बुधवार, 17 जून 2015

आपातकाल 1975 के बंदियों की दशा पर वसुंधरा की मानवीयता?


टिप्पणी-करणीदानसिंह राजपूत:
वसुंधरा राजे मानवीयता के कारण ललित मोदी की धर्मपत्नी का ईलाज करवाने में सहयोग वास्ते पुर्तगाल गई। पहले केन्द्र की विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ललित मोदी की पत्नी के मामले में बुरी तरह से घिरी और अभी तक निकल नहीं पाई।
इसी दौरान राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ललित मोदी की मित्रता की खबर छा गई।
सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे दोनों ने मानवीयता के आधार पर अपराधी भगोड़े ललित मोदी का साथ दिया।
बचाव के लिए यह शब्द मानवीयता बड़े काम का है और जहां चाहे इस्तेमाल किया जा सकता है।
वसुंधरा राजे ने आपातकाल 1975 के बंदियों की बीमारी वृद्धावस्था कई 90 साल तक के हो गए हैं और करीब करीब सभी 60 साल से ऊपर हो गए हैं के बारे में उत्सुकता से मानवीयता उजागर नहीं की।
आपातकाल में रासुका मीसा में बंदी रहे देशभक्त लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन शुरू करने में सात साल लग गए और वह जिनकी शुरू हो पाई। राजस्थान उच्च न्यायालय में एक याचिका से स्थगित भी हो गई। इसके बाद सरकार की ओर से इस पर क्या कार्यवाही हो रही है? इसका कोई समाचार नहीं है।
इसके अलावा आपातकाल में शांति भंग अधिनियम में भी अनेक लोकतंत्र सेनानी जेलों में बंद रहे,यातनाएं सहन की,उनके कारोबार चौपट हो गए,अखबार बंद हो गए। वे लोग इस समय 60 साल से ऊपर अनेक बीमार अवस्था में हैं और अनेक तो 90 साल तक की उम्र में हैं। उनको भी पेंशन देने के लिए कागजात प्रवधान प्रस्ताव का प्रारूप तैयार कराया गया। सरकार के पास पड़ा है। लेकिन उस पर महीनों के बाद भी निर्णय नहीं हो पाया है। मंत्री परिषद की जब भी बैठक होती है तब लोगों को एक आशा बंधती है कि इस बार घोषणा हो जाएगी लेकिन निराशा हाथ लगती है।
माननीय गुलाबजी ने विधानसभा में एक सवाल के उतर में कहा था कि सरकार इस पर विचार कर रही है।
यह विचार आखिर कब होगा?
बहुत कम लोग जीवित बचे हैं। अगर उनको आज इस पेंशन का लाभर दे दिया जाता है तो उनके कुछ माह या कुछ साल आराम से कट जाऐंगे अन्यथा आशा में पीड़ाएं भोगते हुए मर जाऐंगे।
सवाल यह है कि वसुंधरा राजे को मानवीयता में ललित मोदी की पत्नी का ईलाज याद रहा लेकिन लोकतंत्र सेनानियों का ध्यान क्यों नहीं आया?
एक वसुंधरा ही नहीं राजस्थान के मंत्री लोकतंत्र सेनानियों के बारे में निर्णय लेने में वसुंधरा को कहने में डरते क्यों हैं?
राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों से भी यह छिपा नहीं है लेकिन वे भी इस बारे में वसुंधरा को कहने में दबाव डालने में कतराते हैं।
भाजपा को इसमें मानवीयता नजर नहीं आती तो लटकाने तरसाने आशाएं बंधवाने के बजाय साफ मना कर देना चाहिए कि शांतिभंग व अन्य धाराओं में बंदी रहे लोगों से हमारा कोई नाता नहीं है और कोई पेंशन नहीं देनी है।

गुरुवार, 11 जून 2015

भाजपा सरकार राजस्थान में इतनी जल्दी फेल हो जाएगी,किसी ने नहीं सोचा था?

 अब तो जनता खुद बोलने लगी है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा।
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़ 11 जून- - सूरतगढ़ में आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार को अनेक आरोपों के घेरे में लपेटते हुए कहा कि ये सरकार इतनी जल्दी फेल हो जायेगी ऐसा किसी ने भी नहीं सोचा था। राज्य सरकार का शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध होने लगा है। जनता खुद बोलने लग गई है।
गहलोत ने भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार पर आरोप लगाए कि जन कल्याणकारी योजनाओं को शुरू करने के बजाय कांग्रेस राज में शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद कर दिया ह, या कमजोर व धीमें कर लुंज पुंज कर दिया। इस कारण से जनता में भारी आक्रोश है।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान में इंदिरागांधी नहर के बाद रिफाइनरी सबसे बड़ी परियोजना थी जिसे केन्द्र सरकार द्वारा संचालित किया जाना था और अन्य राज्य की वनिस्पत राज्य सरकार की 26 प्रतिशत सर्वाधिक भागीदारी होने के बावजूद भाजपा सरकार उसमें मीनमेख निकाल रही है और प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार में जब विधायकों की सुनवाई भी नहीं होती तो जनता ऐसी सरकार से क्या उम्मीद करे। भाजपा कि विधायक स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे
है

गहलोत ने प्रदेश की जनता से आह्वान किया कि वो राज्य सरकार से जबाब मांगे कि प्रदेश में यह सब क्या हो रहा है?
अशोक गहलोत पूर्व सांसद शंकर पन्नू की पुत्री की शादी समारोह में शामिल होने के लिए श्रीगंगानगर जाने के लिए ट्रेन से सूरतगढ़ पहुंचे और यहां पर कुछ समय रूक कर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं व पत्रकारों से बातचीत कर कार से श्रीगंगानगर रवाना हो गए।

सोमवार, 8 जून 2015

वंदेमातरम् का नारा और मंचों पर आरोपी हों अतिथि तो कैसे बनेगा मोदी का भारत?


- करणीदानसिंह राजपूत -
वंदे मातरम् मुंह से और भारत माता का पूजन करवाएं उन लोगों से जिन पर किसी न किसी रूप में भ्रष्टाचार की कालिख लगी हो तो मोदी का भारत कैसे बनेगा? भ्रष्टाचार दुराचार के गंभीर आरोपों और करोड़ों रूपयों के गोलमाल करने वालों तथा सरकार की विकास की योजनाओं को घपलों में डालने वालों को मंचों पर सुशोभित करने से वंदे मातरम् का महान नारा केवल मुंह से बोल देने मात्र से तो सफल नहीं हो पाएगा। सीधी और दो टूक बात है कि समाजसेवी संस्थानों में पदाधिकारी अपने किसी न किसी व्यक्तिगत हित को ध्यान में रख कर आरोपियों को मुख्य अतिथि या विशिष्ट अतिथि बनाते हैं या अध्यक्षता करवाते हैं। जनता से इस प्रकार की बातें और राज छुपे हुए नहीं रह पाते। सामाजसेवी संस्थानों से सीधा सवाल है कि जो कार्यकर्ता आपके और धन भी आपका तब आरोपियों को मंचों पर लाने से कुछ कालिख तो लगेगी ही और आरोपों के घेरों में संस्था भी आएगी।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को महान बनाने के लिए कितने ही मंचों से दिल खोल कर अपने वक्तव्य दिए हैं लेकिन लगता है कि आपने आप को भारतीयता का प्रतीक कहलाने वाले संस्थाओं के पदाधिकारियों को उनकी बात समझ में नहीं आ रही है।
संस्थाएं कालिख लगे चेहरों को मंचों पर कैसा भी स्थान दें स्वागत करें लेकिन जो लोग ईमानदारी से भ्रष्टाचार खत्म करने पर लगे हुए हैं उनके कदम आगे बढ़ते रहेंगे। कालिख लगे चेहरे संस्थाओं के कार्यक्रम में सम्मानित होने से सफेद नहीं हो पाऐंगे। उन पर मुकद्दमे बनते रहेंगे और चलते भी रहेंगे। लेकिन कालिख लगे चेहरों को मंचों पर लाए जाने से संस्थाओं के उद्देश्य और संकल्प सफल नहीं हो सकते। इसे इस तरह से भी कहा जा सकता है कि संस्था पदाधिकारी अपने संकल्पों से ही गद्दारी कर रहे हैं। इस प्रकार के दोगले व्यवहार से भारत महान कैसे बन पाएगा?
भ्रष्टाचारियों को मंचों पर बुलाने वाली और रिबन कटवाने वाली संस्थाओं के पदाधिकारियों की कुंडली भी जब बनने लगेगी तब उनके चेहरे भी बेनकाब होने लगेंगे। संस्थाओं को अपने आपको सुधारना ही होगा। भ्रष्टाचार से लडऩे वालों की नजर तो सब पर रहेगी।
वंदेमातरम् का नारा लगाओ तो पूरी ईमानदारी से लगाओ। भारत को महान बनाने का संकल्प है और समाजसेवा का संकल्प है तो समाज का खून चूंसने वालों का सत्कार बंद करो।
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एसीबी का मुकद्दमा कैंसर नहीं है असल में भ्रष्टाचार घोटाले कैंसर हैं


- करणीदानसिंह राजपूत -
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में नगरपालिका सूरतगढ़ के मुकद्दमें व जाँचें सर्वाधिक हैं और जब भी कोई मुकद्दमा व जाँच नई दर्ज होती है तब कहा जाता है कि यह तो कैंसर लग गया है और अब इससे जान ही जाएगी। इससे बचने की कोई दवा अभी तक नहीं बनी। लेकिन सच्च एकदम उल्टा है। कैंसर की दवा बनती जा रही है और ईलाज भी संभव हो जाता है लेकिन सच्च में भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का मुकद्दमा शिकंजे में कस कर मार ही डालता है। इससे बचने का कोई ईलाज नहीं है कोई दवा नहीं है।
असल में मुकद्दमा कैंसर नहीं है। कैंसर भ्रष्टाचार घोटाला है जिसे लोग खुद अपने गले लगाते हैं और जब यह बदन को घेरे में ले लेता है तब छटपटाते हैं।
नगरपालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा पर पहला मामला ब्यूरो में जाँच के लिए दर्ज हुआ है और कितनी ही शिकायतें और हैं। जब जब घोटाला भ्रष्टाचार हुआ तब तब अनेक समाचार अखबारों में छपते रहे लेकिन उन पर गौर नहीं किया गया। अखबार वालों को ही झुठला देने का प्रयास किया जाता रहा। घोटाले करने वालों द्वारा और उनके चापलूसों द्वारा खबरों को ही झूठा बताने की कोशिशें होती रही है।
सत्ताधारी नेताओं की ओर से भी बचाव के रूख रहते हैं लेकिन ये प्रकरण सालों तक चलते हैं और राज बदल जाते हैं। बड़े दुखदाई होते हैं।
लोग कहते हैं कि कुछ भी नहीं होगा। लेकिन होता है और उसका प्रमाण रहा है ईओ मदनसिंह बुडानिया का गिरफ्तार होना।

बुधवार, 3 जून 2015

भाजपा नेता चरणजीत टंडन के सीमेंट गोदाम पर पुलिस की सील:


दुबारा बिक्री नहीं वाले 601 थैले कालाबाजारी के होने का आरोप:

टंडन की पत्नी भाजपा की पार्षद है: पहले टंडन खुद पार्षद था:
सूरतगढ़,3 जून।
राजेश सेतिया ने 2 जून को पुलिस में लिखित में एक शिकायत की जिसमें आरोप लगाया गया था कि चोरी से लाई गई सीमेंट वार्ड नं 9 के गोदाम में रखी हुई है तथा उसका इस्तेमाल नगरपालिका के निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है। इसके बाद जिला पुलिस कार्यालय में भी शिकायत की जाने की खबर आई और हडकंप मचा।
सिटी पुलिस ने संबंधित स्थान पर छापा मारा। छापे में मालूम पड़ा कि उक्त दुकान हनुमान सोनी की है। उससे पूछा गया तो उसने बताया कि पूर्व पार्षद चरणजीतसिंह टंडन को किराए पर दी हुई है। पुलिस ने टंडन को तलब किया और ताला खुलवाया।
उस दुकान में 601 श्री सीमेंट के रॉक स्ट्रांग मार्का सीमेंट से भरे थैले मिले। उन पर लिखा हुआ था कि दुबारा बिक्री के लिए नहीं।
टंडन से इनके कागजात मांगे गए तब उसने असली के बजाय फोटो स्टेट बिल दिए जो किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी किए हुए थे। टंडन ने पुलिस को जो कागजात दिए वे सुरेन्द्र कुमार बंसल श्रीगंगानगर निवासी के थे और 15 मई को श्री सीमेंट से थर्मल को जाने के लिए थे।
पुलिस ने सुरेन्द्र कुमार बंसल को तलब किया है और आगे की जाँच उसके आने पर खुलेगी।
पुलिस ने इन थैलों को अभी सीआरपीसी की धारा में जब्त किया है।
पालिका के निर्माण कार्य पर कितनी सीमेंट लगाई जा चुकी है यह भी जाँच का विषय है।
इस फर्म ने पहले भी जो निर्माण कार्य किए हैं उनकी सीमेंट कहां से खरीदी जाती रही हैï?
पालिका में पार्षदों पर अन्य नामों से ठेकेदारी करने के आरोप
नगरपालिका में बैठकों में व बाहर बार बार आरोप लगते रहे हैं कि कुछ पार्षद अन्य नामों की फर्मों से या अपने रिश्तेदारों की फर्मों के नाम से ठेकेदारी करते हैं। इसकी पुष्टि इससे होती है कि वे पार्षद व पूर्व पार्षद नगरपालिका में हर समय जमे हुए देखे जा सकते हैं तथा काम पर भी देखे जा सकते हैं। 

चरणजीतसिंह टंडन पहले खुद पार्षद था और मील के साथ था लेकिन बाद में पाला बदला और राजेन्द्र भादू के पाले में घुस गया व भाजपा की सदस्यता ग्रहण करली। 
वर्तमान में इनकी पत्नी भाजपा से पार्षद है। पालिका के नियमों में पार्षद का कोई रिश्तेदार संबंधित नगरपालिका में ठेकेदारी नहीं कर सकता। चरणजीतसिंह टंडन को नगरपालिका में लगभग देखा जा सकता है।
भाजपा के विधायक राजेन्द्र भादू ने भ्रष्टाचारियों को चेतावनी दे रखी है।
भाजपा की पालिकाध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा के बड़े बड़े बोर्ड नगर में लगे हें जिनमें भ्रष्टाचार मुक्त पालिका की घोषणा की हुई है।
दिल्ली की भाजपा सरकार व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन का राग अलाप रहे हैं। नगरपालिका में जम कर भ्रष्टाचार होने का आरोप बार बार लगता रहता है। सीमेंट की सही जांच से असलियत सामने आ पाएगी।
श्री सीमेंट ठेकेदारों को कैसे देती है और कितनी सीमेंट सीधे देती है?
श्री सीमेंट के कारखाने से सीधे ठेकदार को सीमेंट थैले देने का कोई आधार बनाया हुआ होगा?
ठेकेदार को असल में निर्माण कार्य पर कितनी सीमेंट दी जानी चाहिए।
क्या सीमेंट अधिक दी जाती है जो बाजार में जाती है? किस दर पर दी जाती है? कारण कि ठेकेदार को जितनी अधिक सीमेंट सस्ते रेट पर दी जाती है। वह सरकार के राजस्व को घाटा होता है।
असल में यह घोटाला इतने ही सीमेंट थैलों का नहीं है।
यह महा घोटाला है जो व्यापक जाँच से खुलेगा और बड़े लोग लपेट में आ पाऐंगे। 

बिक्री कर विभाग को भी हुई है शिकायत और वह भी व्यापक जाँच करे तो श्री सीमेंट से हटेगा परदा

 

रविवार, 10 मई 2015

तुम्हारा अनछुपा प्यार:एक सच्च:


 

मुस्कुराती हुई नवयुवती और उसकी कमर को थामे मुस्कुराता हुआ युवक।
 तस्वीरों से लाखों ने देखा:
बड़े अखबार ने घर घर पहुंचाया:
- करणीदानसिंह राजपूत -
मुस्कुराती हुई नवयुवती और उसकी कमर को थामे मुस्कुराता हुआ युवक। हिन्दी में कितने ही प्रकार से पढ़ा जा सकने वाला आकर्षित करने वाला अंग्रेजी वाक्य...अनहाइड योर लव...।
तुम्हारा अनछुपा प्यार।
तुम्हारा बिना राज का प्यार।
तुम्हारा प्यार जो गुप्त नहीं।
तुम्हारा प्यार जो पर्दे में नहीं।
इसे एकदम साफ शब्दों में तुम्हारा खुला प्यार लिखा जा सकता था, लेकिन फिर वह बात नहीं रहती जो आकर्षण के साथ दिखाई जाने वाली थी। उसके लिए भी अंग्रेजी के ओपन योर लव लिखा जा सकता था।
लेकिन लिखा गया अनहाइड योर लव।
इन शब्दों से तस्वीर का लुक ही बदल गया।
उनके आकर्षक पहनावे पर नजरें टिकी होंगी।
अनहाइड योर लव लिखे होने के कारण तस्वीर के आकर्षण को सभी ने देखा होगा और युवक युवती की मुस्कुराहटों को दिल में महसूस किया होगा।
बस तस्वीर की इसी जिंदादिली को घर घर पहुंचाने का उद्देश्य अधूरा नहीं रहा होगा।
इसी जिंदादिली को जोड़ों ने अपने अपने दिलों के पास में महसूस किया होगा।
देश में अपनी बड़ी पहुंच को बताने वाले अखबार ने युवाओं को प्रभावित किया। या प्रभावित करने के लिए अपने मुख पर हसीन युवा लड़की लड़के की तस्वीर को अनहाइड योर लव के साथ हर जगह पहुंचा दिया।
लाखों परिवारों ने इस तस्वीर को देखा।
बड़े छोटे ने देखा।
बस। अब आगे क्या कहा जा सकता है।
इससे आगे की कहानी जो बनती है।

वो कहानी तस्वीर नहीं बनाती। 
वो कहानी अखबार नहीं बनाता।
मगर जब बनती है तो कोई रोक नहीं पाता।

वह कहानी एक नहीं अनेक अखबारों में छपती है।
लड़की चली गई प्रेमी संग।
इसके बाद न जाने कहानी कितने रूपों में कितनी घटनाओं में चलती है।
अनहाइड योर लव।
एक सच्च जो रूक नहीं रहा है।
एक सच्च जो बड़ी तेजी से समाज में फैलता जा रहा है।

कहानी-
करणीदानसिंह राजपूत
 

गुरुवार, 7 मई 2015

राजस्थानी भाषा मान्यता वास्ते संसद की चौखट पर 6 मई को ऐतिहासिक धरना दिया:


जंतर मंतर पर देश भर से राजस्थानी प्रेमी पहुंचे:
संसद के मानसून सत्र में मान्यता मिलने की संभावना-सांसद अर्जुन राम मेघवाल:
विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ 7 मइ 2015. राजस्थानी भाषा मान्यता के लिए 6 मई को जंतर मंतर पर ऐतिहासिक धरना लगाया गया व प्रदर्शन किया गया। राजस्थानी भाषा प्रेमियों ने मंच से अपने विचार रखे। सबकी एक ही आवाज थी कि अब चुप नहीं रहेंगे और मान्यता लेकर ही रहेंगे।
सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि राजस्थानी भाषा को मानसून सत्र में मान्यता मिलने की प्रबल संभावना है। मेघवाल ने भाषा प्रेमियों को विश्वास दिलाया कि अब उन्हें और अधिक समय तक भाषा की मान्यता का इन्तजार नहीं करना पड़ेगा।
 इस सभा में सांसद लोकेन्द्र सिंह कालवी, गजसिंह शेखावत, राजस्थान सरकार के मंत्री वासुदेवनानी सहित बड़ी संख्या में राजनेताओं व भाषा मान्यता से जुड़े भाषा प्रेमियों ने भाग लिया व अपना सम्बोधन दिया।
भाषा प्रेमियों  ने कहा कि राजस्थानी भाषा का मुद्दा राजस्थान के लिए सांस्कृतिक, रोजगार परक व अस्मिता से जुड़ा हुआ है। राजस्थानी भाषा विश्व की समृद्धत्तम भाषा में से एक है। इसका गौरवशाली इतिहास है। चार लाख हस्तलिखित ग्रंथों का विपुल भंडार है। ढाई हजार वर्षो से भी पुराना इतिहास है। जिसमें राजस्थानी भाषा लिखी पढी व बोली जाती है। 13 करोड लोग इसके बोलने वाले हैं। राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं देकर मातृ भाषा के अधिकार से राजस्थान को वंचित रखा जा रहा है। इसे अब और अधिक सहन नहीं किया जा सकता। इस धरने में प्रदेश के कोने कोने से भाषा प्रेमी शामिल हुए वही विदेशों से भी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सूरतगढ से इस धरने में शामिल होने वालो में,
समिति के जिलाध्यक्ष परसराम भाटिया के नेतृत्व में सघर्ष समिति के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत ,जिला परिषद सदस्य व बसपा नेता डूंगरराम गेदर, टैगोर एजूकेशनल ग्रुप के चेयरमैन रोटेक्ट क्लब के संस्थापक डा.सुशील जेतली, पंजाबी वेल्फेयर सोसायटी अध्यक्ष परमजीत सिंह बेदी, लक्ष्य संस्थान के निदेशक पीके मिश्र,  चिन्तन परिषद के संभाग प्रभारी प्रहलाद राय पारीक, नारी उत्थान  केन्द्र की अध्यक्ष  पार्षद राजेश सिडाना, गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की महिला प्रभारी पार्षद सावित्री स्वामी, पूर्व पार्षद सुन्दर देवी साबणियां, पूर्व पार्षद हरीश सेखसरिया, किशन लाल स्वामी, क्रांतिकारी महावीर भोजक, सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण समिति के महासचिव हेमन्त चांडक,  पिपुल फोर ऐनिमल के जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह जाटव, विनय तिवाड़ी, विजय स्वामी, अनिल सैनी, जमींदारा पार्टी नेता बलराम कुकडवाल, राजपूत क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष लाल सिंह बीका, कांग्रेसी नेता भीम जोशी, यूथ कांगेस अध्यक्ष गगनदीप सिंह बिडिग, द्वारका पेड़ीवाल, मायड़ भाषा प्रेमी सुरेन्द्र स्वामी, राजकुमार स्वामी, प्रभुदयाल सिंधी, नरेन्द्र शर्मा, रामकिशन स्वामी, ओम सावणियां, रामेश्वर दास स्वामी, गोरीशंकर भार्गव पुजारी, शिक्षक गिरधारी लाल स्वामी, किशन लाल गिरी, दुर्गा राम, महेन्द्र कुमार, आशा राम स्वामी, इन्द्रा देवी स्वामी, शारदा देवी गौड़, गंगा देवी स्वामी, कांग्रेस नगर अध्यक्ष व क्रंातिदल अध्यक्ष जेपी गहलोत, सघर्ष समिति  के प्रदेश मंत्री मनोज कुमार स्वामी, सावित्री, संतोष वर्मा, संकिला बिश्रोई, भागीरथ स्वामी, डीडी पारीक, महेन्द्र कुमार$ अल्का स्वामी, दुर्गा राम, जगदीश स्वामी लक्ष्मीनारायण आदि थे।

नारी उत्थान केन्द्र सूरतगढ़ की अध्यक्ष श्रीमती राजेश सिडाना अपने विचार रखते हुए





बुधवार, 6 मई 2015

नौकरी में अंग्रेजी से बड़ी ताकत बन जाएगी राजस्थानी-पढ़ें:


राजस्थानी को मान्यता मिलने दो:
अंग्रेजी को नौकरी के लिए ही ताकतवर मानते हैं:
विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
एक दिन वह आएगा कि राजस्थानी भाषा नौकरी में अग्रेजी से बहुत अधिक ताकतवर बन जाएगी। अभी नौकरी पाने के चक्कर में ही तो अग्रेजी का पठन पाठन अधिक हो रहा है तथा इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है कि अंग्रेजी के बिना नौकरी मिलेगी ही नहीं। इस कुप्रचार में अंग्रेजी पढ़ाने वाले कुछ स्कूल कॉलेज हर स्थान पर लगे हुए मिल जाते हैं। इस प्रचार को वे लोग तरजीह देते हैं जिनके पास में अधिक पैसा है जो अग्रेजी स्कूलों की भारी भरकम फीस आसानी से दे देते हैं तथा अपने आपको को समाज में बड़ा और अलग साबित करते हैं।
लेकिन जिस दिन राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता मिल जाएगी उस दिन राजस्थानी भाषा नौकरी में अंग्रेजी से अधिक ताकतवर बन जाएगी।
अभी राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता मिलने में देरी होने का कारण यह भी रहा है कि राजस्थान के भी कुछ लोग संस्थाएं आदि क्षेत्र की अलग अलग भाषाओं को आगे ले आते हैं जबकि सभी मिल कर ही राजस्थानी का स्वरूप है।
राजस्थानी को भी एक दिन मान्यता मिल जाएगी और विरोध के बावजूद वह दिन अधिक दूर नहीं होगा।
यह मेरा विश्वास है और लाखों राजस्थानियों का भी विश्वास है जो मान्यता के संघर्ष में किसी न किसी प्रकार से जूझ रहे हैं।
किसी भी मांग को अधिक दिन तक टाला नहीं जा सकता।
अंग्रेजों का राज तो विश्व भर में था। देश स्वतंत्र कैसे होते चले गए?
राजस्थानी मान्यता का आँदोलन अब उस स्तर पर है कि इसे और अधिक दिनों तक दबाए नहीं रखा जा सकता।
इसे ज्यों ज्यों दबाया गया त्यों त्यों अधिक ताकत से शुरू हुआ।
देश की राजधानी दिल्ली में जंतर मंतर पर 6 मई 2015 को धरना प्रदर्शन सभा में राजस्थानियों का जोश व्यर्थ नहीं जाएगा।
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़
94143 81356
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मंगलवार, 5 मई 2015

राजस्थानी मान्यता प्रदर्शन धरना:सूरतगढ़ से दिल्ली बस रवाना:


परसराम भाटिया व मनोजकुमार स्वामी का नेतृत्व:
दिलात्मप्रकाश प्रकाश जैन व घनश्याम शर्मा ने झंडी दिखा बस रवाना की:

खबर- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,5 मई। राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए 6 मई को दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन वास्ते राजस्थानी भाषा प्रेमी रात को बस से रवाना हुए जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष परसराम भाटिया और समिति के प्रदेश मंत्री साहित्यकार मनोजकुमार स्वामी की अगुवाई में ये लोग रवाना हुए। समाजवादी चिंतक दिलात्मप्रकाश जैन व भारत विकास परिषद के जोनल अध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने बस को झंडी दिखा कर पुरानी धानमंडी से रवाना किया।

शुक्रवार, 1 मई 2015

आपातकाल बंदियों का लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन:


अखिल भारतीय संयोजक पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा:
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने आपातकाल बंदियों का अखिल भारतीय लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन बनाया

राजस्थान प्रदेश संयोजक प्रभात रांका:


राजस्थान प्रदेश संयोजक प्रभात रांका ने वसुंधरा राजे से शांतिभंग में बंदी रहे लोगों को पेंशन दिए जाने की मांग की
खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत
इकतालीस साल पहले आपातकाल सन 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन काल में आपातकाल लगा कर हजारों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया था। उस समय के शासन के विरोध में अनेक लोग प्रदर्शन सभाओं में आंदोलन को उतरे और वे भी जेलों में डाल दिए गये थे।
कुछ प्रदेशों में मीसा व राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में बंदी बनाए गए लोगों को पेंशन देनी शुरू कर दी। जिसमें राजस्थान भी शामिल है।
इसके अलावा हजारों लोग शांतिभंग कानून में गिरफ्तार किए गए थे। ऐसे लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को पेंशन दिए जाने पर विचार भी चल रहा है मगर उसकी गति धीमी है। शांति भंग में गिरफ्तार किए लोगों की उम्र भी आज के समय में साठ से ऊपर तक पहुंच गई है तथा कई लोग तो अनेक परेशानियों में बीमारियों में वृद्धावस्था जीवन जी रहे हैं।
शांतिभंग कानून में बंदी बनाए गए लोगों को पेंशन सुविधा मिले की सोच के साथ कुछ सालों से कार्य तो किया जा रहा है मगर उसकी गति धीमी रही है।
आपातकाल में बंदी रहे पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर कई महीनों से कार्य शुरू कर संपर्क किया है और संगठन खड़ा किया है।
अखिल भारतीय स्तर पर इस नए संगठन का नाम अखिल भारतीय आपातकाल लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन रखा गया है।
राजस्थान में इसके संयोजक प्रभात कुमार रांका भीलवाड़ा को बनाया गया है। रांका भीलवाड़ा व जयपुर में शांतिभंग कानून में बंदी रहे थे।
रांका ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को एक पत्र लिख कर शांति भंग में बंदी रहे लोगों को भी पेंशन दिए जाने की मांग की है।
पत्र में लिखा गया है कि शांति भंग व अन्य किसी धारा में बंदी बनाए गए लोगों के परिवारों पर जो संकट आया व व्यवसाय आदि चौपट हुए थे वे लोग आजतक पनप नहीं सके।
उन लोगों ने देश सेवा के लिए ही कदम उठाए और आपातकाल का विरोध किया था। 

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