रविवार, 7 सितंबर 2025
शनिवार, 6 सितंबर 2025
कुंडिया सारस्वत धर्मशाला.नया नोटिस. दुकानें हटाओ.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 6 सितंबर 2025.
कुंडिया सारस्वत समाज की धर्मशाला में नियम व स्वीकृत नक्शे के विरुद्ध दुकानें निर्माण को लेकर नगर पालिका अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा ने 4 सितंबर 2025 को एक अंतिम नोटिस दिया है। अंतिम नोटिस काफी बड़ा है जिसमें तीन दिन में व्यावसायिक निर्माण हटाने का लिखा गया था। इस नोटिस के बावजूद यदि निर्माण व्यावसायिक के बजाय धर्मशाला कमरों के रूप में नहीं किया गया तो भूखंड को सीज कर दिये जाने के चांस अधिक हो गए हैं।
विदित रहे की धर्मशाला के लिए लिए गए भूखंड में दुकानों के निर्माण को लेकर सारस्वत समाज में दो गुट बन गए हैं और आपसी लड़ाई झगड़ा मुकदमे बन गए हैं। इस स्थिति में शांति बनाकर कोई बीच का रास्ता निकालना संभव नहीं लग रहा है। नगर पालिका प्रशासन एक ही कार्वाई करेगा जिसके तहत भूखंड सीज हो सकता है।
अभी भी इस भूखंड को बचाने के लिए अध्यक्ष लक्ष्मण शर्मा व्यावसायिक निर्माण हटाकर कमरे बनाने की कार्रवाई कर सकते हैं।
विदित रहे के इस भूखंड पर पहले धर्मशाला के कमरों का ही निर्माण हुआ था। भीतरी तरफ कमरों के गेट लगे हुए थे लेकिन बाद में उन भीतरी दरवाजों को बंद कर दिया गया और सड़क की तरफ गेट बनाकर शटर लगा दिए गए, और दुकानें संचालित की जाने लगी। एक गुट पिछले करीब 15 साल से भी ज्यादा समय से दुकान बनाने का विरोध कर रहा है। अब इसमें दुकान रहने दी जाती है कमरे बनाए जाते हैं या फिर भूखंड सीज होता है यह पूर्व में कुछ भी कहा नहीं जा सकता। अध्यक्ष के ऊपर अब पूरा दायित्व आ गया है कि वह भूखंड को बचाए और इसके लिए धर्मशाला के कमरों का रूप ही दिया जाएगा तभी यह भूखंड बचाया जा सकता है। दोनों पक्ष एक दूसरे के सामने डटे हुए हैं।
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राजनैतिक दलों में पद:माया और काया का अर्पण.
* करणीदानसिंह राजपूत *
राजनैतिक दलों में बिना कुछ काम किए पद मिल जाए तब कोई भी काम क्यो करेगा? यह खतरनाक परिपाटी चलने लगी है तब से कार्याकर्ता काम नहीं चापलूसी करने लगे हैं। बड़े नेता को धन की रिश्वत और अपना सर्वस्व अर्पण भी कर देना मामूली समझा जाने लगा है। माया नहीं तो काया और माया संग काया तो फिर क्या कहना।
राजनैतिक पदों की बढ़ती लालसा ने इतनी गिरावट पैदा कर दी है कि पार्टियों का संविधान नहीं चलता। माया और काया ने दलों का संविधान आलमारियों में बंद कर रखवा दिया। राजनैतिक पद घोषित होने में विलंब होता है उतना ही माया काया का खेल बढता जाता है और बार बार होता है। यहां तक कि बढे सो पाए। माया ही नहीं काया अर्पण और भोगने के आरोप बड़े बड़े पदों पर बड़े बड़े नेताओं पर खुलासे होते हैं। अर्पण करने वालों के मुंह से खुलासे होने पर भी न खंडन होता है न झूठा बताया जाता है। नेता नहीं बोलते न पार्टियों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण आता है। माया और काया अर्पण करने और भोगने को एक सामान्य सी बात मान लिया गया है। अब राजनीति में इसे चरित्र पतन नहीं माना जाता बल्कि उत्थान के रूप में गरिमा के रूप में प्रचारित करने में भी शर्म वाली बात नहीं रही। जब कोई बिना काम के राजनैतिक नियुक्ति पाता है तो समझा जा सकता है कि यह चापलूसी से,माया और काया से लिया दिया गया है।
6 सितंबर 2025.
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकारिता 61 वर्ष.
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
94143 81356.
शुक्रवार, 5 सितंबर 2025
सूरतगढ़ कुंडिया सारस्वत समाज समझदारी से धर्मशाला भूखंड बचाए.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ के कुंडिया सारस्वत समाज में समझदारी से विचार करते हुए भविष्य की सोच रखते हुए अपनी धर्मशाला बनानी चाहिए। पिछले करीब 15 -20 वर्षों से चलता हुआ विवाद इतना अधिक बढ गया है कि दो गुटों में बंटा समाज एक नहीं हो रहा। समाज की धर्मशाला के लिए जब भूखंड रियायती दर से आवंटित करवाया गया था तब सरकार की एक शर्त भी थी कि उस पर कोई व्यावसायिक कार्य नहीं होगा। यह नियम है जिस पर एक गुट कायम है और वह व्यावसायिक निर्माण का वर्षों से विरोध कर रहा है। नगरपालिका ने अंतिम नोटिस भी दे दिया है कि व्यावसायिक निर्माण नहीं हटाया तो भूखंड सीज कर लिया जाएगा। भूखंड पूरा सीज होता है,कभी भी आधा दुकानों के निर्माण वाला सीज नहीं होता। यह भूखंड इस समय बहुत कीमती है जो सीज होने पर नगरपालिका की संपत्ति हो जाएगा। नगरपालिका का ताला एक बार लग जाने के बाद वापस लेना बहुत कठिन होगा। यदि वापस लेने के लिए कार्यवाही होगी तब यह लिख कर ही देना होगा कि व्यावसायिक निर्माण हटा लेंगे। अब लिख कर देने में व्यावसायिक निर्माण हटाने में जो आनाकानी हो रही है वही सब करना होगा। अभी भूखंड सीज नहीं है और शनिवार रविवार दो दिन बाकी है जिसमें समझदारी से उचित निर्णय लिया जाना अच्छा होगा। प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं है न कोई बीच का रास्ता है, वह नोटिस के विपरीत कोई नया निर्णय नहीं कर सकता। जो लोग दुकानें बनाना चाहते हैं वे 15-20 सालों में विरोध करने वालों को सहमत नहीं कर पाए इसलिए गलती इनकी भी है। अभी तो कुछ लोगों द्वारा यह कहा जा रहा है कि विरोध करने वाले समाज की संपत्ति छिनवाना चाहते हैं और भविष्य में वे ही दोषी कहलाएंगे। लेकिन बाद में यह भी तो कहा जा सकता है कि विरोध करने वाले धर्मशाला निर्माण का विरोध नहीं कर रहे थे। वे दुकानों का विरोध कर रहे थे। दुकानों के निर्माण पर अड़े रहकर यह धर्मशाला नहीं बनाई जा सकती। सरकारी नियम ही मान्य होता है इसलिए ये दो दिन बड़े कीमती हैं।
नगरपालिका प्रशासन जिसमें प्रशासक पद पर उपखंड अधिकारी भरत जय प्रकाश मीणा है और अधिशासी अधिकारी पद पर पूजा शर्मा है जो नियम के विपरीत नहीं चल सकते और नोटिस अवधि बीत चुकी होने पर केवल नियमानुसार सीज की कार्वाई ही करेंगे। यदि भूखंड सीज हो गया तो लोग यही चर्चा करेंगे कि रूपया तो बहुत था लेकिन सही निर्णय लेने की समझदारी नहीं की। समाज को बड़ा मानते हैं तो दुकानों के निर्माण में दिये रूपये का समाज हित में त्याग समझें और धर्मशाला बनाने को ही सर्वोत्तम माने। जो ट्रस्ट है या समिति है उस पर बड़ी जिम्मेदारी है,उसे समाज के इस भूखंड को सीज होने से बचाने का उचित निर्णय लेकर सही दायित्व निभाना चाहिए।०0०
5 सितंबर 2025.
करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार से अधि स्वीकृत लाईफटाइम)
सूरतगढ़. 94143 81356.
कुछ शिक्षक गुरू संत किधर जा रहे हैं?
* करणीदानसिंह राजपूत *
अब ज्ञान लेकर ही पैदा होते हैं और आवश्यकता से अधिक ज्ञान किशोर एवं युवा अवस्था में सोशल मीडिया मोबाइल से ले लेते हैं। प्राचीन काल में गुरूकुल व्यवस्था में एक ही गुरू प्रारंभ से अंत तक होता था। उनकी पूजा होती थी।
अब तो शिक्षा पूर्ण होने तक अनेक शिक्षक होते हैं। किसको गुरू माने?
फिर अपराधियों के भी गुरू जो अपराधों के लिए ट्रेंड करते हैं।
लेकिन आज जिनकी चर्चा कर सकते हैं वे होते हैं राजनीति के गुरू। राजनीति से बड़ा कोई क्षेत्र नहीं क्योंकि राजनीति में सबकुछ मिल जाता है। सत्ताधारियों के राजनेताओं के गुरू अधिक ज्ञान ध्यान के कारण व्यभिचार अपराधों में जीवन भर के लिए जेलों में सजा भोग रहे हैं। चाहे गुजरात के संत गुरू हों चाहे पंजाब हरियाणा के संत गरू हों। राजनेताओं के कारण वे जेलों में भी गुरू हैं जहां कैदियों वाली ड्रेस नहीं, वे शानदार वस्त्र धारण करते हैं तथा पैरोल के नाम पर जब चाहें जेलों से बाहर भी आते रहते हैं। पैरोल कितने समय अवधि का हो वह गुरू जी ही बताते हैं। अब यहां महत्वपूर्ण प्रश्न यह पैदा होता है कि जो जेलों में बंद हैं उन गुरूओं से कैसा ज्ञान मिला होगा,उन्होंने कैसा ज्ञान दिया होगा? अब उस ज्ञान के दृश्टान्त भी सामने आ ही रहे हैं। ऊंचे पद पर बैठे राजनेताओं का कुछ भी बिगड़ता नहीं। वे चाहे जितनी रंगरेलियां मनाएं?
अनेक राजनेताओं का व्यभिचारी रूप खुल गया उनका कुछ भी नहीं बिगड़ा तब हालात ऐसे हो गए हैं कि अनेक शिक्षक शिक्षिकाओं के स्कूलों के अंदर के विडिओ वायरल हो चुके हैं। छात्राओं के साथ अभद्रता के मामले भी सामने आते रहते हैं। शिक्षक गुरू संत किधर जा रहे हैं? यह कौन विचार करे? इसका उत्तर मिलेगा कि विभिन्न समाज विचार करे लेकिन ये जो विभिन्न समाज हैं, ये किधर जा रहे हैं? समाज के बड़े लोग भी भटक रहे हैं।०0०
शिक्षक दिवस. 5 सितंबर 2025.
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार से अधि स्वीकृति लाईफटाइम)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
बुधवार, 3 सितंबर 2025
घग्घर बहाव निरीक्षण पर जिला कलक्टर डा.मंजू व अधिकारी टीम.
* करणीदानसिंह राजपूत *
श्रीगंगानगर, 3 सितम्बर 2025.
-उपखण्ड स्तरीय अधिकारियों को दिये समुचित व्यवस्थाएं करने के निर्देश
जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बुधवार को जिले के सूरतगढ़ और श्रीबिजयनगर उपखण्ड में घग्घर बहाव क्षेत्रों का अवलोकन किया। इसके पश्चात उन्होंने आमजन और किसानों से भी मुलाकात करते हुए उपखंड स्तरीय अधिकारियों को घग्घर बहाव क्षेत्र में पानी की मात्रा बढ़ने अथवा बाढ़ के मद्देनजर समुचित व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिये।
बुधवार शाम को सूरतगढ़ पहुंचकर जिला कलक्टर ने मानकसर चौराहा, एयरफोर्स/ फार्म सड़क पुलिया, पुरानी बारेकां और देर रात को श्रीबिजयनगर में चेतक प्वाइंट स्थित घग्घर बहाव क्षेत्र का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बहाव क्षेत्र में पानी की आवक तथा इसमें और पानी आने के मद्देनजर अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि घग्घर बहाव क्षेत्र में पानी की मात्रा बढ़ने अथवा बाढ़ के मद्देनजर समुचित व्यवस्थाएं की जाएं। संभावित आपदा से निपटने के लिये जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का भी सहयोग लिया जाये।
अधिकारियों ने बताया कि घग्घर बहाव क्षेत्र में पानी की आवक बढ़ने के मद्देनजर नियमित निगरानी की जा रही है। सिविल डिफेंस की टीमें लगाई गई हैं। साथ ही एसडीआरएफ की टीम को भी मुस्तैद रहने के लिये निर्देशित किया गया है। घग्घर बहाव क्षेत्र एवं सेम नाला के तटबंधों की निगरानी हेतु अधिकारी-कर्मचारी नियुक्त किये गये हैं।
जिला कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि घग्घर में पानी की आवक बढ़ने के मद्देनजर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए और आवक की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित करने, घग्घर के पास वाले क्षेत्रों में तटबंधों को मजबूत करने, चेतावनी संकेतक लगाने, कट्टों में मिट्टी भरने, ट्रेक्टर-ट्राली, जेसीबी सहित अन्य व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर एडीएम प्रशासन श्री सुभाष कुमार, सूरतगढ़ एडीएम श्री दीनानाथ बब्बल, एसडीएम सूरतगढ़ श्री भरत जयप्रकाश मीणा, तहसीलदार विनोद कड़वासरा, विकास अधिकारी मेजर अली,
जल संसाधन विभाग के एसई श्री धीरज चावला, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री शरणपाल सिंह मान सहित अन्य मौजूद रहे। ०0०
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नदी,नालों के पास जाना खतरनाक' प्रशासन की अपील.
* करणीदानसिंह राजपूत *
-घग्घर नदी में अत्यधिक पानी आने की संभावना के मद्देनजर आमजन से अपील
श्रीगंगानगर, 3 सितम्बर 2025.
जिला प्रशासन की ओर से अत्यधिक बरसात के कारण घग्घर नाली क्षेत्र में हरियाणा के रास्ते गुल्लाचिका से खनोरी-चांदपुर-ओटू से होते हुए राजस्थान में बहुत अधिक मात्रा में पानी आने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए नाली बहाव क्षेत्र या इसके आस-पास के इलाकों या ढाणियों में निवास करने वाले किसानों एवं आमजन के लिए अपील जारी की गई है।
जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने जारी अपील में बताया है कि आम नागरिक नदी नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाए। तेज बहाव में वाहन न उतारे तथा आपात स्थिति में टॉर्च, रेन कोट व छाते का प्रयोग करें। पानी निकलने वाले सड़क मार्गो की तरफ से नहीं गुजरे तथा पानी निकल जाने के बाद ही मार्ग से होकर जाए।
आपदा की स्थिती में खाद्य सामग्री, जरूरी दवाईयों एवं नगदी की व्यवस्था अपने पास रखें। तेज बहाव के समय बिजली के तारों के टूटने एवं खंभों के गिरने की संभावना है। अतः सावधानी रखें। बिजली के खम्भों के नीचे व पास दुपहिया व चौपहिया वाहन खड़ा न करें। तेज बहाव दौरान पेड़ों के नीचे व कच्ची दीवार के पास खड़े न हो। पशुओं को खुले बाड़े में रखे तथा खूंटे से नहीं बांधे।
बड़े होर्डिंग्स लगे स्थानों से दूर रहें तथा विद्युत खम्भों, तारों व ट्रांसफार्मर आदि से पर्याप्त दूरी बनाये रखें एवं नजदीकी सुरक्षित स्थान पर शरण लें। नाली बहाव क्षेत्र के आस पास पशुओं को बचाने हेतु सुरक्षित स्थान पर बांधे। पशु चराने वाले चरवाहे नाली क्षेत्र के आसपास पशुओं को चराने न लेकर जायें।
अत्यधिक पानी के बहाव के कारण निचले स्थानों पर पानी भरने की संभावना रहती है, अतः वहां के आम नागरिक सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी रखें। पानी से भरे हुए गड्डो से दूर रहें। किसी भी आपात स्थिति (तटबंधों के कटाव की स्थिति) में निम्नलिखित नियंत्रण कक्ष पर तत्काल सूचना देवें। जिले में सुरक्षा हेतु नागरिक सुरक्षा स्वयं सेवक टीम को तैनात किया गया है, जो 24 घंटे कार्य करेगी। जिले में सुरक्षा हेतु नागरिक सुरक्षा स्वयं सेवक टीम को तैनात किया गया है, जो 24 घंटे कार्य करेगी। जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष 0154-2440988 संचालित है। इसके अलावा 0154-2445020 और 01507-223165 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।०0०
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