रविवार, 16 अक्टूबर 2022

गजसिंहपुर क्षेत्र के सम्माननीय व्यक्तित्व थे सेठ सूरजमल बोथरा:84 साल का प्रेरक जीवन रहा।

 

श्रीगंगानगर, 16 अक्टूबर 2022.

गजसिंहपुर क्षेत्र में सेठ सूरजमल बोथरा का नाम कभी भी परिचय का मोहताज नहीं रहा है। हो भी कैसे अपने  84 साल के जीवन का  समय स्वर्गीय बोथरा जी की कर्मभूमि जो रहा है, गजसिंहपुर। 

चौटाला से गजसिंहपुर आकर बसने वाले सेठ सूरजमल बोथरा  का जन्म 2 सितम्बर 1939 को पिता काशीराम जी बोथरा जी के यहां हुआ था। अपनी पांच बहनों के अकेले भाई सूरजमल पर उस समय विपत्तियों का पहाड़ टूटा जब मात्र 8 वर्ष की छोटी सी उम्र में इनके सिर से पिता का साया उठ गया। संकट के इस समय में माता हुलासी देवी का पारिवारिक सहयोग ने न सिर्फ हिम्मत दी बल्कि संघर्षपूर्ण हालातों में लालन पालन ने इनमें हिम्मत, मेहनत और ईमानदारी के संस्कार पैदा किये।  

  बाल्यावस्था में आपने स्व. रामरखा चावला से मुनीमी के गुरुमंत्र सीखे और स्व. गौरीशंकर गीदड़ा के खेत, चक्की और दुकान पर मुनीमी के कार्य किये। बाद में गजसिंहपुर की फर्म मेहरसिंह हरबंस सिंह में पूरी लग्न और प्रमाणिकता के साथ मुनीमी का कार्य  किया।

 मेहनती, योग्य, जिम्मेदार और भरोसेमंद सूरजमल को सन 1960 में जब गेहू 5 रूपये क्विंटल मिलती थी, उस समय 110 रुपये वेतन मिलता था। फर्म एम एच के मालिकों, रिश्तेदारों, बूटरसर के स्व. कपूरसिंह के आर्थिक सहयोग, मित्र दोस्तों ओमप्रकाश पटवारी, सरदार रतनसिंह, जनकराज सूद की हौसला अफजाई से आपने मात्र 26 वर्ष की उम्र में साल 1964 में रामनवमी के दिन गजसिंहपुर की मंडी में फर्म ‘‘काशीराम सूरजमल’’ की शुरुआत की प्रारम्भिक वर्षाे में साथी धर्मसिंह की चाय पत्ती, गंगानगर के सरदारीलाल की साबुन और दूसरा परचूनी सामान साईकिल पर लाद कर रेतीले टिब्बों वाले गावों व ढाणियों में बेचकर मेहनत और लग्न से व्यापारिक सम्पर्क बनाये।  इसी दौरान आढ़त काम में 4 आर बी के वीर बहादुर, राजपुरा के रावतराम और अन्य जमीदारों  का ऐसा साथ मिला कि आज की नई पीढ़ी के साथ मजबूत पारिवारिक रिश्ते बने हुए है। माता हुलासी देवी और पत्नी मोहनी देवी ने भी इस दौर में व्यापार वृद्धि में अप्रत्यक्ष रूप से पूरा साथ दिया।

 सन् 1971 के भारत  पाक युद्ध में जब अधिकांश व्यापारी दूर सुरक्षित स्थानों में पलायन कर गये, लेकिन साहसी और दूरदर्शी सूरजमल ने किसानों और जमीदारों के साथ गजसिंहपुर में ही रह कर विपदा की घड़ी में परचून सामग्री के साथ जरुरी आर्थिक मदद की। इससे फर्म काशीराम सूरजमल की साख, भरोसा और व्यापारिक सफलता में वृद्धि हुई। सूरजमल ने भी अपनी मेहनत, योग्यता, ईमानदारी और वचन निभाने की विश्वसनीयता से पूरे अंचल में गजसिंहपुर की साख बढ़ा दी। किसानों और जमीदारों को खेती किसानी के बीज खाद और दूसरे साधनों या जमीन को बढाने के लिए उनके आर्थिक सहयोग और परामर्श को इलाका हमेशा याद रखेगा। किसान को उपज का सही मोल और तोल मिले इसके लिए वो हमेशा जागरूक रहे। वो स्वयं जिन्सों की बोली लगाते और चाहे तपती गर्मी हो या देर रात सामने खड़े होकर तुलाई करवाते थे। सभी बही खातों में दैनिक हिसाब किताब भी वो स्वयं नियमित देखते थे। किसान को समय पर उपज का दाम दिलाने में उनकी विश्वसनीयता और भरोसा पूरे अंचल में चर्चित रहा।  

 गजसिंहपुर में रेल स्टेशन, चार से ज्यादा कॉटन मिल और  फर्म एम एच् की साख और सहयोग के साथ सूरजमल की योग्यता और मेहनत ने गजसिंहपुर को इलाके की सबसे बड़ी मंडी बना दिया। आस पास के सभी इलाकों के अलावा दूर पंजाब, हरियाणा से अच्छे भावों के कारण कपास बिक्री के लिए गजसिंहपुर आने लगा और मुम्बई की सूती मिलों  में यहाँ की उच्च गुणवता की कपास गांठे रेल से पहुंचने लगी। कहते है साधनों के अभाव में भी गजसिंहपुर मंडी से 3000 गांठें कपास तुलकर बैलगाड़ियों से मिल पहुँच जाता था।

 सूरजमलजी सामाजिक सरोकारों, धार्मिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वाहन में भी सदैव अग्रणी रहे। अपने समधी श्री आर.के. जैन की माता श्री की स्मृति में आयोजित होने वाले मातृ वंदना समारोह में आपने 25 से ज्यादा वर्षाे तक लगातार पूरी मित्र समूह के साथ जयपुर में उपस्थिती बनाई। समूह में इलाके के कार्याे हेतु गंगानगर या जयपुर जाना, राजधानी में पोलोविक्ट्री के सामान्य बजट वाले होटलों में रहना, अधिकारियों और मंत्रियों से प्रस्तावों पर सहमति प्राप्त करना। ये सब अब यादें बनकर रह गई हैं।  सामाजिक और धार्मिक संस्थाओ को सहयोग देने में आप सदैव अग्रणी रहे, जिसने जैसी राशि की रसीद बनाई उसे तत्काल उसी राशि का सहयोग दिया। 

हनुमानजी के प्रति उनकी असीम आस्था रही। नियमित सालासर और चानना धाम और स्थानीय मंदिर में दर्शन करना। शिवकुटी मंदिर निर्माण और अन्य स्थानों पर कमरों के निर्माण में उन्होंने योगदान दिया। इनके पिता काशीराम जी को इलाका पित्तर रूप में पूजता था। कार्तिक सुदी चौथ को रतिजोगा और हनुमानजी का जागरण पूरे श्रद्धा, विश्वास और भक्ति से आयोजित होता रहा है।

 सूरजमलजी की तेरापंथ, धर्म संघ और गुरुदेव के प्रति अपार समर्पण और श्रद्धा रही। आचार्य श्री और अन्य साधु साध्वियों के दर्शन सेवा करना, प्रवचन सुनना दिनचर्या का हिस्सा रहा है। दूरदर्शन, पारस, जिनवाणी, आदिनाथ और अन्य चैनल पर कब कौनसा प्रवचन देखना है, वो कभी नहीं भूलते और रिश्तेदारों को भी समय-समय पर ऐसे कार्यकर्माे की सूचना फोन कर देते थे। गायों को चारा देना, पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना, कुत्ते को रोटी खिलाना, बिल्ली के लिए दूध रखना अब हमेशा यादो में ही रहेगा। वे जिंदादिली की मिशाल रहे। 

क्या छोटा, क्या बड़ा, क्या बच्चा और क्या बूढ़ा इस क्षेत्र का प्रत्येक व्यक्ति उन्हें आदर और सत्कार देता था। उसे देखकर मृत्युपरांत उनके चाहने वाले उन्हें गजसिंहपुर की पूजनीय शख्सियत मानते हैं ।०0०






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कुम्हार समाज समिति का शपथ ग्रहण:भूमिदान पट्टिका का अनावरण

 





सूरतगढ़ ,16 अक्टूबर 2022.

कुम्हार समाज समिति सूरतगढ़ की नवगठित  कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण  व दीपावली स्नेह मिलन समारोह समिति अध्यक्ष नत्थूराम कलवासिया की अध्यक्षता में  कुम्हार धर्मशाला में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि जिला प्रगतिशील कुम्हार समिति अध्यक्ष महेन्द्र बागड़ी ने नई कार्यकारिणी के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। समारोह  के विशिष्ट अतिथि के रूप में कांग्रेस नेता बलराम वर्मा, प्रभुदान गेदर,पूर्व सरपंच बीरमाना ओम प्रकाश गेदर,गुरुदयाल नोखवाल,व ओम प्रकाश टाक भगवानसर उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह में कुम्हार छात्रावास के निर्माण पर विचार विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि महेन्द्र बागड़ी ने सूरतगढ़ क्षेत्र की कुम्हार समाज की सराहना करते हुआ कहा कि आप राजनैतिक स्तर पर जागरूक है। 

 समारोह में निवर्तमान कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को माला पहनाकर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। समारोह में  विभन्न प्रकोष्ठों के नामों की घोषणा की गई। मीडिया प्रकोष्ठ अशोक बागोरिया,राजेन्द्र जालप,जगदीश जलंधरा,वित सलाहकार प्रकोष्ठ एडवोकेट भूराराम माहर ,महिला प्रकोष्ठ सुनीता माहर,संतोष जालप,पूनम प्रजापति,विमला देवी,विधि सलाहकार प्रकोष्ठ -राम कुमार वर्मा,राम नारायण जालप,राम प्रताप जालप,सुनील नोखवाल,राजनैतिक प्रकोष्ठ -महावीर नोखवाल,केसरा राम टाक,राजेन्द्र माहर,सुखदेव जलंधरा,कृष्ण जालप, जसराम टाक, सुरेन्द्र टाक ,आसकरण जालप,सुरेन्द्र सोखल,तकनीकि प्रकोष्ठ सुभाष भोभरिया,जगदीश माहर,मोहन मंगलाव,महेन्द्र बाबरिया,युवा प्रकोष्ठ -सूरज भारतीय नोखवाल,दिनेश सारस्वा,सुभाष गेदर,साहिल गेदर,प्रदीप गुरिया,राधेश्याम,दीपक कुमावत,डॉ.सुनील आईथान,विनोद जलंधरा आदि को शामिल किया गया है। अध्यक्ष नत्थूराम कलवासिया ने समारोह में पधारे सभी आगन्तुकों का आभार प्रकट किया।  


ये भी हुए सम्मानित : - भामाशाह प्रेरक प्राचार्य नरेन्द्र प्रजापति ,ब्लॉक स्तर पर शिक्षक दिवस पर सम्मानित होने वाले अध्यापक चन्द्रपाल सोखल,राम कुमार चांदोरा ,सूरतगढ़ ब्लॉक सरपंच यूनियन के अध्यक्ष महावीर नोखवाल,राजकीय महाविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष साहिल गेदर को माला पहनाकर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

धर्मशाला भूमि दान की शिला पट्टिका अनावरण :- कुम्हार धर्मशाला के लिए भूमि दान करने वाले भामाशाह सहीराम कारगवाल के नाम की पट्टिका अनावरण उनके पुत्र बलराम वर्मा,ओम प्रकाश कारगवाल व भतीजे राम कुमार कारगवाल ने किया।०0०






 


शनिवार, 15 अक्टूबर 2022

गोधों का शहर:ओमप्रकाश कालवा का शहर: गोधों का शहर:अनिल धानुका का शहर



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 15 अक्टूबर 2022.

शहर के विकास और खूबसूरती की बड़ाई करें तो सड़कों पर शान से घूमते गोधों को अनदेखा तो नहीं किया जा सकता। हर सड़क और हर मोहल्ला गोधों के बिना सूना सूना लगता है। 


बस! गोधों को सड़कों पर मस्ती से विचरण करते देखते हैं तो अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा का चेहरा सामने आ जाता है। मील साहेब का चेहरा भी सामने आ जाता है। शहर को चमन बनाने का वादा गंगाजल मील साहब के सामने जनता से किया। 2 दिसम्बर 2019 को कालवा ने कार्यभार ग्रहण करते हुए समारोह में कहा। मील साहब की   बहुत बड़ी गलती साबित हो गया कालवा को अध्यक्ष बनाना। मील साहब टोक नहीं सकते। कालवा इन्कार कर दे तब क्या होगा? बस,ढकी पड़ी है जब तक रहे। मील साहेब किसी अन्य को टोकने का अधिकार दे दें तो गोधों का ही नहीं पूरी नगरपालिका की व्यवस्था सुधर जाए। मील साहब को अभी सहारा देकर कालवा जी यत्र तत्र ले जाते हैं। इसका लाभ कालवा जी ले रहे हैं। कालवा जी को गलतियों पर भी टोका नहीं जा रहा। मील परिवार में अनेक समझदार हैं और सूरतगढ़ में कांग्रेस की जनता से बढ रही दूरी को देख रहे हैं। वे गंगाजल मील सा. को कुछ कह नहीं सकते। कालवा यह जानते हैं कि जब तक गंगाजल मील साथ हैं तक कोई परवाह नहीं।

कांग्रेस अपना विश्वास जनता में खो रही है लेकिन कांग्रेस में कोई बोलने वाला नहीं और ऊपर लिखने वाला नहीं। लिखें तो बहुत कुछ हो सकता है लेकिन अपने अपने स्वार्थ और मन का डर। ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया नाराज हैं मगर शिकायत लिखने में कमजोर। अध्यक्ष को सस्पेंड करने की शिकायत। अनेक पावरफुल तथ्य प्रमाण हैं। 

जनता बोलने तो लगी है कि क्या सोचा था और क्या हो गया?बस,लाऊडस्पीकर जैसी आवाज बननी बाकी है। जब जनता की आवाज लाऊडस्पीकर बनेगी तो मील साहेब को हानि होगी क्योंकि तब विधानसभा चुनाव 2023 सिर पर आ चुके होंगे।

अनिल धानुका का नाम भी अपने वचन खो रहा है। शिक्षा केंद्र संचालक नंदी शाला के अध्यक्ष बने। अब समय नहीं शहर के हालात जानने का। ऊपर से एक और पद  श्री गंगानगर जिले के मनरेगा लोकपाल बन गये। मनरेगा कार्यों पर तो गांवों में निरीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। समय है। शहर में घूमने गोधों को देखने का समय नहीं है। जब समय नहीं है तो अध्यक्ष का पद छोड़ने में देरी क्यों कर रहे हैं? गोधों से किसी बड़ी दुर्घटना के बाद यह पद छोड़ेंगे? गोधों को नंदी शाला पहुंचाओ या पद छोड़ो।

👍कालवा जी को शहर को समस्याओं से मुक्त करना था लेकिन खुद ही समस्या बन गए। 

👍👍 भाजपा को विरोध करना चाहिए मगर कासनिया की सहमति से बना नगर मंडल चुप है और शहर देख रहा है। भाजपा में भी ऊपर लिखने वाला और सच्चाई बताने वाला कोई नहीं। इसमें भी नाकाम नेताओं को हटाने की जरुरत है।०0०






बुधवार, 12 अक्टूबर 2022

सूरतगढ़ स्थापना दिवस पहली बार मनाया जाएगा,14 अक्टूबर स्थापना दिवस.

 




* करणीदानसिंह राजपूत *

 सूरतगढ़ 12 अक्टूबर 2022.

 सूरतगढ़ का स्थापना दिवस पहली बार 14 अक्टूबर 2022 को मनाया जाएगा। 235 वर्ष पूर्ण होने पर यह समारोह होगा।

इस दिवस पर गढ़ के भीतरी क्षेत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा और उसमें गढ़ का इतिहास भी बताया जाएगा। यह कार्यक्रम शाम  5:30 बजे शुरू होगा। इससे एक दिन पहले शाम 5:30 बजे बिश्नोई मंदिर से वाहन रैली निकाली जाएगी जो विभिन्न मार्गों से होती हुई इंदिरा सर्कल पर सम्पन्न होगी। गढ धरोहर संरक्षण समिति की संयोजिका अधिवक्ता श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में यह दिवस मनाया जाएगा। पूनम शर्मा करीब दो वर्षों से यह प्रयास कर रही थी कि सूरतगढ़ का स्थापना दिवस मनाना शुरु किया जाए। पूनम शर्मा का यह प्रयास सफल हुआ है और पहली बार सूरतगढ़ स्थापना दिवस मनाया जाएगा।


 महाराजा सूरत सिंह द्वारा इस स्थान पर  अधिकार करने के बाद गढ का निर्माण कराया गया और  सूरतगढ़ नाम दिया गया।  सरकारी रिकॉर्ड में सन् 1787- 1799 ईसवी में यह अधिकार बताया गया है जिसकी व्यापकरूप से देखना आवश्यक है।


 गढ विध्वंस स्थिति में है। इसकी देखरेख नहीं हो पाई।धरोहर संरक्षण समिति के अंतर्गत पिछले करीब 30 सालों से इस पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर उत्साहित नागरिकों की ओर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता रहा है। 

* गढ़ का संरक्षण किया जाने की आवाज लगातार उठती रही है ताकि सूरतगढ़ नाम बना रह सके। गढ पूरा ध्वस्त हो जाने के बाद हमारे पास विरासत में कुछ भी नहीं रहेगा।

 गढ़ के आसपास प्राचीन मंदिर हैं प्राचीन तालाब है यह सभी सरंक्षण के कारण ही बच सकते हैं। गढ़ के अंदर प्राचीन रघुनाथ जी का मंदिर है जो भी क्षतिग्रस्त हालत में ही है। यह मंदिर भी महत्वपूर्ण है। मंदिर के नाम की रियासत के समय से ही माफी की कृषि भूमि भी है जो पुजारी की देखरेख में है और जीवनयापन का आधार है।

गढ़ के पास में प्राचीन तालाब है जिसका नाम है सूरत सागर उस पर भी अतिक्रमण हो गए उसमें कचरा डाल दिया गया अब थोड़ा सा हिस्सा उसका बाकी है जिसकी मांग उठती रही है कि इस तालाब को पुराने स्वरूप में कायम किया जाए।कानून भी यह कहता है कि तालाब आदि पर कोई अन्य निर्माण नहीं किए जा सकते। तालाब तालाब ही रहेगा। इस तालाब के पास ही तीज त्योहार मनाए जाते रहे हैं। गणगौर का मेला भी भरता रहा है। तालाब का पानी लोग पीते थे।

तालाब में प्राचीन गणेश मंदिर है जिसे नया रूप दे दिया गया है।

गढ़ के सामने महादेव का प्राचीन मंदिर सूरतेश्वर महादेव है जिसको अब नया रूप दे दिया गया है। प्राचीन गणेश मंदिर है। पास में हनुमान जी का मंदिर भी है अन्य देवी देवताओं के भी मंदिर हैं। जनता जागे तो सूरतगढ़ का यह गढ़ प्रतीक रूप में भी जिंदा रह सकता है।



* पहले गढ़ से इस क्षेत्र का प्रशासनिक कार्य संचालित होता रहा है गढ़ के अंदर तहसील थी पुलिस थाना था और कारागृह भी था। उसके बाद में जब यह सभी अन्य स्थानों पर नए भवनों में स्थानांतरित कर दिए गए। उसके बाद में गढ़ की स्थिति लावारिस हो गई।सरकारी रिकॉर्ड में यह नजूल संपत्ति के रूप में दर्ज हुआ।जिसका कोई मालिक नहीं उसका मालिक सरकार। किसी ने इसकी तरफ गौर नहीं कियाइसलिए वर्षों पहले इसके आगे का क्षेत्र भूखंड बनाकर नीलाम कर दिया गया।जब कुछ नीलामी हो गई उसके बाद में उत्साहित लोगों ने सरकार की नीलामी का विरोध किया और उसके बाद जो बचा खुचा स्वरूप है वह हम सभी के सामने है।

* बार-बार आवाज उठती रही की जो गढ़ की दीवारें हैं उनका पुनर्निर्माण हो। प्रतीक रूप में तो यह माना जा सके। बार-बार यह भी कहा गया मांग रखी गई कि नगरपालिका इस क्षेत्र को विकसित करे लेकिन अनदेखी होती रही।

अब स्थापना दिवस मनाने के समारोह हर साल होंगे तो विकास की ओर भी गतिविधियां बढेगी।०0० 

करणी दान सिंह राजपूत,

पत्रकार,

(राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

 सूरतगढ़ (राजस्थान)

94143 81356

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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2022

एडीएम दफ्तर झाड़ियां कचरा गंदगी से घिरा हो तब सूरतगढ़ की बुरी दशा का अंदाजा लगालें

 






* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 11 अक्टूबर 2022.

सूरतगढ़ के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी अतिरिक्त जिला कलेक्टर के कार्यालय के आसपास सफाई पर नगर पालिका की आंखें बंद है। वहां झाड़ झंखाड़ गंदगी दीवारों के पास में रूप बिगाड़ रही है। क्या यहां ए डी एम का दफ्तर है झाड़ झंकार के बीच में लोग लघुशंका करते हैं। माने तो यह केवल घंटे आध घंटे का काम है जिसमें साफ सफाई हो सकती है लेकिन हालात देखकर लगता है कि वहां पर पिछले कई महीनों से सफाई नहीं हुई। 

यहां अतिरिक्त जिला कलेक्टर का कार्यालय तहसील परिसर में ही है। तहसील परिसर कि पश्चिमी दीवार के साथ में कीकर झाड़ियां उगी हुई है। तहसील परिसर का पश्चिमी द्वार बंद पड़ा है जहां पर भी गंदगी है। तहसील के पश्चिमी दीवार और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कार्यालय के बीच में करीब 10 फुट की सड़क है जिसकी सफाई करते नगर पालिका को देखा नहीं गया। यह निंदनीय है कि लोग वहां झाड़ियों में लघु शंका करते हैं जहां वातावरण शुद्ध और साफ रहना चाहिए। इस कार्यालय परिसर में सैकड़ों वकील और सैकड़ों लोग उपस्थित रहते हैं वहां नगरपालिका की दृष्टि नहीं है। 




आश्चर्यजनक यह भी है कि इस कार्यालय के पीछे पशु विज्ञान केंद्र का कार्यालय है।उसके पास में ही अधिशासी अधिकारी का निवास है और वहां की मुख्य सड़क पर नाला लबालब है और गंदा पानी महीनों से भरा पड़ा है। नाले की सफाई किए हुए भी लगता है कि दस बारह महीनों से नाला साफ नहीं हुआ। यही नाला पशुचिकित्सालय के मुख्यद्वार के आगे से निकलता है। पशुचिकित्सालय के आगे भी गंदगी भरी है। इस सड़क से हजारों लोग गुजरते हैं जो बदबू के बीच में से गंदगी को देखते हुए गुजरते 

हैं। नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी का  बोर्ड है जिसको नगर की साफ सफाई और गंदे पानी की निकासी के ऊपर कोई परवाह नहीं है। सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी अतिरिक्त जिला कलेक्टर के कार्यालय के आसपास ही गंदगी कचरा नहीं हटाया जाता तब शहर की कितनी बुरी हालत होगी! शहर के 45 वार्ड हैं। नगरपालिका बताए कि कितने वार्ड एकदम साफ हैं जिनमें कचरा गंदगी नहीं है। कौनसे वार्डों में सफाई नियमित हो रही है।

👍नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने कार्य शुरू करने के समारोह में पूर्वविधायक गंगाजल मील और हनुमान मील की उपस्थिति में आम जनता के सामने सूरतगढ़ को चमन बनाने की घोषणा की थी। अब ऐसे बना रहे हैं चमन।०0०








सोमवार, 10 अक्टूबर 2022

मानसिक रोगी कोई भी, किसी पद कद काठी का,उसे रोगी न कहें,उसका ईलाज कराएं।

 

* करणीदानसिंह राजपूत *


मानसिक रोगी कोई भी हो सकता है। किसी भी पद कद और काठी का व्यक्ति मानसिक रोगी हो सकता है लेकिन सार्वजनिक रूप से उसे पागल या मानसिक रोगी नहीं कहना चाहिए। मानसिक रोगी किसी भी अवस्था में किसी भी स्तर के कम या ज्यादा विभिन्न प्रकार की क्रिया प्रतिक्रिया करते अजब हरकतें करते हुए मिल जाते हैं। मानसिक रोगियों का अपने मन पर अपनी क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता। वे बेबस से होते हैं।वे दया के पात्र होते हैं। ईलाज के पात्र होते हैं। 


विश्व स्तर पर मानसिक रोगी को स्वस्थ बनाने के लिए या उसके स्वास्थ्य के लिए जनता को जाग्रत करने के लिए सोचा गया। विश्व स्तर पर 10 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाने और जागरण करने का दिवस तय किया गया।

भारत में पहले आगरा अमृतसर रांची आदि में ही मानसिक रोगियों के इलाज की व्यवस्था थी। लोग अक्सर कहते थे कि आगरा भिजवाना है। यह एक मजाक के रूप में भी प्रचलित था। कोई उत्तेजित होता या गलत बात करता हरकतें गलत होती तो उसे पागल कहते और कहते कि आगरा भिजवाना है।

 बहुत बाद में कहा जाने लगा के कोई व्यक्ति विभिन्न प्रकार की हरकतें करता है और वह किसी स्तर का हो,उसे पागल नहीं कहा जाए। वह मानसिक रोगी है और उसका इलाज भी संभव है। वर्तमान समय में भारत में लगभग हर बड़े स्थान पर बड़े शहर में मानसिक रोगियों का इलाज संभव है। सरकारी स्तर पर और निजी क्षेत्र में भी मानसिक रोगियों का इलाज हो रहा है। सरकारी स्तर पर जिला स्तर पर मानसिक रोगों का इलाज मिल जाता है।

 आज जिस स्थान सूरतगढ़ में मैं रहता हूं यहां भी मानसिक रोगियों का इलाज संभव है। 

*कुछ वर्ष पहले राजस्थान सरकार ने मानसिक रोगियों की दुर्दशा पर विचार किया था।  सरकार का आदेश था कि जो मानसिक रोगी बाजारों में घूमते हैं सड़कों पर घूमते हैं उन्हें पुलिस चिकित्सालय तक पहुंचाएं। इस आदेश को लगभग भुला दिया गया है।फाइलों में जरूर मौजूद होगा।यह सरकारी आदेश बहुत महत्वपूर्ण था और आज भी इसका महत्व है। यदि कहीं कोई मानसिक रोगी विचरण करता हुआ मिले तो आज भी पुलिस को सूचित किया जा सकता है कि इसको सरकारी चिकित्सालय तक पहुंचाएं। व्यक्ति और संस्थाएं भी ऐसे रोगी को सरकारी चिकित्सालय तक पहुंचा सकते हैं। उसके बाद सरकारी चिकित्सा  प्रभारी की ड्यूटी है कि वह उसे उचित इलाज के लिए अपने यहां पर व्यवस्था  करे या फिर बड़े चिकित्सालय में भिजवाए। 

*मानसिक रोगी शहर में हो सकता है गांव और ढाणी तक में भी हो सकता है।  अपने पद को लेकर अपने पैसे को लेकर अपनी समस्याओं को लेकर अधिक परेशान होकर व्यक्ति मानसिक रोग की ओर बढ़ जाता है। यदि व्यक्ति को स्वयं पता लगे कि उसकी कार्यप्रणाली में कुछ अलग प्रकार के लक्षण हैं तो उसे स्वयं ही इलाज के लिए सरकारी गैर सरकारी स्थान पर पहुंचना चाहिए। यदि परिवार जनों को व्यक्ति के लक्षण कार्य अजब तरीके के लगे कुछ परेशानी नजर आए तो उनको भी ध्यान देना चाहिए और रोगी को साथ लेकर उचित स्थान पर इलाज करवाने के लिए पहुंचना चाहिए। 

*मानसिक रोगी की अलग-अलग अवस्थाएं होती है।मानसिक रोगी स्वयं को कभी रोगी नहीं मानता। यह भी अवस्था होती है लेकिन उसके लक्षण अन्य लोग जानकर मालूम कर सकते हैं कि वह व्यक्ति मानसिक रोगी है और उसे इलाज की जरूरत है।

* व्यक्ति किसी भी पद किसी भी कद काठी का हो नेता हो व्यापारी हो कर्मचारी हो मजदूर किसान हो मानसिक रोगी हो सकता है। आपको कहीं विचित्र लक्षण करते हुए कोई दिखाई दे तो उचित देखरेख कर मालूम करें।एक-दो दिन में ही मालूम हो जाएगा कि संबंधित व्यक्ति मानसिक रोगी है और उसे इलाज की आवश्यकता है। इसके बाद उचित कदम उठाए जा सकते हैं।

एक बात का ध्यान रखें कि मानसिक रोगी को पागल न कहें और सार्वजनिक स्थान पर कहीं कुछ भी विचार प्रगट नहीं करें। 

* विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस.

10 अक्टूबर 2022.

* करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

 सूरतगढ़ (राजस्थान )

94143 81356

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रविवार, 9 अक्टूबर 2022

वसुंधरा राजे राजस्थान की महान नेता: बीकानेर में स्वागत को जबरदस्त भीड़ उमड़ी:फोटो.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *


वसुंधरा राजे की लोकप्रियता इतनी व्यापक है कि बीकानेर संभाग में आने पर आज भीड़ उनको देखने और स्वागत के लिए जबरदस्त उमड़ी। 

यह भीड़ साबित करती है कि वे कल भी नेता थी और आज भी सर्वप्रिय नेता हैं। 

बीकानेर यात्रा के शानदार फोटोग्राफ्स यहां दिए जा रहे हैं।

 👍मन की बात से  प्राप्त।*





















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