शनिवार, 25 जनवरी 2020

पगथली में रेत कण न चुभे* कविता- करणीदानसिंह राजपूत


माई डीयर मोंटी,

सारी पेड़ियां 

साफ ।

मेरी मोंटी को

चढना और उतरना।

कहीं थोड़ी सी

धूल भी न लगे

पगथली में 

कोई रेत कण भी

न चुभे।

पगथली तो 

नाजुक है।

चूमने वाली है।

आपका दिन

हंसते मुस्कुराते

बीते।

****

मेरी हथेली में उठाऊं तुम्हारी पगथली।


मेरी हथेली में उठाऊं

तुम्हारी पगथली।


ऐसा प्यार हमारे

तुम्हारे बीच में हो।


तुम्हारी पगथली को

चूम कर इठलाऊं।


बाहों में लेकर  तुम्हें

मस्त मस्त करदूं।


ऐसा प्यार तो

सभी चाहते हैं।


मगर प्रेमिका की

पगथली को चूमना

नहीं चाहते।


मैं तो पगथली को

चूम रहा हूं सालों से।


इसीलिए तो वह

चिपटी है मेरे तन से।


बहुत आनंद मस्ती

मिलती है पगथली में।


आओ, मेरी सुंदरता

कुछ पांव उठाओ।


तुम्हारी पगथली को

भी चूमू सहलादूं।


हम दोनों में से 

कोई बोल पड़ेगा।


कह देगा जल्दी से

लव माई डीयर।


सुदरता तुम सुंदर

पगथली अति सुंदर।


मैं सच्च में चूम लूंगा

पगथली तुम्हारी।


मोरपंख धारी ने

चूमी राधा की ऐड़ी।


जूही की कली सी

राधा सी मोंटी।


तुम्हारी गोरी ऐड़ी

का रसपान करूं।


सच्च में यह

अवसर आएगा।


तुम सो नहीं पाई 

रात भर।


मै भी यादों में

तुम्हारी जागता रहा।


यह कैसा प्रेम है

दोनों के बीच चुपचाप।


तुम हंसती रहो सदा

मुस्कुराती रहो हर पल।


आजकल तो खुश हो

ऐसे ही खुश रहो।


तुम्हारी खुशी ही

मेरी खुशी है।


चाहे मोंटी कहूं

चाहे खूबसूरती कहूं।


आसपास नहीं है

तुम्हारे जैसी खूबसूरत।


इसलिए हंसाता रहता

तुमको हर पल।


बस देखता रहूं

तुम सामने रहो।


****

कविता - श्रंगार प्रीत रस*

करणीदानसिंह 

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

राजस्थान में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम- जरूर पढें

श्रीगंगानगर, 21 जनवरी 2020.

 राज्य में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम 2007 को प्रभावी रूप से अगस्त 2008 से लागू किया गया। अधिनियम के क्रियान्वयन के लिये 19 सितम्बर 2008 को प्रत्येक उपखण्ड स्तर पर अधिकरण तथा प्रत्येक जिले को अपीलीय अधिकरण का गठन किया गया तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी को अनुरक्षण अधिकारी के रूप में अधिसूचित किया गया। पदाधिकारी द्वारा अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त प्रकरणों का निस्तारण किया जाता है। अधिनियम की धारा 31 (1) की पालना में राजस्थान सरकार माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण नियम-2010 जारी किये गये। 

अधिनियम की धारा 23 (1) के अनुसार कतिपय परिस्थितियों में सम्पति के अन्तरण को शुन्य घोषित करने के संबंध में समस्त जिला कलक्टर एवं उपखण्ड अधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश के लिये परिपत्र जारी किया। राज्य में राज्य, केन्द्र सरकार द्वारा अनुदानित राजकीय एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से कुल 45 वृद्धाश्रम संचालित है, जिनमें गरीब वृद्ध निसहाय, निराश्रित, सन्तानहीन, परिवार से प्रताड़ित तथा वृद्ध व्यक्ति आजीविका चलाने में असमर्थ वृद्ध महिला, पुरूष जिनकी आयु 60 वर्ष अथवा इससे  अधिक है, उन्हें आवास, भोजन-वस्त्र, मनोरंजन, चिकित्सा, पत्र-पत्रिका आदि की निशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। 

राज्य में कुल 22 भक्त श्रवण कुमार कल्याण सेवा आश्रम (डे-केयर सेन्टर) संचालित किये जा रहे है। जिनमें उनकी आवश्यकताओं जैसे चिकित्सा सेवा, प्रौढ शिक्षा, धार्मिक प्रवचन, धार्मिक स्थलों का भ्रमण एंव निशुल्क चाय, अल्पाहार, पत्र-पत्रिकाएं व मंनोरजन आदि की सुविधाये उपलबध कराई जाती है। वर्तमान में वरिष्ठ नागरिकों के पुनर्वास एवं सरंक्षण की दिशा में समुचित कार्य करने के लिये विभाग द्वारा राजस्थान राज्य वरिष्ठ नागरिक कल्याण बोर्ड का गठन किया गया। 

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सोमवार, 20 जनवरी 2020

श्रीगंगानगर-प्रभारी सचिव ने टिड्डी प्रभावित क्षेत्र का किया दौरा

श्रीगंगानगर, 20 जनवरी 2020.

भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं जिले के प्रभारी सचिव श्री वैभव गलरिया ने सोमवार को श्रीगंगानगर जिले के टिड्डी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने टिड्डी से प्रभावित किसानों से बातचीत की तथा जिन खेतों में टिड्डी का अधिक प्रभाव था, वो फसलें भी देखी। उन्होंने टिड्डी मंडल, कृषि विभाग तथा किसानों के सहयोग से टिड्डियों की रोकथाम पर चल रहे छिड़काव कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। श्री गलरिया ने कहा कि जिन फसलों का नुकसान हुआ है, उसकी गिरदावरी तथा बीमा कम्पनी द्वारा सर्वें का कार्य जल्द पूरा कर लिया जाये तथा जिन किसानों की फसल का नुकसान हुआ है, उन्हें बीमा कम्पनी तथा आपदा राहत कोष से नियमानुसार राहत प्रदान की जायेगी। प्रभारी सचिव ने चक 4 केएएम, 5 केएएमए, 1केबीएम, 2केबीएम, 1बीएनडब्ल्यू सहित अन्य गांवों का दौरा कर प्रभावित फसलों को देखा तथा उपस्थित किसानों से बातचीत की। इस अवसर पर तहसीलदार तथा कृषि विभाग के उपनिदेशक श्री जी.आर.मटोरिया व स्थानीय अधिकारी मौजूद थे। 

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मंगलवार, 7 जनवरी 2020

सुंदरता कराती रहे तिल के दर्शन- कहानी- करणीदानसिंह राजपूत.




सुंदरता गहरी नींद में चित्त सो रही थी।
समय देख रहा था।
खुले गले के ब्लाउज से गले के नीचे हंसुली के पास नीचे काला बड़ा सा तिल सुंदरता को और अधिक बढा रहा था।
सिर पर से ओढनी खिसक जाने से मुखड़ा और पैरों तक का आकर्षक लुभाने वाला था।
गले के नीचे का तिल वह ढक कर रखती लेकिन कभी कभार समय को दिख ही जाता। ढीले गले के ब्लाउज में तो दिख ही जाता।
बहुत बार वह ढक नहीं पाती। काम में व्यस्त होने के कारण ध्यान नहीं होता तब अनेक बार समय को बहुत पलों तक यह आकर्षण दिखता रहता।
समय की नजरें इस आकर्षण से हटती नहीं। समय को इस तिल के दर्शन शुभ होते और पूरा दिन आनंद से गुजरता।
समय चाहता रहता कि बस,दर्शन होते रहें चाहे थोड़े ही हो जाएं। ज्यादा हो जाएं तो मन मयूर सारे दिन नाचता रहता।
यह विश्वास ऐसा था कि तिल के दर्शन के लिए समय को सुंदरता के आसपास भी रहना होता। बार बार देखना भी होता कि न जाने कब ओढनी हटे और दिख जाए।
सुंदरता गहरी नींद में और ओढनी हटी हुई। तिल के दर्शन। बड़ा अच्छा मौका। अच्छी तरह से देखने का। समय की नजरें एकटक तिल पर ही टिकी थी। तिल को दिल में उतारने का सुंदर अवसर था और यही काम हो भी रहा था।
समय की यह सोच भी चल रही थी कि रोजाना ही दर्शन करादे तो शुभ दर्शन से रोजाना ही आनंद से दिन बीते और कोई न कोई लाभ भी होता रहे।
यह सोच गलत भी नहीं।
किसी चीज के दिखने से दिन आनंद में रहे लाभ हो तो उसके दर्शन करने के लिए हरेक कोशिश भी करता है।
समय भी यही कोशिश करता रहता। यह कोशिश रोजाना होती।
कभी कभी सुंदरता भी नहीं ढकती। मालूम हो जाता फिर भी नहीं ढकती।

अभी तो सुंदरता नींद में थी।
समय तिल के शुभ दर्शन को ऐसे में क्यों छोड़े और फिर यह विश्वास भी।
आज तो बहुत बड़ा लाभ होगा तो जी भी नहीं होता दूर हटने का।
समय को यह मौका भगवान ने ही दिया है तभी तो सुंदरता यों मस्त नींद में और ओढनी हटी हुई।
समय उसका संपूर्ण मुखड़ा देख देख और तिल के शुभ दर्शन कर ईश्वर को धन्यवाद भी लगातार दे रहा।
समय की यह प्रार्थना भी हो रही थी कि सुंदरता इस तिल के दर्शन रोजाना करवादे।
रूप की रानी का मुखड़ा,सेब सरीखे कपोल,सुंदर गले से नीचे तक। गोरे पांव ऐसे की अंगूठे अंगुलियों को चूमने का दिल चाहे। अभी ऐसा ही मौका क्योंकि सुंदरता तो गहरी नींद में थी।
समय की नजरें हाथों पर और तराशे हुए नाखूनों पर भी घूमी। मन में धीमे से हाथ उठा कर चूम लेने का आया। समय झुका और एक हथेली को चूम लिया।
समय तो सभी ओर घूमता।
उसने भी सुन रखा था कि किसी रूपसुंदरी अफ्सरा,परी के गले और छाती के बीच काला तिल हो और उसके दर्शन हो जाए तो शुभ ही शुभ।

समय को धरा पर एक सुंदरता दिख ही गई जिसके दोनों अंगों के बीच  ठीक उसी जगह काला तिल था जिसके दर्शन से आनंद मिलने का सुन रखा था।
समय उसी के आसपास ही अधिक रहता।
उसे यदा कदा थोड़े थोड़े दर्शन होते भी रहते, मगर अभी तो सुंदरता नींद में दर्शन चाहे जितने।
समय निहारता रहा।
समय जो हर वक्त हर जगह बेरोकटोक विचरण करता रहता है।उसे कोई नहीं देख पाता वही ईश्वर से प्रार्थना करने लगा कि सुंदरता जागते हुए भी दर्शन कराती रहे।
बस।
उसे और कुछ नहीं चाहिए।
केवल दर्शन।
उसके तिल के दर्शन।
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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़.
94143 81356.

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रविवार, 5 जनवरी 2020

वह नहीं आई मैं इंतजार करता रहा- कविता-करणीदानसिंह राजपूत.


मैं निहारता रहा

धरती से आकाश

शाम हो गई,

वह नहीं निकली

कल का भी कोई

वचन वादा नहीं है।


इंतजार और इंतजार

मै करूं चाहे तुम करो

कल भी नहीं आई 

तब भी कुछ नहीं होगा।


वह जब आएगी तब 

हम सभी खुशामद करेंगे

किसी की हिम्मत ही नहीं

शिकायत करने की।


बादलवाही शीतलहर में

खूबसूरती ने फोन मिलाया

और पूछा धूप बोल रही हो

तुम आई नहीं आज

परेशान हो गए 

इंतजार करते करते।


स्पीकर आन में 

सुनाई पड़ा

मेरा तो कल का भी,

भरोसा नहीं है।


हां,मेरे से पहले 

वर्षा आ सकने की

पकायत है,

वह अपने साथ 

ओले भी ला सकती है।


खूबसूरती प्यार से बोली

वर्षा की बात छोड़

तूं तो मेरी सहेली है 

आ कल गले मिलेंगे।


धूप ने उत्तर दिया

तेरी बात तो ठीक है

मगर वर्षा भी मेरी सहेली है

उससे भी तो नाता है।


खूबसूरती बोली

मानी तेरी बात

पर वह ओले क्यों 

लाएगी अपने साथ।


धूप का उत्तर था

वह उसका भाई है

नाराज न हो जाए इसलिए

कभी कभी उसे भी

रखना पड़ता है साथ।

कुछ भी हो

मै कल भी उसके निकलने का

इंतजार करूंगा

और मैं,

कुछ कर भी नहीं सकता।

***

करणीदानसिंह राजपूत,

सूरतगढ़.

94143 81356.

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कटे प्याज में रोगाणुओं का जमाव: तुरंत काट खाएं



*मानो या ना मानो यह पूर्णतया सत्य है।

देर से कटी प्याज का कभी उपयोग ना करें।प्याज हमेशा तुरंत काट कर खाएं।कटी रखी प्याज दस मिनिट में अपने आस पास के सारे कीटाणु अवसोशित कर लेती है।यह वेज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुका है।जब भी किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप फैले घर में सुबह शाम हर कमरें में प्याज काट कर रख दें।बाद में उसे फैंक दें।सुरक्षित बने रहेंगें।*

*जब कभी भी फ़ूड पॉइसनिंग के केस अस्पताल में आते हैं तो सबस पहले इस बात की जानकारी ली जाती कि मरीज़ ने अंतिम बार प्याज कब खाई थी. और वे प्याज कहाँ से आई थीं ,(खासकर सलाद में ) तब इस बीमारी के लिए या तो प्याज दोषी हैं या काफी देर पहले कटे हुए "आलू "*

*प्याज बैक्टेरिया के लिए "चुंबक "की तरह काम करती  हैं खासकर कच्ची प्याज।*

*आप कभी भी थोड़ी सी भी  कटी हुई प्याज को देर तक रखने की गलती न करे ये बेहद खतरनाक हैं*

*यहाँ तक कि किसी बंद थैली में इसे रेफ्रिजरेटर में रखना भी  सुरक्षित नहीं है।*

*प्याज ज़रा सी काट देने पर ये बैक्टेरिया से ग्रसित हो सकती है औए आपके लिए खतरनाक हो सकती है। यदि आप कटी हुई प्याज को सब्ज़ी बनाने के लिए उपयोग कर रहें हो तब तो ये ठीक है मगर यदि आप कटी हुई प्याज अपनी ब्रेड पर रख कर खा रहें है तो ये बेहद खतरनाक है ऐसी स्थिति में आप मुसीबत को न्योता दे रहें हैं। याद रखे कटी हुई प्याज और कटे हुए आलू की नमी बैक्टेरिया को तेज़ी से  पनपने में बेहद सहायक होता है।*

*कृपया ध्यान रखे कि "प्याज को काट कर अगले दिन सब्ज़ी बनाने के लिए नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये बहुत खतरनाक है यहाँ तक कि कटी हुई प्याज एक रात में बहुत विषाक्त हो जाती है क्योंकि ये टॉक्सिक बैक्टेरिया बनाती है जो पेट खराब करने के लिए पर्याप्त रहता है "*

5 मार्च 2018.
अपडेट 5 जनवरी 2020.








गुरुवार, 2 जनवरी 2020

सुंदरता को जी भर चूमा धूप ने-काव्य शब्द- करणीदानसिंह राजपूत


धूप खिली और सुंदरता मुस्कुराई,
धूप में छत पर घूमी आनंदित हुई
धूप को भी मौका मिला छूने का,
और धूप ने सारे तन को चूम लिया।
सुंदरता के कपोल लाल सुर्ख हुए
धूप के स्पर्श से मन खिला
होंठ प्रेम गीत गुनगुनाने लगे
गौरे गौरे पैर नाचने लगे।
सुंदरता के मन में कुछ कुछ
होने लगा कि उनके नयन भी
निहारलें सिर से पांव तक,
रसपान रूप का करलें
जितना चाहे जी भर कर।
धूप ने जी भर चूमा,
वे भी आलिंगन करलें जी भर कर।
मैं नहीं झिझकूंगी नहीं शर्माउंगी,
वे झिझके रुक गए तो
आगे बढ मैं कर लूंगी आलिंगन
ऐसी धूप फिर न जाने कब खिले।
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काव्य शब्द- करणीदानसिंह राजपूत,
सूरतगढ़.
94143 81356.
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बुधवार, 1 जनवरी 2020

सुंदरता, सजी संवरी रहना- काव्य शब्द-करणीदानसिंह राजपूत


सुंदर होना अच्छा है,

सुंदरता गहना है,

सुंदरता शिंगार है,

सुंदरता से मुखड़ा निखरता

सुंदरता को सजा कर रखना

संवार कर रखना।

सुंदरता से प्यार पनपता

जीवन में खुशियां आती

सभी निगाहें दर्शन को तरसती

कुछ पल को आ जाती।


जिनके आसपास है सुंदरता

वे देखते हर पल सुंदरता

वे हैं बड़े भाग्यशाली।


तुम्हारी सुंदरता जैसी नहीं

आसपास कोई दूजी सुंदरता

देखलो घूमघाम मोहल्ला

न अड़ोस पड़ोस में।

सुंदरता को संभाल कर रखना

हर पल हर दिन

इससे रहता जोश

मन तन में

जीवन रंग बिरंगा रहता

यौवन की बहार में

मौसम का आनंद रहता।

सुंदरता की सुगंध और

तन मन की महक

संवारे संभाले रखना।


हे सुंदरता,

बस इतना कहना मानना

आशा और विश्वास है

तुम अपने को सदा

निखारती रहोगी।

***

काव्य शब्द - 

करणीदानसिंह राजपूत,

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