स्व.गुरूशरण छाबड़ा का जीवन बताते हैं, मगर खुद एक दिन नहीं चलते.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 2 नवंबर 2026.
सूरतगढ़ के विधायक रहे स्व.गुरूशरण छाबड़ा को सात्विक ईमानदार नियमों के कठोर पालनकर्ता,नशा विरोधी कर्म को सभी बताते हैं, मगर बताने वाले एक दिन भी उनके सिद्धांतों पर नहीं चलना चाहते। उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित कर उनका जन्मदिन और पुण्यतिथि मनाने के लिए कुछ घंटे देने वाले कुछ लोग हैं। इनमें लगभग करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं, मगर किसी की सहायता के लिए सर्वाधिक गरीब हैं। समाजसेवा के लिए जेब से नहीं निकलता पैसा। अनेक हर रात नशा करने वाले और ऊंची कीमत की शराब बोतलें खाली करने वाले। अधिकतर कहते हैं कि आज के जीवन में गुरूशरण बनके जिया नहीं जा सकता,व्यावाहारिक बन कर ही जी सकते हैं। बस,इतना कहकर सेवा संस्कार से बच निकलने की कोशिश जब करते हैं तो उनका यह व्यवहार अशोभनीय लगता है। लेकिन वे तो कहकर बच निकलते हैं। सच्च को सच्च नहीं कह पाते। सच्च बोलने वाले के साथ खड़ा होना समर्थन करना हो तो वे एक दो दिन के लिए शहर तक छोड़ देने वाले सच्च को आगे नहीं बढा सकते।
स्व. छाबड़ा के जीवन पर बोलने वाले एक दिन जयंती पर और एक दिन पुण्यतिथि पर ही गुरूशरण बन जाएं। ०0०
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