शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

बिजली सामान खरीद में ईओ भंवरलाल सोनी व राकेश मेंहदीरत्ता के खिलाफ जांच:


फर्म से घटिया सामान खरीदने और कम खरीदने बिल अधिक लेने का आरोप:
विशेष खबर-करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,31 अगस्त 2012. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सूरतगढ़ नगरपालिका के पूर्व में रहे ईओ भंवरलाल सोनी व पूर्व में रहे लेखाधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता के विरूद्ध बिजली सामान खरीद में घोटाले की प्राथमिक जांच शुरू की है। आरोप है कि विष्णु बाहेती नामक व्यक्ति की फर्म से निर्धारित मापदंड के बजाय घटिया सामान खरीदा,यह सामान भी कम खरीदा व बिल अधिक लिया गया।
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बुधवार, 29 अगस्त 2012

सूरतगढ़ में इन्द्रधनुष:करणीदानसिंह राजपूत:



सूरतगढ़, 29 अगस्त 2012. भारी वर्षा के बाद रिमझिम के चलते 28 अगस्त की शाम को जब सर्य अस्ताचल में छिपने को जा रहा था तब पूर्व की दिशा में आकाश में सतरंगे इन्द्रधनुष का लुभावना दृश्य था। हजारों लोगों ने यह दृश्य देखा जो बाहर वर्षा का आनन्द ले रहे थे या बाहर विचरण कर रहे थे। इसी दृश्य को आप भी देख सकते हैं।
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शनिवार, 18 अगस्त 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण पीडि़ता की अर्जी पर एसपी का आदेश

-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-
पीडि़ता ने अनुसंधान अधिकारी सीआई रिछपालसिंह चारण,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल,पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल, पार्षदपति ओम साबनिया और सिपाही रोहताश पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की अर्जी दी थी।
पीडि़ता के साथ वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी थे।
एसपी के आदेश के बाद पीडि़ता और वकील सूरतगढ़ सिटी थानाधिकारी दिनेश राजोरा से भी मिले की एसपी के आदेशानुसार कार्यवाही करने की मांग की।
सूरतगढ़, 18 अगस्त 2012.पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल यौनशोषण के प्रकरण में पुलिस की फाईनल रिपोर्ट के बाद आए मोड़ के बाद कहा जा सकता है कि इस मामले से बनवारीलाल मेघवाल का पीछा नहीं छूट रहा है बल्कि इसमें पुलिस अधिकारी भी उलझते जा रहे हैं। पीडि़ता के वकील हरचंदसिंह सिद्धु ने कहा है कि बनवारीलाल को बचाने के चक्कर में आगे और कितने पुलिस अधिकारी मामले में उलझते जाएंगे।
    इस प्रकरण में पीडि़ता की ओर से थाना सूरतगढ़ सिटी में मुकद्दमा दर्ज नहीं किए जाने पर वकील हरचंदसिंह सिद्धु ने बीकानेर के पुलिस महानिरीक्षक से भेंट की थी। उन्होंने एसपी को फोन पर आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया था।
    पीडि़ता इसके बाद 9 अगस्त को जिला पुलिस अधीक्षक से श्रीगंगानगर में मिली और अर्जी दी। उस समय वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी साथ थे। एसपी ने उस अर्जी पर आदेश दिया जो सिटी थाने में पहुंच गया। पीडि़ता ने एसपी को वह फोटो भी दिखाई जो ब्याह के बाद सिपाही रोहिताश के साथ खिंचवाई हुई है। इसके अलावा एक नया तथ्य और बताया गया।
अनुसूचित बाजीगर जाति की महिला ने पुलिस में जो अर्जी दी उसमें यह लिखा हुआ था।
    पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश पर अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार करने, यौन शोषण करने, मारपीट करने,गर्भपात करवाने,शिव मंदिर में सिपाही को कुंवारा बतलाकर ब्याह करवाने के प्रकरण में पुलिस के फाइनल रिपोर्ट दिए जाने के बाद अब बहुत गंभीर मोड़ आया है। पीडि़ता ने आरोप लगाया है कि अनुसंधान अधिकारी थानाधिकारी रिछपालसिंह चारण ने पीडि़ता के मोबाईल और सिम, सिपाही रोहिताश के साथ ब्याह के फोटो आदि अनुसंधान में लिए मगर उन्हें रिकार्ड में नहीं लिया तथा नष्ट कर दिए। पीडि़ता ने इस बाबत 19 जुलाई को एक आवेदन पुलिस थाना सूरतगढ़ सिटी में प्राथमिकि दर्ज करने के लिए दिया। सूचना है कि सीआई दिनेश राजौरा ने पीडि़ता से कहा कि इस बाबत पहले पुलिस अधीक्षक से बात करके उनका जो भी निर्देश होगा उसका पालन करेंगे। अगर वे प्रकरण दर्ज करने का आदेश देंगे तो प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा अन्यथा जो भी सूचना होगी वह बतला दी जाएगी।
इस आवेदन में रिछपालसिंह पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसने पीडि़ता के लडक़े का झूठा बयान लिखा कि उसकी माता बदचलन है। पुत्र ने यह आरोप लगाया है कि उसने रिछपालसिंह को कभी कोई बयान नहीं दिया। इसके अलावा पीडि़ता के पति का भी बयान रिछपाल ने दर्ज करना बताया है जिसमें पत्नी पर बदचलनी का आरोप लगाया हुआ है। इस बारे में आरोप लगाया गया है कि पुलिस एक तरफ तो पीडि़ता के पति को अदालती वारंट पर चार साल से लिखती रही है कि वह मिला नहीं और जिस दिन बयान लिखे तब वह वारंट दिया क्यों नहीं? पति के विरूद्ध दो प्रकरण पीडि़ता ने दर्ज करवा रखे हैं।
पीडि़ता ने यह आरो भी लगाया है कि आरोपियों से जो बात मोबाईल आदि पर हुई उसकी सीडी की आवाज की जांच नहीं हुई। आरोपियों और पीडि़ता की आवाजों के नमूने लेकर जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला से करवाए जाने चाहिए थे लेकिन नहीं करवाए गए। ये सब आरोपियों को बचाने के लिए किया गया।
पीडि़ता ने यह प्रकरण अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण, अपर पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल सहित बनवारीलाल मेघवाल, ओम साबनिया व सिपाही रोहिताश पर दर्ज करने का लिखा है।
इसमें यह आरोप भी लगाया है कि रिछपालसिंह चारण स्थानीय विधायक गंगाजल मील की अनुशंसा पर सूरतगढ़ में पद स्थापित रहा और उनके प्रभाव में काम करता रहा। पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल मेघवाल को गंगाजल मील का खास आदमी बताया गया है। वहीं ओम साबनिया के लिए लिखा गया है कि उसकी पत्नी को कांग्रेस की टिकट गंगाजल मील ने दिलवाई थी। -ओम साबनिया की पत्नी सूरतगढ़ में पार्षद है।-यह आरोप लगाया गया है कि अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण ने इनको बचाने के लिए झूठे साक्ष्य गढ़े और सही तथ्यों को नष्ट किया छिपाया। पीडि़ता ने जब यह आवेदन पुलिस में दिया तब उसके वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी साथ थे।
    सिपाही रोहताश ने पीडि़ता से ब्याह किया और बनवारीलाल तथा ओम साबनिया ने यह ब्याह करवाया था।


सोमवार, 6 अगस्त 2012

मूली में नर और नारी


मित्रता दिवस पर फेस बुक पर अजब गजब एक चित्र शेयर हुआ। मूली की विचित्र आकृतियों को संग्रह किया गया, लेकिन बड़ा रोचक लगा। प्रकृति के इस अजूबे को यहां पर दिया जा रहा है। इसमें एक नर और दूसरी नारी दिखाई देती है।


शनिवार, 21 जुलाई 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण मामला:पीडि़ता के वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु महानिरीक्षक से मिले-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-


महानिरीक्षक गोविंद गुप्ता को लिखित में शिकायत की गई-
सूरतगढ़, 21 जुलाई  2012.पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश द्वारा अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार यौन शोषण आरोप के प्रकरण में अनुसंधान अधिकारी सीआईरिछपालसिंह चारण द्वारा पीडि़ता से साक्ष्य लेकर उनको गायब करने के गंभीर आरोप में पीडि़ता के वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने 20 जुलाई को पुलिस महानिरीक्षक गोविंद गुप्ता से बीकानेर में भेंट कर लिखित में शिकायत की। उस शिकायत में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल के विरूद्ध भी आरोप लगाए हुए हैं। सिद्धु ने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक ने उसी समय जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर को टेलिफोन कर आवश्यक निर्देश दिया। सिद्धु ने बताया कि वे स्वयं शीघ्र ही जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर से मिलेंगे।
इस प्रकरण में पीडि़ता ने 19 जुलाई को सूरतगढ़ के थानाधिकारी को अनुसंधान कर्ता रिछपालसिंह चारण के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने का आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस ने यह प्रकरण दर्ज नहीं किया। इसी शिकायत पर वकील हरचंदसिंह सिद्धु पुलिस महानिरीक्षक से मिले थे।
इस प्रकरण की संपूर्ण रपटें इसी लेबल अपराध और चर्चित प्रकरण में पढ़ें।
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गुरुवार, 19 जुलाई 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण मामला:सिपाही रोहिताश के साथ पीडि़ता के ब्याह फोटो नष्ट करने का आरोप-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-


सूरतगढ़, 19 जुलाई  2012.पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश पर अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार करने, यौन शोषण करने, मारपीट करने,गर्भपात करवाने,शिव मंदिर में सिपाही को कुंवारा बतलाकर ब्याह करवाने के प्रकरण में पुलिस के फाइनल रिपोर्ट दिए जाने के बाद अब बहुत गंभीर मोड़ आया है। पीडि़ता ने आरोप लगाया है कि अनुसंधान अधिकारी थानाधिकारी रिछपालसिंह चारण ने पीडि़ता के मोबाईल और सिम, सिपाही रोहिताश के साथ ब्याह के फोटो आदि अनुसंधान में लिए मगर उन्हें रिकार्ड में नहीं लिया तथा नष्ट कर दिए। पीडि़ता ने इस बाबत 19 जुलाई को एक आवेदन पुलिस थाना सूरतगढ़ सिटी में प्राथमिकि दर्ज करने के लिए दिया। सूचना है कि सीआई दिनेश राजौरा ने पीडि़ता से कहा कि इस बाबत पहले पुलिस अधीक्षक से बात करके उनका जो भी निर्देश होगा उसका पालन करेंगे। अगर वे प्रकरण दर्ज करने का आदेश देंगे तो प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा अन्यथा जो भी सूचना होगी वह बतला दी जाएगी।
इस आवेदन में रिछपालसिंह पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसने पीडि़ता के लडक़े का झूठा बयान लिखा कि उसकी माता बदचलन है। पुत्र ने यह आरोप लगाया है कि उसने रिछपालसिंह को कभी कोई बयान नहीं दिया। इसके अलावा पीडि़ता के पति का भी बयान रिछपाल ने दर्ज करना बताया है जिसमें पत्नी पर बदचलनी का आरोप लगाया हुआ है। इस बारे में आरोप लगाया गया है कि पुलिस एक तरफ तो पीडि़ता के पति को अदालती वारंट पर चार साल से लिखती रही है कि वह मिला नहीं और जिस दिन बयान लिखे तब वह वारंट दिया क्यों नहीं? पति के विरूद्ध दो प्रकरण पीडि़ता ने दर्ज करवा रखे हैं।
पीडि़ता ने यह आरो भी लगाया है कि आरोपियों से जो बात मोबाईल आदि पर हुई उसकी सीडी की आवाज की जांच नहीं हुई। आरोपियों और पीडि़ता की आवाजों के नमूने लेकर जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला से करवाए जाने चाहिए थे लेकिन नहीं करवाए गए। ये सब आरोपियों को बचाने के लिए किया गया।
पीडि़ता ने यह प्रकरण अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण, अपर पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल सहित बनवारीलाल मेघवाल, ओम साबनिया व सिपाही रोहिताश पर दर्ज करने का लिखा है।
इसमें यह आरोप भी लगाया है कि रिछपालसिंह चारण स्थानीय विधायक गंगाजल मील की अनुशंसा पर सूरतगढ़ में पद स्थापित रहा और उनके प्रभाव में काम करता रहा। पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल मेघवाल को गंगाजल मील का खास आदमी बताया गया है। वहीं ओम साबनिया के लिए लिखा गया है कि उसकी पत्नी को कांग्रेस की टिकट गंगाजल मील ने दिलवाई थी। -ओम साबनिया की पत्नी सूरतगढ़ में पार्षद है।-यह आरोप लगाया गया है कि अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण ने इनको बचाने के लिए झूठे साक्ष्य गढ़े और सही तथ्यों को नष्ट किया छिपाया। पीडि़ता ने जब यह आवेदन पुलिस में दिया तब उसके वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी साथ थे।
    सिपाही रोहताश ने पीडि़ता से ब्याह किया और बनवारीलाल तथा ओम साबनिया ने यह ब्याह करवाया था। पुलिस इसके लिए इंकार कर रही है, मगर रोहताश के साथ पीडि़ता के ब्याह के बाद के फोटो हैं। एक फोटो पाठकों के लिए यहां दिया जा रहा है। इसमें पहचान को प्रदर्शित नहीं किया जा सकता इसलिए फोटो पर आँखों पर रबड़ का इस्तेमाल किया गया है।
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रविवार, 1 जुलाई 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण मामला: पुलिस की संपूर्ण अंतिम रिपोर्ट-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-

पुलिस ने करीब साढ़े अठारह महीना के अनुसंधान में निष्कर्ष निकाला कि पीडि़ता के कब्जे का पट्टा नहीं बनाने व एक ठेकेदार फर्म का भुगतान रोकने की रंजिश से प्रकरण दर्ज कराया गया:
 पुलिस ने लिखा है कि पत्रकार मालचंद जैन व एडवोकेट विष्णु शर्मा दौराने अनुसंधान पीडि़ता की सहायता करते रहे।
 एक मोबाईल सिम रायांवाली की निकली जिससे पीडि़ता को कॉल होती रही लेकिन पुलिस ने यह मालूम नहीं किया कि वह किसने जारी करवाई थी।
सूरतगढ़, 1 जुलाई  2012.पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश पर अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार करने, यौन शोषण करने, मारपीट करने,गर्भपात करवाने,शिव मंदिर में सिपाही को कुंवारा बतलाकर ब्याह करवाने का मामला चर्चित रहा है।
अदालत के आदेश पर 7 अक्टूबर 2010 में मामला दर्ज हुआ। पीडि़ता 3 बार मुख्यमंत्री से मिली। कुछ दिन पहले पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट बना कर अदालत में प्रस्तुत कर दी। पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट में पीडि़ता के लिए चरित्रहीन होने के शब्द इस्तेमाल किए हैं, जबकि किसी घटना व प्रकरण का उल्लेख नहीं किया जिनसे यह साबित होता हो। एक सवाल है कि महिला बुरे चरित्र की रही थी तो पुलिस उप अधीक्षक के घर पर झाडू पोंछा करने के लिए कैसे रखी गई थी? पीडि़ता की सहायता करना अपराध नहीं है, मगर पुलिस ने पत्रकार मालचंद जैन व एडवोकेट विष्णु का नाम इस तरह से उल्लेख किया है। अनेक सवाल इस अंतिम रिपोर्ट पर हैं,लेकिन अभी इस रिपोर्ट को पढ़ें।  इस पूरी रिपोर्ट को यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। पीडि़ता के वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने कहा कि पुलिस की जांच का तरीका इस तरह का रहा है कि पीडि़ता को किसी तरह से झूठा साबित किया जाए। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट में यह आभास हो रहा है। सिद्धु ने कहा कि अदालत में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी जाएगी और उसे मंजूर नहीं करने का निवेदन अदालत से किया जाएगा। सिद्धु ने कहा कि अनेक बिंदु हैं जो पुलिस की जांच को सही नहीं होना साबित करते हैं, तथा अनेक तथ्य हैं जो पीडि़ता के आरोपों की पुष्टि करते हैं, जिन्हें अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। अदालत में इसकी तारीख 30 अगस्त  2012 है।




पुलिस की फाईनल रिपोर्ट से राहत में बनवारीलाल,ओम साबनिया और रोहिताश


पीडि़ता के वकील हरचंदसिंह सिद्धु पूर्व विधायक

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सोमवार, 28 मई 2012

कीड़ा नगरी पर आवास दुकान:हर समय संकट में घिरे होने की आशंका-खास खबर करणीदानसिंह राजपूत-


सूरतगढ़, कीड़ा नगरी उस जगह को कहा जाता है जहां पर धरती में लाखों कीड़े रहते हैं। कीड़ा नगरी को नष्ट करना या वहां मकान दुकान आदि बनाना भी कीड़ा नगरी को नष्ट करने में ही माना जाता है। कीड़ा नगरी पर मकान अथवा दुकान या किसी भी प्रकार का अन्य निर्माण करना मतलब वहां लाखों कीड़ों की मौत। संभव है कि इतने कीड़ों के जीवन को बचाने के लिए यह मान्यता गढ़ी गई हो कि उजाडऩे वाला व्यक्ति और उसका परिवार संकट में घिरे हुए रहेंगे। कीड़ा नगरी को सींचने का कर्म वर्षों से हो रहा है। कीड़ा नगरी स्थल पर आटा,दलिया, या अन्य अन्नाज व शक्कर कीड़ों को खाने के लिए डालने की परंपरा आज भी है।
कीड़ा नगरी को उजाडऩे पर संकट की बात को सही अथवा गलत माना जाए या नहीं, लेकिन आशंका पर सोचा जाए तो सब कुछ सामने आता है कि कीड़ा नगरी पर आवास या व्यावसायिक निर्माण कराने वाले परेशान रहे हैं या फिर परिवार जन असामयिक मौतों जैसे भयानक खतरों को झेलते रहे हैं। जीवन पर और सम्पति पर इस प्रकार के उतार चढ़ाव आए हैं कि करोड़ों की सम्पति जीर्ण शीर्ण हो रही है या उनके दुबारा निर्माण नहीं हो रहे हैं।
एसबीबीजे के पीछे का इलाका जहां पर मोदी सिनेमा होता था। वहां पर बड़े बड़े नोहरे इस समय खाली पड़े हैं और उनमें घास फूस ऊग रहे हैं। मालिक चाहते हुए भी दुबारा निर्माण नहीं करवा पा रहा।
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रविवार, 1 अप्रैल 2012

गंगाजल मील के नाम से अतिक्रमण आखिर किसने दर्ज करवाए और क्यों करवाए? :खास रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत:


मील उस समय तो विधायक भी नहीं थे-
सूरतगढ़ में गुजर रहे राष्ट्रीय उच्च मार्ग न.15 पर मील के नाम की जगह पर अब कौन काबिज है? मील ने अतिक्रमण की जांच करवाने की मांग की है-
सूरतगढ़, 1 अप्रेल 2012. राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 पर दोनों ओर अतिक्रमणों की दो सूचियां बनी थी जिनमें मील के अलावा अनेक प्रभावशाली लोगों व राजनीतिज्ञों के नाम से करोड़ों रूपयों की जमीन पर अतिक्रमण बताए गए थे। एक पत्रकार कृष्ण सोनी आजाद की लोकायुक्त को की गई शिकायत पर यह जांच हुई थी। इसमें राजस्व तहसीलदार की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई जिसमें उच्च मार्ग के इंजीनियर, पालिका के इंजीनियर आदि व पटवारी आदि थे।
इस जांच में उच्च मार्ग की परिधि को सीमा माना गया व उसके बीच में से नाप लिया गया था। यह सूची 2007 में बनी थी। उस समय गंगाजल मील विधायक नहीं थे, मगर सूरतगढ़ में निवास शुरू हो चुका था।
इस सूची के बारे में ईओ मनीराम सुथार ने यह कहा था कि वे किसी भी रूप में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करके कोई पंगा नहीं लेना चाहते।
यह भी कहा था कि सूची में जिन लोगों के नाम आए हैं उनको पालिका की ओर से नोटिस जारी कर पूछा गया है कि वे किस अधिकार से इस भूमि पर काबिज हैं। ईओ ने बताया था कि कुछ लोगों ने जवाब दिया है, लेकिन दस्तावेज केवल दो जनों ने ही दिए हैं।
अब सवाल यह पैदा हो रहे हैं
1. गंगाजल मील का नाम सूची में था तो नोटिस उनके नाम से आवश्य जारी हुआ होगा?
उस नोटिस का उत्तर क्या आया था? या उत्तर आया नहीं था। इसके अलावा अन्य लोगों के क्या उत्तर आए थे?
2. गंगाजल मील के नाम से जिन स्थानों पर अतिक्रमण बतलाए गए थे, उन स्थानों पर वर्तमान में कौन काबिज हैं? ये लोग कब से काबिज हैं?
3.इस सूची के समाचार आने लगे तब गंगाल मील विधायक बन चुके थे। नगरपालिका कर्मचारियों को मील साहेब के सामने उसी समय यह तथ्य सामने लाए जाने चाहिए थे कि आपके नाम से अतिक्रमण दर्ज हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मील ने चुनाव जीतने के बाद और नगरपालिका में बनवारीलाल का पहला बोर्ड बनने के बाद स्वयं ने घोषणा की थी कि वे अतिक्रमण के खिलाफ हैं। इतना होते हुए भी नगरपालिका ने उनको यह क्यों नहीं बतलाया? यह मामला केवल गंगाजल मील का नहीं अन्य लोगों का भी है? कई लोगों ने तो पालिका में यह लिख कर दिया कि किराएदारों ने अतिक्रमणों पर आने नाम सर्वे में लिखवा दिए थे। कितना महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि सरकारी जमीन को लोगों ने अतिक्रमण करके आगे किराए पर भी चढ़ा दिया और जमीन की मालिक नगरपालिका सोई हुई रही।
4. इयहां पर एक और महत्वपूर्ण सवाल मील पर ही पैदा हो रहा है। मील साहेब ने अपने अतिक्रमण के आरोप को असत्य बतलाते हुए जांच की मांग की है। लेकिन उन्होंने अतिक्रमणों को तुरंत तुड़वाने का नहीं लिखा। अगर अतिक्रमणों को तुड़वाने का लिखा होता तो वह पत्र सराहा जाता और उससे मील की शक्ति ही बनती। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर केवल आवासीय अतिक्रमण नहीं हैं जिनके पट्टे जारी किए जा सकें, इंदिरा सर्किल से मानकसर तक करोडों रूपयों के व्यावसायिक शो रूम बने हुए हैं। व्यावसायिक जगह का नियमन करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा जिनके नाम से अतिक्रमण दिखलाए गए वे लोग वहां रहते भी नहीं थे। उनकी रिहायश अन्यत्र रही और केवल चार दीवारियों को सर्वे में अतिक्रमण माना गया।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण वह रिपोर्ट है आखिर किस तरह से अतिक्रमण माने गए या लिखे गए? वह रिपोर्ट कोई एक दो पेज की नहीं होगी। इसका पूरा खुलासा होना चाहिए।

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