बुधवार, 19 मार्च 2014

मोदी नहीं पीते शराब:गुजरात में शराब तस्करों का तंत्र क्यों नहीं टूट रहा?

क्या सच्च में मोदी जी को मालूम नहीं है?
क्या यह सच्च संघ को मालूम नहीं है?
क्या यह सच्च भाजपा हाई कमान को मालूम नहीं है?
क्या यह सच्च वसुंधरा को मालूम नहीं? राजस्थान होकर जाती है शराब।

टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत

मोदी जी शराब नहीं पीते मगर उनके गुजरात में शराब पर प्रतिबंध के बावजूद शराब तस्करों का मजबूत तंत्र कार्य कर रहा है और तीसरी बार सत्ता में आए मोदी जी का तंत्र उनको रोक नहीं पा रहा है।
राजस्थान के रास्ते होकर गुजरात को करोड़ों रूपए की शराब की तस्करी प्र्रतिदिन हो रही है। राजस्थान में महीने में पांच दस ट्रक शराब कार्टन से भरे हुए पकड़े जा रहे हैं,जिनके बारे में यही खुलासा होता है कि शराब गुजरात ले जाई जा रही थी। शराब तस्कर जो पकड़ में नहीं आ पाते उनकी संख्या काफी मानी जाती है। यानि कि करोडों रूपयों की शराब गुजरात हर रोज पहुंचने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
यह शराब पंजाब,हरियाणा और चंडीगढ़ से राजस्थान के रास्ते से गुजरात पहुंचती है। कितने ही लोग इस करोडों रूपयों की अवैध कमाई से मालामाल हो रहे हैं और गांधी के गुजरात में ,नरेन्द्र मोदी के गुजरात में नशे के व्यापार में सरकारी तंत्र पर भारी पड़ रहे हैं।
मोदी जी को भावी प्रधानमंत्री के रूप में चुनाव में उतारा जा रहा है।
मोदी जी देश की सीमाओं की सुरक्षा करेंगे। बड़े दावे इसके किए जा रहे हैं।
सच्च यह है कि मोदी जी अपने गुजरात की सीमा की रक्षा ही नहीं कर पा रहे हैं।
मोदी जी शराब तस्करों से गुजरात की सीमा की रक्षा नहीं कर पा रहे,वे हथियारों से सुसज्जित दुश्मन की सेना से देश की सीमाओं की रक्षा कैसे कर पाऐंगे?
क्या सच्च में मोदी जी को शराब तस्करी और तस्करों के तंत्र का मालूम नहीं है? या उनका सरकारी तंत्र इस अवैध कार्य में शामिल है। उसकी यह के बिना तो अवैध कार्य हो ही नहीं सकता। क्या सरकारी तंत्र पर खुद मोदी का अंकुश नहीं है? क्या मोदी भी उसी मिट्टी के बने हुए हैं कि जैसा चल रहा है चलने दिया जाए? कोई पंगा नहीं लिया जाए? या फिर शराब तस्करों से चंदा लेने का काम कोई करने में लगा हैï?
मोदी जी ने अगर अंकुश लगाया हुआ है तो शराब की तस्करी कैसे हो रही है?

शराब बंदी के कारण गुजरात सरकार को तो एक पैसे की आमदनी नहीं हो रही है तो शराब तस्कर मालामाल क्यों हो रहे हैं? गुजरात में सुशासन का दावा किया जा रहा है,लेकिन जहां शराब तस्करी से हर जगह उपलब्ध हो तो सुशासन का दावा खोखला हो जाता है?

कितनी शराब पकड़ी गई और कितने शराब तस्करों को पकड़ा गया व कितनों को कितनी कितनी सजा हुई?
अगर सरकारी तंत्र की कड़ाई हो तो तस्करी एक बोतल की भी नहीं की जा सकती।
क्या यह सच्च भाजपा हाई कमान को मालूम नहीं है?
क्या यह सच्च वसुंधरा को मालूम नहीं? राजस्थान होकर जाती है शराब। राजस्थान में गुजरात जाती हुई शराब करोडों रूपए की हर पांचवें सातवें दिन पकड़ में आती है।
पिछले 10 सालों का आबकारी विभाग का रिकार्ड देख कर मालूम किया जा सकता है।
साफ सुथरे मोदी की छवि पर गुजरात में शराब तस्करी का धब्बा है जिस पर ना जाने क्यों मोदी व भाजपा अभी तक नजर क्यों नहीं डाल रहे हैं?
दिल्ली का इलेक्ट्रिोनिक मीडिया जब चैनलों पर सवाल दागेगा और मोदी जी को सवालों के घेरे में खड़ा करेगा तब शायद इस महत्वपूर्ण सवाल का उत्तर सामने आएगा।
ना जाने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या अन्य राजनैतिक दलों के नेता इस सवाल को उठाने में पीछे क्यों हैं?

गुरुवार, 13 मार्च 2014

सूरतगढ़:होटलों धर्मशालाओं में ठहरने को असली आईडी -


पुलिस आदेश जारी हुआ:
खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत.
सूरतगढ़, 13 मार्च 2014.यहां के होटलों धर्मशालाओं आदि में ठहरने वालों को अब असली परिचय पत्र जमा करवाना होगा और जब होटल धर्मशाला छोड़ा जाएगा तब वह लौटाया जाएगा। सिटी थानाधिकारी ने यह आदेश होटलों व धर्मशालाओं के संचालकों को दिया है। यह आदेश 9 मार्च को जारी किया गया है। इसके अलावा संचालकों को आदेश में लिखा गया है कि वे अपने होटल धर्मशाला का रजिस्टर हर महीने की 15 व 30 तारीख को थाने में दिखायेंगे। पुलिस ने मोबाइल नम्बर लिखने और उसके कन्फर्म करने का भी लिखा है,जो तत्काल ही रिंग देकर हो सकेगा। लेकिन अनेक लोग हैं जो मोबाईल फोन रखते ही नहीं है।
यह भी लिखा गया है कि इसकी पालना नहीं हुई तो कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
पहले होटलों व धर्मशालाओं में रूकने वाले का असली परिचय पत्र देख कर उसकी प्रतिलिपि जमा करवा ली जाती थी। होटलों धर्मशालाओं में ठहरन वाला किसी दफ्तर में व्यवसाय आदि का काम करने निकलता तब असली परिचय पत्र उसके पास में होता था।
इस आदेश का पालन करने के लिए जरूरी है कि ठहरने वाला असली दो प्रकार के परिचय पत्र रखे। एक ठहरने वाले स्थान पर जमा करवाए और दूसरी आने पास में रखे।
ढ़ाबों व अन्य रेस्टोरेंटों आदि में जहां पर केवल चारपाईयां लेकर लोग ठहरते हैं वहां के क्या नियम होंगे?
पुलिस का आदेश यहां दिया जा रहा है।




सोमवार, 10 मार्च 2014

लोकसभा:विधायक राजेन्द्र भादू के नेतृत्व में सूरतगढ़:भाजपा को 1 लाख वोट मिलना संभावित



टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत-

सूरतगढ़। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के जोश में विधायक राजेन्द्रसिंह भादू की कमान में लोकसभा चुनाव में भाजपा को सूरतगढ़ विधान सभा क्षेत्र में वोटों की भारी बढ़त से 1 लाख वोटों से अधिक वोटों के मिलने की संभावना है।
विधानसभा चुनाव 2013 में सूरतगढ़ क्षेत्र से भाजपा के राजेन्द्र भादू को 67 हजार वोट मिले थे और बसपा 40 हजार वोट लेकर दूसरे तथा कांग्रेस 33 हजार वोट लेकर तीसरे और 20 हजार वोट लेकर जमींदारा पार्टी चौथे नम्बर पर रही थी।
आज की स्थिति में पूरें विधानसभा क्षेत्र में केवल भाजपा के कार्यक्रमों के दर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस,बसपा,जमींदारा पार्टियां शांत है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी का कोई माहौल बन ही नहीं पाया है। कुछ दिन पूर्व इस पार्टी ने एक रैली निकाली थी। उसमें चार पांच कार्यकर्ता बोलने वाले थे और पन्द्रह बीस इन्हीं के कार्यकर्ता भाषण सुनने वाले थे। मतलब खुद बोल रहे थे और खुद ही सुन रहे थे। इसलिए वोटों की संभावना में फिलहाल इसकी चर्चा नहीं करेंगे।
बसपा के 40 और जमींदारा के जो 60 हजार वोट हैं, जो इनकी शांत प्रवृति के कारण स्थाई नहीं रह सकते और भाजपा के मोदी के डंके के कारण हर हालत में आधे खिसक जाऐंगे और वे भाजपा की झोली में जाऐंगे। पिछले चुनाव में वोटरों पर राजेन्द्र भादू की पकड़ बहुत ज्यादा हुई है और वोटरों को अपनी ओर खींचने के तरीकों को और अधिक ताकत मिली है। राजेन्द्र भादू के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव में वह वोटर चिपक जाएगा जो विधानसभा चुनाव में अन्य पार्टियों के साथ था। इसका एक महत्वपूर्ण कारण भी है कि ग्रामीण और शहरी जनता को विधायक से ही अधिक काम पड़ते हैं। खासकर ग्रामीण जनता तो थाना कचहरी सिंचाई आदि के सारे कार्यों में और विवादों को सुलटाने में विधायक को ही आगे रखती है।
इस समय शहर और ग्रामों पूरे विधानसभा क्षेत्र सूरतगढ़ में भाजपा का ही बोलबाला है।
भाजपा ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाने को लेकर कई कार्यक्रम कर दिए हैं जो सफल रहे हैं।
वर्तमान में भाजपा के पास में मजबूत युवा मोर्चा और मजबूत महिला मोर्चा है जो कांग्रेस के पास में नहीं है।

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

राजस्थान में आपातकाल के बंदियों की पेंशन अब शुरू हो जाएगी:



 आपातकाल के मीसी व रासुका बंदियों को पेंशन जनवरी 2014 से मिलेगी
30 अप्रेल तक आवेदन करना होगा
सूरतगढ़, 28 फरवरी।
राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की वसुंधरा राजे सरकार ने अपनी घोषणा के अनुसार आपातकाल के बंदियों को पेंशन देने की घोषणा कर दी है। पेंशन जनवरी 2014 से दी जाएगी। यह पेंशन 12 हजार रूपए मासिक होगी व इसके साथ में 12 सौ रूपए प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता भी दिया जाएगा। यदि बंदी पुरूष रहा है तो उसके बाद में पत्नी को मिलेगी। यदि स्त्री है तो उसके बाद उसके पति को मिलेगी।
राजस्थान सरकार ने इस पेंशन को लागू करने के लिए 2008 में जो नियम बनाए थे उसी में संशोधन कर इसे लागू करने की अधि सूचना जारी हुई है।
अभी इसके लिए कोई नया आवेदन फार्म नहीं दिया गया है।
इसका राजपत्र प्रकाशन इंटरनेट पर सरकारी साइट पर नजर नहीं आया।

इसमें शांति भंग में बंदी बनाए गए राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल नहीं किया गया है।
लोकतांत्रिक मंच पिछले सालों से लगातार यह मांग करता रहा है कि यह पेंशन आपातकाल में शांति भंग नियमों में बंदी बनाए गए लोगों को भी मिलनी चाहिए। इसके लिए अदालत में रिट भी की हुई है। लोकतांत्रिक मंच के अशोक मलेठी मो.94138 29952 ने बताया है कि रिट को   कायम रखा जाएगा व अदालत में न्याय मांगा जाएगा।
श्रीगंगानगर जिले में तो शांति भंग में बंदी बनाए गए लोगों को राजनैतिक दर्जा भी दिया गया था,लेकिन उनको भी पेंशन में शामिल नहीं किया गया है।
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आपातकाल- शांतिभंग में जेलों में बंदियों को भी मिलेगी पेंशन 
 
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से आपातकाल में शांति भंग करने के आरोप में जेलों में बंद रहे कार्यकर्ता मिले
 

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पेंशन वास्ते जो कोई बिंदु छूट गया है उस पर विचार कर लिया जाएगा
 

खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, x फरवरी w®vy. इंदिरागांधी द्वारा v~|z में आपातकाल लागू कर अनेक लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया था। उनमें मीसा और रासुका बंदियों को पेंशन देने की घोषणा कर दी गई थी।
आपातकाल में शांतिभंग कानून के तहत भी हजारों लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया था। उनके परिवार भी परेशान हुए व व्यवसाय आदि
बरबाद हो गए थे। अब शांतिभंग के तहत बंदी रहे लोगों को भी पेंशन सुविधा प्रदान की जाने का
बिंदु भी शामिल कर लिया जाएगा।
शांतिभंग में बंदी बनाए लोग यह पिछले सालों से कर रहे थे।
मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में आज कई कार्यकर्ता मिले और इस मांग से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि जो बिंदु छूट गया है उस पर विचार कर शामिल कर लिया जाएगा।

इस आश्वासन पर प्रतिनिधि मंडल के लोग पूरे आश्वस्त हो गए हैं।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने दोपहर को यह सूचना मुझे दी और उसके बाद ईटीवी पर भी यह समाचार रिलीज हुआ है।
राजस्थान के हजारों परिवारों को इससे लाभ मिल सकेगा।
सूरतगढ़ से शांति भंग में vw कार्यकर्ता बंदी बनाए गए।
पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत को श्रीगंगानगर में wz जुलाई को पकड़ा गया।  गुरूशरण छाबड़ा पूर्व विधायक जो अब जयपुर में रहते हैं व पत्रकार मुरलीधर उपाध्याय पूर्व पार्षद जो अब आफसेट प्रेस व्यवसाय में हैं,ने सूरतगढ़ में गिरफ्तारी दी जिनको श्रीगंगानगर जेल में भेज दिया गया था। वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु पूर्व विधायक, स.गुरनामसिंह लाइनपार रहते हैं,स्व.कुशालचंद चिलाना,स्व.श्यामलाल चिलाना,इनका भाई भगवानदास चिलाना जो अब घड़साना में व्यवसाय करते हैं। स्व. हरिराम चीनिया,मांगीलाल जैन जो अब घड़साना में हैं। स्व. भगवानदास धाणका,सोहनसिंह सोढ़ा जो आजकल बीकानेर में रहते हैं।
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इंदिरा गांधी ने अपने शासन की विफलता में सन v~|z में आपातकाल लगा कर जो जुल्म ढ़हाए वे आज के y®-z® वर्ष के लोगों को मालूम नहीं हैं। बिना किसी कारण के राजनैतिक लोगों को डीआइआर और मीसा में तथा शांति भंग में जेलों में ठूंस दिया गसा था। जबरन नसबंदियां कही गई जिनमें नव विवाहितों बुड्ढों व कुंवारों को भी पकड़ कर नसें काट दी गई थी व प्रपत्र पुलिस की मौजूदगी में झूठे भरवा लिए गए थे। अखबारों पर सेंसर लगा दिया गया था। इतना भय पैदा कर दिया गया था कि बंदी लोग बाहर आए व तारीखों पर आए तब लोग नमस्कार करने और मिलने तक से कतराते थे। व्यवसाय बरबाद हो गए थे।
सूरतगढ़ में आपातकाल के विरोध में आमसभा की जाने के बाद नेता और कार्यकर्ता भूमिगत हो गए थे। बाद में पकड़े गए व नारे प्रदर्शन के साथ गिरफ्तारियां दी। सच्च में जांबाज और जोशीले लोगों ने यह कार्य किया था।
सूरतगढ़ से डीआईआर यानि कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में vv कार्यकर्ता बंदी बनाए गए थे। इस कानून में एक वर्ष तक तो न्यायालय में चुनौती ही नहीं दी जा सकती थी।
एक दल में  { जने गोपसिंह सूर्यवंशी पूर्व पार्षद निवासी लाइनपार वार्ड नं v~ सूरतगढ़, सुगनपुरी जो अब अध्यापक है,महावीर प्रसाद तिवाड़ी जो फार्म में सर्विस में है, नेमीचंद छींपा पूर्व पार्षद हैं,मदनलाल मेघवाल जो अब जैतसर में रहते हैं,चम्पालाल जो आजकल हैदराबाद में रेस्टोरेंट चलाते हैं। इन्होंने vz  दिसम्बर v~|z  को गिरफ्तारी दी थी।
दूसरे दल में पांच जने बलराम वर्मा कांगे्रस नेता,हनुमान प्रसाद मोट्यार जो आजकल ग्राम सचिव हैं,लक्ष्मण शर्मा माकपा नेता हैं,रामकुमार पारीक जो आजकल ग्राम कीकरवाली रायसिंहनगर में रहते हैं। मेघसिंह यहां दुग्ध बेचते थे और अब भीलवाड़ा में अन्य व्यवसाय कर रहे हैं।

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आपातकाल के बंदियों को पेंशन वसुंधरा राज मंत्रीमंडल का निर्णय
भाजपा की सरकार के मंत्रीमंडल में x जनवरी w®vy को निर्णय हुआ।
 
हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा-वसुंधरा के पिछले राज में पेंशन देने का कानून बनाया गया था। अशोक गहलोत सरकार ने इसे रोक दिया था। अब भाजपा का राज आने के बाद इसे लागू कर दिया। भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में भी यह घोषित था।

पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने मोबाइल फोन पर यह सूचना दी। इसके बाद लोकतांत्रिक मंच से भी बात हुई। इतने में ही टीवी पर न्यूज भी आनी शुरू हो गई।

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मीसा एवं डीआइआर बंदियों की पेंशन अब शुरू हो जाएगी:
 

वसुंधरा राजे ने पिछले कार्यकाल में कानून बनाया मगर राज बदल गया तथा अशोक गहलोत सरकार ने शुरू होने पर रोक लगा दी थी 
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तीसरे स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों व परिवारों को मिलेगा लाभ
सूरतगढ़ से 16 लोगों ने इंदिरा गांधी के आपातकाल को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी दी थी
आपातकाल में शांतिभंग में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था
 

-------विशेष लेख- करणीदानसिंह राजपूत:आपातकाल में शांतिभंग में बंदी बना गए थे---------


इंदिरागांधी ने अपने प्रधानमंत्रीत्व काल के कुशासन में जनता को कुचलने के लिए सन 1975 में आपातकाल की घोषणा कर भयानक क्रुरताएं की थी जिसका पूरे देश में विरोध हुआ था। 
सूरतगढ़ देश का पहला एकमात्र शहर था जिसमें आपातकाल लगाते ही  विरोध में आमसभा हुई थी।
आपातकाल के विरोध में कई लोगों ने गिरफ्तारियां दी व कई लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर जेलों में ठूंस दिया गया था।
श्रीमती वसुंधरा राजे ने अपने पिछले मुख्यमंत्रीत्व काल में राजस्थान मीसा एवं डीआइआर बंदियों की पेंशन नियम 2008 बनाया था जो राजस्थान के राजपत्र के विशोषांक में दिनांक 17 सितम्बर 2008 को प्रकाशित हुआ था। इस नियम के तहत प्रति माह 6000 रूपए पेंशन व 600 रूपए मेडिकल भत्ता मिलना था। संभव है कि वसुंधरा राजे प्रपत्र भरे जाने के समय से इसे लागू करदे और अब महंगाई आदि को ध्यान में रखते हुए राशि में वृद्धि भी करदे। इसके अलावा जो लोग शांति भंग में जेलों में ठूंसे गए उनको भी पेंशन लागू करदे।
इस कानून के तहत प्रभावित लोगों ने अपने प्रपत्र राज्य सरकार के लिए जिला कलक्टर को सौंपे। उन पर पेंशन देने की प्रक्रिया शुरू होने ही वाली थी कि राज बदल गया। राजस्थान में अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को सत्ता मिलने के बाद इस पर रोक लगा दी गई। इसे लागू ही नहीं किया गया। कांग्रेस ने कहा कि आपातकाल के बंदियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
    इसके बाद राजस्थान में लोकतंत्र रक्षा मंच का गठन किया गया और उसके तहत संघर्ष शुरू किया गया व कई बार सम्मेलन आयोजित किए गए। इस मंच के वर्तमान में अध्यक्ष नंदलाल नागर हैं।
पूर्व अध्यक्ष कौशल किशोर जैन की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बैंच में एक याचिका केस नं 7176-2010 प्रस्तुत की गई जिसके पैरवीकार प्रसिद्ध वकील भरत व्यास हैं जिसकी जनवरी 2014 में तारीख है।
    वर्तमान में मंच के संरक्षक फरीदुल्लाह कोटा मो.9214528581 और कोटा संभाग संयोजक अशोक मलेठी मो.94138 29952 से व्यापक जानकारी ली जा सकती है।
सम्पूर्ण प्रदेश में इसके लिए संभाग संयोजक बनाए हुए हैं।
फरीदुल्लाह व अशोक मलेठी ने इस लेखक से अनेक बार बात की है और बताया है कि मंच की यह मांग है कि शांतिभंग के आरोप में बंदी बना गए लोगों को भी पीड़ा और आर्थिक हानि उठानी पड़ी व परिवार पीडि़त हुए थे इसलिए उनको भी पेंशन शुरू की जाए।
अशोक मलेठी से मोबाइल वार्ता में ताजा जानकारी दिनांक 15 दिसम्बर 2013 को मिली है।
उन्होंने बताया कि आपातकाल की पेंशन 4 राज्यों में प्राप्त हो रही है। यूपी में 3 हजार रू, बिहार में 5 हजार रू,मध्यप्रदेश में 15 हजार रू तथा छत्तीसगढ़ में 15 हजार रू. प्रतिमाह है। मंच की मांग यह है कि सभी राज्यों में एकरूपता करते हुए प्रतिव्यक्ति यह राशि 15 हजार रूपए की जाए।
 

-- लेखक राजस्थान सरकार के जन संपर्क विभाग द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार हैं। सूरतगढ़। मोबा.9414381356
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रविवार, 16 फ़रवरी 2014

वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की जान को खतरा:लायसेंस निरस्ती के बाद से हथियार सूरतगढ़ थाने में जमा है

वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की जान को खतरा:
लायसेंस निरस्ती के बाद से हथियार सूरतगढ़ थाने में जमा है
श्रीगंगानगर में एक वकील पर हमला हो चुका है-
वकीलों को मुकद्दमें लडऩे व बाहर आने जाने के समय हर वक्त सुरक्षा जरूरी-
सिद्धु ने जिला कलक्टर को लिखा हुआ है कि जान को खतरा है व तुम्हारी जिम्मेदारी होगी

खास रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़। वरिष्ठ वकील पूर्व विधायक सरदार हरचंदसिंह सिद्धु का लायसेंस जिला कलक्टर श्रीगंगानगर द्वारा निरस्त करने के बाद से हथियार सूरतगढ़ सिटी पुलिस थाने में जमा है तथा हर समय जान पर खतरा मंडराता रहता है।
श्रीगंगानगर में कुछ दिन पूर्व अदालत में ही एक व्यक्ति ने हमला कर दिया था। उसके बाद से यह चिंता बहुत बढ़ गई है कि वकीलों की सुरक्षा का प्रयाप्त प्रबंध हो। श्रीगंगानगर में वकीलों की तरफ से यह मांग भी उठी थी। स.हरचंदसिंह सिद्धु सूरतगढ़ न्यायिक बार संघ के वरिष्ठतम सदस्य हैं और उनको अनेक प्रकार के प्रकरणों पर बाहर की अदालतों में जाना आना पड़ता है। सिद्धु राजनैहितक व्यक्ति भी हैं तथा 4 बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं व 2 बार विधायक रह चुके हैं।
सिद्धु ने अपनी आत्मरक्षा के लिए 32 बोर रिवाल्वर ले रखा था और उसका लायसेंस 2014 तक नवीनीकृत होते हुए भी जिला कलक्टर ने चुनाव से पहले लायसेंस दिनांक 25-10-2013 को निरस्त कर दिया व 12-11-2013 को कोई विरोध हो तो पेश होने की तारीख दी। सिद्धु ने आदेश की अनुपालना में थाने में तत्काल ही हथियार जमा करवाया व  31-10-2013 को जिला कलक्टर को पत्र दिया। सिद्धु ने उस पत्र में साफ साफ लिखा कि उसका लायसेंस दुर्भावना से निरस्त किया गया है व कोई षडय़ंत्र है। शस्त्र दुरूपयोग का कोई प्रकरण नहीं है।
इसी पत्र में सिद्धु ने लिखा था कि वे सक्रिय राजनैतिक कार्यकर्ता हैं व नेताओं व अधिकारियों के विरूद्ध संघर्षरत हैं तथा लगातार जान की धमकियां मिल रही हैं जिनकी लिखित शिकायतें लगातार राज्य सरकार को की जाती रही हैं।
सिद्धु ने जिला कलकटर को चेतावनी भी दी कि कोई जानी नुकसान हो गया तो आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।
इस पत्र के बाद जिला कलक्टर ने स्थानीय समिति को रिपोर्ट के लिए लिखा और वह रिपोर्ट यहां से चली गई।
इसके बाद लायसेंस को अविलम्ब बहाल कर दिया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
श्रीगंगानगर में वकील पर हमले के बाद से यह मामला बहुत गंभीर हो गया है।
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शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

सूरतगढ़ में रेलवे ओवर ब्रिज फाटक एलसी-95 का नक्शा व कमेंट्स

रेलवे ओवर ब्रिज से मंडराएगा हर समय मौत का खतरा-
अब चल रहे निर्माण की एकदम ताजा रिपोर्ट 
15 फरवरी 2014.



 समाजवादी चिंतक दिलात्मप्रकाश जैन ने छह सितम्बर 2012 को आरोप लगाया था
भू माफिया और अवैध कॉलोनी के भूखंड आदि को बचाने के लिए बदलाव किया गया
सही स्थान पर बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास करने का आह्वान किया था
दिलात्मप्रकाश जैन ने सूचना के अधिकार के तहत इरकॉन से इसका नक्शा प्राप्त किया
खबर: करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,4 अक्टूबर 2012. समाजवादी चिंतक दिलात्म प्रकाश जैन ने रेलवे फाटक एलसी-95 पर प्रस्तावित ओवर ब्रिज के स्थान को बदलने पर छह सितम्बर को गंभीर आरोप लगाए थे। जैन ने नए नक्शे को सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगा जो इरकॉन ने 26 सितम्बर को प्रेषित किया था। इस नक्शे की फोटो प्रति यहां दी जा रही है ताकि आम लोगों को पुल का स्थान मालूम हो सके। पुल बडोपल रोड पर से उतरेगा चढ़ेगा और बाईपास पर इंडेन गैस एजेंसी कार्यालय के आगे चढ़ेगा उतरेगा। इससे सेठ राम दयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का खेल मैदान प्रभावित होगा, मतलब खत्म सा हो जाएगा। असल में मास्टरप्लान में ओवरब्रिज का स्थान राजकीय पशु चिकित्सालय के पास में बनाया जाना निर्धारित किया गया था। लेकिन मास्टर प्लान से हट कर पुल पहले बाजार में महाराजा होटल के पास से चढऩा उतरना प्रस्तावित किया गया और बाद में उसमें भी बदलाव कर दिया गया। अब जो स्थान निर्धारित किया गया है उसका नक्शा यहां दिया गया है।





दिलात्मप्रकाश जैन
दिलात्मप्रकाश जैन ने सात सितम्बर को जो समाचार विचार दिया था उसको यहां दुबारा दिया जा रहा है।
 सूरतगढ़, 6 सितबर.2012.सूरतगढ़ उपखंड विकास समिति के संयोजक दिलात्मप्रकाश जैन ने प्रशासन की ओर से ओवर ब्रिज-रेलवे फाटक सी- 95-के बार बार बदलाव और कानूनी प्रक्रियाओं की पूर्ति के बिना बनाय जा रहे पुल बाबत एकदम साफ आरोप लगाया है कि इरकोन कम्पनी की ओर से बनाया जा रहा ओवरब्रिज गलत है। इससे कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था अदालत में जा सकते हैं जिससे रोक लग जाने पर बीच में अटक जाएगा।
    दिलात्मप्रकाश जैन ने 6 सितम्बर को जिला कलक्टर श्रीगंगानगर और नगरपालिका अध्यक्ष सूरतगढ़ व इरकोन के प्रबंधक को एक पत्र लिखा है जिसमें पुल के गलत बनाने का उल्लेख किया गया है। पत्र में लिखा गया है।
    सूचना के अधिकार के तहत नगरपालिका ने साइट प्लान,नक्शा,तखमीना बाबत कोई जानकारी नहीं दी है। इरकोन कं. ने नक्शा तखमीना साइट प्लान नहीं दिया है। सिर्फ सोइल भूमि रिपोर्ट की नकल ही दी है। मंडल रेल प्रबंधक बीकानेर ने साइट प्लान व नक्शा दिया है तथा अन्य जानकारियां इरकोन से लेने का कहा है।
रेलवे से उपलब्ध नक्शे के अनुसार मौके पर इरकोन ने अलाइन्मेंट नहीं दिया है। स्थान में तबदीली की गई है। नक्शे के अनुसार पुल बडोपल रोड से रेलवे डिग्गी गंदे पानी के गड्ढे के ऊपर से होकर, खेल मैदान के पास से होता हुआ ,गंदे पानी के नाले के पास से होटल आशियाना की तरफ जाना था। गंदे पानी का नाला नक्शे में दिखलाया नहीं गया है।
अब फिर इस अलाइन्मेंट को बदलकर अवैध कॉलोनी को बचाने वास्ते भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। अब इस पुल को इंडेन गैस एजेंसी कार्यालय के पीछे पुल को मोड़ देकर बनाया जाएगा। सरकार इसके लिए 10 फुट की सडक़ कॉलोनी में बनाकर देगी। इस स्थान पर पार्क की दीवार व अन्य स्थानों को हटाना पड़ेगा। इसके लिए भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही नगरपालिका को नए सिरे से करनी पड़ेगी।
    सोइल टेस्ट इाकोन ने पहले कराना दिखा दिया है तो दुबारा क्यों कराया जा रहा है। समिति ने आशंका प्रगट की है कि ऐसा लगता है कि पहले वाली रिपोर्ट सही नहीं है। पुल के स्थान परिवर्तन के कारण दुबारा सोइल जांच की कार्यवाही की जा रही है।
    भू माफिया, बिल्डर्स, बेनामी संपति के मालिकों के कारण पहले ही स्थान बदला गया था तथा अब अवैध कॉलोनी को बचाने वास्ते प्रशासन पर तीसरी बार पुल का स्थान बदलाने को दबाव बनाया जा रहा है। स्थानीय विधायक, पालिका अध्यक्ष जिला कलक्टर आदि इंजीनियर बनकर बिना तकनीकी ज्ञान के भूमाफिया की ईच्छानुसार कार्य कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि शहर का बेड़ा गर्क करने की सोची हुई है।
    इस समय ओवरब्रिज गैरकानूनी, गैर न्यायिक,बगैर नक्शा, साईट प्लान व बिना तखमीना मंजूरी के कार्य करवाया जा रहा है। इस पर न्यायिक प्रक्रिया की गाज कभी भी गिर सकती है।
    ऐसा क्यों किया जा रहा है? प्रशासनिक अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय, राजनैतिक दलों व सामाजिक संगठन सभी आँखें मूंदे बैठे हैं। चुप हैं जैसे जुबान ही नहीं है। नए परिवर्तन से लाईन पार के 10 वार्डों के लोगों को करीब 1 किलोमीटर और अधिक रास्ता पार कर शहर में आना पड़ेगा। सेठ रामदयाल राठी स्कूल के खेल मैदान को खत्म किया जा रहा है।
    दिलात्म प्रकाश जैन ने लोगों को चेताया है कि अभी समय रहते जागो और ओवरब्रिज सही स्थान पर बनाने के प्रयास नए सिरे से शुरू करें।

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अब चल रहे निर्माण की एकदम ताजा रिपोर्ट करणीदानसिंह राजपूत
अभी देखलो::अभी देखलो:पुन:कह रहे हैं कि मौके पर देखलो-

रेलवे ओवर ब्रिज से मंडराएगा हर समय मौत का खतरा-
पुल पर जबरदस्त मोड़ है-पुल पर दुर्घटनाओं का खतरा रहेगा-
पुल अब कॉलोनी में उतरेगा-बसंत बिहार में रहेगा खतरा-
खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 15 फरवरी 2014. रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण मौके पर देखते हैं तो मालूम पड़ता है कि इसकी चौड़ाई कम है। इतनी कम चौड़ाई क्यों रखी गई? शायद आसपास की दुकानों को टूटने से बचाने के चक्कर में पुल की चौड़ाई कम कर दी गई। जो अब हमेशा के लिए दुर्घटनाओं का खतरा पैदा कर दिया गया है।
पुल को पहले इंडेन गैस कार्यालय के आगे से बनाना था। लेकिन अब पीछे से बनाया जाने के कारण पुल के ऊपर जबरदस्त मोड़ दिया गया है तथा बसंत बिहार के बीच में उतारा चढ़ाया गया है। बड़ोपल रोड से आने वाला तेज वाहन जबरदस्त मोड़ पर आएगा तब दुर्घटना का खतरा रहेगा। इसके बाद तेज गति से बसंत बिहार में उतरेगा तब खतरा रहेगा।
आज तो इस हालात को समझा नहीं जा रहा है और न देखा जा रहा है। लेकिन बाद में बसंत बिहार और आनन्द बिहार दोनों ही कॉलोनियों के लिए खतरा रहेगा। दोनों कॉलोनियों का बेड़ा गर्क हो रहा है मगर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा।
असल में यहां खूब पैसे वाले,खूब पढ़े लिखे,ऊंचे ओहदों वाले अधिकारी तथा राजनेता आदि रहते हैं और उनको एक मिनट की फुर्सत नहीं है।




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बुधवार, 22 जनवरी 2014

एलियंस दूसरे मानव चन्द्रमा पर बसे हैं?


दूसरी दुनिया के मानव यानि कि एलियंस के बारे में जानने की ईच्छा हर व्यक्ति की रही है और अभी भी है।
गूगल मैप की तस्वीरों के शोध पर ये बातें कही जाने लगी है।

एलियंस यानि कि दूसरी दुनिया के मानव पर जब भी कोई बात आती है तो उसके बारे में अधिक से अधिक जानने की जिज्ञासा जाग उठती है। यह मानव की स्वाभविक ईच्छा है चाहे वह धरती के किसी भी हिस्से में बसा हुआ हो। इस बार चर्चा आई है वह आश्चर्य पैदा करने वाली है। गूगल मैप की तसवीरों की मानें तो हमारी धरती के एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा पर एलियन्स का बसेरा है।
गूगल मैप केद्रवारा शोधकर्ताओं ने चन्द्रमा की सतह का अध्ययन किया है तथा वहां पर त्रिकोणीय स्पेशशिप होने की बात कही जा रही है। जो कि काफी हद तक एलियंस के यूएफओ जैसा है। गूगल मैप के माध्यम से इस यूअफओ की खींची गई तस्वीर को विडियो के रूप में यू ट्यूब पर सांझा किया गया है। इस विडियो में एक त्रिकोणीय आकृति दिखाई दे रही है। यू ट्यूब पर ये विडियो wowforreel         के नाम से पोस्ट किया गया है।
यू ट्यूब पर पोस्ट किए अपने वर्णन में शोधकर्ता ने कहा है कि एलियंस के सदर्भ में यह अब तक की सर्वश्रेष्ठ खोज है। हालांकि अभी तक इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हो पाई है।
दिनांक 20 जनवरी 2014.

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दूसरी  दुनिया दूसरे ग्रहों के मानव एलियन्स के धरती पर आने  फोटो कल्पना   -    करणीदानसिंह राजपूत

 

दूसरी  दुनिया दूसरे ग्रहों के मानव एलियन्स के धरती पर आने और धरती के वर्तमान मानव के अतिविकसित रूप अतिमानव कि मिली जुली कल्पना के तहत यह फोटो 16 मार्च 2013 की रात्रि में लिए गए। 
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अतिमानव नामक एक महत्वपूर्ण पुस्तक


अतिमानव नामक एक महत्वपूर्ण पुस्तक है,जो आध्यात्म दर्शन विज्ञान और धर्म अनुभव पर रविदत्त मोहता की ओर लिखी गई है। असल में रविदत्त मोहता के स्वर उच्चारित हुए और उन्हें लिपिबद्ध किया गया।

 प्रसिद्ध दार्शनिक डा.छगन मोहता के पौत्र हैं रविदत्त मोहता। इस पुस्तक अतिमानव के बारे में जिज्ञासा है तो उसके बारे में अवश्य जानिए। हमारी इसी साईट पर पुस्तक चर्चा स्तंभ में।






रविवार, 19 जनवरी 2014

फार्म ने शॉपिंग काम्पलेक्स में नहीं बनाए पार्क पार्किंग और टायलेट


लोगों को ये सुविधाएं देने का बतलाकर दुकानें लीज पर दी गई थी

केन्द्रीय राज्यफार्म निगम के सूरतगढ़ स्थित फार्म मुख्यालय की जमीन पर मुख्यबाजार से सटी भूमि पर अपना विशाल मार्केट कॉम्लेक्स सैंकड़ों दुकानों वाला बनाया और उसकी दुकानों की नीलामी में करोड़ों रूपए कमाए। उस कॉम्लेक्स में जो सुविधाएं घोषित की थी उनमें से एक की भी पूर्ति नहीं की गई। इस कॉम्लेक्स में सडक़ें,नालियां,पार्क,पार्किंग,शौचालय मूत्रालय आदि नहीं है। कभी भी सफाई नहीं करवाई गई। दुकानदार परेशान है और नगर पालिका प्रशासन को सडक़ें आदि के निर्माण के ज्ञापन और चेतावनियां दे रहा है। नगरपालिका ने पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल के कार्यकाल में एक सडक़ का निर्माण नियम विरूद्ध करवा दिया था।
अब अगर फार्म प्रशासन कोई भी कार्य नहीं करवा रहा है तो दुकानदारों को फार्म प्रशासन को कानूनी नोटिस देना चाहिए।
फार्म प्रशासन की ओर से साफ सफाई का कार्य नहीं करवाया जा रहा है तो इस हालत में नगरपालिका को भी फार्म प्रशासन को नोटिसदेनाचाहिए और कानूनी रूप से बाध्य करना चाहिए।
यह रिपोर्ट 20 मई 2013 को प्रकाशित की गई थी जो दुबारा पढ़ी जा सकती है।
 

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, केन्द्रीय राज्य फार्म निगम के सूरतगढ़ फार्म के सूरतगढ़ स्थित मुख्य कार्यालय की जमीन शहर के मुख्य बाजार से सटी हुई है। फार्म ने अपनी बिगड़ी हुई माली हालत में 1982  में बाजार से चिपती हुई जमीन पर शॉपिंग कॉम्पलेक्स के लिए भूखंड लीज डीड पर दिए। उस समय लोगों को आकर्षित करने के लिए दुकानों के साथ में ही पार्किंग,पार्क और टायलेट बनाकर देने का वादा किया गया। यह सब उस समय नक्से में भी दर्शाया हुआ था। दुकानें एक साथ नहीं बनी इसलिए दुकानदार संगठित नहीं थे।  जो थोड़े दुकानदार थे उन्होंने कुछ साल तो फार्म प्रबंधन से कहा लेकिन बाद में जब कुछ भी नहीं हुआ तो चुप हो गए।

शहर में जब जब यातायात के अवरूद्ध की या परेशानी की बात आती है तब कहा जाता है कि फार्म की जमीन पर पार्किंग होनी चाहिए। फार्म वाले कई कई बार वाहनों को खड़ा करने पर रोक लगाते रहते हैं। पार्किंग के बारे में तीन चार बार पुलिस थाने में सीएलजी की बैठकों में विचार विमर्श हुआ। नगरपालिका प्रशासन ने फार्म से जब जब नक्सा मांगा तब फार्म ने 2005 को कोई नक्सा दिया। मैं भी इन बैठकों में था और प्रशासन को सुझाव दिया था कि फार्म से पुराना नक्सा मांगा जाए। लेकिन पालिका प्रशासन ने भी बाद में दबाव नहीं दिया। इतनी दुकानें बनी है,उनकी मंजूरी हुई है। नक्सा कहीं तो अभी भी होगा।

अब फार्म ने दुकानों को बाहर रखते हुए अपनी जमीन पर चारदीवारी बनानी शुरू कर रखी है,ताकि उसकी जमीन पर एक भी वाहन खड़ा नहीं किया जा सके। लेकिन उसके शॉपिंग काम्पलेक्स की दुकानों पर पहुंचने वाले वाहनों के लिए और लोगों के लिए पार्किंग तथा टॉयलेट की सुविधा देने को फार्म प्रशासन ही बाध्य है। इसके अलावा फार्म की जो दुकानें बीकानेर रोड पर निकाली हुई हैं,उनके आगे 8 फुट तक की चौकी नगरपालिका की जमीन पर है, जो अवैध है।

उपखंड अधिकारी और नगरपालिका प्रशासन को तुरंत ही फार्म की दीवार का निर्माण रूकवाना चाहिए तथा वहां पर पार्किंग,पार्क और टॉयलेट की सुविधाएं बनाकर देने को फार्म प्रबंधन को पाबंद करना चाहिए।


सोमवार, 6 जनवरी 2014

गुरू गोविन्दसिंह जी जयंती पर नगर कीर्तन:

सूरतगढ़ व हनुमानगढ़ टाऊन में निकाले गए नगर कीर्तन की चित्रावली:
रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 6 जनवरी 2014. सरवंशदानी गुरू गोविन्दसिंह जी के जन्मोत्सव पर सूरतगढ़ और हनुमानगढ़ टाऊन में निकाले गए नगर कीर्तन की चित्रावली यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है।


सूरतगढ़ चित्र- रमेश स्वामी







 हनुमानगढ़ टाऊन चित्र- करणीदानसिंह राजपूत


 



 

रविवार, 5 जनवरी 2014

आपातकाल:कालकोठरी में गुरूशरण छाबड़ा और स.वकील हरचंदसिंह सिद्धु को डाल दिया गया था:


आपातकाल के बंदियों को पेंशन:वसुंधरा राज मंत्रीमंडल का निर्णय:सूरतगढ़ में आपातकाल:

 


विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़,5 जनवरी 2014.
आपातकाल के मीशा और रासुका बंदियों को भाजपा के पिछले वसुंधरा राज में पेंशन के नियम बन गए थे लेकिन कांग्रेस की गहलोत सरकार ने रोक लगा दी थी,लेकिन भाजपा राज दुबारा आने पर वह पेंशन दुबारा लागू कर दी गई है जो कि कल्याणकारी राज की कार्यवाही का एक शुभ संकेत है। अभी इसमें शांति भंग में बंदी बनाए गए और नजरबंद किए गए लोगों को पेंशन सुविधा देना बाकी है।
    इंदिरा गांधी के राज में सब कुछ वह नहीं हुआ जो सराहा जाए। सन 1975 में 25 जून को आपातकाल लागू कर संपूर्ण देश को जेल बना दिया गया था उसकी आलोचना संपूर्ण संसार में हुई थी। बहुत दर्दनाक हालात में लोग गुजरे। हजारों लोग तबाह हो गए। अनेक लोग मौत के शिकार हुए अनेक के कारोबार ठप हुए तथा बाद में पनप ही नहीं सके।
    देश के कई लेखकों ने अपने लेखों में लिखा है कि आपातकाल के घावों को समय ने मरहम लगाई है। लेकिन यह सच नहीं है। केवल शब्दों में लिख देने मात्र से मरहम नहीं लग पाती। उन लेखकों को मालूम नहीं कि अनेक परिवार वे पीड़ाएं अभी भी भोग रहे हैं। जिनके रोजगार बंद हो गए, कारोबार उजड़ गए वापस पनपे ही नहीं,उनके मरहम कैसे लग गया? आपातकाल लागू करने की तिथि को 40 साल हो चुके हैं। आपातकाल को भोगने वाले लोग करीब 70 प्रतिशत तो अब इस संसार में नहीं है, जो हैं वे सब 50 साल से उपर की आयु में यानि कि वृद्धावस्था में है। जो जीवित हैं उनमें से अनेक वृद्धावस्था में भयानक अभावों व कष्टों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं और जो संसार से विदा हो चुके हैं उनके परिवार कष्टों भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
अनेक लोग जिनमें पत्रकार लेखक बुद्धिजीवी और राजनीतिज्ञ शामिल हैं वे इस पीड़ा को जानते बूझते भी समझ नही पा रहे।
    सूरतगढ़ के लोगों में में भी आपातकाल के शिकार अनेक लोग हुए। लेकिन यहां जांबाज जोशीले लोग भी हैं। आपातकाल के लगाए जाने के अगले ही दिन रेलवे स्टेशन के आगे विरोध में आम सभा करके सरकार को चुनौती तक दे दी गई थी। उस सभा में गुरूशरण छाबड़ा व हरचंदसिंह सिद्धु सहित कई जांबाजों ने संबोधित किया था।
गिरफ्तारी के बाद गुरूशरण छाबड़ा ने राजनैतिक बंदी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर श्रीगंगानगर जेल में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1975 से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। अन्य कैदी सांकेतिक अनशप पर रहे थे। छाबड़ा को इसके लिए कालकेठरी में डाल दिया गयाप था जिनमें अमूमन मृत्युदंड फांसी पाए कैदियों को डाला जाता है। उनसे कोई मिल नहीं सकता था लेकिन किसी तरह मिल लिया जाता था। हरचंदसिंह सिद्धु ने भी तीन दिन बाद आमरण अनशन का नोटिस दे दिया था। इस पर उनको अन्यत्र स्थानान्तरित किया गया। सिद्धु को अजमेर जेल में काल कोठरी में डाल दिया गया था और आसपास कोई पूछता तो बताया जाता कि इसमें पागल है। सिद्धु को तो हथकड़ी व बेड़ी भी लगाई गई थी।
छाबड़ा के आमरण अनशन का यह असर हुआ कि सभी को राजनैतिक बंदी माना गया।
सूरतगढ़ के करीब 24 लोग जेलों में बंदी रहे। इनमें मीसा में भी रहे। वे लोग अब विभिन्न राजनैतिक दलों में हें। गुरूशरण छाबड़ा व हरचंद सिंह बाद में विधायक भी बन गए थे।
गुरूशरण छाबड़ा वर्तमान में जयपुर में रहते हैं तथा सन 2013 में राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। कई बार प्रयास के बाद कुछ ङ्क्षबदुओं को मान कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अनशन समाप्त करवाया था।
सरदार हरचंदसिंह सिद्धु वर्तमान में सूरतगढ़ में रहते हैं तथा अभी भी सरकारी भ्रष्टाचार दुराचार के विरोध में संघर्षरत हैं।

सूरतगढ़ के बंदी लोगों के बारे में अलग से विवरण देंगे।


करणीदानसिंह राजपूत

 =लेखक राजस्थान सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकार है तथा आपातकाल में जेल में बंद था। लेखक का भाई गोपसिंह सूर्यवंशी मीसा में बंद रहा था।

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