ओलावृष्टि में पीड़ित किसानों के दुखों में संदीप कासनिया. बाकी नेता गुम!
* समीक्षात्मक टिप्पणी: करणीदानसिंह राजपूत.
सूरतगढ़ विधानसभा के टिब्बा क्षेत्र में ओलावृष्टि से फसलों की तबाही से पीड़ित किसानों के खेतों में दुखों में संदीप कासनिया की मौजूदगी से एक के जिंदा होने का प्रमाण है। भाजपा के बाकी के नेता कहाँ हैं? बड़े नेताओं में अन्य नेता अन्य किसान नेता और विधानसभा के पिछले विधानसभा चुनाव सन् 2023 के लिए टिकट मांगने वाले और सन् 2028 के चुनाव के लिए सोशल मीडिया पर चेहरा दिखाते रहने वाले गुम से हो गये। नेता नेतियां सभी का गुम हो जाना आश्चर्य जनक है। सभी का इस प्राकृतिक आपदा में एक ही समय एक साथ गुम हो जाना बड़ी दुर्घटना है। जो आज गुम हैं वे धीरे धीरे सन् 2028 तक पूरे गुम हो जाएंगे। यह प्रकृति जैसा राजनीति आपदा का नियम है। जो अपने आप भूमि में समा रहे हैं उनको कोई भी क्यों निकाल कर बाहर लाएगा। बहुत आसान शब्दों में है ऐसा कुछ नहीं जो समझ में नहीं आता हो। मेरे लेखों रिपोर्टों में जमीन पर काम करने का लिखा गया था जिससे कुछ नेताओं नेतियों में नाराजगी है। जनता से जुड़ने का सुझाव राजनीति का पहला पाठ होता है और इसे मानने वाला ही राजनीति में आगे बढता है। अब यह विचारणीय है कि रामप्रताप कासनिया को हरा कर क्या पाया? रामप्रताप कासनिया को हराया तो कोई काम करने कराने वाला आगे रहता लेकिन इसमें भी कोई आगे नहीं रहा। जिसे मारा वही जीवित है। वही काम कराने में आगे है। वही जनता के बीच है।
काम कराने से दूर रहना और दूर भागना,लापता रहना ऐसी राजनीति है जो फेल करती है। समारोहों में कार्यकर्मों में घंटे दो घंटे फोटो होने तक जीवित दिखते हैं लेकिन सच्च में जीवित होते नहीं।पहले पत्रों में अंत में लिखते थे." थोड़ी लिखी को घणी समझना'। ०0०