गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

सरदार पटेल लौह पुरूष थे और अब मोम के पुतले - करणीदानसिंह राजपूत-





सरदार पटेल लौह पुरूष थे और अब मोम के पुतले जिनमें प्राण नहीं। देश की स्वतंत्रता के इतने वर्ष बाद राष्ट्रवादी देश भक्त कहलाने वाले नाम के देश भक्त और राष्ट्रवादी रह गए हैं,उनमें एक भी नेता लौह पुरूष जैसा चरित्र नहीं बना पाया। देश की एकता अखंडता के लिए रियासतों के एकीकरण के लिए सरदार पटेल कठोर थे जिसके कारण देश का यह स्वरूप बन पाया। बड़ी बड़ी रियासतों के राजाओं को चेतावनी देना बड़ा कठिन कार्य ही था। लेकिन सरदार पटेल ने वह चुनौति पूर्ण कार्य किया और सफल भी हुए।

लेकिन आज के देश भक्त राष्ट्रवादी कहलाने वाले नेताओं व राजनैतिक दलों में यह चरित्र और आत्मबल देखने को ही नहीं मिलता। आज के नेताओं में सत्ता लोलुप, परिवार लोलुप,धन लोलुप और चारीत्रिक पतन को लिए हुए हैं। बड़े नेताओं को तो सत्ता लोलुप हैं मगर छोटे से छोटे नेता और कार्यकर्ता स्वार्थी हो गए हैं। एक एक पैसे के लिए ईमान बेचने में क्षण भर की देरी नहीं करते। चोरों लुटेरों धोखेबाजों ठगों और नारी से दुराचार करने वालों से मित्रता साझेदारी कर लेते हैं। कोई शर्म नहीं।

सामाजिक संगठन और समाजसेवी संस्थाएं ऐसे लोलुप लोगों को बड़ा मानते हुए मंचों पर आसीन करते हैं और उनके हाथें से सम्मान प्रदान करवाते हैं। गुणी ज्ञानी प्रतिभाशाली विद्यार्थी को दुराचारी के हाथों से दिलवाया गया प्रशस्ति पत्र उस विद्यार्थी को जीवन देगा या जहर देगा? लेकिन संस्थाएं अपने स्वार्थ के लिए इतने घिनौने कार्य करने में संकोच नहीं करती।

इतना बड़ा देश जिसमें कितने कस्बे कितने ग्राम कितने शहर हैं?

कम से कम हर ग्राम हर कस्बे और हर शहर में एक एक तो लौह पुरूष जैसा व्यक्ति तो हो,चाहे पुरूष हो चाहे नारी।

सरदार पटेल की जयंती पर आज 31 अक्टूबर 2013 पर उनको नमन।

- करणीदानसिंह राजपूत

राजस्थान सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकार,

सूरतगढ़. राजस्थान

94143 81356

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रविवार, 13 अक्टूबर 2013

दशहरा उत्सव सूरतगढ़ 2013:विशेष रिपोर्ट करणीदानसिंह राजपूत


रावण कुंभकरण मेघनाथ के पुतले पटाखों के धमाकों से धू धू हो गए
नगरपालिका के आयोजन में उमड़ी भीड़:





आशाराम डूडी

सूरतगढ़, 13 अक्टूबर। राष्ट्रीय उत्थान रामलीला क्लब के रामलीला कलाकारों की आरती के साथ आतिशबाजी संग मनाए गए दशहरा उत्सव में अच्छी खासी भीड़ नर नारी बच्चे और बच्चियां रंग बिरंगे परिधानों में शोभायमान हो रहे थे। चुनाव आचार संहिता के कारण जन प्रतिनिधि उपस्थित नहीं थे,लेकिन अतिरिक्त जिला कलक्टर आशाराम डूडी ने अपने उदबोधन में राम का जयकारा लगवा कर आनन्दित किया।
रावण के एक छोटे पुतले को पहले राम ने अग्रि दी। इसके बाद हुई आतिशबाजी। कुछ पलों के लिए लोग आकाश की ओर ही खो गए।
इसके बाद प्रवीण डी जैन की ओर से घोषणा हुई कि दशहरे पर्व में रावण पुतले को जलाना माना जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत।
बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए पुतलों को जलाने के लिए अधिकारी वर्ग को आमंत्रित किया गया।
अधिकारियों अतिरिक्त जिला कलक्टर आशाराम डूडी,राजस्व तहसीलदार राकेश न्यौल,उप अधीक्षक पुलिस मदनसिंह बुडानिया,थानाधिकारी रणबीर सांई,पालिका के अधिशाषी अधिकारी सुरेन्द्र यादव व सहायक अभियंता कर्मचंद अरोड़ा व रामलीला कलाकारों ने इन पुतलों को जलाया।

प्रवीण डी जैन

पहले मेघनाथ को अग्रि दी गई। मेघनाथ का पुतला जला। उसके बाद कुंभकरण के पुतले को अग्रि दी गई। वह भी जल उठा। अंत में रावण के पुतले को अग्रि दी गई। सभी पुतले धू धू हो गए।

पुरानी परंपरा के अनुसार लोग रावण की अस्थियां लेने को दुघर्टना की परवाह किए बिना बांस खपचियां आदि ले ले कर भागे। ये अस्थियां लोग अपने घरों की सुरक्षा के लिए रखते हैं। मान्यता है कि इससे चोरी नहीं होती।

इस पर्व के कुछ फोटो यहां दिए जा रहे हैं।


शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

नारियल में प्रगट हुए गणेश


खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 12 अक्टूबर 2013. नारियल में श्री गणेश के प्रगट होने की घटना कौतुहल बन गई है। श्रद्धालु दर्शन को पहुंचने लगे हैं व मिष्ठान आदि का भोग लगा रहे हैं।

धर्मकर्म में विश्वास रखने वाले पवन मिश्रा ने पूजा के लिए नारियल की जटाएं हटाई तो उसमें स्वेत रूप में श्री गणेश नजर आए। पवन मिश्रा इस अलौकिक से दृश्य को निहारते रहे। कुछ ही क्षणों में यह घटना लोगों में पहुंच गई तथा लोग वहां पहुंचने लगे।

नारियल में प्रगट गणेश में सिर पर मुकुट है। दो आँखें,बड़े बड़े हाथी कान,सूंड और दंत साफ दिखाई पड़ रहे हैं।

    सूरतगढ़ में छवि सिनेमा के सामने सोनी मार्केट है जिसमें पवन मिश्रा का आवास है। वहीं नया शोपिंग कॉम्पलेक्स बन रहा है जिसमें यह गणेश नारियल रखा हुआ है।



शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

विधायक गंगाजल मील जी के खाते में और जोड़ो शिला पूजन के वोट


गंगाजल मील

 बलराम वर्मा



टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़। विधायक गंगाजल मील के राज में खूब पत्थर लगाए गए और चुनाव आचार संहिता के लगने के चक्कर में आधे अधूरे निर्माणों पर भी पत्थर लगवा कर नाम दे दिया। शिला पूजन का। पहले पत्थर लगाए जाते थे कार्य शुरू किए जाते समय शिलान्यास के और उसके बाद लगाए जाते थे निर्माण पूरा होने पर उदघाटन के या लोकार्पण के। लेकिन चुनाव आचार संहिता के चक्कर में जब और कोई नाम नहीं सूझा तो पत्थर लगाने की भूख ने नया नाम दिया जो शिला पूजन के नाम से बोला गया लिखा गया। कितनी ही आलोचना करें। मील साहेब की सलाहकार परिषद के रत्नों में अक्ल तो है जो यह नाम सुझाया गया।

पत्थरों से वोटों की गिनती का आंकलन करें तो इन शिला पूजन के पत्थरों के वोट भी मील साहेब के खाते में जोड़ दें। हो सकता है कि पाठकों को यह पढ़ते हुए हँसी आए लेकिन एक एक करके भी कई बार काम बन जाता है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सी.पी.जोशी भाजपा प्रत्याशी से केवल 1 वोट से हार गए थे।

मील साहेब को टिकट मिल जाए तो पत्थरों के वोटों से शिला पूजन से इतनी घोषणा दावा तो किया ही जा सकता है कि मील साहेब की जमानत जब्त नहीं कराई जा सकती।

वैसे तो बलराम वर्मा ओबीसी के नाम पर टिकट का प्रबल दावेदार है और जयपुर दिल्ली के चक्कर मील साहेब से ज्यादा लगा चुका है। बलराम का बल पिछली बार तो काम नहीं कर पाया था,लेकिन इस बार कहते हैं कि बलराम वर्मा ने अपना वजन किया है जो पिछली बार से ज्यादा हुआ है। बलराम वर्मा का खुद का भी दावा है कि उनका वजन इस बार अधिक है।

चलते चलते एक बात लिख दी जाए कि जनता में स्वयं को वरिष्ठ साबित करने के लिए बलराम वर्मा अपने बाल सफेद रखने लगे हैं और गंगाजल मील अपने को जवान साबित करने के लिए बाल काले करने लगे हैं। देखते हैं कि पहले तो पार्टी के दंगल में कौन किसको चित्त करता है?

वैसे मील साहेब को खिलाडिय़ों से थोड़ी शिक्षा ले लेनी चाहिए थी। खिलाड़ी अपने चरम उत्कर्ष काल में मतलब शिखर काल में सन्यास ले लेता है ताकि बाद में हार होने का कोई खतरा ही नहीं रहे। लेकिन होनी को कोई टाल नहीं सकता। वे पहले दावा करते थे कि उनकी टिकट घर चल कर आएगी। फिर दावा किया कि आज वे खुद की ही नहीं तीन चार टिकटें दिलवाने की ताकत रखते हैं। अब वे इतनी ताकत के साथ टिकट लेने की लाइन में लगे हैं और उस लाइन में लगने से पहले आवेदन करना पड़ता है सो वह आवेदन भी किया है। घर आती टिकट में इतनी फाचरें और यह बलराम की एक और फाचर। लेकिन इतना तो मान कर चलना चाहिए कि बल्ले की फाचर वाचर से मील साहेब का कुछ भी बिगडऩे वाला नहीं है। इतने पत्थरों से और शिला पूजन से बढ़ी ताकत से टिकट तो मिल ही जानी चाहिए।


गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

सूरतगढ़ में करोड़ों के भूमि घोटालों में राजनेता


विशेष खबर- सबसे पहले- करणीदानसिंह राजपूत

चारे घोटाले से कई गुणा बड़ा है सूरतगढ़ का भूमि घोटाला

राजस्थान उच्च न्यायालय ने तहसीलदार राकेश न्यौल के स्थानान्तरण आदेश पर रोक लगाई

सूरतगढ़, 3 अक्टूबर। सूरतगढ़ तहसील के भूमि घोटालों में राजनेताओं की ईच्छानुसार करोड़ों की जमीन का गैर कानूनी रूप से पुख्ता आवंटन की कार्यवाही के लिए रिपोर्ट नहीं करने वाले राजस्व तहसीलदार राकेश न्यौल को यहां से एपीओ कर दिया गया था,लेकिन राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने राज्य सरकार के उस आदेश पर स्टे कर दिया है।

उच्च न्यायालय में वकील रामावतार चौधरी ने रिट लगाई जिसमें अखबारों को पेश किया जिनमें यह समाचार प्रकाशित हुआ था। यह रिट आज ही लगाई गई थी।

इस स्टे की सूचना यहां मिली तब राकेश न्यौल ने दफ्तर में सूचना देदी लेकिन खबर है कि स्थानान्तरित होकर आए हुए तहसीलदार ने चार्ज रिज्यूम कर लिया। कानून विदों का मानना है कि इसमें राज्य सरकार का आदेश ही रोक दिया गया है।

    बिहार का चारा घोटाला देश का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है,लेकिन सूरतगढ़ में कई घोटाले हैं तथा हरेक घोटाला बिहार के घोटाले से बड़ा है। सूरतगढ़ शहर और शहरी सीमा में भूमि की कीमतें बढऩे से राजनेताओं व बड़े लोगों ने विशाल कॉलोनियों के निमार्ण के लिए जमीनें हड़पनी शुरू की है। जमीन का एक एक घोटाला सौ सौ दो दो सौ करोड़ का है।

राजनेताओं को जमीनें दिलवाने में पटवारी किशोरसिंह का खास नाम है और यह पटवारी बेताज बादशाह कहलाता है।
इस पटवारी को यहां से पहले हटा दिया गया था,लेकिन यह अपनी बनाई संपत्ति के लिए यहां वापस आना चाहता था। राजनेताओं से संपर्क कर उनको जमीनें उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर तक रिस्क उठाने में माहिर माने जाने वाले इस पटवारी को यहां बदली करवा कर लाया गया और सूरतगढ़ हल्का दिया गया,लेकिन पटवारी का इस बार का दांव चक्र में उलझ गया। पटवारी की संपति बेशुमार बताई जाती है।
असल में चुनाव से पहले जमीनें हड़पी जाने की ताबड़तोड़ जल्दबाजी में यह मामला पकड़ में आया।
नाव के बाद अगर
चु सीबीआई जांच करवाई गई तो कितने ही राजनेताओं का हाल लालू यादव से बदतर होगा।

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करोड़ों की जमीनों में गिरता राजनीतिज्ञों का ईमान

नेताओं की जमीनों का फर्जीवाड़ा नहीं किया तो तहसीदार को बदल दिया

जमीनें पीछे थी मगर उनको राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर लग आए
मुख्यमंत्री का कार्यालय भी दागी हुआ

खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़ के शहरी क्षेत्र में और पास की जमीनों के रेट करोड़ों रूपए होने के कारण अस्थाई कास्त वाली जमीनों को गरीबों से जैसे तैसे हथिया कर उनका पुख्ता आवंटन कराने में नेताओं का ईमान गिरता जा रहा है। पुख्ता आवंटन के लिए कब्जा कास्त की रिपोर्ट  तहसीलदार देता है तब संभागीय कमिश्रर  पुख्ता आवंटन करता है। नेता खासकर कांग्रेसी सत्ताधारी और उनके साथ रहने वाले चाटुकार भाजपाई पिछले सालों से जमीनों की हेराफेरी में लगे हुए हैं। जमीनों को खरीदने के बाद उच्च मार्ग पर लाने का फर्जीवाड़ा चलता है।
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने ही वाली है इसलिए सत्ताधारी नेता जल्दी से जल्दी जमीनों का पुख्ता आवंटन कराने को लालायित हो रहे हैं तथा राजस्व कर्मचारियों व अधिकारियों से झूठी रिपार्टें चाहते हैं। अधिकारियों को झूठी रिपोर्ट देने से बाकी का जीवन कोर्ट कचहरी व जेल में दिखाई देता है। सूरतगढ़ के राजस्व व अन्य अधिकारी झूठी रिपोर्ट से बचना चाहते हैं।
ऐसे ही एक मामले में राजस्व तहसीलदार राकेश न्यौल ने झूठी रिपोर्ट देने से इन्कार का दिया तो नेताजी ने मुख्यमंत्री कार्यालय से उनका स्थानान्तरण करवा दिया। तहसीलदार को आए हुए केवल 2 माह ही हुए थे।

मामला है राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास की मोहनी देवी की जमीन का। भरतजी को  इस जमीन में लगाव हुआ और यह जमीन पीछे से खिसका कर उच्च मार्ग पर ला दी गई। पहले किसी प्रयाग वाल्मिकि की जमीन सडक़ के पास थी उसे पीछे कर दिया गया। पटवारी ने गोल मोल रिपोर्ट दी कि आसपास के लोगों से पूछने पर मालूम हुआ कि मोहनीदेवी कब्जा कास्त है। इस रिपोर्ट को राजस्व तहसील से जिला कलक्टर के पास भिजवा दिया गया। कलक्टर कार्यालय से फाइल वापस आ गई। स्पष्ट लिखा जाए कि विक्रमी संवत 2042 से अब तक कब्जा कास्त है। अब यह रिपोर्ट दी जाए तो साफ साफ जेल दीखती है। पुराने रिकार्ड की ना जाने कितनी नकलें ली जा चुकी है,उसमें झूठी रिपोर्ट को जगह जगह इन्द्राज कैसे किया जाए?
राजस्व तहसीलदार पर दबाव बनाया जाता है। लेकिन तहसीलदार कह देता है कि सीधे तो रिपोर्ट नहीं करता। गिरदावर से पहले करवा दी जाए। गिरदावर हाल ही में पदोन्नत हुआ। वह कहता है कि मुझे क्यों मरवा रहे हो? मैं यह नहीं करता।
राजस्व तहसीलदार दबाव बनाया जाता है। विधायक जी के भ्राता तहसीलदार के पास में पहुंचते हैं। तहसीलदार को जिला कलक्टर कार्यालय में पहुंच कर मुख्यमंत्री की ऑन लाइन बैठक में भाग लेना होता है। आदर सत्कार कर तहसीलदार निकल जाता है।
तहसीलदार को नेता ही लाए थे और वह काम नहीं करे। मुख्यमंत्री के कार्यालय में ना जाने क्या क्या कहा जाता है और वहां से निर्देश कि अपीओ कर दिया जाए।
तहसीलदार के स्थानान्तरण की खबर से हलचल शुरू होती है और शनिवार को ही काफी लोग तहसील में पहुंच जाते हैं। तहसीलदार जी के मुंह से सच्च फूट कर बाहर निकलने लगता है। वहां पर खड़े कई लोग पुष्टि करते हैं। तहसीलदार को फोन पर कहा जाता है कि भरत जी आए थे और आपने उनका आदर सत्कार नहीं किया। तहसीलदार कहते हैं कि भरत जी आए ही नहीं। विधायक जी के दो भाई आए थे और उनका पूरा आदर सत्कार किया गया था।
बस आदर सत्कार वह बाकी रहा कि जमीनों के पुख्ता करने के लिए फर्जी रिपोर्ट नहीं की गई। यह एक जमीन नहीं। कितनी और जमीनें हैं। शहर में सन सिटी के पीछे उच्च मार्ग के पास में जहां पर सात पत्रकारों को भी प्लाट दिए जा चुके हैं। अभी उसका पुख्ता आवंटन नहीं हुआ है। इसके
अलावा घग्घर डिपे्रशन की जमीनें जिन पर कुछ नेताओं की नजरें हैं लेकिन उन पर रिपोर्ट हो नहीं सकती। राज बदलना निश्चित है और उसके बाद में ना जाने कितने प्रकरण खुलेंगे और फर्जीवाड़े में कौन कौन घेरे में आऐंगे।

सोमवार, 30 सितंबर 2013

नरेन्द्र मोदी टाइगर पावर और सामने डॉग पावर:मुकाबला हो ही नहीं सकता:

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी बेजान दारूवाला ने कहा

राहुल गांधी नहीं बन सकते प्रधानमंत्री

खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, जी चैनल पर 28 सितम्बर 2013 की रात में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी बेजान दारूवाला का इंटरव्यू चल रहा था। एंकर को दारूवाला ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। कांग्रेस में गांधी परिवार का अस्तित्व चार पांच साल में खत्म हो जाएगा। दारूवाला ने एक पुस्तक दिखलाते हुए कहा कि यह आज नहीं कह रहा हूं कई साल पहले लिख चुका हूं।

दारूवाला ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के चांस ज्यादा हैं।

दारूवाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस से भाजपा का भविष्य बेहतर है।

नरेन्द्र मोदी के सामने चल रहे प्रधानमंत्री उम्मीदवार नाम के बारे में कहा कि नरेन्द्र मोदी टाइगर की पावर है और सामने डॉगी पावर वाला है। दोनों की पावर ही अलग अलग है तो मुकाबला हो ही नहीं सकता। कोई डॉग यानि कि कुत्ता किसी टाइगर यानि कि किसी शेर का मुकाबला कैसे कर सकता है?

एंकर ने कहा कि आप तो बहुत खुले बोलते हो। हालांकि एंकर ने अपने वाक्यों में सुधारते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी में अधिक ताकत है और सामने वाले में कम ताकत है।

30.9.2013.


मंगलवार, 17 सितंबर 2013

सफाई कर्मचारी नियुक्ति अवैध का ओरोप:हाईकोर्ट में रिट दायर:अपडेट:


कोर्ट ने 16 सितम्बर को प्रतिपक्ष ईओ,अध्यक्ष व अन्य को नोटिस जारी कर 26 सितम्बर को हाजिर होने का आदेश जारी किया।

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 17 सितम्बर। नगरपालिका में नियुक्त 148 सफाई कर्मियों की नियुक्ति को नियम विरूद्ध बतलाते हुए सूची को निरस्त करने,ताजा नई नियुक्तियां करने की यायिका राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर की गई है। याचिका में चयन समिति को भी नियम विरूद्ध अवैध बताया गया है। वाल्मिकि समाज के वरिष्ठ पार्षद को चयन समिति में लेने के बजाय मनोनीत जूनियर पार्षद को लिया गया,तीन से अधिक संतानों वाले अपात्रों को चुना गया व पात्र लोगों को नियुक्त नहीं किया गया।

    उच्च न्यायालय जोधपुर में यह रिट पांच लोगों विनोद पुत्र चरणदास,सुनीतादेवी पुत्री कालूराम,राकेश पुत्र दुलाराम,दीपक कुमार पुत्र मोहनलाल,प्रेमकुमार पुत्र बंशीलाल की ओर से पेश की गई।

रिट में राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग के सचिव,नगरपालिका ईओ,नगरपालिका अध्यक्ष व हाल ही में नियुक्त सफाई कर्मचारियों संजय पुत्र भंवरलाल,अशोक पुत्र कालूराम, बुधराम पुत्र भागुराम,दर्शनादेवी पत्नी भरतकुमार,राजकुमार पुत्र चम्पालाल,और रेखा पत्नी राजकुमार,मंजु पत्नी छोटू राम,किशोर कुमार पुत्र फूसाराम,सीता राम पुत्र नत्थूराम,श्रवण कुमार पुत्र लाल मणि,कमल कुमार पुत्र राजेन्द्र कुमार को प्रतिपक्षी बनाया गया है।

    रिट में लिखा गया है कि नगरपालिका ने मई 2012 में 90 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का विज्ञापन प्रकाशित करवाया। इसके बाद संशोधन होते रहे व 148 कर्मचारी नियुक्त किए गए। राजस्थान सरकार की ओर से 3 मई 2013 को नियुक्तियों के लिए समस्त पालिकाओं के लिए गाईड लाइन जारी की। जिसमें 5 सदस्यीय चयन समिति बनाने के लिए निर्देश था। उसमें चयन समिति का अध्यक्ष नगरपालिका का अध्यक्ष,वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी,वरिष्ठ सफाई निरीक्षक,एक सदस्य वाल्मिकि समुदाय का जो चुना हुआ वरिष्ठ पार्षद या मनोनीत पार्षद हो व अधिशाषी अधिकारी।

    रिट में लिखा गया है कि नत्थूराम भाटिया नवम्बर 2009 में निर्वाचित हो पार्षद बना व रामनिवास को 8 जून 2010 को राज्य सरकार ने मनोनीत किया। इसमें नत्थूराम भाटिया के होते हुए रामनिवास को अवैधानिक तरीके से चयन समिति का सदस्य लिया गया। इस तरह से यह चयन समिति अवैधानिक है और इसका चयन भी अवैधानिक है।

यह लिखा गया है कि 1-6-2002 के बाद तीन से अधिक संतानों होने वालों का चयन असंवैधानिक बताया गया। जिसमें उनके राशनकार्डों का हवाला दिया गया है जिनमें परिवार के समस्त सदस्यों के फोटो हैं। इसके अलावा कमल कुमार की आयु 18 वर्ष से कम होना बताया गया है। यह लिखा गया है कि याचिकाकर्ता पात्र होते हुए भी चुने नहीं गए।

 याचिका में लिखा गया है कि चयन समिति ही असंवैधानिक है तब उसका चयन भी अपने आप में अवैध हो जाता है सो उस चयन सूची को निरस्त का आदेश देते हुए नियमानुसार ताजा नई नियुक्तियां किए जाने का आदेश प्रदान किया जाए।

इस याचिका के नोटिस जारी होने के समाचार ने यहां खलबली मचा दी है। इन नियुक्तियों को लेकर कुछ दिन पालिका प्रांगण में धरना प्रदर्शन हुए। अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल का पुतला फूंका गया। उसके बाद विधायक के पुत्र महेन्द्र मील ने धरना देने वालों के बीच में जाकर कहा कि पालिकाध्यक्ष ने उनको बताए बगैर यह नियुक्ति सूची जारी कर दी है। यह आश्वासन दिया कि इस सूची को निरस्त कराया जाएगा। विधायक पुत्र महेन्द्र मील प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी हैं। इसके बाद विधायक गंगाजल मील ने आश्वासन देकर धरना व जूस पिला कर अनशन खत्म करवाया। लेकिन इसके बाद कुछ भी नहीं हुआ।

अब पात्र लोगों ने राजस्थान उच्च न्यायालय में यायिका दायर की है।

राजस्थान उच्च न्यायालय में  सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति को नियम विरूद्ध बतलाते हुए एक और रिट पेश की गई है।
यह रिट पार्षद नत्थूराम भाटिया व 7 अन्य की ओर से पेश की गई है जिसमें पालिका अध्यक्ष,तत्कालीन ईओ,राजस्थान सरकार सहित कुल 15 जनों को प्रतिपक्षी बनाया गया है। इस रिट की तारीख भी 26 सितम्बर दी गई है।

 

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मंगलवार, 10 सितंबर 2013

पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा का आमरण अनशन मुख्यमंत्री ने खत्म कराया


राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी   की मांग को लेकर यह आमरण अनशन 15 अगस्त स्वाधीनता दिवस से चल रहा था

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 10 सितम्बर 2013. पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त से राजापार्क आर्य समाज के परिसर में आमरण अनशन शुरू किया और वह अनशन चिकित्सालय ले जाए जाने के उपरांत वहां भी जारी रहा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार उनसे मिल कर अनशन त्याग करने की अपील करते रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि छाबड़ा जैसे कुछ लोग ही बचे हैं तथा उनका जीवन अनमोल है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छाबड़ा को अनशन त्यागने के लिए मनाया और दिनांक 9 सितम्बर 2013 को फलों का रस अपने हाथों से पिला कर अनशन समाप्त करवाया।

छाबड़ा अब अपने रामनगर स्थित पुत्र गौरव के आवास पर है। मेरी उनसे दिन में 12-45 बजे बात हुई है।



मुख्यमंत्री से कई बातों का आग्रह किया गया है जो 15 सूत्री है। इसके कुछ महत्वपूर्ण सूत्र यहां प्रदर्शित हैं।

शनिवार, 31 अगस्त 2013

राजाराम मील व 2 विधायकों पर मुकद्दमा-अदालत के आदेश


डीडवाना विधायक रूपराम डूडी व सूरजगढ़ विधायक श्रवणकुमार के नाम

नेछवा थाने में दर्ज मुकद्दमें में पुलिस अधिकारियों के नाम

खबर- करणीदानसिंह राजपूत


यह मुकद्दमा नेछवा थाने में अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ है,जिसमें आरोप लगाया गया है कि मनीष आर्य की हत्या के भगोड़े आरोपी सीताराम को पकड़े जाने के बाद नेछवा थाने में से दबाव डाल कर छुड़वा दिया गया। अदालत में मनीष आर्य के पिता शुभकरण ने इस्तगासा पेश किया था जिस पर अदालत ने मुकद्दमा दर्ज कर अनुसंधान करने के आदेश दिए हैं। नेछवा थाने में यह प्रकरण दर्ज होने के बाद सीआईडी सीबी को जांच सौंप दी गई है।

घटनाक्रम के अनुसार 2 वर्ष पूर्व 17 अप्रेल 2010 को सुजानगढ़ में मनीष आर्य की हत्या हुई जिसमें कई लोगों पर मामला दर्ज हुआ था। एक आरोपी सीताराम निवासी गांधी बस्ती सुजानगढ़ भी था जिसे अदालत ने 18 मई 2010 को भगौड़ा घोषित कर स्थाई वारंट जारी कर दिया था।

नेछवा थाने के प्रभारी महावीरसिंह ने सीताराम को नाकाबंदी करके 14 अगस्त 2010 को पकड़ लिया। थानाधिकारी ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी।  इसके बाद दबाव डाल कर सीताराम को छुड़वा दिया गया।

अदालत के आदेश पर पुलिस थाना नेछवा में जिन लोगों के विरूद्ध मुकद्दमा दर्ज हुआ है उनमें राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील और डीडवाना विधायक रूपराम डूडी व सूरजगढ़ विधायक श्रवणकुमार के नाम भी आरोपियों में हैं।

इनके अलावा उस समय के पुलिस अधिकारियों

पुलिस महानिरीक्षक मोहन लाल लाठर जयपुर रेंज,

एस.पी. एस.एन.खीची चुरू

एएसपी अनिल क्याल

एस.पी. नितेश आर्य सुजानगढ़,

एएसपी पृथ्वीराज मीणा सीआईड सीबी जयपुर

थाना प्रभारी राजेश बिश्रोई सुजानगढ़

के नाम हैं।

मुकद्दमें में विधायकों के नाम होने से प्रक्रियानुसार यह जांच सीआइडी सीबी को सौंपी गई है।


शनिवार, 13 जुलाई 2013

पूर्व विधायक हरचंदसिंह हीरो:विधायक गंगाजल मील राज में भ्रष्टाचार


नगरपालिका को करोड़ों रूपयों के भूखंडों की नीलामी रोकनी पड़ी:

पूर्व विधायक का आरोप था कि जमीनें बेच बेच कर धन का कर रहे हैं दुरूपयोग:

अधिषाषी अधिकारी पृथ्वीराज मील को सूरतगढ़ से स्थानान्तरित कर दिया गया:

पालिकाध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार की कार्यवाही शुरू हो गई।

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-

सूरतगढ़, पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग के साथ आमरण अनशन का नोटिस दिया था,जिस पर सरकार ने सख्त कार्यवाही शुरू की। अत्यंत गंभीर आरोप था कि पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल और अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ पालिका की करोड़ों रूपयों की जमीने बेच कर प्राप्त धन का दुरूपयोग करने में लगे हैं। इसके कई तथ्य भी दिए गए। नगरपालिका का 115 करोड़ रूपयों का बीकानेर नगर विकास न्यास से भी अधिक का बजट केवल सात आठ मिनट में पारित कर दिए जाने का भी उल्लेख था। सडक़ पर सडक़ बनाने आदि के आरोप भी थे। बैनरों पर प्रचार पर अनापशनाप रकम खर्च किए जाने का आरोप भी था।

सचिवालय के निर्देश पर कार्यवाही शुरू हुई और अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ को यहां से स्थानान्तरित कर दिया गया।

इसके साथ ही बेशकीमती जमीनों की नीलामी को रोका गया। अब नीलामी करने से पहले राज्य सरकार की स्वीकृति लेनी होगी।

नगरपालिका ने 11,12 और 15 जुलाई को की जाने वाली नीलामी रोकी। इसमें बीएसएनएल के पीछे राजीव गांधी मार्केट,सैनी गार्डन के पश्चिम में राजीव गांधी आवासीय योजना,सदर थाने के पूर्वी दिशा में भूखंडों की नीलामी रोकी गई। नगरपालिका में आने जाने वाले ठेकेदारों को तो बहुत पहले ही राज्य सरकार का आदेश आते ही मालूम पड़ गया था। आम लोगों के लिए नगरपालिका ने राजस्थान पत्रिका में एक छोटा सा विज्ञापन छपवाया जो 11 जुलाई 2013 के अंक में छपा।

सचिवालय की ओर से सिद्धु की शिकायत कार्यवाही के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भिजवा दी गई है,जिसमें प्राथमिक जांच के बाद मुकद्दमें भी होंगे।

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