ऐतिहासिक कोडमदेसर भैरों मंदिर और आसपास साफसुथरा हो. देवस्थान विभाग की देखरेख कम.
* करणीदानसिंह राजपूत *
* रिपोर्ट:30 मार्च 2026.
बीकानेर संभाग में कोडमदेसर भैरों मंदिर और तालाब ऐतिहासिक धरोहर एवं लाखों परिवारों के आस्था पूजा स्थल हैं जहां हजारों लोग रोजाना पहुंचते हैं। यह पूजा स्थल देवस्थान विभाग की लापरवाही में साफसुथरा नहीं है। यहां श्रद्धालुओं को सफाई में कमी दिखती है तो मानसिक पीड़ा पहुंचती है।
* तालाब जल से लबालब हो तो दर्शन सफल मगर उसका सूखा होना तो प्राकृतिक है कि वर्षा नहीं हुई। मगर जो लोग पहुंचे उनको यह धार्मिक स्थल साफ सुथरा तो मिले। इसके प्रांगण में ही सफाई नही। हजारों लोगों में सैंकड़ों को प्यास भी लगती है और लघुशंका भी होती होगी। पानी प्रबंध भी सही नहीं। कीचड़ क्यों हो? आसपास भी कचरा क्यों हो? मंदिर में प्रवेश करते हैं वहां दो बोर्ड लगे हैं। एक देवस्थान का प्रबंधन होने का सूचना देता है और एक ऐतिहासिक होने की सूचना देता है। इन दोनों ही बोर्ड के लिखे पेंट अक्षर धुंधले और खत्म हो गये। पुजारी कौन आदि नाम नहीं है। दोंनो बोर्डों के पास ही झाडियों की बढत ही दिखाती है कि सफाई पर ध्यान ही नहीं है।
एक बड़े बैनर पर नाम हैं। यहां प्रबंध जिनके पास है या जो देखरेख करते हैं, देवस्थान विभाग ने जिनको जिम्मेदारी दे रखी है, उनको साफ सफाई तो हर दिन हर समय रखनी ही चाहिए।
• भैरूजी की मूर्ति जांगलू में बसने के समय स्वंय राव चहायड़ सिंह जी गहलोत ने मंड़ोर ( जोधपुर) से लाकर यहां स्थापित की थी।
भैरू जी की मूर्ति के निकट के दो कीर्तिस्तंभ खुदा है। यह कीर्तिस्तंभ लाल पत्थर का है तथा इसके चारों ओर देवी-देवताओं की मूर्तियां खुदी है। इस लेख से पाया जाता है कि १४५९ ई० में भाद्रपद सुदि को राव रणमल के पुत्र राव जोधा ने यह तालाब खुदवाया और कीर्तिस्तंभ स्थापित करवाया।*
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