गुरुवार, 7 मई 2015

राजस्थानी भाषा मान्यता वास्ते संसद की चौखट पर 6 मई को ऐतिहासिक धरना दिया:


जंतर मंतर पर देश भर से राजस्थानी प्रेमी पहुंचे:
संसद के मानसून सत्र में मान्यता मिलने की संभावना-सांसद अर्जुन राम मेघवाल:
विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ 7 मइ 2015. राजस्थानी भाषा मान्यता के लिए 6 मई को जंतर मंतर पर ऐतिहासिक धरना लगाया गया व प्रदर्शन किया गया। राजस्थानी भाषा प्रेमियों ने मंच से अपने विचार रखे। सबकी एक ही आवाज थी कि अब चुप नहीं रहेंगे और मान्यता लेकर ही रहेंगे।
सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि राजस्थानी भाषा को मानसून सत्र में मान्यता मिलने की प्रबल संभावना है। मेघवाल ने भाषा प्रेमियों को विश्वास दिलाया कि अब उन्हें और अधिक समय तक भाषा की मान्यता का इन्तजार नहीं करना पड़ेगा।
 इस सभा में सांसद लोकेन्द्र सिंह कालवी, गजसिंह शेखावत, राजस्थान सरकार के मंत्री वासुदेवनानी सहित बड़ी संख्या में राजनेताओं व भाषा मान्यता से जुड़े भाषा प्रेमियों ने भाग लिया व अपना सम्बोधन दिया।
भाषा प्रेमियों  ने कहा कि राजस्थानी भाषा का मुद्दा राजस्थान के लिए सांस्कृतिक, रोजगार परक व अस्मिता से जुड़ा हुआ है। राजस्थानी भाषा विश्व की समृद्धत्तम भाषा में से एक है। इसका गौरवशाली इतिहास है। चार लाख हस्तलिखित ग्रंथों का विपुल भंडार है। ढाई हजार वर्षो से भी पुराना इतिहास है। जिसमें राजस्थानी भाषा लिखी पढी व बोली जाती है। 13 करोड लोग इसके बोलने वाले हैं। राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं देकर मातृ भाषा के अधिकार से राजस्थान को वंचित रखा जा रहा है। इसे अब और अधिक सहन नहीं किया जा सकता। इस धरने में प्रदेश के कोने कोने से भाषा प्रेमी शामिल हुए वही विदेशों से भी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सूरतगढ से इस धरने में शामिल होने वालो में,
समिति के जिलाध्यक्ष परसराम भाटिया के नेतृत्व में सघर्ष समिति के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत ,जिला परिषद सदस्य व बसपा नेता डूंगरराम गेदर, टैगोर एजूकेशनल ग्रुप के चेयरमैन रोटेक्ट क्लब के संस्थापक डा.सुशील जेतली, पंजाबी वेल्फेयर सोसायटी अध्यक्ष परमजीत सिंह बेदी, लक्ष्य संस्थान के निदेशक पीके मिश्र,  चिन्तन परिषद के संभाग प्रभारी प्रहलाद राय पारीक, नारी उत्थान  केन्द्र की अध्यक्ष  पार्षद राजेश सिडाना, गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की महिला प्रभारी पार्षद सावित्री स्वामी, पूर्व पार्षद सुन्दर देवी साबणियां, पूर्व पार्षद हरीश सेखसरिया, किशन लाल स्वामी, क्रांतिकारी महावीर भोजक, सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण समिति के महासचिव हेमन्त चांडक,  पिपुल फोर ऐनिमल के जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह जाटव, विनय तिवाड़ी, विजय स्वामी, अनिल सैनी, जमींदारा पार्टी नेता बलराम कुकडवाल, राजपूत क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष लाल सिंह बीका, कांग्रेसी नेता भीम जोशी, यूथ कांगेस अध्यक्ष गगनदीप सिंह बिडिग, द्वारका पेड़ीवाल, मायड़ भाषा प्रेमी सुरेन्द्र स्वामी, राजकुमार स्वामी, प्रभुदयाल सिंधी, नरेन्द्र शर्मा, रामकिशन स्वामी, ओम सावणियां, रामेश्वर दास स्वामी, गोरीशंकर भार्गव पुजारी, शिक्षक गिरधारी लाल स्वामी, किशन लाल गिरी, दुर्गा राम, महेन्द्र कुमार, आशा राम स्वामी, इन्द्रा देवी स्वामी, शारदा देवी गौड़, गंगा देवी स्वामी, कांग्रेस नगर अध्यक्ष व क्रंातिदल अध्यक्ष जेपी गहलोत, सघर्ष समिति  के प्रदेश मंत्री मनोज कुमार स्वामी, सावित्री, संतोष वर्मा, संकिला बिश्रोई, भागीरथ स्वामी, डीडी पारीक, महेन्द्र कुमार$ अल्का स्वामी, दुर्गा राम, जगदीश स्वामी लक्ष्मीनारायण आदि थे।

नारी उत्थान केन्द्र सूरतगढ़ की अध्यक्ष श्रीमती राजेश सिडाना अपने विचार रखते हुए





बुधवार, 6 मई 2015

नौकरी में अंग्रेजी से बड़ी ताकत बन जाएगी राजस्थानी-पढ़ें:


राजस्थानी को मान्यता मिलने दो:
अंग्रेजी को नौकरी के लिए ही ताकतवर मानते हैं:
विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
एक दिन वह आएगा कि राजस्थानी भाषा नौकरी में अग्रेजी से बहुत अधिक ताकतवर बन जाएगी। अभी नौकरी पाने के चक्कर में ही तो अग्रेजी का पठन पाठन अधिक हो रहा है तथा इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है कि अंग्रेजी के बिना नौकरी मिलेगी ही नहीं। इस कुप्रचार में अंग्रेजी पढ़ाने वाले कुछ स्कूल कॉलेज हर स्थान पर लगे हुए मिल जाते हैं। इस प्रचार को वे लोग तरजीह देते हैं जिनके पास में अधिक पैसा है जो अग्रेजी स्कूलों की भारी भरकम फीस आसानी से दे देते हैं तथा अपने आपको को समाज में बड़ा और अलग साबित करते हैं।
लेकिन जिस दिन राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता मिल जाएगी उस दिन राजस्थानी भाषा नौकरी में अंग्रेजी से अधिक ताकतवर बन जाएगी।
अभी राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता मिलने में देरी होने का कारण यह भी रहा है कि राजस्थान के भी कुछ लोग संस्थाएं आदि क्षेत्र की अलग अलग भाषाओं को आगे ले आते हैं जबकि सभी मिल कर ही राजस्थानी का स्वरूप है।
राजस्थानी को भी एक दिन मान्यता मिल जाएगी और विरोध के बावजूद वह दिन अधिक दूर नहीं होगा।
यह मेरा विश्वास है और लाखों राजस्थानियों का भी विश्वास है जो मान्यता के संघर्ष में किसी न किसी प्रकार से जूझ रहे हैं।
किसी भी मांग को अधिक दिन तक टाला नहीं जा सकता।
अंग्रेजों का राज तो विश्व भर में था। देश स्वतंत्र कैसे होते चले गए?
राजस्थानी मान्यता का आँदोलन अब उस स्तर पर है कि इसे और अधिक दिनों तक दबाए नहीं रखा जा सकता।
इसे ज्यों ज्यों दबाया गया त्यों त्यों अधिक ताकत से शुरू हुआ।
देश की राजधानी दिल्ली में जंतर मंतर पर 6 मई 2015 को धरना प्रदर्शन सभा में राजस्थानियों का जोश व्यर्थ नहीं जाएगा।
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़
94143 81356
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मंगलवार, 5 मई 2015

राजस्थानी मान्यता प्रदर्शन धरना:सूरतगढ़ से दिल्ली बस रवाना:


परसराम भाटिया व मनोजकुमार स्वामी का नेतृत्व:
दिलात्मप्रकाश प्रकाश जैन व घनश्याम शर्मा ने झंडी दिखा बस रवाना की:

खबर- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,5 मई। राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए 6 मई को दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन वास्ते राजस्थानी भाषा प्रेमी रात को बस से रवाना हुए जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष परसराम भाटिया और समिति के प्रदेश मंत्री साहित्यकार मनोजकुमार स्वामी की अगुवाई में ये लोग रवाना हुए। समाजवादी चिंतक दिलात्मप्रकाश जैन व भारत विकास परिषद के जोनल अध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने बस को झंडी दिखा कर पुरानी धानमंडी से रवाना किया।

शुक्रवार, 1 मई 2015

आपातकाल बंदियों का लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन:


अखिल भारतीय संयोजक पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा:
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने आपातकाल बंदियों का अखिल भारतीय लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन बनाया

राजस्थान प्रदेश संयोजक प्रभात रांका:


राजस्थान प्रदेश संयोजक प्रभात रांका ने वसुंधरा राजे से शांतिभंग में बंदी रहे लोगों को पेंशन दिए जाने की मांग की
खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत
इकतालीस साल पहले आपातकाल सन 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन काल में आपातकाल लगा कर हजारों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया था। उस समय के शासन के विरोध में अनेक लोग प्रदर्शन सभाओं में आंदोलन को उतरे और वे भी जेलों में डाल दिए गये थे।
कुछ प्रदेशों में मीसा व राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में बंदी बनाए गए लोगों को पेंशन देनी शुरू कर दी। जिसमें राजस्थान भी शामिल है।
इसके अलावा हजारों लोग शांतिभंग कानून में गिरफ्तार किए गए थे। ऐसे लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को पेंशन दिए जाने पर विचार भी चल रहा है मगर उसकी गति धीमी है। शांति भंग में गिरफ्तार किए लोगों की उम्र भी आज के समय में साठ से ऊपर तक पहुंच गई है तथा कई लोग तो अनेक परेशानियों में बीमारियों में वृद्धावस्था जीवन जी रहे हैं।
शांतिभंग कानून में बंदी बनाए गए लोगों को पेंशन सुविधा मिले की सोच के साथ कुछ सालों से कार्य तो किया जा रहा है मगर उसकी गति धीमी रही है।
आपातकाल में बंदी रहे पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर कई महीनों से कार्य शुरू कर संपर्क किया है और संगठन खड़ा किया है।
अखिल भारतीय स्तर पर इस नए संगठन का नाम अखिल भारतीय आपातकाल लोकतंत्र रक्षा सेनानी संगठन रखा गया है।
राजस्थान में इसके संयोजक प्रभात कुमार रांका भीलवाड़ा को बनाया गया है। रांका भीलवाड़ा व जयपुर में शांतिभंग कानून में बंदी रहे थे।
रांका ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को एक पत्र लिख कर शांति भंग में बंदी रहे लोगों को भी पेंशन दिए जाने की मांग की है।
पत्र में लिखा गया है कि शांति भंग व अन्य किसी धारा में बंदी बनाए गए लोगों के परिवारों पर जो संकट आया व व्यवसाय आदि चौपट हुए थे वे लोग आजतक पनप नहीं सके।
उन लोगों ने देश सेवा के लिए ही कदम उठाए और आपातकाल का विरोध किया था। 

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

बेटी चली गई प्रेमी संग? कहानी-


वह चली गई प्रेमी संग गुपचुप। माँ बाप का प्रेम फीका पड़ गया। उसका प्रेम परवान चढ़ गया। 


बसपा नेता डूंगर गेधर की चुपी सवाल बनी?


भाजपा व विधायक भादू के मामलों में चुप।
सूरतगढ़। विधानसभा चुनाव के बाद से बसपा नेता भाजपा और भाजपा के विधायक राजेन्द्र भादू के मामलों और नगरपालिका के मामलों पर एकदम चुप हैं। भादू के बाद विभागों में क्या हो रहा है? पुलिस में क्या हो रहा है? राजस्व विभाग में क्या हो रहा है? भादू की कोठी कटलों पर भी चुपी। विधानसभा चुनाव के मंचों पर भाजपा और कांग्रेस को एक ही थैली के चट्टे बट्टे बताने वाली बसपा के नेता डूंगर गेधर के चुप रहने पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। आखिर क्यों चुप हैं? डूंगर गेधर और बसपा दोनों ही चुप हैं।
डूंगर गेधर चुनाव से पहले कहा करते थे कि वे सूरतगढ़ में ही रहेंगे। सूरतगढ़ में रहकर राजनीति करनी है तो भाजपा और भाजपा के विधायक की रीति नीति पर मुंह खोलना ही पड़ेगा।
डूंगर राम गेधर बसपा की राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य हैं और यह सदस्यता भी पावरफुल ही मानी जाती है।
चुपी को राजनीति तो नहीं माना जा सकता।
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रविवार, 26 अप्रैल 2015

हाई मास्ट टावर हादसे की पुलिस में एफआइआर क्यों नहीं करवाई गई?


पुलिस से क्यों छुपाया जा रहा है हादसा जिसमें भारी नुकसान हुआ।
साधारण घटना थी या गड़बड़ या निर्माण में घोटाला? पुलिस जांच में हो जाता खुलासा।
विशेष- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़। नगरपालिका के स्टेडियम में 30 मार्च शाम को हाई मास्ट लाईट का विशाल लम्बाई वाला टावर गिरा और 33 हजार केवी बिजली लाइन पर जा गिरा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा इसी स्टेडियम में 19 फरवरी को हुई थी। इस टावर के गिरने से बिजली लाइन की मीनारें भी टेढ़ी हो गई व उनके तार बस्तियों के घरों पर गिर पढ़ते तो हादसा कितना भयंकर होता। उसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता। बड़े अखबारों ने केवल इतना लिखा कि हादसा टल गया। मौके पर जो हालात से उनको देखने की और देखा तो छापा नहीं। नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी से सहानुभूति रखी। वर्तमान में जो अधिशाषी अधिकारी कार्यवाहक बने हुए हैं वही यहां पर इंजीनियर हें और उनकी देखरेख में ही निर्माण होते रहे हें तथा घटिया और घोटालों के आरोप लगते रहे हैं।
टावर का जो आधार फाऊंडेशन सीमेंट कंक्रीट का बनाया गया वह मौके पर घटिया लग रहा था। धूल कंकड़ दिखाई दे रही थी और 


पलस्तर तक नहीं था। टावर फांऊडेशन के बोल्ट के कितने नट गायब थे या नहीं लगे थे? इन सभी का खुलासा पुलिस जांच में प्रयोगशाला में जांच करवाने से होता। लेकिन बड़े नुकसान के होते हुए भी अधिशाषी अधिकारी ने इसकी रिपोर्ट पुलिस में नहीं दी। नगर पालिका को बड़ा नुकसान हुआ लेकिन बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा ने भी इसे पुलिस को नहीं सौंपा।
यहां पर फांऊडेशन और लाइट की टूट की तस्वीरें दे रहे हैं। देखें कि किस प्रकार का निर्माण हुआ था?


लाइट की टूट



रविवार, 19 अप्रैल 2015

वरिष्ठ पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत,पत्रकार मुरलीधर उपाध्याय को भी आपातकाल पेंशन शीघ्र

आपातकाल 1975 के शांतिभंग में जेलों में बंदी रहे पत्रकारों व पूर्व विधायकों को भी पेंशन शीघ्र
सूरतगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत,पत्रकार मुरलीधर उपाध्याय,पूर्व विधायकों स.हरचंदसिंह सिद्धु व गुरूशरण छाबड़ा को भी मिलेगी पेंशन:
करणीदानसिंह राजपूत गुरूशरण छाबड़ा हरचंदसिंह सिद्धु मुरलीधर उपाध्याय




सूरतगढ़।
आपातकाल 1975 में केन्द्र की सरकार के अत्याचारों का विरोध करने वाले आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों को जो शांतिभंग कानून के तहत गिरफ्तार कर जेलों में ठूंस दिए गए थे, उनको भी पेंशन दिए जाने का विचार राजस्थान सरकार कर रही है। 

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

हर की पौड़ी हिन्दुओं का तीर्थ है गैर हिन्दुओं के घूमने का नहीं:


हिन्दुओं के पूजा स्थल पर हिन्दु तरीके रीति रिवाज से पूजा आराधना होती है।
मुस्लिमों के आस्था स्थलों पर उनके तरीके रीति रिवाज से अल्लाह की इबादत की जाती है।
ईसाईयों के चर्च में उनके रीति रिवाज से गौड भगवान से प्रार्थना की जाती है।
मुस्लिम इबादत स्थानों पर अन्य धर्मों हिन्दु ईसाई आदि के तरीके से अल्लाह को याद नहीं किया जाता।
ईसाईयों के चर्च में मुस्लिम व हिन्दु तरीके से पूजा नहीं होती।
ठीक इसी तरह हिन्दु पूजा स्थलों तीर्थ स्थलों पर मुस्लिम व ईसाई तरीकों से भगवान की पूजा प्रार्थना नहीं की जा सकती।
गैर हिन्दु लोग दूसरे धर्मों के मानने वाले लोग वहां हिन्दु तरीके से पूजा प्रार्थना के लिए तो जाते नहीं है।
हिन्दुस्तानी मीडिया खासकर चैनल वाले पत्रकार बंधु अन्य धर्मों के अनुयायियों को वहां पर भेजने को उत्सुक कयों है?
हिन्दु साधु संत जब भी कोई बात कहते हैं या आह्वान करते हैं तब मीडिया के मरोड़ उठने लगते हैं। मीडिया हर बयान को अपने आप विवादित कहते हुए समाचार देना शुरू कर देता है और उस पर बहस तक करवाने लग जाता है। चाहे उस बयान पर कोई बवाल मचा ही न हो। हिन्दुओं के पूजा आराधना स्थान घूमने फिरने और मौज मस्ती के स्थान तो है नहीं है जो वहां पर इस ईच्छा से जाएं?

हर की पौड़ी बाबत भाजपा सांसद आदित्य नाथ के बयान को मीडिया ने अपनी मन मर्जी से विवादित बयान देना बतला कर उस पर खबरें शुरू करदी। आदित्य नाथ का बयान था कि हर की पौड़ी पर गैर हिन्दुओं को रोका जाना चाहिए। इसी बयान पर मीडिया ने तूफान मचा दिया।
मीडिया वाले बताएं कि इसमें विवादित वाले शब्द और भावना कौन सी है?
हर की पौड़ी पर हिन्दुस्तान के कोने कोने से लोग अपने बुजुर्गों की अस्थियां पूजा पाठ से गंगा के जल में प्रवाहित करने आते हैं। वहां पर अन्य धर्मों के लोग तो अस्थियां लेकर नहीं पहुंचते और न पूजा पाठ करने जाते हैं।
तब गैर हिन्दु वहां आखिर किस लिए जाना चाहते हैं?
इनके अलावा फिर उत्तर यही हो सकता है कि वहां पर गैर हिन्दु घूमने फिरने जाते हैं।
और हर की पौड़ी इसके लिए नहीं बनी है?
वह स्थान हिन्दुओं का पवित्र स्थान है तीर्थ है तो उसे उसी अनुरूप ही रहने दिया जाना चाहिए। मीडिया वालों को खासकर चैनल वालों को अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए तूल नहीं देना चाहिए।
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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

मेडिकल स्टूडेन्ट अजीम भाटी बीकानेर की उदयपुर में षड्यंत्र हत्या का मुकद्दमा:





गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पीटल का स्टूडेन्ट:सहपाठियों पर आरोप:
1 अप्रेल 2015 को नाई थाने में एफआइआर:
गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पीटल प्रबंधन ने 75 लाख रूपए लिए:
ग्रुप रेंगिंग से परेशान का आरोप:डूबो कर मारे जाने का आरोप:
पुलिस द्वारा सही जांच नहीं की गई:मृतक के वस्त्र आदि भी कब्जे में सीलबंद नहीं किए:
मौत 7 सितम्बर 2014 के बाद पिता लियाकत अली भाटी सेवा निवृत कर्नल ने 1 अप्रेल 2015 को एफआइआर दर्ज करवाई।
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत:

गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पीटल उदयपुर के एमबीएसएस के द्वितीय वर्ष के छात्र अजीम भाटी की रेंगिंग से परेशान किए जाने और हत्या कर दिए जाने के आरोप में करीब 7 माह बाद दर्ज हुए मुकद्दमें में सहपाठियों पर आरोप लगाया गया है। आरोप लगाया गया है कि यह ग्रुप अजीम भाटी को परेशान किया करता था।

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