गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

ममता सारस्वत को पोषाहार घोटाले से बचाने में सूरतगढ़ प्रेस मुंह क्यों छिपा रही है?


प्रेस क्लब पत्रकार वार्ता आयोजित कर ममता का बयान लेकर बता सकता है सच्च।
सूरतगढ़ में पोषाहार गायब होने में कई बार जाँचें हो गई:99 हजार की रिकवरी के नोटिस जारी हो गए:
लेकिन प्रेस क्लब के सदस्य पत्रकारों ने पांच दस लाइन की न्यूज तक नहीं बनाई:
ममता सारस्वत सूरतगढ़ की बेटी है तो फिर सूरतगढ़ के पत्रकारों का कुछ तो सोच होगा?
स्पेशल रिपोर्ट-
सूरतगढ़। महिला बाल विकास विभाग सूरतगढ़ में बच्चों के लिए आने वाले पोषाहार में लाखों की गड़बड़ी होने और जाँच में सारस्वत धर्मशाला में काफी संख्या में भरे हुए थैले सारस्वत धर्मशाला में बरामद होने,कई बार जांच हो जाने,93 हजार रूपए की तत्कालीन सीडीपीओ व स्टोरकीपर से वसूली के आदेश हो जाने के समाचार श्रीगंगानगर से पत्रिका में लगते रहे हैं।
जिस अविधि में यह गड़बड़ी हुई उस अवधि में ममता सारस्वत यहां पर महिला बाल विकास अधिकारी यानि कि सीडीपीओ थी। आजकल वे हनुमानगढ़ में इसी पोस्ट पर हैं।
ममता सारस्वत का पीहर सूरतगढ़ में है और उनके पहले राजस्थान की अधिनस्थ सेवाओं में चयन होने,सर्विस लगने के बाद तथा अब सन 2012 की राजस्थान प्रशासनिक सेवा प्रतियोगिता में चुनी जाने के समाचार लगे हैं तथा बधाई के बोर्ड अभी लगे हुए हैं।
ममता सारस्वत के कार्यकाल में पोषाहार में गड़बड़ी हुई वह निश्चित रूप से गरीब बच्चों के मुंह में जाने वाला था। उसमें जो भी दोषी हो वह बचना नहीं चाहिए।
लेकिन सूरतगढ़ के जो पत्रकार चयन होने पर कसीदे काढ़ते रहे हैं,उन्होंने कभी एक समाचार भी नहीं बनाया। सूरतगढ़ के पत्रकारों ने यह जाानने की कोशिश भी नहीं की कि सच्च क्या है?
श्रीगंगानगर से पत्रिका में कई समाचार छपे। लेकिन यहां के प्रेस क्लब के अध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत व सदस्य पत्रकारों व अखबारों ने कभी भी ममता के लिए एक लाइन लिखने की कोशिश नहीं की। ममता से पूछा तक नहीं। उसका पक्ष भी जानने की कोशिश क्यों नहीं की? ममता के बचाव में खोजबीन करना तो दूर रहा।
सूरतगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष व सदस्य पत्रकार तथा अन्य पत्रकार जो स्वागत सत्कार करते रहे हैं वे अब पीछे क्यों हैं?
प्रेस क्लब के सदस्य बाहर के अधिकारियों को बचाने में उनको क्लीन चिट देने में ऐसे समाचार छापने में आगे रहे हैं तो फिर ममता तो सूरतगढ़ की है उसके लिए एक लाइन क्यों नहीं लिखी।
सूरतगढ़ के थानाधिकारी सीआई रणवीर साईं पर आरोप था कि पकड़े गए तीन चोरों को छोड़ दिया गया। आंदोलन चला। जांच की गई और पुलिस की जाँच में एक हैडकांस्टेबल को आरोपी बना कर जाँच का पत्र थमा दिया गया। पत्रकारों ने घटना की सच्चाई पर दो लाइन नहीं लिखी। सीआई को क्लीन चिट का शीर्षक लगा कर समाचार छापा। यह संदेश पत्रकार किसको देना चाह रहे थे? इस सीआई के कार्यकाल में आधी कीमत सस्ती कीमत पर सामान देने की बुकिंग के नाम पर लाखों रूपए लेने वाले थाने ले जाने के बाद छोड़ दिए गए थे।
अब विकलांगों को नौकरी देने के नाम पर तीस तीस हजार के ड्राफ्ट लेने वाले कस्टडी में तो लिए गए हैं मगर कार्यवाही क्या हुई है? कसीदे काढऩे वाले पत्रकार कैसे भूल गए वह घटना। क्लीन चिट का समाचार इस तरह से लगाया मानों कोई बहुत बड़ा किला फतह करके थानाधिकारी आया हो और अब सदा के लिए यहां पर पोस्टिंग हो गई हो। नगरपालिका के ईओ पर आरोपों के समाचार व एसीबी की जाँचें होने व कार्यवाही के समाचार भी नहीं लगाए गए। उपखंड अधिकारी के आवास पर नगरपालिका के 8 लाख रूपए लगा दिए गए। गलत लगाए गए लेकिन पालिका को हर घोटाले में क्लीन चिट देकर बचाव करते रहे। बाहरी अधिकारियों को बचाने में जब आगे आते रहे। तब अब क्या हो गया कि ममता सूरतगढ़ की होते हुए भी उसके लिए कोई समाचार नहीं बनाया गया?

बुधवार, 7 अक्टूबर 2015

आमरण अनशनकारी गुरूशरण छाबड़ा एसएमएस में भर्ती कराए गए:अनशन जारी:


2 अक्टूबर से शराबबंदी को लेकर आमरण अनशन पर थे:6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराए गए:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 7 अक्टूबर। पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा का स्वास्थ्य गिरने पर पुलिस ने 6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराया। छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती से शहीद समारक जयपुर पर आमरण अनशन पर थे। संपूर्ण राजस्थान में उनकी इन मांगों पर अनेक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
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रविवार, 4 अक्टूबर 2015

वर्कशॉप के प्लॉट नं 174 व 175 के टुकड़े करना कानूनी गलत:जाँच रिपोर्ट में माना:


विधि सलाहकार की राय भी नहीं मानी गई:
उप निदेशक स्वायत शासन विभाग बीकानेर ने जाँच रिपोर्ट में माना:

पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने की थी शिकायत:
- स्पेशल रिपोर्ट  करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु ने दो वर्ष पूर्व मई 2013 में मुख्य सचिव व स्वायत्त शासन विभाग को अनेक मुद्दों पर नगरपालिका की शिकायत की थी। जिसमें वर्कशॉप ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के प्लॉट नं 174 व 175 के  खरीदारों द्वारा टुकड़े करना कानूनी गलत बताते हुए ईओ राकेश मेंहदी रत्ता और पृथ्वीराज जाखड़,पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर आरोप गलाए गए थे। सिद्धु ने आरोप में लिखा था कि इससे सरकारी कोष को भी हानि पहुंचाई गई।
उप निदेशक स्वायत्त शासन विभाग बीकानेर ने 31 मई 2013 को मौके पर पहुंच कर जांच की और उसकी रिपोर्ट बना कर 10 जून 2013 को शासन उप सचिव ,स्वायत्त शासन विभाग विभाग जयपुर को भेज दी। वह रिपोर्ट वहां पर 12 जून 2013 को पहुंच गई। इसके बाद नगरपालिका को भी यह मिली। नगरपालिका सूरतगढ़ में तो हाथी जैसे मैटर तक गायब हो जाते हैं सो यह रिपोर्ट भी दब गई। अब यह रिपोर्ट हाथ लगी है।/ सिद्धु ने यह शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में अलग से दी हुई है।/
रिपोर्ट में लिखा गया है कि उक्त विभाजन व नामान्तरण किए जाने से ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के उक्त भूखंड संख्या 174 व 175 का उपयोग  प्रयोजन एवं ले आऊट विचलित हो गया है। नगरपालिका की पत्रावलियों के अवलोकन से स्पष्ट है कि नगरपालिका के विधि सलाहकार द्वारा स्पष्ट रिपोर्ट लिखी गई कि उक्त उपविभाजन राज्य सरकार शहरी क्षेत्र /उप विभाजन पुनर्गठन सुधार/ नियम 1975 व राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धरा 171 के अध्यधीन परिपत्र दिनांक 19-2-2010 के तहत कार्यवाही की जाए। 
लेकिन नगरपालिका सूरतगढ़ ने उक्त अधिनियम व परिपत्रों की अवहेलना करते हुए उप विभाजन की कार्यवाही की। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास विभाग के परिपत्र क्रमांक प.10/65/न.वि.वि.3/04 दिनांक 19 फरवरी 2010 का पूर्णत: उल्लंघन करते हुए नगरपालिका ने उक्त भूखंडों का उप विभाजन किया है। भूखंडों का उपविभाजन करने से नीलामी में बेचे भूखंडों का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया है। इस कारण से उक्त क्षेत्र का लैंड यूज /भू उपयोग भी प्रभावित हुआ है। इसके लिए भूमि शाखा के लिपिक व अधिषाषी अधिकारी स्पष्ट रूप से दोषी हैं।
इस प्रकरण का मुकद्दमा भ्रष्आचार निरोधक ब्यूरो में भी दर्ज हो गया है तथा जाँच तेजी से चल रही है। जिन लोगों को लाभ हुआ है उनको भी आरोपी माना गया है। ब्यूरो में सभी के बयान भी होने की सूचना है। एक संजय धुआ के बयान नहीं होने की सूचना कुछ दिन पहले तक थी।
एक सूचना यह भी है कि प्रभावित व्यक्तियों में से किसी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में निगरानी याचिका भी सीआरसीपी धारा 482 के तहत लगा दी है जिसकी तारीख 16 अक्टूबर बताई जा रही है। उधर शिकायतकर्ता स.हरचंदसिंह सिद्धु ने बताया उक्त सीआरसीपी धारा 482 के तहत दायर की गई याचिका में शिकायतकर्ता को भी सुना जाने का नियम है। उनके पास अभी तक कोई सूचना नहीं है।

नींद न जाने कितनी दूर थी,,,,कविता.



नींद न जाने कितनी दूर थी
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
प्यार की चाहत में
मधुर क्षण पाने को
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
धीमी धीमी सी हवा
उड़ा रही थी आँचल।
तुम संवारती रही बार बार
कपोलों पर आती
झूमती लटों को।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
कपोल सुर्ख चाँदनी में
बेचैनी में भी शरमा रहे थे
गेसू काले काले झिलमिल करते
मिलन सुख की आस में,
इतरा रहे थे।
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
तुम मिलन की आस में
नीची निगाहें धरती पर गड़ाए
मौन में मंथन कर रही थी।
मैं पाने की चाहत में
शांत था तुम्हें देखते हुए,
न जाने कब लहर आ जाए
और आलिंगन सपना बन जाए।
दोनों का धैर्य चरम पर था
लहर के इंतजार में।
न तुम खोना चाहती थी
न मैं खोना चाहता था।
मैं देखते हुए तुम्हें,
जाग रहा था।
तुम बेचैन थी
नींद न जाने कितनी दूर थी।
तुम मेरे समीप थी,
मैं तुम्हारे समीप था।
मिलने को आतुर थे दोनों,
बीच में हवा की दीवार थी।
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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.

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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

पाकिस्तान के कब्जे का कश्मीर छुड़ाने की आशा बलवती:मोदी पर आशा:


- करणीदानसिंह राजपूत -
पाकिस्तान ने देश की आजादी के तुरंत बाद ही काबायलियों का आक्रमण करवाया और कश्मीर की आजादी के नाम पर एक हिस्से पर अतिक्रमण कर लिया। कश्मीर के राजा हरिसिंह ने भारत में मिलने का रास्ता अपनाया था। लेकिन उस समय के राजनेता जवाहरलाल नेहरू की राजनीति से यह मामला यूएनओ में चला गया। उसके बाद से आजतक पाकिस्तान में कश्मीर के नाम पर राज चलते हैं। और राज बदलते हैं। पाकिस्तानी सेना चाहे जो करे लेकिन वहां के सत्ताधारी चूं तक नहीं कर पाते। वे केवल समूचे कश्मीर की आजादी का राग अलापते रहते हैं।
पाकिस्तान ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा कर रखा है वहां पर दुनिया में चल रहे विकास को नहीं देखा जा सकता। पाकिस्तान वहां पर ऐसे राज कर रहा है मानो वहां के रहने वाले उसके गुलाम हैं। वहां के रहने वालों को रोजी रोटी तक का संकट आए दिन झेलना पड़ता है। लोग विरोध में आवाज तक उठाने में कतराते रहे हैं। आवाज उठाने पर सेना गोलियों से भून देती रही है। तंग हाल फटे हाल लोगों ने दुनिया में विकास को देखा है। वे लोग भारत वाले कश्मीर में भी विकास की बहती गंगा को देखते हैंञ तो उनके दिल दिमाग में भी आने लगा है कि वे पाकिस्तान में ठगे जा रहे हैं और आने वाली पीढिय़ां भी गुलामी जैसा जीवन जीयेगी।
पाकिस्तान ने वहां पर एक गड़बड़ी और कर रखी है कि काफी इलाका सड़क के नाम पर चीन के हवाले कर दिया है।
अब वहां पर स्वतंत्रता की आवाज उठाई जाने लगी है। वहां की सत्ता और सेना का कुछ कुछ विरोध होने लगा है। लोग अपने घरों से बाहर आकर विरोध करने लगे हैं।
वहां पर इतना ही नहीं भारत के पक्ष में प्रदर्शन होने लगे हैं। अब अधिक समय तक उनको गुलाम बनाए रखना संभव नहीं है।
लोगों को अब विश्वास होने लगा है कि भारत के प्रधानमंत्री कोई साहसिक कदम उठाएं और पीओके यानि कि पाकिस्तान ओक्यूपाई कश्मीर आजाद हो जाए और भारत में वापस आ जाए।
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शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

तुम्हारे मन के समंदर में उतरा:




तुम्हारे मन के समंदर में
उतरा और उतरता ही
चला गया।
गहरे तल तक असंख्य
दरद की चट्टाने,
और एक से एक जुड़ी।
मैं बाहर निकालने को आतुर
दरद की चट्टानों को,
एक मुस्कान ला दूं,
तुम्हारे चेहरे पर,
जो वर्षों से दुखों में डूबता रहा।
चट्टान तो एक को भी
निकालना दुष्कर,
और मैं असंख्य को निकालने को आतुर।
मुझे विश्वास है
अपने संकल्प पर,
चट्टानों को कंकड़ों में
बदल डालूंगा।
निकाल डालूंगा बाहर,
तुम्हारे मन को अब नहीं
लगने दूंगा कोई खरोंच।
ये अपने और ये अपना समाज
खुशी देना क्या जाने?
युग बदल गए
इनको समझाते।
इनकी मनमानियों से कितने
नष्ट हो गए झगड़ों में।
कृष्ण ने भी सोचा होगा
अर्जुन को गीता ज्ञान देते।
विनाश हो जाएगा दुष्टों का,
लेकिन दुष्टता न कम होगी न खत्म होगी।
बस,
नए दुष्ट पैदा हुए
बनता गया नया संसार,
इस युग के दुष्ट
चुभोते रहे छुर्रे कटारें।
मगर कोई साथ नहीं आया
धर्म निभाने,
देखते रहे अपने और रिश्तेदार।
शक्तिशाली समाज देखता रहा,
दुष्टों के हाथों में पुष्प कलियां
आवरण में छुर्रियां कटार,
और सुनता रहा
मंच पर झूठी घोषणाएं।
तुम्हारे मन में जो चट्टानें
दुखों की पड़ी हैं,
वैसी ही असंख्य लोगों के
मन में भी हैं।
मैं चाहता हूं कि सबके
मन और तन को
बचालूं दुष्टों से।
सच,क्या मैं कर पाऊंगा ऐसा
मेरे संकल्प से।
मेरा संकल्प सदा मजबूत रहा है।
बस। अब आँसू न बहाना।
वर्षों बीता दिए दुखों में
अब कुछ दिनों का इंतजार करना।
.......


करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356
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रविवार, 20 सितंबर 2015

एसडीएम के सरकारी आवास पर नगरपालिका के 8 लाख क्यों लगे?पार्षदों ने नहीं पूछा


- करणीदानसिंह राजपूत -
एसडीएम के सरकारी आवास पर नगरपालिका सूरतगढ़ के लगाए गए 8 लाख रूपयों के बारे में बोर्ड की बैठक में किसी भी पार्षद ने अध्यक्ष काजल छाबड़ा से सवाल नहीं किया कि यह रकम गैरकानूनी रूप से क्यों लगाई गई? नगरपालिका ने एसडीएम के सरकारी आवास की चारदीवारी निर्माण के टेंडन निकाले और निर्माण करवाया। एसडीएम का सरकारी आवास राजस्व विभाग का है तथा वहां पर सार्वजनिक निर्माण विभाग ही निर्माण व मरम्मत आदि करवाता है। अन्य किसी भी नगरपालिका द्वारा ऐसा निर्माण करवाना सामने नहीं आया है।
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने आरोप लगााया था कि एसडीएम के सरकारी आवास की मरम्मत के लिए जिला कलक्टर ने 4 लाख रूपए दिए थे तब वहां पर आठ लाख रूपए लगाए जाने का पूरा प्रकरण ही घोटाला है। सिद्धु के आरोप के बाद में पालिका बोर्ड की बैठक हुई थी मगर फिर भी सवाल नहीं किए गए।
नगरपालिका एक तरफ तो फंड की कमी का रोना रोती रहती है और दूसरी तरफ यह फंड नियमों के विपरीत खर्च करना आश्चर्यजनक लगता है।
नगरपालिका की दमकल की मरम्मत कराने के लिए ढाई लाख रूपए चाहिए जो नहीं हैं। उसके अभाव में पुरानी दमकल की मरम्मत नहीं हो रही है। ढाई लाख नहीं है और आठ लाख थे जो खर्च कर दिए गए। इस बाबत पार्षदों की ओर से कोई सवाल नहीं पूछा जाना साबित करता है कि पार्षद अपने वोटरों व नगर वासियों के प्रति कितने वफादार हैं?
दो बार आग लगने पर पालिका की नई छोटी दमकल चल ही नहीं पाई। उसमें पैट्रोल ही नहीं था। दो बार यह घटना हुई और आश्चर्य है कि पार्षदों ने बड़ी दमकल का तो कहा लेकिन पैट्रोल नहीं होने पर सवाल नहीं किया। आखिर किसी कर्मचारी की तो जिम्मेदारी थी। उसके विरूद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई? आखिर दमकल का पैट्रोल कहां पर जाता है? यह मालूम करना तो पार्षदों का ही फर्ज बनता है।
खाँचा भूमि आवंटन की पत्रावलियां कभी भी पार्षद देखते नहीं और सभा में ये रखी तक नहीं जाती। बस पहले चर्चा और बाद में प्रस्ताव पारित। चाहे खाँचा भूमि के लिए आवेदक हकदार हो या न हो पार्षद सवाल नहीं करते। खाँचा भूमि में सड़क की भूमि मांग ली जाए और पार्षद कोई सवाल ही न करे कि सड़क की भूमि पर अवैध कब्जा कैसे हुआ? पहले हुआ तब तोड़ा गया। दुबारा कैसे हुआ? उस कब्जाधारी को खाँचा भूमि देने के बजाय तो आपराधिक मुकद्दमा दर्ज करवाया जाना चाहिए जो पालिका नियमों में स्पष्ट लिखा हुआ है।
नगरपालिका के घोटालों की रिपोर्टं अखबारों में छपती रहती है लेकिन पार्षद उस बाबत भी कोई सवाल नहीं करते। भ्रष्टाचार निरोधक विभाग रिकार्ड ले जाता है मगर पार्षद बोर्ड की बैठक में सवाल नहीं करते।
सड़कों नालियों और पुलियों के निर्माणों में घोटालों के आरोप लगते रहते हैं मगर पार्षद सवाल नहीं करते।
आखिर पार्षद किसके प्रति अपना दायित्व निभाते हैं?

नगरपालिका के ईओ इंचार्ज रहे तरसेम अरोड़ा के विरूद्ध एसीबी में परिवाद


सूरतगढ़। नगरपालिका के इंजीनियर तरसेम अरोड़ा के विरूद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दो पार्षदों विनोद पाटनी और लक्ष्मण शर्मा की शिकायत पर परिवाद संख्या 187/15 दर्ज हुआ है। ब्यूरो की श्रीगंगानगर चौकी में इन पार्षदों के बयान दर्ज होने के बाद जाँच आगे बढ़ेगी।

बी.एड कक्षाओं में फर्जी हाजिरी से डिग्री -कानून से नहीं बच सकते


डिग्री दिलाने वाले प्राचार्य,संचालक और डिग्री लेने वाले सालों बाद भी कानून से नहीं बच सकते
- करणीदानसिंह राजपूत -
बी.एड.कराने वाले कॉलेजों में 20 से 25 हजार रूपए दो और घर बैठे या कहीं नौकरी करते हुए कक्षा में फर्जी हाजिरी लगवाते हुए परीक्षा में बैठ जाओ। यह केवल चर्चा नहीं है। ऐसा हो भी रहा है। अँधी कमाई के चक्कर में जिन संस्थाओं में ऐसा चक्र चलता है वे कभी न कभी इसी चक्र में सब कुछ नष्ट कर लेती हैं। फर्जी हाजिरी से डिग्री प्राप्त करने वाला कभी न कभी फंसता जरूर है और जब वह फंसता है तब उसका परिवार भी साथ में तबाह हो जाता है। ऐसा नहीं है कि केवल डिग्री लेने वाला ही फंसता हो। इस जाल में फर्जी हाजिरी लगाने वाले व्याख्याता,संस्था के प्राचार्य व संचालक आदि भी फंस जाते हैं। जो भ्रष्टाचार में खाया और खूब खाया वह सारा उल्टी में निकल जाता है। ज्यादा खाने पर और नहीं पचने पर जब उल्टी होती है तब आंतें तक निकलने लगती है।

शनिवार, 19 सितंबर 2015

आपातकाल 1975 के विरूद्ध सूरतगढ़ में हुई सभा: विरोध में गिरफ्तारिया दी गई थी


- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,
कांग्रेस के इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री काल में जब 25 जून 1975 को आधी रात को आपातकाल लगाया गया अगले दिन सुबह आम जनता को मालूम हुआ। यहां पर जोशीले लोगों को आपातकाल सहन नहीं था। आपातकाल के विरूद्ध रेलवे स्टेशन के सामने चौक पर 27 जून रात को सरकार के विरूद्ध आमसभा हुई। राजस्थान में यह पहली एकमात्र सभा थी जिसमें सरकार को चुनौती दी गई थी। इस सभा में कई लोगों ने विरोध में भाषण दिए थे।
उन्हीं में से एक थे मांगीलाल जैन पुत्र रूपराम चोरडिय़ा जो सभा में भाग लेने के बाद अपने घर जोकर सो गए।
स्थानीय पुलिस ने रात को घर से गिरफ्तार किया। शांतिभंग करने का आरोप लगाया गया और भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं 107,151 व 116/3 में यह गिरफ्तारी की गई।
इसके बाद हनुमानगढ,श्रीगंगानगर व बीकानेर की जेलों में करीब 4 माह तक बंद रखा गया। श्रीगंगानगर जेल में राजनैतिक बंदी मानते हुए विशेष सुविधाएं दी गई। मांगीलाल जैन वर्तमान में घड़साना नई मंडी में निवास कर रहे हैं और वहीं पर व्यवसाय है।

डा.सोहनसिंह सोढ़ा पुत्र राम बक्स सोढ़ा जो डूंगर कॉलेज से प्राध्यापक बने और अब सेवा निवृति के बाद ए/217 सादुलगंज बीकानेर में निवास कर रहे हैं। इनको सूरतगढ़ में गिरफ्तार किया गया। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं 107,151 व 116/3 में यह गिरफ्तारी की गई।
सोढ़ा 6 जुलाई 1975 से 14 जुलाई तक हनुमानगढ़ जेल में,15 जुलाई से 7 अगस्त तक बीकानेर जेल में और 8 अगस्त से 28 अक्टूबर 1975 तक श्रीगंगानगर जेल में बंदी रहे।
स.गुरनारमसिंह पुत्र फूलासिंह कम्बोज सिख पुराना वार्ड नं 9 व वर्तमान नया वार्ड नं 32 सूर्याेदय नगरी को सरकार के विरूद्ध नारेगाजी के साथ पैम्फलेट बांटते हुए गिरफ्तार किया गया। इनको 5 अगस्त 1975 को गिरफ्तार किया गया था। स.गुरनामसिंह और श्यामलाल चिलाना ने इश्तहार बांटते हुए गिरफ्तारी दी थी और पुलिस ने बाद में चिलाना के भाई कुशालचंद चिलाना को उनकी किरयाना की दुकान से गिरफ्तार किया।
उपखंड मजिस्ट्रेट उन दिनों हनुमानगढ़ में थे। उनके आदेश पर 6 अगस्त 5 अगस्त 1975 को श्रीगंगानगर जेल में भेजा गया। वहां से 16 अक्टूबर 1975  को मुचलके पर तीनों रिहा हुए। तीनों की गिरफ्तारी भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं 107,151 व 116/3 में की गई थी।

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