सोमवार, 18 मार्च 2013

शराबबंदी मांग:सुभाष चौक धरना सभा और मोमबत्ती जूलूस

   करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 18 मार्च 2013.राजस्थान में संपूर्ण शराब बंदी कानून बनाने और लागू करने की मांग को लेकर सूरतगढ़ में अठारह मार्च की शाम को मंच की महिला मोर्चे की ओर से धरना देने सभा करने के साथ नारे लगाते हुए बाजारों में मोमबत्ती जूलूस निकाला गया। राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी मंच की महिला मोर्चे की अध्यक्ष श्रीमती राजेश सिडाना के नेतृत्व में यह आयोजन हुआ जिसमें विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया। धरना स्थल पर हुई सभा में श्रीमती राजेश सिडाना,श्रीमती रूपा कंवर,डा.टी.एल.अरोड़ा, करणीदानसिंह राजपूत,त्रिलोकचंद अग्रवाल, विष्णु शर्मा ने विचार रखे।

इस कार्यक्रम में महिला संगठनों से जुड़ी महिलाओं सुमनकौर,कांताअरोड़ा,लता शर्मा, करूणा रत्न, ऊषा तिवारी,कांता तनेजा,विमला घोड़ेला, सावित्री शर्मा,शशि मूंधड़ा,संतोष स्वामी,सरस्वती,अरूणासिंह व सावित्री बाजीगर ने भाग लिया।
    शराब बंदी को लेकर जयपुर में मंच के संरक्षक पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा भारती के आमरण अनशन का ब्यौरा दिया गया। 








रविवार, 17 मार्च 2013

दूसरी दुनियां के मानव एलीयन्स रात को हमारी बस्तियों में यों आएंगे


 फोटो कल्पना-करणीदानसिंह राजपूत

दूसरी दुनिया दूसरे ग्रहों के मानव एलियन्स के धरती पर आने और धरती के वर्तमान मानव के अतिविकसित रूप अतिमानव कि मिली जुली कल्पना के तहत यह फोटो 16 मार्च 2013 की रात्रि में लिए गए। 

अतिमानव नामक एक महत्वपूर्ण पुस्तक है,जो आध्यात्म दर्शन विज्ञान और धर्म अनुभव पर रविदत्त मोहता की ओर लिखी गई है। असल में रविदत्त मोहता के स्वर उच्चारित हुए और उन्हें लिपिबद्ध किया गया। प्रसिद्ध दार्शनिक डा.छगन मोहता के पौत्र हैं रविदत्त मोहता। इस पुस्तक अतिमानव के बारे में जिज्ञासा है तो उसके बारे में अवश्य जानिए। हमारी इसी साईट पर पुस्तक चर्चा स्तंभ में।


बुधवार, 16 जनवरी 2013

महिलाओं से दुराचार: पूर्व विधायक हरचंदसिंह का अशोक गहलोत को कड़वा पत्र -खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत


दिल्ली गैंगरेप पर दुख व्यक्त मगर सूरतगढ़ की पिडि़ता 3 बार मिलने पर भी सबूत तक नष्ट:

अपनी सत्ता बचाने को सूरतगढ़ के विधायक को खुश रखने को जाट अधिकारी लगाने का आरोप

आपके जोधपुर क्षेत्र में बड़े लोग मंत्री विधायक मुंह काला करते रहे। आपके स्तर पर कार्यवाही नहीं हुई। मीडिया में मामला आने के बाद में कार्यवाही हुई।

सूरतगढ़, 16जनवरी 2013. पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने राजस्थान में महिलाओं के साथ हो रहे दुराचार पर मुख्यमंत्री को रोष भरा कड़ा पत्र लिखा है। सिद्धु ने लिखा है कि दिल्ली की गैंग रेप पिडि़ता पर तो संवेदना अलग है और सूरतगढ़ की दुराचार की पिडि़ता से कोई संवेदना तक नहीं जो तीन बार खुद मिल कर आई फिर भी जांच सही नहीं की गई तथा पुलिस ने साक्ष्य नष्ट कर एफआर लगादी। सिद्धु ने आपे दो जनवरी को लिखे पत्र में यह भी लिखा कि सत्ता बचाने को विधायक को खुश रखने के लिए सूरतगढ़ में जाट अधिकारियों को लगा कर जातिवाद को बढ़ावा दिया गया।

    सिद्धु का पत्र गहरी भावनाओं से भरा हुआ रोष पत्र है।

आपके द्वारा दिल्ली गैंग रेप पर पीडि़ता के प्रति व्यक्त संवेदना टीवी पर देखी। वह देख कर यह पत्र लिखा जा रहा है,जो तकलीफ देह महसूस होगा मगर सत्य कहते और लिखते हुए भगवान को सामने रख कर लिखा जा रहा है कि आपकी संवेदना और व्यावहारिक जीवन में अंतर साफ दिखाई देता है।


    सूरतगढ़ की अनुसूचित जाति की महिला से दुराचार का मामला जिसमें नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,ओम साबनिया और सिपाही रोहताश आरोपी हैं का प्रकरण पुलिस ने दर्ज तक नहीं किया था। अदालत के आदेश पर मामला दर्ज हुआ,मगर उसकी पुलिस जांच में सबूत लेकर नष्ट कर दिए गए। पुलिस ने मोबाइल सिम ली, रोहिताश से शादी किए जाने के फोटो नेगेटिव आदि लिए और उनको फर्द बनाकर जांच में शामिल नहीं किया। इसके अलावा तीनों आरोपियोंके साथ राजीनामे की वार्ता की सीडी में रिकॉर्ड आवाज की जांच तक नहीं करवाई। पुलिस ने एफआर लगा कर अदालत में पेश किया जो अदालत ने नामंजूर कर दुबारा जांच करने का आदेश दिया। इसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपी बनवारीलाल मेघवाल को विधायक मील का संरक्षण है। पीडि़ता ने साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में अनुसंधान अधिकारियों सीआई रिछपाल चाारण व अपर पुलिस अधीक्षक यादराम फासल श्रीगंगानगर के विरूद्ध प्रकरण दर्ज करने का आवेदन दिया मगर मामला दर्ज नहीं किया गया। पीडि़ता 3 बार आपसे जयपुर में मिली मगर आपकी संवेदनशीलता सोई हुई है।

    आप चिंतन कर नतीजा निकालें। सीकर में घटना घटित हुई। आपके जोधपुर क्षेत्र में बड़े लोग मंत्री विधायक मुंह काला करते रहे। आपके स्तर पर कार्यवाही नहीं हुई। मीडिया में मामला आने के बाद में कार्यवाही हुई। पुलिस प्रशासन स्वच्छंद हो गया है। लूट का आलम है। प्रशासन अपनी मनमर्जी कर रहा है। आपकी सरकार का बोझ थामे विधायक मनमर्जी से प्रशासन चलवा रहे हैं। उनके हाथ खीच लेने से सरकार धड़ाम से गिर जाएगी।

    महात्मा जी का कथन है कि साधन और साध्य दोनों ही पवित्र होने चाहिए,अन्यथा उद्देश्य निष्फल रहता है। महात्मा जी का साहित्य पढ़ा नहीं है तो अब पढ़ लो।

    अशोकजी, हकीकत कि जातिवाद को बढ़ावा आप खुद दे रहे हैं। आपने विधायक को खुश करने के लिए उसी कि जाति के ही अधिकारियों को पद स्थापित किया है। सूरतगढ़ में एडीएम जाट,एसडीएम जाट,डीएसपी जाट,बीडीओ जाट,दो थानेदार जाट,एक्सइएन जाट व डाक्टर जाट। क्या दूसरी जातियों के अधिकारियों पर से विश्वास खत्म हो गया है?

संगरिया, हनुमानगढ़,भादरा,पीलीबंगा,रायसिंहनगर आदि कहीं भी निगाह डालें। सभी स्थानों पर हालत समान है। थाने भ्रष्टाार के अड्डे बने हुए हैं।

    सिद्धु ने एक महिला द्वारा अपने पति की मौत का झूठा प्रमाणपत्र देकर विधवा पेंशन उठाने का प्रकरण जो थाना सूरतगढ़ में दर्ज हुआ का बयौरा दिया है कि इसमें सीआई रिछपालसिंह ारण और उपर पुलिस अधीक्षक यादराम फासल ने दस्तावेजी सबूत होते हुए भी एफआर लगा दी। अब पुन: अनुसंधान में जुर्म साबित हो गया।

    सिद्धु ने लिखा है कि दूरभाष की काल डिटेल पर राजेन्द्रसिंह राठौड़ को आरोपी बना कर जेल भेज दिया। इसी बिनाह पर करनीसिंह रायसरिया को जाति विशेष के आईजी के दबाव से जेल में बंद कर रखा है,जबकि कॉल डिटेल कोई अपराध का प्रमाण नहीं होता,केवल संपर्क करने का ही प्रमाण होता है।

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सोमवार, 14 जनवरी 2013

पुस्तक चर्चा: अतिमानव -चर्चाकार: करणीदानसिंह राजपूत






पुस्तक चर्चा:

अतिमानव


-चर्चाकार: करणीदानसिंह राजपूत

अति मानव के लिए काल की गणना कुछ भी नहीं होगी। वह जब चाहेगा अपनी सोच से ही एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर बिना किसी साधन के पहुंच सकेगा। मानव की उत्पति स्त्री पुरूष के संसर्ग से होती है,मगर अति मानव अपने विचार से ही दूसरे को जन्म दे देगा। अति मानव का जन्म उस लोक में हो चुका है जो लोगों से गुप्त है। एक बार में नहीं कितनी बार इसे ध्यान से पढऩे से ही आभास होगा कि अतिमानव बस आने ही वाला है।

तीर्थों के पवित्र सरोवरों में श्रद्धालु कितनी ही बार स्नान ध्यान करते हुए पानी में डुबकी लगाते हैं फिर भी मकर संक्रांति के पावन पर्व पर वही डुबकी और लगाने को तत्पर रहते हैं। कुछ पाने को। बस। यही हालत मेरी हुई है। अतिमानव पुस्तक कितनी ही बार बड़ी उत्सुकता से पढऩे के बावजूद आज मकर संक्रांति पर मैं इसमें एक बार फिर डुबकी लगाने के बाद इसकी चर्चा की शुरूआत कर रहा हूं। यह चर्चा भी इसलिए कि इसमें आध्यात्म,विज्ञान,धर्म के साथ मानवीयता को बहुत गहरे मनन चिंतन अनुभव से दार्शनिकता के स्वरूप में हजारों वर्षों के काल को समेटा हुआ है,जिन्हें हम सतयुग,त्रेता,द्वापर और कलयुग कहते हैं।प्रलय में पृथ्वी नष्ट हो जाएगी तब इस मानव जाति का क्या होगा? इतनी गर्म होती हुई जल जाएगी। तब? क्योंकि यह मानव हर युग में अपने स्वभाव से किसी की बात मानता नहीं। उस असीम शक्ति की भी नहीं मानता जिसने जन्म दिया। बस। यही गूढ़ रहस्य है इस पुस्तक में क्या होगा मानव का? पुस्तक एक जिज्ञासा उत्पन्न करती है कि मानव का विकसित स्वरूप अति मानव बन कर तैयार हो चुका है और वह स्वरूप खत्म नहीं होगा और वह अतिमानव अपने भाव से स्वभाव से मानव को अति मानव में बदल देगा। अति मानव के लिए काल की गणना कुछ भी नहीं होगी। वह जब चाहेगा अपनी सोच से ही एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर बिना किसी साधन के पहुंच सकेगा। मानव की उत्पति स्त्री पुरूष के संसर्ग से होती है,मगर अति मानव अपने विचार से ही दूसरे को जन्म दे देगा। अति मानव का जन्म उस लोक में हो चुका है जो लोगों से गुप्त है।

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण को यह अहसास हो गया कि मानव समझाने से भी समझता नहीं है,सो आगे ऐसी प्रजाति होनी चाहिए जो केवल इशारे से ही समझ जाए। श्री कृष्ण का यह अनुभव आगे महर्षि अरविन्द की अंत:चेतना में उतरा और उन्होंने बहुत कुछ जानकर उसको नाम दिया अति मानव। अति मानव कैसा होगा? कैसा दिखाई देगा? काम कैसे करेगा?

अतिमानव पुस्तक में जो कुछ है वह लिखा नहीं गया। प्रख्यात दार्शनिक डा.छगन मोहता के पौत्र रविदत्त मोहता के मुंह से जो उच्चारित हुआ वह पुस्तक आकार में दर्शन का आभास देता आ गया। रविदत्त आचार्य अवधेशानन्द जी के शिष्य हैं,इसलिए उनके मंथन चिंतन में आध्यात्मिक बल प्रदर्शित होता है।
अति मानव पुस्तक में जो हे उसे कथा नहीं कह सकते। उसे कविता भी नहीं कह सकते। यह लेख भी नहीं है। ये सारे चिंतन हैं जो सरल शब्दों में बहुत गांभीर्य लिए हुए हैं। इन्हें जल्दी से समझ पाना आसान नहीं कहा जा सकता। मैं इस पुस्तक की समीक्षा करने के बजाय पुस्तक चर्चा करना चाहता हूं ,क्योंकि जो है उस पर आगे सालों तक चर्चा होगी और होती रहेगी। यह मेरा प्रबल विश्वास है।

मैंने आधी आधी रात के बाद तक इसको बार बार पढ़ा और पढ़ता गया। जो अहसास हुआ वह अलौकिक सा है।

मेरे आसपास धीमी धीमी हवा में एक महक सी उठी जो पहले कभी जानी हुई सी नहीं लगी। उसी के साथ ही एक सुरीली सी आवाज वातावरण में आई हुई नहीं लगी, लगा आवाज उतरी है ...तुम.. अति मानव की समीक्षा लिख पाओगे..मेरा मन बोल उठा तत्काल हां। उसी की तैयार में ही तो पुस्तक पढ़ रहा था। लेकिन आवाज फिर उतरी...सच्च..। आसपास कोई नहीं था। मेरे मुंह से निकला तुम कौन हो? उतर मिला...अति मानव।

मैंने आसपास फिर देखा और बोला लेकिन दिखाई क्यों नहीं दे रहे?....अभी वह काल नहीं आया।...और निस्तब्धता। बस,यही सच्च है कि यह जो  आप पढ़ रहे हैं। आप पुस्तक की समीक्षा मानेंगे और में इसे पुस्तक चर्चा कहता हूं जो निरंतर आगे से आगे बढ़ती रहेगी... और तब तक अतिमानव के सामने आने का काल आ जाएगा।

इस पुस्तक में नाना प्रकार का विचार मंथन है। यह पुस्तक सन् 2011 इसवी में प्रकाशित हो चुकी थी। इसमें बहुत सी बातें जो आज हो रही है,उन पर चिंतन शामिल है।

.....भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर विष पैदा करने वाली समस्त बुराईयों को मारा,लेकिन शरीर मर गया और वे बुराईयां और अधिक विकृत रूप में विस्तृत रूप में सामने आ खड़ी हुई हैं। श्री कृष्ण अपनी बहन द्रौपदी को साड़ी पहनाने पहुंचे। उसी धरती पर घरों में और सरे राह बेटी के साथ बलात्कार होता है। क्यो? कुछ नहीं हुआ? महाभारत के युद्ध ने बलात्कारी को मार दिया लेकिन बलात्कार नहीं मार सका।

इस प्रकार के हालात के कारण ही वो अतिमानव  चेतना अंतरिक्ष से उतर आई है। उसका कार्य संपूर्ण ब्रह्मांड को ध्यान में रखते हुए होगा। उनके बारे में अभी आम जन नहीं जानते,मगर वे सब जानते हैं। उनका आना संक्रांति होगी।

अति मानव पुस्तक में विभिन्न प्रकार के कथन तथ्य भरे पड़े हैं,जिनको अलग अलग अध्याय में समझाया गया है।

शून्य अध्याय में बताया गया है अतिमानव का स्वभाव। विश्व चेतना अध्याय में आने वाले समय के खतरनाक संकेत हैं और साथ में ही अतिमानव के प्रगट होने की सूचना जैसी बातें। नित्य और निमित अवतार अध्याय में धरती की पुकार को माध्यम बनाते हुए धरती को अमृतलोक में बदल जाने के विचार हैं। युद्ध और बनवास अध्याय में काल के रूपान्तरण की व्याख्या है। एक ऐसी सत्ता का जो धरती पर प्रेम स्थापित करेगी।

प्रतिज्ञा और प्रतीक्षा अध्याय में बताया गया है कि जो ज्ञात है,उसी में सभी खोज करने में लगे हैं,जबकि खोज अज्ञात में की जानी चाहिए। सृजन समर्पण और समर्थन में महत्वपूर्ण तथ्य हे कि अंतरिक्ष में किसने करोड़ों करोड़ों ग्रहों को तारों को रोशन किया है? प्रणव प्रणाम परिणाम और प्रमाण में धार्मिक ग्रंथों को अकाल पुरूष की आत्म कथाएं बताया गया है।  चार युग अध्याय में बताया गया है कि चाहे कैसा भी विकट समय आ जाए, प्रभु का कार्य अवश्य ही करना चाहिए। चरण स्पर्श अध्याय में इसकी अपार महिमा और क्षमता बतलाई गई है।

    सुबह दोपहर शाम और रात, स्वाध्याय,गुरू अध्याय में आध्यात्मिकता का मनन है। राजनीति अध्याय में बताया गया है कि प्रजातंत्र के नाम पर एक परिवार की सत्ता को सारा देश भोग रहा है। प्राश्श्चात्य जगत की भोगतंत्र की बातें हैं। भारत के प्रजातंत्र पर गंभीर बात है कि.. बेटी बहु मां पत्नी कोई भी सुरक्षित नहीं है।

    ब्रह्म शब्द है, शब्द ब्रह्म नहीं,अंतरिक्ष में आध्यात्मिक बातें मनन करने को उत्सुकता पैदा करती हैं।

मैं अतिमानव पुस्तक की इस चर्चा को शुरू कर रहा हूं और अब आगे से आगे यह चर्चा स्वयं ही चलती जाएगी। अतिमानव में जो बातें हैं जो कथन हैं जो तथ्य हैं। ये सभी चर्चा को आगे से आगे बढ़ाने की उत्सुकता पैदा करने वाले हैं। मुझे ऐसा लग रहा है कि पुस्तक के जो भी संस्करण भविष्य में प्रकाशित होंगे उनमें और नई बातें होंगी। हां एक बार पुन: कहना चाहता हूं कि एक बार में नहीं कितनी बार इसे ध्यान से पढऩे से ही आभास होगा कि अतिमानव बस आने ही वाला है।

पुस्तक चर्चा- करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
विजयश्री करणी भवन,लाइनपार
सूर्यवंशी विद्यालय के पास,
सूरतगढ़, राजस्थान।
मो.91 94143 81356.

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रविदत्त मोहता

पुस्तक- अतिमानव
पुस्तकालय संस्करण
पृष्ठ 152. मूल्य 200 रूपए.

प्रकाशक, राजस्थानी साहित्य संस्थान,यूआईटी के पास,जोधपुर।
लेखक- रविदत्त मोहता,
वर्तमान कार्य क्षेत्र-
प्रसारण अधिकारी,आकाशवाणी केन्द्र,सूरतगढ़।

मो.91 94147 29739
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रविवार, 2 दिसंबर 2012

विधायक के खासमखास रणवीर सहारण को भी हुआ गलत आवंटन:खबर-करणीदानसिंह राजपूत

विधायक गंगाजल के नजदीकी रणवीर सहारण का आवेदन

रणवीर सहारण का हल्फनामा

बाबूसिंह खीची की शिकायत का महत्वपूर्ण भाग


समाजसेवी बाबूसिंह खीची का आरोप-दस्तावेज झूठे देकर सत्ताधरियों व प्रभावशालियों ने हड़पे भूखंड:
लोगों ने भूखंड लिए और 10 सालों की शर्त के बावजूद बेच दिए-खरीदार संकट में
अधिशाषी अधिकारियों भंवरलाल सोनी और राकेश अरोड़ा-मेंहदीरत्ता पर सरकारी सपत्ति कम मूल्य में लुटाने का आरोप:
आईडीएसएमटी योजना के भूखंड आवंटन का महाघोटाला:
सूरतगढ़,2 दिसम्बर 2012. सूरतगढ़ में आईडीएसएमटी योजना के तहत वर्तमान टैगोर कॉलेज के साथ की कॉलोनी में फर्जी दस्तावेजों पर भू खंउ आवंटित कराने वालों में अनेक लोगों ने अपने भूखंडों को आगे बेच कर लाखों रूपए का मुनाफा कमा लिया लेकिन उन भूखंडों के खरीदारों पर संकट घिर गया है। आवंटी 10 साल तक भूखंड को बेच नहीं सकता था। यह शर्त होते हुए भी उसने तो बेचा मगर खरीदार ने भारी रिस्क जोखिम खतरा लेकर भूखंड को खरीदा क्यों? सूरतगढ़ में अनेक प्रोपर्टी डीलर जो अब खुद को प्रोपर्टी एडवाइजर बताने लगे हैं,उन लोगों का भी खरीदार को अंधेरे में रखते हुए भूखंडों के बिकवाने में हाथ है। ये लोग किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करते और खरीदार को उलझा देते हैं। निरस्तीकरण की सूची में जो भूखंड आए हैं उनमें से जो बेच दिए गए हैं उनको नियमानुसार सरकार अपने कब्जे में लेगी। खरीदारों की लाखों रूपए की रकम डूब जाएगी। खरीदार धोखाधड़ी का मामला चाहे चलाते रहें।

बाबूसिंह खीची का आरोप है कि अनेक प्रभावशाली लोगों ने जो सत्ताधरियों के नजदीकी थे,ने झूठे हल्फनामें देकर भूखंड हड़प लिए।
आवेदकों ने अपनी आय कम बतलाई और मकान होते हुए भी तथ्य को छुपाया। आवेदकों के दस्तावेजों की सही जांच करने की ड्यूटी अधिशाषी अधिकारियों की थी। उन्होंने जांच नहीं की और सत्ताधरियों व प्रभावशाली अपात्र आवेदकों को भूखंड आवंटित कर दिए।

बाबूसिंह खीची ने आरोप लगाया है कि विधायक के अत्यन्त नजदीकी रणवीर सहारण ने जिन दस्तावेजों के सहारे भूखंड प्राप्त किया वे सभी लोगों को देखने चाहिए ताकि मालूम हो कि आवंटन में कितना फर्जीवाड़ा हुआ है। खीची ने आरोप लगाया है कि सेना परिवारों को इनमें से भूखंड मिलने थे,लेकिन इसका व्यापक प्रचार तक नहीं किया गया। प्रभावशाली लोगों को ही भूखंड आवंटित करने में सब नियम कानून ताक पर रख दिए गए। प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण उनके आवेदन नहीं आए। खीची ने कहा है कि इस घोटाले के सभी दोषियों को दंड दिलवाया जाएगा ताकि आगे कोई इस प्रकार की हेराफेरी नहीं कर सके।


शनिवार, 24 नवंबर 2012

सूरतगढ़:भूखंडों के आवंटन का महाघोटाला:जांचमें गलत पाए 46 आवंटन की सूची:खास रिपोर्ट-करणीदानसिंह राजपूत


सरकार ने भूखंड निरस्त करने का आदेश जारी किया:पहले आवंटियों को सुना जाएगा

तथ्य जो आए:प्रभावशाली लोगों ने अल्प आय के प्रमाणपत्र दिए:राजस्थान में मकान होते हुए भी झूठा हल्फनामा:
जिस आय के लिए जो साईज निर्धारित था उससे बड़ा प्लॉट आवंटित कर दिया गया
अधिशाषी अधिकारियों भंवरलाल सोनी और राकेश अरोड़ा-मेंहदीरत्ता पर सरकारी सपत्ति कम मूल्य में लुटाने का आरोप:
आईडीएसएमटी योजना में हुआ था यह महाघोटाला
सूरतगढ़,24 नवम्बर 2012. सूरतगढ़ में आईडीएसएमटी योजना के तहत वर्तमान टैगोर कॉलेज के साथ की कॉलोनी में भूखंड के लिए सन 2009 में आवेदन आमंत्रित किए गए। इनमें 4 हजार रूपए प्रतिमाह तक की आय और सरकारी कर्मचारियों की 5 हजार रूपए तक की मासिक आय वालों को ही आवेदन करना था। लेकिन अनेक प्रभावशाली लोगों ने जो सत्ताधरियों के नजदीकी थे,ने झूठे हल्फनामें देकर अधिक साईज के भूखंड पा्रप्त कर लिए। आवेदकों ने अपनी आय कम बतलाई और मकान होते हुए भी तथ्य को छुपाया। आवेदकों ने कुछ भी भरा हो मगर ड्यूटी तो अधिशाषी अधिकारियों की थी जिनको तथ्यों की जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने जांच नहीं की और अपात्र आवेदकों भूखंड आवंटित कर दिए। सत्ताधारी के नजदीकी आवेदकों की जांच की हिम्मत किसी भी अधिकारी ने नहीं की। दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य तो यह रहा है कि विधायक की सिफारिश पर जिसे लाया हुआ हो वो अधिकारी सरकार के नहीं विधायक और उसके खास का कहना मानता है। इस लापरवाही में दो अधिकारी आरोपों के लपेट में आ गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता बाबूसिंह खीची ने सूचना के अधिकार के तहत नगरपालिका से दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त की और 11 जून 2012 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उनकी जन सुनवाई में मिला तथा शिकायत पेश की। इस शिकायत पर स्वायत शासन विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने 14 जून को नगरपालिका सूरतगढ़ में जांच की उसमें 46 लोगों को अपात्र माना गया जिनको निर्धारित साईज से अधिक के भूखंड दे दिए गए। इसके अलावा भी जांच रिपोर्ट में अनेक तथ्य सामने आए।
जांच रिपोर्ट की संपूर्ण फोटो यहां दी जा रही है।




राजस्थान सरकार ने एक माह पूर्व 23 अक्टूबर 2012 निरस्तीकरण की कार्यवाही के लिए श्रीगंगानगर के जिला कलक्टर को आदेश दिया। इस आदेश में लिखा था कि कुछ भूखंडों का कब्जा दिया जा चुका है तथा उनकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है। नियमानुसार निरस्तीकरण करने की कार्यवाही शुरू की जाए और इससे पहले उनकी सुनवाई करली जाए। इस आदेश को एक माह बीत चुका है। अब यह मामला अखबारों में छप चुका है। अपात्र लोगों की सूची में उन लोगों के ही नाम हैं जिनको निर्धारित साईज से अधिक साईज के भूखंड दे दिए गए।
संपूर्ण आवंटित भूखंड मालिकों की जांच एक बार और की जानी चाहिए और यह मालूम किया जाना चाहिए उनमें झूठी आय नहीं दिखाई है और उनके पास राजस्थान में वास्तव में मकान नहीं है।
लॉटरी में डाली गई संपूर्ण सूची भी यहां दी जा रही है।




सामाजिक कार्यकर्ता बाबूसिंह खीची
सामाजिक कार्यकर्ता बाबूसिंह खीची ने अपने ताजा बयान में घोषणा की है कि शहीद सैनिकों की वीरांगनाओं की,उनके परिवार की, अनूसूचित जाति जनजाति परिवारों की भूखंडों की लूट मचाने वाले व दोषी अधिशाषी अधिकारियों को बक्सा नहीं जाएगा व भूखंडों की निरस्तीकरण की कार्यवाही व दोषियों को दंडित कराने तक की कार्यवाही करवाई जाएगी। राज्य सरकार से कार्यवाही की अपेक्षा है और अगर राज्य सरकार इसमें ढ़ील बरतेगी तो सक्षम न्यायालय में भी की जाऐंगे। खीची ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से 11 जून 2012 को उपस्थित होकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को शिकायत की थी। इसके बाद  14 जून 2012 को अतिरिक्त निदेशक ने जांच की मगर कार्यवाही ठप रही। इस पर 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री से मिल कर हाल बताया तब जाके 23 अक्टूबर को जिला कलक्टर को गलत आवंटन को निरस्त करने का आदेश जारी हुआ। अब तेजी से कार्यवाही नहीं होती हे तो एक बार फिर से मुख्यमंत्री का ध्यान दिलाया जाएगा। खीची ने कहा है कि विधायक गंगाजल मील के अत्यन्त नजदीकी साथ रहने वालों ने गलत जानकारियां देकर राजनैतिक और सत्ता के दबाव से भूखंड हथिया लिए हैं, जो बहुत ही दुर्र्भाग्यपूर्ण है। दबाव के लिए आवेदन पत्रों में नई धान मंडी दुकान नं 82 और रिलांयस पेट्रोल पम्प के पते दिए गए। इन पर तो तत्काल ही कार्यवाही होनी चाहिए। विधायक स्वयं क्या फैसला लेते हैं,ये उन पर निर्भर है। 
राजनैतिक सामाजिक संगठनों का कर्तव्य क्या होगा?
शहर में राजनैतिक दलों में भाजपा,शिव सेना,माकपा,बसपा और अनेक संगठन जो क्रांतिकारी होने की घोषणा करते हैं। उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है? मामला शहीदों की वीरांगनाओं व परिवारों को भूखंड देने का है। संघ जो अपने हर बौधिक में देश की सुरक्षा करने वाली सेना औा उसके परिवारों को खासकर वीरांगनाओं को बड़ा महत्व देता है,देखना है कि इस मसले पर उसकी क्या प्रतिक्रया होती है?

 

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रविवार, 18 नवंबर 2012

भाजपा के तीन नेता रामप्रताप कासनिया,राजेन्द्र भादू और अशोक नागपाल क्यों डरते हैं और किससे डरते हैं?


टिप्पणी-करणीदानसिंह राजपूत


भारतीय जनता पार्टी की ओर से एडीएम के माध्यम से 9 नवम्बर 2012 को शहर की समस्याओं को दूर करने का सात सूत्री ज्ञापन राज्यपाल को भेजा गया। इस ज्ञापन में पीने के पानी के शुद्ध वितरण की मांग के साथ चेतावनी दी गई थी कि सात दिनों में सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। शहर के तीस वार्डों में शुद्धपानी का वितरण होने की कोई सूचना जनता की ओर से तो नहीं है। किसी ने भी नहीं कहा कि पानी शुद्ध मिलने लगा है और निर्धारित समय पर मिलने लगा है। लाईनपार के क्षेत्र को सूर्याेदय नगर कहा जाता है,वहां तो पानी एक दिन छोड़ कर दिया जा रहा है और वह भी निर्धारित समय पर नहीं दिया जाता। भाजपा ही नहीं कोई अन्य पार्टी व नेता भी इस पर नहीं बोले। भाजपा ने आगे चतावनी के अनुरूप कोई आंदोलन शुरू नहीं किया। सच तो यह है कि आंदोलन की चेतावनी देना और आंदोलन करना दोनों में बहुत अंतर है।

यहां पर वे मांगे दी जा रही है जिनमें से किसी एक पर भी काई कार्यवाही हुई हो,ऐसा लग नहीं रहा है।

भाजपा ने जब यह ज्ञापन तैयार किया और जिन नेताओं ने यह उपखंड अधिकारी के मार्फत राज्यपाल को भिजवाया,वे सभी जानते हैं कि राज्यपाल को दिया गया ज्ञापन कितने दिन बाद जाकर कार्यवाही में आता है।

भाजपा यह ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को ही सौंपती जो मांगें स्थानीय स्तर पर हल हो सकती थी। भाजपा ने जो मांगें दी हैं वे हम दुबारा यहां बता रहे हैं, ताकि जनता समझ जाए कि इनमें से पानी शुद्ध दिए जाने,सीवरेज के 8 ईंची व्यास पे पाईपों के बजाय अधिक व्यास के पाईप लगाने,अस्पताल और यातायात की व्यवस्था सुधारने तथा बिजली के एवरेज बिलों को शुद्ध करने की मांगें तो स्थानीय स्तर पर ही हल हो सकती हें।


1.शहर में गंदे पेयजल का वितरण हो रहा है,इसमें 7 दिन में सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। जनता

2.सीवरेज पाईप कम व्यास के हैं,बड़े व्यास वाले पाईप लगवाए जाऐं।

3.ग्वार को एनसीडीएक्स में शामिल किया जाए।

4.सबसीडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को सीमित नहीं किया जावे।

5.अस्पताल में अव्यवस्था को दूर किया जावे।

6.यातायात व्यवस्था में सुधार किया जावे।

7.बिजली के एवरेज बिल आ रहे हैं। इस व्यवस्था में सुधार किया जावे।

   

उक्त ज्ञापन देने वालों में जिला किसान मोर्चे के अध्यक्ष राजेन्द्र भादू, पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया,जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष रजनी मोदी,देहात अध्यक्ष नरेन्द्र घिंटाला,युवा मोर्चे के अध्यक्ष गौरव बलाना,नगर मंडल के प्रयागचंद अग्रवाल,परसराम भाटिया,धर्मदास सिंधी,पूरण कवातड़ा,पार्षद सत्यनारायण छींपा,मुरलीधर पारीक,सुभाष सैनी,गोपीराम दग्गल,प्रेमसिंह राठौड़,प्रभुदयाल,पवन औझा,त्रिलोक कलसी,ओम चाहर, सम्पत बगेरिया,घनश्याम सैनी आदि थे।

ज्ञापन देकर ये भूल गए कि 9 नवम्बर के ज्ञापन में 7 दिन की अवधि दी गई थी जो बीत गई है। ये सभी जानते हैं,मगर सच कुछ और है। भाजपा का  नगरमंडल काम नहीं कर सकने वाला,किसी भांति चलने फिरने में लाचार और जनता की आवाज नहीं सुनने वाला जिसे  लूला लंगड़ा बहरा कहा जा सकता है,उसके चार पांच पदाधिकारी कभी दो चार ज्यादा हो सकते हैं, झटपट बिना दूरगामी सोचे निर्णय लेते हैं। उसकी विज्ञप्ति जारी कर देते हैं कि फलां दिन ज्ञापन दिया जाएगा। अनेक बार एसएमएस के जरिए भी तुरंत फुरंत बुलावा देते हैं और सीधे उपखंड कार्यालय पर ही पहुंचने का निर्देंश देते हैं। चालीस पचास एकत्रित हो जाते हैं जो एक लाख की आबादी में साधारण बात है। उसमें भी बीस तीस तहसील,उपखंड और एडीएम कार्यालयों में काम कराने आए हुए शामिल हो जाते हैं। भाजपा का लूला लंगड़ा बहरा संगठन इस मामूली संख्या को भी इतराते हुए अच्छी संख्या बतलाता है।

किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजेन्द्र भादू, पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक अशोक नागपाल भी साथ होते हैं। आगामी चुनाव के चक्कर में भयभीत ये नेता सब कुछ जानते हुए संगठन के नाम पर मजबूरी में साथ होते हैं। अन्यथा यह कह दिया जाएगा कि कार्यकर्ताओं को साथ नहीं देते। लेकिन जिनको चुनाव लडऩा है,उनको इतना तो जान ही लेना चाहिए कि पांच दस लोग जो निर्णय कर लेते हैं, बाद में कार्यवाही नहीं होती,उससे कितनी भद्द होती है।

इस प्रकार के निर्णय करने वालों को जब तक फटकार नहीं लगती तब तक वो भद्द पिटने वाली कार्यवाही करते रहेंगे। इस प्रकार के निर्णयों पर साथ नहीं देने पर पार्टी कोई निकालने वाली नहीं है। नेताओं को झूठा भय सताने लगता है उस स्थानीय संगठन का जिसमें विगत चुनाव में मील को साथ देने वाले हैं। ये तीनों दिग्गज शक्तिहीन संगठन के चंद पदाधिकारियों से डरना छोड़ें और ज्यादा ही संगठन की बात हो तो नए अध्यक्ष और नई कार्यकारिणी का गठन करवाएं। नगरमंडल के अध्यक्ष गुरदर्शनसिंह सोढ़ी तो एक बार इस्तीफा दे चुके हैं और कई बैठकें उनकी अनुपस्थिति में ही होती रही हैं,जो पांच सात जनों का निर्णय होता है। देहात मंडल की हालत भी न होने के बराबर है। क्या हालत है देहात मंडल की और कितनी ताकत है देहात मंडल में।

साफ साफ हालात तो यह हैं कि वर्तमान नगर और देहात मंडलों के भरोसे तो आगामी विधान सभा चुनाव लड़ा गया तो भगवान ही मालिक होगा। साफ तय करके लडऩा की हार के लिए लड़ रहे हैं।

दिग्गज नेता विगत चुनाव पर नजर डालें कि गुरदर्शसिंह सोढ़ी कहां थे और देहात मंडल के अध्यक्ष नरेन्द्र घिंटाला का पार्टी प्रत्याशी को कितना और कैसा सहयोग रहा था?

अब एक प्रसिद्ध भजन...

उठ जाग मुसाफिर भोर भई,अब रैन कहां जो सोवत है।

जो सोवत है सो खोवत है,जो जागत है सो पावत है।

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फोटो-भाजपा नेताओं अशोक नागपाल,रामप्रताप कासनिया और राजेन्द्र भादू व अन्य नेताओं ने 24-10-2010 को नगरपालिका की समस्याओं पर तत्कालीन उपखंड अधिकारी कालूराम को ज्ञापन दिया था। उसके बाद धरना लगाया था और जैसे तैसे कई दिनों तक चलाने के बाद जैसे तैसे समझौता आश्वासन से उठाया था।

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सूरतगढ़ में नन्दी शाला का शिलान्यास:संतों ने लगाई नींव:खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत:




गौ रक्षा सम्मेलन में गौ वंश के पालन और संरक्षण का आह्वान
पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया,विधायक गंगाजल मील और पूर्व विधायक अशोक नागपाल समारोह में शामिल-
सूरतगढ़, 18 नवम्बर 2012. हनुमान खेजड़ी मंदिर धाम के सटते हुए दक्षिण पश्चिम दिशा में अठारह नवम्बर को शुभ बेला में संतों के कर मिलों से नन्दी शाला की नींव रखी गई। बाल संत भोले बाबा व अन्य संतों की ओर से मंत्रोच्चार के साथ यह कार्य सम्पन्न करवाया गया। शिलान्यास पट का अनावरण विधायक गंगाजल मील से करवाया गया।
श्री गौशाला के अध्यक्ष ओम प्रकाश राठी व एडवोकेट व नोटेरी एन.डी.सेतिया,पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया,विधायक गंगाजल मील और पूर्व विधायक अशोक नागपाल सहित सैंकड़ों गौ भक्त नर नारी समारोह में शामिल हुए। एन.डी.सेतिया ने बताया कि करीब 17 बीघा भूमि पर यह नन्दी शाला बनाई जा रही है।
इस नन्दी शाला से शहर की श्रीगौशाला को सांडों के संरक्षण के लिए यह स्थान मिलेगा। अभी शहर में बाजारों और गलियों मोहल्लों में विचरण करते असहाय निराश्रित सांडों को इसमें रखा जा सकेगा।
इस अवसर पर गौ रक्षा सम्मेलन भी आयोजित किया गया।
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शनिवार, 10 नवंबर 2012

सूरतगढ पालिका:औद्यौगिक प्लॉट नीलामी घोटाला:हरचंदसिंह ने कहा एसीबी जांच में सबूत दूंगा।

सूरतगढ पालिका:औद्यौगिक प्लॉट नीलामी घोटाला:
पूर्व विधायक हरचंदसिंह ने पुलिस को कहा एसीबी जांच में सबूत दूंगा।
विशेष खबर-करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 10 नवम्बर। नगरपालिका के औद्योगिक प्लॉट निलामी और उसके बाद प्लाटों के उपविभाजन पर भ्रष्टाचार से सरकार को लाखों रूपए के राजस्व की हानि होने की एक शिकायत पूर्व विधायक एडवोकेट हरचंदसिंह सिद्धु ने राजस्थान के मुख्यमंत्री से की थी। इस शिकायत की जांच पर बयान लेने को सूरतगढ़ सिटी थाने के उपनिरीक्षक किशोरसिंह 7 नवम्बर को बयान लेने सिद्धु के पास गए। सिद्धु ने अपने बयान में कहा कि सूरतगढ़ पुलिस को अनुसंधान में कुछ भी तथ्य नहीं बताऊंगा। यह प्रकरण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संबंधित है। राज्य सरकार ब्यूरो को अनुसंधान का दायित्व सौंपेगी तब ब्यूरो को संपूर्ण सबूत दूंगा।
सिद्धु ने बताया कि नगरपालिका ने औद्योगिक प्लॉट 174 और 175 की नीलामी में घोटाला किया। मास्टर प्लान में घोषित कार्य के अनुसार प्लाटों की नीलामी हुई। उसके बाद में उनका उपविभाजन करके बेचे नहीं जा सकते। प्लॉटों का उप विभाजन और उनकी रजिस्ट्री व पालिका रिकार्ड में नामांतरण तक कर दिया गया। सिद्धु ने आरोप लगाया है कि 120 गुणा 150 फुट के प्लॉटों को उप विभाजन करके दुकानों के रूप में टुकड़े करके नहीं बेच सकते।
सिद्धु ने यह आरोप भी लगाया कि एक प्लॉट की छह जनों के ग्रुप ने बोली दी। वह प्लॉट 50 लाख 40 हजार में छूटा। उसकी एक चौथाई रकम भी बोली पूरी होते ही जमा करवा दी गई। उसके बाद मिली भगती करके नियम विरूद्ध दो जनों के नाम निकाल कर चार जनों के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई। घोटाला इसके बाद और हुआ कि भूखंड के टुकड़े करके गिफ्ट दिखलाए गए। उनमें भी गोलमाल हुआ। इसमें सब रजिस्ट्रार ने बिना स्टाम्प शुल्क के रजिस्ट्री कर दी। सिद्धु ने आरोप लगाया है कि वर्कशॉप का बड़ा भूखंड पालिका खुद ही टुकड़े करके बेचती तो करोड़ों में बिकता मगर पालिका ऐसा कर नहीं सकती थी। पालिका ने वर्कशॉप को वर्कशॉप के रूप में ही बेचा,मगर बाद में उपविभाजन को स्वीकार करके घोटाला किया।
सिद्धु ने कहा कि इस मामले में विधायक पुत्र,नगरपालिका का अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता, सब रजिस्ट्रार व कई और लोग शामिल हैं।

गुरुवार, 1 नवंबर 2012

शुद्ध के लिए युद्ध:जांच में आटा शामिल करो:चावल कणी और भूसी की मिलावट:



तीखे तेवर-सामयिक टिप्पणी:-करणीदानसिंह राजपूत

दीपावली पर्व के आते ही प्रशासन को जनता की सेहत का ध्यान आता है और पर्व से कुछ दिन पहले सरकार की ओर से केवल हलवाईयों की दुकानों पर छापेमार कार्यवाही शुरू होती है। आरोप होता है कि मिठाईयों में जम कर मिलावट की जाती है। इसलिए सरकार अपने प्रशासनिक अधिकारियों तक को जांच की कार्यवाही में लगा देती है। जांच में सड़ी हुई चाशनी और मिठाईयां,मावा आदि नष्ट करवाने की कार्यवाही होती हे और अखबारों में व चैनलों पर तस्वीरों सहित समाचार प्रसारित होते हैं।
शुद्धता के लिए युद्ध केवल हलवाईयों के यहां ही क्यों होता है।
दीपावली पर और रोजाना जो आटा हलवाईयों के यहां, भोजनालयों में उपयोग में लाया जाता है,उसकी शुद्धता की जांच भी होनी चाहिए। इन दुकानों से तो नमूने लिए ही जाएं साथ में आटा बनाने वाली मिलों पर और उनके आटे के थैलों में से भी नमूने लिए जाकर प्रयोगशाला में जांच करवाई जानी चाहिए।
आटे के थैलों पर गेहूं का शुद्ध आटा छपा हुआ होता है और उसकी 100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी तक छपी हुई होती है। अनेक आटा निर्माता
गेहूं के आटे में चावलों की कणी और भूसी मिलाते हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन दोनों ही यह जानते हैं। अब सवाल पैदा होता है कि जानते हैं तो फिर छापे की और प्रयोगशाला में जांच करवाने की कार्यवाही क्यों नहीं करते?
क्या केवल मिठाईयों की अशुद्धता से ही लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है,आटे की अशुद्धता से आदमी बीमार नहीं होता?
बड़े गौर करने वाला बिंदु है कि मिठाईयां तो लोग यदा कदा ही खाते हैं,मगर आटा तो रोजाना ही उपयोग में लिया जाता है।
जो खाद्य रोजाना इस्तेमाल हो रहा है उसकी शुद्धता की जांच की जरूरत क्यों नहीं समझी जाती?
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन  हर कार्य हल्ला मचने मचाने के बाद शुरू करते हैं। तो क्या आटे की शुद्धता के लिए भी हल्ला ही मचाया जाए?
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