदास करीब दो साल तक इस कुटिया में रहे और बाद में कहीं चले गए।
    संत भीमदास के जाने के करीब दो माह बाद में यहां पंजाब से उदासीन पंथ के महात्मा रणधीरदास आए और वे भी करीब दो साल तक रहे। इसके बाद साधु संत आते जाते रहे लेकिन कोई भी अधिक अवधि तक नहीं रहा।
    कुछ सालों तक भक्तजन ही इस पवित्र धूणे को तापते रहे। इसके बाद सन् 1990 में बीकानेर में लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास में एक आश्रम में रहने वाले संत रामदास को इस धूणे से पुकार हुई। संत रामदास को बीकानेर में रहते हुए दस साल बीत चुके थे। संत रामदास के दोनों पैर काम नहीं करते थे। वे बैसाखियों के सहारे रहते और दूर जाना होता है तब मोटर रिक्क्षा चलाते थे।
    संत रामदास बहुत ही उदार स्वभाव के संत थे। रामदास जी ने बताया कि उनका जन्म बस्ती जिला के उसरी ग्राम में सन् 1934 में हुआ था जिसके अनुसार सन् 2011 में उनकी उम्र करीब 77 वर्ष की हो चुकी है। संत ने बताया कि अपंगता पैदाइशी नहीं थी। करीब दो ढाई साल की आयु में लकवा हुआ और एक ओर का आधा बदन प्रभावित हुआ जो बाद में काफी ठीक हो गया मगर पैर ठीक नहीं हो पाए। उन्होंने दसवीं तक शिक्षा ग्रहण की। पिता खेती करते थे।  माता पिता का नाम उन्होंने नहीं बताया। वे बोले कि संत हो गए अब गुरू का ही नाम लिया जाना उचित है। उन्होंने अपना गुरू रामकिशनदास को बनाया जो आगरा में रहते थे।
    संत रामदास आश्रम में धूणा रमाते और वर्ष में कई बार रामायण और भागवत के पाठ करवाते थे। 
वे जब यहां आए तब उन दिनों में भी असहाय छोड़ा हुआ गौ वंश यत्र तत्र भूख से तड़पता हुआ दिखाई पड़ता था। 
अमरता को प्राप्त संत रामसुख दास जी उन दिनों अपने हर उपदेश प्रवचन में इन असहाय गौ वंश बचाने की कहते थे। उनकी प्रेरणा से यहां सूरतगढ़ में संत आश्रम के पास में सन् 1992 के आसपास गौ वंश को बचाने का अभियान चलाया जाने लगा। इस अभियान में संत रामदास संयोजक बने और अनेक लोग इसमें जुड़ गए। उस समय गौ वंश के लिए खुले में ही घास तूड़ी आदि डाली जाती थी। इसके बाद सन् 1999 में संत आश्रम की सीताराम गौशाला की स्थापना हुई। उस समय संरक्षक रामदास जी बने। कार्यकारिणी का सन् 2005 में पंजियन कराया गया। 
    इस संत आश्रम और गौशाला के पास में ही ठाकुरजी का मंदिर बनाया गया। उसमें भी श्रद्धालुओं का आना जाना होता है।**

प्रथम लेखन 2 नवंबर 2011.
अपडेटेड 10 मार्च 2021.
अपडेट  25 जुलाई 2022.
अपडेट 7 मार्च 2024.
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मंगलवार, 5 मार्च 2024

RAS अविगर्ग पहले थे विकास गर्ग:भ्रष्टाचार उजागर हुआ तब नाम बदला.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

* विकास गर्ग सूरतगढ़ राजकीय महाविद्यालय में संविदा पर पढाते रहे और बीएड में संगरिया में करीब 7 माह हाजिरी लगती रही। हाजिरी 2004 में लगती रही। इस फर्जीवाड़े से तैयार दस्तावेज से परीक्षा महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय से 2005 में दी गई और सी.सै.विद्यालय में स्कूली लैक्चरार लगे तथा करीब 80 लाख रू.का भुगतान उठाया जबकि इसके पात्र नहीं थे। यह फर्जीवाड़ा सूरतगढ़ से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक  "ब्लास्ट की आवाज" में भी छपा।आर ए एस की परीक्षा बाद में दी थी और उतीर्ण होने पर नौकरी लगने के बाद जब यह मामला उजागर हुआ तब विकास गर्ग से नाम बदला और अवि गर्ग रख लिया। विकास गर्ग नाम था उस समय भी अवि के नाम से मोबाइल सिम ले रखी थी। अविगर्ग अभी स्वायत्त शासन विभाग में बीकानेर में उपनिदेशक पोस्ट पर नियुक्त हैं। सेठ रामदयाल राठी सी.सै. स्कूल सूरतगढ़ में लैक्चरार रहे। आर ए एस पोस्ट पर संगरिया हनुमानगढ़ पीलीबंगा में रहे।

* अब थानेदारों के पकड़े जाने के बाद लग रहा है कि यह भ्रष्टाचार भी जांच के दायरे में आएगा।

 5 मार्च 2024.

* करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

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सोमवार, 4 मार्च 2024

मुख्यमंत्री ने की जनसुनवाई:परिवेदनाओं का तुरंत निस्तारण का निर्देश.

 

जयपुर, 4 मार्च 2024.

 मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास (ओटीएस) पर जनसुनवाई की। उन्होंने आमजन की परिवेदनाओं को सुनते हुए अधिकारियों को त्वरित निस्तारण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से भी आत्मीय मुलाकात की। 





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पूनम/रवीन्द्र

रविवार, 3 मार्च 2024

अतिक्रमण हटाते वक्त मौका मजिस्ट्रेट ईओ को भी मौजूद रखे.

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 3 मार्च 2024. अतिक्रमण हटाने का कार्य अधिशासी अधिकारी की उपस्थिति में ही होना चाहिए। असल में अतिक्रमण हटाने की स्थिति में ईओ जानबूझकर उपस्थित होने से बचते हैं और अधिनस्थ कर्मचारियों को आगे करते हैं।


* अतिक्रमण हटाने का कार्य महत्वपूर्ण है मगर पेचीदा होता है और अधिशासी अधिकारी की उपस्थिति के निर्देश भी उच्च स्तर पर दिए जाते रहे हैं। जब भी झगड़ा फसाद होता है तब पहला सवाल पूछा जाता है कि ईओ वहां पर था या नहीं था। यह इसलिए जरूरी होता है कि कागजात और मौके की स्थिति में अनेक बार अंतर होता है। ऐसी स्थिति में ईओ ही बताता है कि कौनसा अतिक्रमण कितना हटाना है। ईओ की मौजूदगी नहीं होने पर विवाद होते हैं। चुने जनप्रतिनिधि या शिकायत कर्ता तो रड़क के लिए किसी का भी अतिक्रमण तुड़वाने का प्रयास कर सकता है इसलिए सरकारी अधिकारी " अधिशासी अधिकारी" का मौके पर होना जरूरी होता है।

👍 अतिक्रमण हटाने के समय मौका मजिस्ट्रेट और पुलिस बल हो तब संपत्ति का अधिकारी मौजूद न हो,तो यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वह मजिस्ट्रेट से बड़ा नहीं होता है। 


👍 मौका मजिस्ट्रेट ईओ को उपस्थित रखे और उसको कार्यवाही पूरी होने तक मौके पर रहने के लिए पाबंद भी रखे। 

 अतिक्रमण हटाने के समय मौका मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पुलिस बल भी रखा जाता है ताकि किसी भी प्रकार से झगड़ा न हो,कानून और शांति की व्यवस्था बनी रहे।०0०

* करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार.( राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़।

94143 81356

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शनिवार, 2 मार्च 2024

कैलाश मेघवाल और निहालचंद मेघवाल के टिकट युद्ध पर लोगों की निगाहें.जीतेगा कौन?

 


* करणीदानसिंह राजपूत * 

राजस्थान की श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर इसबार भाजपा टिकट के लिए युद्ध जैसा माहौल बना है। कैलाश मेघवाल लोकप्रियता में आगे बढते हुए वर्तमान सांसद निहाल चंद मेघवाल को टक्कर देते हुए बराबर जैसी राजनीतिक हालात पैदा कर चुके हैं। दोनों का व्यापक जनाधार है जिसमें एक नाम तय करना नेताओं के लिए मुश्किल तो रहेगा।


 निहालचंद मेघवाल से कामकाज को लेकर जनता में कुछ नाराजगी बढी है और उनको चाहने वाले कुछ पीछे हैं। आठ विधानसभा क्षेत्रों में कैलाश मेघवाल को 32.75 प्रतिशत और निहालचंद मेघवाल को 29.75 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं लेकिन ये पसंद नापसंद इतनी ऊंची नीची नहीं है कि केवल इस आधार पर टिकट नहीं मिल सके। 


निहालचंद अभी सांसद हैं और कुल मिलाकर पांचवीं बार जीते हुए हैं। पिछली जीत भी बहुत अच्छी 4 लाख से अधिक मतों से रही थी जिसका दबदबा तो रहेगा मगर पांचवीं बार चुने जाने पर संभव है इसबार नये चेहरे को मौका देने की नीति के तहत टिकट निहालचंद को नहीं मिले। निहाल चंद वर्तमान में सांसद हैं तो कैलाश मेघवाल राजस्थान भाजपा में अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष हैं। दोनों ही पावरफुल स्टेज पर हैं।


 👍 निहालचंद मेघवाल के पिता बेगाराम श्रीगंगानगर से दो बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। इस सूची में दो बार श्री बेगाराम चौहान का नाम है। 

भाजपा श्रीगंगानगर सीट पर नया प्रयोग कर सकती है। ऐसी स्थिति में टिकट निहालचंद को नहीं मिल पाए,ऐसा संभव हो सकता है लेकिन नये चेहरे में टिकट कैलाश मेघवाल के अलावा किसी और नये चेहरे को मिल जाए तो आश्चर्य होगा। भाजपा जीत की पकायत के साथ नया प्रयोग करती है तो यह मान कर ही चलती है कि वोट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मिलते हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव 2023 में श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों में मोदी का यह जादू चल नहीं पाया। श्रीगंगानगर सीट पर इसबार भाजपा टिकट तय करने से पहले आठों विधानसभाओं में कांग्रेस की वर्तमान हालात पर विचार भी होगा। यह मानना चाहिए। यह भी मानना चाहिए कि श्रीगंगानगर सीट पर बदलाव की मांग चल रही है। यह बदलाव की मांग निहालचंद मेघवाल की टिकट पर अंतिम समय में भी असर डाल सकती है। अभी राजनीति में श्रीगंगानगर से दिल्ली तक निहालचंद मेघवाल पूरी तरह से पावरफुल है।०0०

2 मार्च 2024.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 60 वर्ष. राजनीतिक लेखन व समीक्षक,

( राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356

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शुक्रवार, 1 मार्च 2024

ममता नायक लोकसभा सीट श्रीगंगानगर से भाजपा टिकट की प्रबल दावेदार. समर्थन में बड़े नेता.

 

* करणीदानसिंह राजपूत * 

राजस्थान की श्रीगंगानगर लोकसभा सीट से ममता नायक रायसिंहनगर सबसे आगे प्रबल दावेदार है। भाजपा के कुछ बड़े नेताओं का समर्थन है। संघ की प्रमुख लाबी का समर्थन भी जुड़ा है जिसके कारण अभी इनका नाम एकदम से आगे आया है।

*अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़ी रही है। भाजपा श्रीगंगानगर सीट पर बदलाव के साथ इस महिला दावेदार पर जीत के विश्वास का पक्का दांव खेल सकती है।

👍यह दावेदार प्रधानमंत्री के जल जीवन मिशन परियोजना की प्रोजेक्ट डिजाइनर टीम में यूनिसेफ की ओर से सलाहकार शामिल रही हैं।

*अभी जल और वातावरण बदलाव पर कार्य कर रही हैं। इनका कार्य क्षेत्र गुजरात राजस्थान महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में व्यवस्थित चल रहा है।

* 36 वर्षीय ममता नायक के पिता भूपेंद्र कुमार माता कौशल्या देवी रायसिंहनगर नगरपालिका के पार्षद रहे हैं। दादा कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता मंत्री स्वर्गीय दुलाराम नायक जनप्रिय रहे। राजनीतिक पारिवारिक वातावरण ममता नायक को मिला।

* यूनिसेफ द्वारा गुजरात राज्य के लिए एसडीजी 6 रोड मैप का मसौदा तैयार किया था। 2021 में वेल्स (ब्रिटेन)में अंबेडकर युवक संघ की सचिव रहीं। 

*2018 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रहितों पर कार्य किया।

** भारतीय जनता पार्टी में पूर्व महामंत्री (प्रखंड अध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद) श्री सत्यपाल कौशिक के साथ भी कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रही। 

*** इनके दादा स्वर्गीय दुलाराम नायक कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता विधायक मंत्री रहे। 

 दुलाराम नायक सन् 1977 और सन् 1980 में रायसिंहनगर से दो बार विधायक चुने गए तथा 1980 में कैबिनेट मंत्री बने।

* 1987 में राजस्थान की 20 सूत्री कार्यक्रम सलाहकार समिति में अध्यक्ष रहे।

👍 *ममता नायक एलएलबी की हुई है।

 ** ममता ने एमएससी जल और वातावरण बदलाव पर कार्डिफ यूनिवर्सिटी (यूके) से की हुई है। 

* संयुक्तराष्ट्र की ओर से पब्लिक पॉलिसी स्ट्रेटेजिक लीड 'जल एवं वातावरण बदलाव व्यवसाय से जुड़ी हैं।

**रायसिंहनगर की मूल निवासी अभी जयपुर और दिल्ली में सक्रिय हैं।०0०

1 मार्च 2024.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 60 वर्ष का अनुभव एवं राजनीतिक लेखक व समीक्षक.

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क सचिवालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356

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