आर एस एस संगठन पर विवाद देश भर हलचल.प्रतिबंध की भूमिका है?
* करणीदानसिंह राजपूत *
कर्नाटक के गृहमंत्री खरगे द्वारा आर एस एस संगठन प्रमुख मोहन भागवंत को लिखे पत्र और उसमें पूछे गए प्रश्नों ने देश भर में हलचल मचा दी है। इस विवाद का अंत क्या होगा? आशंका है कि किसी भी प्रकार का पत्र उत्तर आर एस एस नहीं देगा। पत्र का उत्तर नहीं देने से एक और विवाद पैदा होगा। देश की राजनीति में एक बड़ा प्रश्न उठेगा और उसकी हलचल के बाद आर.एस.एस. पर प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका होगी। कर्नाटक में प्रतिबंध लगा तो हो सकता है गैर भाजपा सरकारें सक्रिय हो जाएं और वे भी अपने राज्यों में प्रतिबंध लगा दें। एक साथ भी सभी गैर भाजप सरकारें निर्णय कर सकती हैं। आर.एस.एस संगठन पर दो बार प्रतिबंध लग चुका है इसलिए वैसे ही तरीक़े का प्रतिबंध लग सकता है। मतलब संघ की शाखाएं सार्वजनिक स्थानों पर नहीं लगाई जा सकेंगी। संघ का गणवेश में सड़कों पर पथसंचलन रोका जा सकेगा। इससे यह होगा कि जहां भाजपा सरकारें हैं वहां संघ अधिक सक्रिय होगा या अधिक सक्रिय किया जाएगा। पत्र में पूछे गए प्रश्न साधारण नहीं है। यह विवाद सामान्य नहीं है। ऐसा लगता है कि यह पत्र आर.एस.एस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की भूमिका है। भाजपा की सरकारें जिस ढंग से अन्य राजनैतिक दलों पर और उनके नेताओं पर कार्वाईयां करवा रही है सो विपक्षी दलों की सरकारें वैसी ही उलट कार्वाईयां भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं पर कर सकती है। जैसे को तैसा। 17 जून 2026.
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