खेजड़ी कटाई. विधानसभा में गरजे डूंगर राम गेदर
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 4 फरवरी 2026
सूरतगढ़ विधायक डूंगर राम गेदर ने आज राजस्थान विधानसभा में राज्य वृक्ष खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई, पर्यावरण संरक्षण और बिश्नोई समाज द्वारा चल रहे आंदोलन को लेकर राज्य सरकार की उदासीनता का गंभीर मुद्दा उठाया।
विधायक गेदर ने कहा कि राजस्थान प्रदेश में पर्यावरण बचाओ–खेजड़ी बचाओ समिति एवं बिश्नोई समाज की अगुवाई में बीकानेर क्षेत्र में लोग पिछले दो वर्षों से आंदोलनरत हैं, इसके बावजूद खेजड़ी के पेड़ों की अवैध कटाई लगातार जारी है। खेजड़ी केवल राज्य वृक्ष ही नहीं, बल्कि देव वृक्ष है, जिसकी पूजा की जाती है, फिर भी इसे बचाने के लिए सरकार द्वारा कोई सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनाया गया।
उन्होंने सदन को अवगत कराया कि 10 नवंबर 2024 को रासीसर में खेजड़ी संरक्षण को लेकर बिश्नोई समाज द्वारा महापड़ाव होना था। उस समय खींवसर उपचुनाव को देखते हुए 9 नवंबर 2024 को कुचेरा में मुख्यमंत्री द्वारा बिश्नोई समाज के संतों और समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर खेजड़ी पर सख्त कानून बनाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही इस मुद्दे को जुमले की टोकरी में डाल दिया गया।
विधायक गेदर ने कहा कि 1 साल बाद में संसदीय मंत्री द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल जुर्माने की राशि बढ़ाने की घोषणा की गई, जो खेजड़ी संरक्षण नहीं बल्कि उद्योगपतियों को राहत देने जैसा कदम है। पहले जहां पेड़ काटने पर 100 रुपये का जुर्माना था, उसे 1000 रुपये किया गया तथा 6 महीने की सजा के स्थान पर मात्र 5000 रुपये का जुर्माना कर दिया गया, जिससे खेजड़ी की कटाई को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिला है।
उन्होंने बताया कि बीकानेर के नोखादहिया में रामगोपाल बिश्नोई के नेतृत्व में 567 दिनों से धरना जारी है तथा जिला कलेक्ट्रेट के सामने 201 दिनों से आंदोलन चल रहा है। 19 दिसंबर 2025 को मुकाम में स्वामी रामानंद जी के नेतृत्व में महापंचायत हुई, जिसमें 2 फरवरी को बीकानेर में महापड़ाव का ऐलान किया गया था। सरकार को इसकी जानकारी होने के बावजूद आज तक किसी मंत्री या अधिकारी ने आंदोलनकारियों से बातचीत नहीं की।
वर्तमान में आंदोलन के तीसरे दिन 29 संत, एक साध्वी, 60 महिलाएं और 429 पुरुष अन जल त्याग आमरण अनशन पर बैठे हैं। तीन आंदोलनकारियों की तबीयत भी खराब हो चुकी है, फिर भी सरकार का कोई प्रतिनिधि संवाद के लिए नहीं पहुंचा।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जी ने भी विधानसभा में इस विषय को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह साधु-संतों से बातचीत करे और खेजड़ी संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति बनाए।
विधायक डूंगर राम गेदर ने सरकार से मांग की कि
खेजड़ी संरक्षण के लिए तत्काल सख्त और प्रभावी कानून बनाया जाए
आमरण अनशन पर बैठे संतों एवं आंदोलनकारियों से तुरंत वार्ता की जाए
पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार अपनी नीयत और नीति स्पष्ट करे
अंत में उन्होंने कहा—
“मां अमृता बाई अमर रहें। खेजड़ी बचेगी, तभी राजस्थान बचेगा।०0०