शुक्रवार, 12 जून 2026

भारत में सब कुछ ठीकठाक है तो फिर लोग रो क्यों रहे हैं? युवा नाखुश क्यों हैं?

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के शासन में बेहतरीन विकास होने के दावे हैं। सबकुछ ठीकठाक है तो फिर लोग रो क्यों रहे हैं। लोग परेशान क्यों हैं? वृद्ध बीमार लाचार हो सकते हैं मगर युवा क्यों परेशान है। सरकार से खुश नहीं है।

जब भी चुनाव होते हैं तब मतदाताओं में युवाओं की गिनती बताई जाती है। यह इसलिए होता है कि युवा मतदाता की वोटिंग से सरकारें बदल जाती है।  यदि सबकुछ ठीकठाक में लोग खासकर युवा परेशान हैं तो उनकी सोच और परेशानी को समझना जरूरी है। सबकुछ ठीकठाक है और 12 वर्षों में जो विकास हुआ है, देश खुशहाल हुआ है तो यह सब युवाओं को समझाया जाना चाहिए। जनता और खासकर युवाओं को समझाए कौन? अब इसमें सोचने की विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह हमझाईस सत्ता धारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी और उसकी सत्ता में सहयोगी पार्टियों के पदाधिकारी करें। यदि समझाईस के लिए नेताओं,पदाधिकारियों के समय नहीं है तो नाराज नाखुश जनता खासकर युवा वर्ग से किसी भी चुनाव में परेशानी हो सकती है। अभी जो हालात सामने आ रहे हैं उनमें युवा की नाराजगी और लोगों की परेशानियों का शोर मचा है। 

भाजपा की एक धौंस रही है कि उसके बड़े नेता कभी भी अपनी गलती, अपनी भूल को जल्दी से स्वीकार नहीं करते। अभी भी ऐसा ही हो रहा है।

मोदी जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के 12 वर्षों को सुशासन बताते हुए भाजपा ने जगह जगह कार्यक्रम किए हैं लेकिन उनमें लोगों की भागीदारी की संख्या अनेक स्थानों पर एक सौ भी नहीं हो पाई। गिने चुने चेहरे ही फोटो खिचवाने में रहे जो प्राय: रहते हैं। जो आए वे सभी नेता। उनके साथ एक भी नहीं। मोदीजी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के 12 वर्ष बेहतरीन रहे हैं तो हजारों लोग हर जगह होने चाहिए थे। खुशी में संख्या हमेशा अधिक होती है। हर कोई नृत्य करने जैसे प्रसन्न मूड में होता है। प्रश्न है कि जो कुछ लोग कार्यक्रमों में पहुंचे उन्होंने लोगों के चेहरों पर प्रसन्नता देखी?

अपने अपने विचार और दृष्टिकोण हैं। भाजपा और सत्ता भोगते संगठन दल 12 साल बेमिसाल कहते रहें लेकिन जो जमीनी सच्च है वह उलटा है। लोग सरकार की नीतियों से परेशान हैं और युवा नाखुश है। भाजपा के नेता आलीशान कार्यालयों और कोठियों में बैठ कर ना सोचे,बाहर निकल कर सच्च जाने और सच्च को सत्ता के नशे में इग्नोर ना करे। यदि लोगों की परेशानियों और युवाओं की नाराजगी को नहीं समझा गया तो भविष्य में परेशानियां होंगी और उनसे छुटकारा मुश्किल होगा। सत्ता मिलना भी मुश्किल हो सकता है।०0०

दि. 12 जून 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 62 वर्ष.

94143 81356.

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