प्रशासन में यह मनमर्जी नहीं चल सकती.सूरतगढ़ का क्या होगा बरसात में?
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 20 मई 2026.
प्रशासन में अधिकारियों की मनमर्जी नहीं चल सकती। अधिकारी न मनमर्जी से काम निपटा सकते हैं न महीनों तक पेंडिंग रख सकते हैं और न डस्टबिन में डाल सकते हैं। नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली में यह सब किया जा रहा है। यहां दो अधिकारी हैं। अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा और प्रशासक उपखंड अधिकारी भरतजयप्रकाश मीणा हैं।
* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान यहां दम तोड़ गया क्योंकि यहां दोनों अधिकारी सरकार के निर्देशों का सही सही पालन नहीं कर रहे। सड़कें नाले नालियां एक दम साफ होने चाहिए यह मुख्य माणक है लेकिन यहां तो बार बार की मांग,प्रदर्शन,ज्ञापन के बाद भी महीने निकल गये। दोनों अधिकारियों ने निरीक्षण नहीं किये। पिछले वर्ष 2025 में आई विपदाओं से और नालों में गिरने से हुई मानव मौतों से ही सीख ले लेनी थी। यह सीख भाजपा नेता नेतियों को तो जरूर लेनी चाहिए थी कि इनकी लापरवाही अनदेखी से अधिकारी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे और मोदी जी का स्वच्छ भारत अभियान फेल हो रहा है। शहर की हर वार्ड की सड़कें गलियां और कीचड़ भरे नाले नालियां गवाह हैं। जीवित आदमी, नेता,मीडिया झूठ बोल सकता है लिख सकता है अपना मुंह बंद रख सकता है लेकिन निर्जीव सड़कें और नाले नालियां तो सच्च प्रदर्शन करते हैं।
* आवासन मंडल पुरानी कालोनी के सड़कों के अतिक्रमण हटाने के नोटिस दिए और उसके बावजूद ईओ पूजा शर्मा ने हटाने की कार्वाई नहीं की। पिछले वर्ष बरसात में आवासन मंडल के अनेक आवासों में पानी भर गया था और सड़कें काफी दिन डूबी रही थी। इसबार सड़कों के अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर फिर बुरी हालत होगी। इनमें वे लोग भी परेशान होते हैं जिनके सड़कों पर अतिक्रमण नहीं हैं।
* गौरव पथ बीकानेर रोड के दोनों ओर के नालों पर से न अतिक्रमण हटाए न उनकी सफाई हुई। बीकानेर रोड के नालों की सफाई कराने की मांगें अनेक बार हुई। मुख्यमंत्री तक हुई और ईओ ने जिद्द पकड़ ली है कि नालों की मांग होती है वे सफाई करनी नहीं है। बाजारों के सभी नाले कचरे से भरे पड़े हैं। मोहल्लों में भी नाले जाम हैं। ईओ की मुख्य ड्युटी है जिसका वे पालन नहीं कर रही। नगरपालिका के प्रशासक उपखंड अधिकारी भरत जय प्रकाश मीणा को भी निरीक्षण करना चाहिए लेकिन वे भी पीएम के स्वच्छ भारत अभियान को सफल करने में एक्टिव नजर नहीं आते। उनको जितने भी ज्ञापन लोगों ने पार्टियों ने दिए उन पर कोई कार्वाई नहीं हुई। नगरपालिका ईओ कार्वाई नहीं कर रही है तो एक्शन ले सकते हैं और जिलाकलेक्टर को भी संपूर्ण रिपोर्ट कर सकते हैं। ईओ के विरूद्ध कोई भी एक्शन लेने में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को हिचक क्यों है? इन दोनों अधिकारियों की अनदेखी और बड़ी लापरवाही से बरसात में सूरतगढ़ का क्या होगा? यह भाजपा को जानने की फुरसत नहीं है लेकिन लोगों को आने वाली आफत से अपने घर दुकानों के बारे में सोचना चाहिए। यदि जानलेवा दुर्घटनाएं हो गई तब क्या होगा और प्रशासक व ईओ कितने जिम्मेदार होंगे?०0०



