रविवार, 12 अप्रैल 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आसपास का भारत,गरीबी में तड़पता जीवन! रोटी के संकट में उनके सपने!

 





* करणीदानसिंह राजपूत *

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करोड़ों का गरीब निवास और और गगनचुंबी इमारतों का ऐश्वर्य भरा अमीर भारत वहीं आसपास एक अकाट्य सच्च धरती चूमती गंदगी कीचड़ कचरे झोंपड़ का दुर्गंध भरा गरीब भारत! 

👌प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिन के चौबीस घंटों में अठारह घंटे काम करते हैं,देश के लिए काम करते हैं। मोदी है तो हर कुछ मुमकिन है। ये जो धरती से जुड़े  मजबूरी का जीवन जीते लोग परिवार हैं, ये तो चौबीस घंटों में हर घंटे काम पर ही होते हैं।इनकी कब होती है छुट्टी! आदमी खपता है तो औरत भी खपती है। छोट्टे छोट्टे बालक बालिका भी खपते हैं। कहां हैं इनके स्कूल और शिक्षा ? इन परिवारों में बुड्ढे बुड्ढी भी मरते दम तक खपते हैं,तब कहीं रोटी नसीब होती है। इन गरीबों को फिंगरप्रिंट के बिना मुफ्त अन्नाज का भी सहयोग नहीं और नेताओं के खास साहूकार करोड़ों रू.बैंकों से ले विदेश भाग गये। गरीब ईमानदार है तो भी भरोसेमंद नहीं है, वह चोर है लुटेरा है,बिना अपराध के अपराधी है। अमीर बेईमान है तो भी भरोसेमंद हैं क्योंकि वह सत्ताधारी नेताओं में किसी न किसी का हमप्याला हमनिवाला है इसलिए साहूकार है। आचरण हमप्याला हमनिवाला से भी आगे ऊंची पसंद का है तो वह और अधिक खास है  और वह राजनेता बन जाता है, मंत्री भी बन जाता है। अमीर को बैंक करोड़ों रूपये घर जाकर दे देते हैं लेकिन गरीब को कच्चे घर के लिए भी कर्ज नहीं मिल पाता। प्रधानमंत्री आवास योजना में दो लाख रू तक की सहायता है कि जमीन हो तो यह सहायता पक्का मकान बनाने के लिए है। गरीब के पास जमीन कहां से होगी? जमीन तो सरकार की है। अमीर गगनचुंबी इमारतें बना सकते हैं तो सरकार ऐसी ही गगनचुंबी इमारतें गरीबों के लिए बनाकर दे दे। गरीबों के लिए बना दें लेकिन महानगरों में जमीन नहीं है। यह कह दिया जाता है। गरीब एक एक झोंपड़ी बना कर जितने घेरे क्षेत्रफल की जमीन पर बसे हैं, वहां उतने से कम क्षेत्रफल में गगनचुंबी इमारतें बनाई जाएं तो और अधिक  गरीब बसाए जा सकते हैं तथा अधिक जमीन की आवश्यकता शायद नहीं पड़ेगी, लेकिन इस पर विचार कौन करे? 

राजनैतिक नेताओं की सोच सरकार से बाहर होती है तब कुछ और होती है तथा जब सरकार बन जाती है तब सोच बदल जाती है। 

गरीब तो मकान और बच्चों को शिक्षा की सोच ही नहीं पाता। रोटी कमाने में ही सारा समय निकल जाता है। मतलब 24 घंटे में वह केवल रोटी ही कमा पाता है,मकान शिक्षा के रूपये तो इकट्ठे हो ही नहीं पाते। महानगरों में गरीबों की कालोनियों के लिए भूमि नहीं ( लेख में सुझाव है कि गगनचुंबी इमारतें सरकार बनाए) लेकिन जो छोटे नगर हैं, नगरपालिकाएं ग्राम पंचायतें हैं और वहां जमीन है तो वहां गरीबों के लिए बहुमंजिली कालोनियां बना कर दी ही जा सकती है। 

राजधानी में भारतीय जनता पार्टी के विशाल कार्यालय के लिए करोड़ों रूपये मिल गये और जमीन भी मिल गई। यह विशाल कार्यालय भवन आंखों के आगे है। इसे देखकर ही प्रश्न उत्पन्न होते हैं। भाजपा के अग्रिम संगठनों के भी भवन हैं और उनके निर्माण के लिए जमीन भी मिली और धन भी मिला। गरीबों की कालोनियों के लिए  प्रयास किया होता तो सफलता मिलने की उम्मीद होती। 


भारतीय जनता पार्टी का राज जिसमें भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जुड़े हुए हैं। अनेक विचार समय समय पर आते हैं। महा भारत! हिंदू राष्ट्र! राम राज! मोदी का भारत! मोदी है तो सब मुमकिन है! मोदी का स्वच्छ भारत अभियान कहां गुम हो गया? देश की राजधानी दिल्ली के परिक्षेत्र में भयानक गंदगी तो है लेकिन स्वच्छ भारत का कहीं नारा भी नहीं दिखता। गगनचुंबी इमारतों के आसपास झुग्गी झोंपड़ी का गरीब दिखता है। गरीबी का जीवन दिखता है। यह सच्च देश भर में है। स्वच्छ भारत मिशन गायब है। भाजपा नेता और संघ के कार्यकर्ताओं में इतनी हिम्मत नहीं कि इस अभियान को कुचलने वाले अधिकारियों से बात कर सकें। यह अभियान केवल दीवार लेखन और कागजों मे सीमित कर दिया गया है। लाखों रूपये हर शहर में अधिकारी डकार रहे हैं। भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्वाई करना तो बहुत दूर कल्पना से भी परे है।

राम राज का सच्च गरीब के लिए होता तो सन् 2014 ईसवी से 2026 तक गरीब को हर शहर में अपना घर मिल गया होता। अभी जो बजट बनते रहे हैं उनमें ऐसी योजनाएं होती हैं जिनका उपयोग पैसे वाले ही कर सकते हैं। 








* गरीब को मुफ्त का अन्नाज दे देने और उसका प्रचार कर श्रेय लेना राजनीति है और वह वोट लेने तक पहुंच कर खत्म हो जाती है। आज का गरीब युवा गरीबी का मुफ्त अन्नाज नहीं चाहता। युवा काम मांग रहा है। युवा रोजगार मांग रहा है। वह चाहता है कि अपने परिश्रम से जीवन को बदल कर आगे बढें। भारत के असली निर्माण करने वाले गरीब मजदूर किसान आदि हैं जिनके लिए कोई ठोस नीति नहीं बनती जो जितनी जल्दी बनाई जाए उतना ही भविष्य के लिए अच्छा होगा।०0०

12 अप्रैल 2026. ( दिल्ली राजधानी परिक्षेत्र से)

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,पत्रकारिता 62 वां वर्ष.

94143 81356.

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