सोमवार, 13 अप्रैल 2026

सूरतगढ़.सफाई कर्मी: वाल्मीकि सफाई पर और स्वर्ण दफ्तर के एसी रूम में। वाल्मीकि के हक पर कौन नेता चुप हैं?



* करणीदानसिंह राजपूत * 

सूरतगढ़ 13 अप्रैल 2026.

नगरपालिका प्रशासन ने सफाई कर्मचारियों के प्रति दो तरह के नियम बना रखे हैं जिनसे वाल्मीकि कर्मचारियों से भेदभाव हो रहा है और उनकी आवाज को प्रशासक भरत जयप्रकाश मीणा ( उपखंड अधिकारी) और अधिशाषी अधिकारी पूजा शर्मा दोनों ही दबा रहे हैं। उच्च स्तरीय जांच हुई तो इन दोनों अधिकारियों के विरुद्ध जानबूझकर भेदभाव करने पर कार्वाई हो सकती है। 

* नगरपालिका में जो सफाई कर्मचारी स्वर्ण जाति वर्ग के हैं, उनको फील्ड में सफाई के लिए न भेजकर दफ्तर में वातानुकूलित कमरों में बिठाया हुआ है और सरकारी आदेश के विरूद्ध दूसरे काम सौंपे हुए हैं। वाल्मीकि वर्ग के ही कर्मचारियों को नाले सफाई कचरा मैला उठाने हटाने पर लगाया हुआ है।

अधीशाषी अधिकारी पूजा शर्मा की प्रशासनिक देखरेख में संविधान और राज्य सरकार की नीति के विरूद्ध यह भेदभाव चलाया जा रहा है। अनेक समाचार, मांगपत्र दिए जाने के बावजूद भी यह भेदभाव खत्म नहीं किया गया है, जबकि सफाई कर्मचारियों ने कुछ माह पूर्व अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा के हाथों में मांगपत्र दिया था कि दफ्तर में लगाए सफाई कर्मचारियों को फील्ड में लगाया जाए ताकि सफाई व्यवस्था में सुधार हो सके। यही मांग पत्र प्रशासक ( उपखंड अधिकारी) भरतजयप्रकाश मीणा को भी हाथों में सौंपा गया था। भरतजयप्रकाश मीणा आईएएस अधिकारी हैं और वे भी तुरंत एक्शन करने के बजाय ईओ की गलत भेदभाव पूर्ण व्यवस्था पर चुप हैं। कर्मचारियों का मांगपत्र कहां दब गया है,यह किसी जांच में ही सामने आ सकेगा। फिलहाल उपखंड अधिकारी और अधीशाषी अधिकारी दोनों ही इस व्यवस्था के दोषी हैं। 

* वाल्मीकि सफाई कर्मचारियों के साथ अन्याय और भी हो रहे हैं। जो सेवा निवृत हो गये हैं उनकी पेंशन,ग्रेच्युटी आदि सालों तक नहीं दी जाती। अभी भी अनेक वाल्मीकि कर्मचारियों के लाखों रूपये नगरपालिका प्रशासन ने नहीं दिए। यहां तक कि समय पर वेतन नहीं दिया जाता।  👍अनेक बेगार पर लगाए हुए हैं जिनकी उपस्थिति नगरपालिका में लगती है और वेतन नगरपालिका देती है। इससे शहर की सफाई चौपट हो रही है। 

👍 नगरपालिका प्रशासन की इस गलत नीति और वाल्मीकि वर्ग के कर्मचारियों से अन्याय भेदभाव के जानकर होते हुए भी ये सब सुधार नहीं करवा रहे। ईओ को लिखित में देना नहीं चाहते।  नगरपालिका पिछले बोर्ड में (भाजपा नेता) अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ( मेघवाल) हैं और अपने ही वर्ग के प्रति अन्याय देख रहे हैं। परसराम भाटिया (मेघवाल) 120 दिन अध्यक्ष रहे। कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष हैं। जगदीश (मेघवाल) भी कुछ दिन अध्यक्ष रहे हैं और भाजपा नेता हैं। इन तीनों ने कभी कोई लिखित में शिकायत नहीं की। 

* वर्तमान विधायक डुंगरराम गेदर जो बसपा में थे तब अनुसूचित जाति के प्रति आवाज उठाते थे और कांग्रेस से विधायक बनने के बाद नगरपालिका में हो रहे अन्याय पर चुप हैं।

👍 पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया, उनके पुत्र संदीप कासनिया भी ईओ पूजा शर्मा के गलत कार्वाई पर चुप हैं। 

* पूजा शर्मा ने वाल्मीकि को मिल रहे प्रमोशन के बजाय अपनी सग्गी भाभी बबीता शर्मा को अवैध रुप से प्रमोशन दिया, अनुचित लाभ दिया और नगरपालिका को हानि पहुंचाई। दस्तावेज गलत बनाए। एक वाल्मीकि का हक मारा। उस समय ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष थे जो मालुम होने के बाद आजतक चुप हैं और सरकार को शिकायत नहीं करते।

इस पर ये सभी राजनेता,नेता चुप हैं और शिकायत नहीं कर रहे। अनुसूचित वर्ग के लिए संघर्ष करने वाले संगठन, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम लेवा भी वाल्मीकि कर्मचारियों पर हो रहे अत्याचार पर चुप हैं। 👍 पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू भी चुप हैं। ये सभी नेता नगरपालिका में हो रहे भेदभाव पर जांच कराने पर 14 अप्रैल को कोई संकल्प लेकर अगले दिन से कार्वाई कराएंगे!०0०









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