रविवार, 10 मई 2020

पीने पिलाने वाले सरकारी खाते में रोटी मांगने वाले समाजसेवियों के खाते में- करणीदानसिंह राजपूत. सामयिक व्यंग्य लेख -



सरकार ने पीने पिलाने वालों को अपने खाते में जोड़ लिया है और भूखे ,रोटी मांगने वाले,जरूरतमंदों, सामान्य लोगों को धर्म प्रेमियों समाजसेवियों संगठनों के खाते में डाल दिया है।
सरकार की सोच बहुत बड़ी है। जो लोग मांगते रहते हैं उनको धर्म प्रेमियों समाजसेवियों के खाते में डाला है ताकि सरकार का खर्च कुछ नहीं लगे और धर्म प्रेमी समाजसेवी भी खुश होते रहें।
अब बात रही पीने पिलाने वालों की। ये पीने वाले लोग सरकार से कभी मांगते नहीं और नहीं पीने वालों की मांगें खत्म होती नहीं।  इतना अंतर है पीने वालों में और न पीने वालों में। नहीं पीने वाले मांगते हैं और पीने वाले सरकार को देना चाहते हैं। वे सरकार के खजाने को भरना चाहते हैं।
ऐसी स्थिति में आप हम सभी सोचें कि सरकार कहां गलत कर रही है?
वे सरकार को देना चाहते हैं। उनको सरकार क्यों खोए और क्यों छोड़े?
फिर मामूली सौ दो सौ वाली बात भी नहीं है। करोड़ों रूपये का खेल है।
न पीने वाले सरकार से लेते रह कर भी उसकी आलोचना करते हैं,गालियां तक भी निकाल देते हैं।  पीने पिलाने वाले सरकार का खजाना भी भरते हैं और कभी भी सरकार को कोसते नहीं गाली नहीं निकालते।
वे तो हर समय कहते हैं कि सरकार उनका पैसा लेती रहे। उनका तो सरकार को सुझाव है कहना है कि समय की भी पाबंदी क्यों है? सुबह 10 बजे खोलो रात के 8:00 बजे बंद करो। इसके अलावा सूखा दिवस ! यह क्या चक्कर डाल रखा है? अरे!सरकार 24 घंटे चाहे तो वे तो सरकार को 24 घंटे देना चाहते हैं। वे शहर में भी देना चाहते हैं गांव में भी देना चाहते हैं। नेशनल हाईवे पर भी सरकार का खजाना भरना चाहते हैं। सरकार ने नेशनल हाईवे पर दुकान स्टोर ठेके दूर दूर कर दिए।वे जो पीने पिलाने वाले भाई बंधु ट्रैक्टर चलाने वाले और भी अनेक लोग हैं जो नेशनल हाईवे पर भी दिन रात सरकार का खजाना भरना चाहते हैं, उनकी सुनवाई होनी चाहिए।
सरकार को काम धाम चलाने के लिए जो करोड़ों रुपए चाहिए। करोड़ों रुपए कौन देता है? ये पीने पिलाने वाले देते हैं। सरकार की आबकारी नीति में इनके सुझाव शामिल हों बल्कि इनका प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इनका दावा है की पीने वालों का प्रतिनिधित्व रहेगा तो सरकार पर कभी भी आर्थिक संकट नहीं आ सकता बल्कि खजाने में करोड़ों रूपये फालतू से पड़े रहेंगे।
सरकार से जो आटा दाल मांगने वाले हैं वे तो एक पैसा भी देते नहीं और सरकार से लेते हैं तो लेते ही भूल जाते हैं। कभी भी साक्षात्कार लेलो एक ही आवाज मिलती है की सरकार ने कुछ नहीं किया। जनप्रतिनिधि तो इलाके में चुने जाने के बाद आया ही नहीं। टीवी चैनलों के साक्षात्कार यों लगते हैं मानो सभी को एक जैसा ही जवाब देने की ट्रेनिंग दी गई हो। ये साक्षात्कार ऐसे बनाए जाते हैं या रोते बिलखते से होते हैं कि देखने वाले को सच्च में लगने लगता है कि इनसे सचमुच अन्याय हो रहा है।
सबसे बड़ी बात छूट न जाए।
कोरोना वायरस के लोकडाउन चक्कर में इतने दिन से बंदी के कारण कुछ करोड़ लोगों का तो दिमाग चलना ही बंद हो गया। जिन लोगों के दिमाग के कपाट पीने से ही खुलते हैं और तेज भी चलते हैं उनके लिए भी सरकार की पोजीटिव सोच की सराहना की जाए वह भी कम ही होगी। सरकार द्वारा उनकी चिंता करना भी गलत नहीं है। इतने लोग पगला जाएं तो बुद्धि का अकाल पड़ जाए।
कई दिनों के बंद के बाद शराब की दुकानें खुली तो एक ही दिन में करोड़ों रूपये का बढाया हुआ कर सरकारों के खाते में जमा हो गया। ऐसी दुकानदारी और कोई नहीं है।
अब बताओ सरकार की गलती कहां है? संविधान ने सबको बराबर का दर्जा दिया है। सरकार को तो हर व्यक्ति के लिए सोचना होता है इसलिए तो लोकतांत्रिक सरकारें कहलाती हैं।00
सामयिक लेख-

करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ जिला श्रीगंगानगर( राजस्थान)
संपर्क- 94143 81356.
E mail.  karnidansinghrajput@gmail.com
*******

बुधवार, 6 मई 2020

लोकडाउन में बाजारों में कैसे घूमती है आठ दस साल की बच्चियां.पुलिस गश्त नहीं होने का परिणाम


* करणीदानसिंह राजपूत*

सूरतगढ़ 6 मई 2020.

सूरतगढ़ में लोकडाउन है, तो बाजारों में और रेलवे प्लेटफार्म पर आठ दस साल उम्र की ये बच्चियां कैसे घूम रही हैं। आज 6 म ई 2020 की शाम के ये फोटो हैं जो मैंने लिए।

प्रशासन और पुलिस किसकी जिम्मेदारी बनती है? 

यदि कोई अनहोनी हो जाएगी तब किसकी जिम्मेदारी बताने की चर्चा करेंगे। मां बाप परिवार वालों की जिम्मेदारी तो है, मगर बाजारों में किसकी पहरेदारी है? किसकी गश्त होती है? मोहल्लों में गश्त नहीं होने का यह परिणाम है कि बच्चे बच्चियां घरों से निकल कर टोलियों में बाजार तक पहुंच जाते हैं।

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़।

*****



सोमवार, 4 मई 2020

पाकिस्तान अवैध कब्जा किए भारत के गिलगित बालिस्तान क्षेत्र को तुरंत खाली करे-भारत सरकार.


नई दिल्ली 4 मई 2020.

*गिलगित-बाल्टिस्तान पर भारत का पाकिस्तान को कड़ा जवाब- फौरन खाली करो अवैध कब्जे वाले क्षेत्र

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों की "स्थिति में बदलाव" लाने के प्रयासों के लिए पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया और उससे उन्हें खाली करने को कहा है।*


भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में आम चुनाव कराने के पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय के आदेश पर इस्लामाबाद के समक्ष कड़ी आपत्ति जताई है।

पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने हाल के अपने आदेश में, 2018 के “गवर्नमेंट ऑफ गिलगित बाल्टिस्तान ऑर्डर” में संशोधन की इजाजत दे दी थी, ताकि क्षेत्र में आम चुनाव कराए जा सकें। 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को बता दिया गया है कि गिलगित- बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं और पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे से इन क्षेत्रों को तुरंत मुक्त कर देना चाहिए।

पाकिस्तान को एक डिमार्श (लिखित बयान) जारी किया गया है, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश को लेकर विरोध जताया गया है।

भारत ने पाक से कहा है कि पूरा जम्मू और कश्मीर व लद्दाख भारत का अभिन्न हिसा है, जिसमें गिलगित और बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्र भी आते हैं। विदेश मंत्रालय ने आगे चेताते हुए कहा- पाकिस्तान फौरन इन अवैध कब्जे वाले इलाकों को खाली कर दे।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार या उसकी न्यायपालिका को उन क्षेत्रों पर हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं हैं जो उसने “अवैध तरीके से और जबरन कब्जाए” हुए हैं। भारत इस तरह के कदमों को पूरी तरह से खारिज करता है और भारतीय जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों की स्थिति में बदलाव लाने के जारी प्रयासों पर आपत्ति जताता है।

मंत्रालय के मुताबिक पिछले सात दशकों से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के “मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया, शोषण किया गया और उन्हें स्वतंत्रता से वंचित” रखा गया।*


शनिवार, 2 मई 2020

👌भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपको संभाल रहे हैं।सुख दुःख हारी बीमारी सब में लगातार पूछ रहे हैं।


👌भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपको संभाल रहे हैं।सुख दुःख हारी बीमारी सब में लगातार पूछ रहे हैं।
 ऐसे में विधायक,सांसद नहीं पूछे तो दिल में न लें।यह भी हो सकता है कि वे खुद किसी हारीबीमारी में पड़े हों।*
*कोरोना का संकट है दूरी बनाए रखने में ही आपका,परिवार का बचाव है। कोई संभालने नहीं आ रहा।बात नहीं सुन रहा है तो परेशान नहीं हो। कोरोना से बचे हुए हो यही बहुत है और इसके लिए जिस सर्वशक्तिमान की पूजा अर्चना करते हो,बस उसे याद करते रहो।
विधायक सांसद मंत्री और कोई पदाधिकारी न आएं तो भगवान का धन्यवाद करें।रोगों से बचे रहेंगे। इनसे मिलने वाले नजदीक रहने वाले भी दुखी ही रहते हैं और वे रो भी नहीं पाते. अपना दुखड़ा किसी को सुना भी नहीं सकते। रोगों से परेशानी से बचे रहें।
आपका शुभ चाहने वाला,

करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़. राजस्थान.
94143 71356.

सोमवार, 27 अप्रैल 2020

* हवलदारजी,ड्यूटी पर बीड़ी सिगरेट का धुंवा उड़ाते हो,लोकडाउन में कहां से लाते हो?




* हवलदारजी,ड्यूटी पर बीड़ी सिगरेट का धुंवा उड़ाते हो,

लोकडाउन में कहां से लाते हो?

म्हारे शहर के सबते बड़े 

अर लोगां नै सबते घणी सीख

देवण आलै हवलदार जी।

तम से एक बात पूछण का जी कर आया।

ड्यूटी अर उपर ते पुलिस वर्दी पहनी,

बीड़ी सिगरेट के सुट लगाते धुआँ उड़ाते हो। ड्यूटी पर ऐसा नहीं न करते।

मेरा सवाल ड्यूटी पर धुंआ उड़ाने पर ना है जी।ये सवाल डिप्टी करे अर सीआई करते अच्छे लागै।

म्हारा सवाल तम से ये है जी।

लोकडाउन लाग रया सै। 

आपणे शहर में भी लाग रैया सै। 

बीड़ी सिगरेट गुटखा तम्बाकू की तमाम दुकानें रेहड़ियां स्टालें बंद सै।

तम बीड़ी सिगरेट गुटखा कहां तै

कबाड़ लातै हो जी। 

तम लोगां नै सारै दिन सीख देते हो जी

तम नै इतना मालम होवैगा अर होणा भी चाहिए कै इण तै कैंसर हो जाता है जी। फेफड़े,लीवर,गला आंते डैमेज हो जावै है।

तम तो परयावण परेमी भी हो।

 पौधे बांटते कितनी फोटू संस्थाओं कै साथ फेसबुक पर लगाते रहे हो जी।

 बीड़ी सिगरेट गुटखा सारै परयावण नै खराब करते हैं जी। 

तम लोगां गे चालान काटो हो,

थारा चालान कट जावेगा जी।

हम नहीं काटेंगे जी वो काट देगा जी।

तम पढ कै मान जावो जी।

बीड़ी सिगरेट के सुट तमने खराब करेंगे जी। 

ना मानोगे जणा कोई दूसरा हवलदार चौक पर सीख देता मिलेगा जी।

कहणा मान ही लो जी।

*****

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़, भारत.

******





शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

लॉक डाउन तोड़ने वालों का साथ दिया तो आपके चिपट सकता है कोरोना- चुनौती लेख -करणीदानसिंह राजपूत.


भगवान कुदरत नियम तोड़कर बेमौसम बरखा तूफान औले गिरा दे तो उसे कोसते हैं लेकिन यदि कोई नेता छोटू भैया नियम तोड़ देता है तो उससे पूछने में भी डरते हैं।
ईश्वर कुदरत सबसे बड़े को कोसने में डर नहीं लगता तो फिर मामूली से और कुछ काल के लिए लिए के लिए पद पर आए हुए से डर क्यों लगता है? सच कुछ और है।
वाह रे इंसान तू इतना स्वार्थी हो गया! भगवान को तो कोसता है मगर मामूली से आदमी से डर जाता है।
यह डर नहीं यह तेरा स्वार्थ है।
नेता या कोई अधिकारी नियम तोड़ता है और उसका असर किसी और पर होता है तो महसूस नहीं होता क्योंकि
उसके नजदीक चिपके हुए रहते हैं। लेकिन नियम तोड़ने का नुकसान कभी तुम्हारे तक आ गया तब क्या होगा ?
जंगल की आग का भरोसा नहीं होता कि दूर लगी हुई है और कब खुद तक पहुंच जाए।
उससे भी भयानक है कोरोना वायरस। नेताओं को नियम तोड़ने की छूट दी बोले नहीं। लॉक डाउन में नेता ने भीड़ की बोले नहीं।समारोह किया आप बोले नहीं।
यदि उस भीड़ से उपजा,नेता के चिपटा कोरोना तुम्हारे तक आ गया तुम्हारे चिपट गया तो क्या होगा?
जरा सोचो! नेताओं को और किसी भीअधिकारी को नियम तोड़ने की छूट नहीं है। वे लोग जो नियम तोड़ने वाले को बचाते हैं,जांच को दबाते हैं। वे किसी का भला नहीं कर रहे। असल में वे एक ऐसे खतरे को पैदा कर रहे हैं जो दिखाई नहीं देता।
उन्हें लगता है कि कोरोना वायरस दूर है। हमारे क्यों लगेगा?हमारे क्यों चिपटेगा? लेकिन कानून तोड़ने वाले नेताओं और अधिकारियों के साथ में जब मेल मिलाप होगा बातचीत होगी तो वहां से कोरोना आपके भी चिपट सकता है।
इस बात को याद रखना कि जो नियम तोड़ने वालों का साथ देते हैं। ईश्वर उनका भला कभी नहीं करता। उनका समय भी बदल सकता है। उनका संकट काल आ सकता है  जो अपने स्वार्थों के कारण नियम तोड़ने वालों का साथ देते हैं।
*पत्रकार,
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत*
सूरतगढ़. 94143 81356.*
======



गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

प्रशासनिक अधिकारियों पर फेसबुक पर टिप्पणी करने पर सूरतगढ़ में गिरफ्तारी

सूरतगढ़ 23 अप्रैल 2020.

राजस्थान सरकार के सूरतगढ़ के प्रशासनिक अधिकारियों पर फेसबुक पर टिप्पणी लिखने के आरोप में मोनू दाधीच नामक युवक को सिटी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया। मोनू दाधीच को शांति भंग करने के आरोप में सीआरपीसी धाराओं 107/151 में गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आज 23 अप्रैल को राजियासर उप तहसील के मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। मोनू को जमानत पर छोड़ने के लिए तस्दीक शुदा जमानत प्रस्तुत करने का आदेश हुआ है।

मोनू का पिता यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। मोनू के विरुद्ध किसने शिकायत की है यह मालुम नहीं हो पाया है। 

मोनू भाजपा और मोदी समर्थक है तथा फेसबुक में अधिकतर टिप्पणियां भाजपा कांग्रेस आदि को लेकर है। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों पर क्या आपत्तिजनक टिप्पणी की है यह भी मीडिया में नहीं है।




बुधवार, 22 अप्रैल 2020

सूरतगढ़ में सख्ती नहीं - लोगों को लोकडाउन की परवाह नहीं-लोगों पर कार्यवाही हो.


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 22 अप्रैल 2020.

मुख्यबाजार में भी लोग लोकडाउन नियम से नहीं डर रहे। मोटर साइकिल पर दो तीन बैठे निकलते हैं। सीसीटीवी कैमरे सुभाष चौक और महाराणा प्रताप चौक पर लगे हैं जिनका निरीक्षण हर वक्त पुलिस थाने में किया जा सकता है। कोई बीमार को लेजाते वक्त 2 हों तो छूट हो सकती है। बीमार तो छुपा नहीं रह सकता। 

सुभाष चौक से दोपहर को एक मोटरसाइकिल निकली साथ में स्त्री बैठी। दोनों के मुंह भिड़े हुए साफ लग रहा कि आराम से निकल रहे हैं, कानून की कोई परवाह नहीं।

सूर्योदय नगरी मोहल्लों की सड़कें और उन पर बातें करते, मोटर साईकिल चलाते युवा। किसी के मास्क नहीं और कोई एक मीटर की दूरी भी नहीं।

शाम के समय तो टोलियां निकल पड़ती है। 

सुबह छोटे बच्चे बच्चियां रोटी मांगते। घरों के दरवाजों पर  पुराने लोको के आसपास।

रेलवे पुल से रेलवे कालोनी, शिवबाड़ी,आसपास के मोहल्लों की सड़कें लोकडाउन तोड़ते स्त्रियों और युवकों की टोलियां। 


इन इलाकों में शाम को सख्त चैकिंग की जरूरत है। सूरतगढ़ को सुरक्षित रखना है तो सख्ती की जरूरत भी है।

लोकडाउन की कार्यवाही नगरपालिका के कचरा उठाने वाले वाहनों पर लाउडस्पीकर प्रचार तक ही सीमित रह गई है।00




करणी प्रेस इंडिया क्लिक पाठक 14 लाख से पार.


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़,22 अप्रैल 2020.
सच्च को सामने लाने, दबे पिछड़े हुए लोगों की आवाज को उठाने व समाज को जगाने के समाचारों विचारों के सामने लाने के प्रयास में करणी प्रेस इंडिया पाठकों की पसंद में शिखर पर है।
 पाठक 14 लाख से अधिक बार देख कर और आगे बढ चुके हैं। यह ऊंचाई पार करना प्रसन्नता पैदा करने वाली तो है ही और आगे बढने की प्रेरणा देने वाली भी है।
इस साइट को सीधेे ही देेखने या इसके लिंक को फेस बुक मेरे नाम करणीदानसिंह राजपूत पर तथा ऑल वर्ल्ड ब्लॉग संगठन की न्यूज में देख पढ़ कर तत्काल विचार प्रगट करने में पाठक गण भी आगे रहे हैं। ये कदम ऐसे प्रभावशाली रहे हैं कि इनसे निरंतर तेज गति मिली  है।
हमने विभिन्न विचारों को नया विस्तार दिया है जिसमें अनेक नए विषय शामिल किए हैं। व्यक्तियों के बजाय तथ्यों वाले कानून   एवं नियमों को सर्वाेपरि मानते हुए आगे बढे हैं।
महिलाओं व लड़कियों के साथ अपराध बढ़े हैं इसलिए सावधान व सतर्क रहने की जागरूकता के लिए भी पोस्टों को लिखा जा रहा है। कन्याओं को बचाने का अभियान हो  या नशा मुक्ति अभियान हो, उनके समाचार देने में आगे रहे हैं।
कई लोग व संगठन कानूनों से परिचित नहीं होते इसलिए उनको हमारा लिखा हुआ अनेक बार अच्छा नहीं लगता,लेकिन उनकी आलोचनाओं  व टिप्पणियों पर गौर किया जाता रहा है।
विशाल देश में नए नए समाचार तेजी से आते हैं। हमारे क्षेत्र में भी समाचारों का बाहुल्य है इसलिए किसी विषय को पकड़ कर नहीं रखा जा सकता। नए विषय पर भी आगे बढना होता है।
राजनीतिज्ञ​ सत्ताधारी धनबली और भ्रष्टाचारी सदा ही मीडिया को अपने विचारों से चलाना चाहते हैं लेकिन लोगों के साथ रहते हुए सच्चाई को ही आगे लाने के प्रयास में रहे हैं।
बड़े अखबार जिन समाचारों को रोकने में दबाने में व अपनी ईच्छानुसार बदल कर गोलमाल तरह से छापने में समय के अनुसार लगे हुए हैं। ऐसे समय में निर्भीक स्वतंत्र लेखन व समाचार देने का प्रयास रहा है। यही एक महत्वपूर्ण प्रमाण है कि अनेक समाचार बड़े अखबारों में नहीं मिलते जो करणी प्रेस इंडिया में पढ़ने को मिल जाते हैं। अखबारों में व चैनलों में आसपास के समाचार देने में आनाकानी होती है,लोग समाचार देखने को पढ़ने को आतुर रहते हैं लेकिन मिलते नहीं हैं। वे समाचार विचार करणी प्रेस इंडिया में देने का प्रयास रहता है।
राजनैतिक आपराधिक सामाजिक धार्मिक आर्थिक विषय शहरी व ग्रामीण,सरकारी व गैर सरकारी सभी में आगे रहने का प्रयास सदा सफल रहा है।
हमारे समाचार,विचार,टिप्पणियां,लेख कहानियां,कविताएं एवं
फोटो कवरेज आसपास और देश प्रदेश और विश्व में सभी वर्गों द्वारा सराहे जाते रहे हैं।
हमारे असंख्य पाठकों की आलोचनाओं समालोचनाओं ने ही इस ऊंचे शिखर पर पहुंचाया है। उनकी आलोचनाओं समालोचनाओं भरी राय से ही आगे और आगे बढने की प्रेरणा मिली है।

विश्व में कोरोना वायरस की महामारी के कहर में भारत भी शामिल है। हम जनता को इस महामारी से बचाने के हर सरकारी गैर सरकारी कदमों में साथ हैं।

उच्च कोटि की टिप्पणियों व समाचारों के लिए लोग इस साइट पर भरोसा करते हुए देखते हैं।
पाठकों से आग्रह है कि करणी प्रेस इंडिया को देखते रहें व फोलोवर बनें।

www.karnipressindia.com


Mail** karnidansinghrajput@gmail.com

^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^





शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

क्या यही है मेरा शहर? कविता-करणीदानसिंह राजपूत



मेरा शहर बोलता नहीं

मेरा शहर देखता नहीं
मेरा शहर सुनता नहीं

अजब है मेरा शहर

घटनाओं पर घटनाएं

कुछ भी हो जाए

मेरे शहर की आँखें नहीं

सुनाओ किसे  कान नहीं

बोले कैसे मुंह नहीं।

अरे। इसका यह रूप

ताकत का यह स्वरूप

कंकाल कैसे हो गया?

सुना है कहानियों में

कंकाल भी बोल उठते हैं।
--------------------

2-9-2016.

अपडेट 5-5-2017.

अपडेट 11-7-2017.

अपडेट 17-4-2020.

********************

करणीदानसिंह राजपूत,स्वतंत्र पत्रकार,सूरतगढ़।_*********************



यह ब्लॉग खोजें