रविवार, 2 जुलाई 2023

पूजा छाबड़ा के क्रांतिकारी कदम और:जिला बनाओ समिति की धीमी चाल.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

शराबबंदी नशा मुक्ति आंदोलन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूजा छाबड़ा की क्रांतिकारी घोषणाएं और उनके तुरंत लागू करने से सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बन रहे संघर्ष पूर्ण वातावरण से  शासन-प्रशासन सभी घबराते हैं. 

पूजा छाबड़ा जिस तरह से बोल्ड स्टेप तुरंत उठाती है उससे जनता उस के पक्ष में प्रभावित हो रही है और सरकार भय खाती है। सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान के तहत पूजा छाबड़ा ने 21 मार्च को अचानक आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की और तुरंत यह कदम उठा भी लिया था। पूजा छाबड़ा के आमरण अनशन पर बैठने का महिलाओं पर प्रभाव पड़ा। तुरंत कदम उठाने से इलाके भर में चर्चा हुई और पूजा छाबड़ा एकदम से सिरमौर नेता बन गई। 

 छठे दिन उसे उठाया गया बीकानेर पीबीएम में भर्ती कराया गया वहां पर भी उसने अनशन नहीं तोड़ा।  3 अप्रैल को सरकार ने एक सहमति पत्र तैयार किया और उसमें तय हुआ कि मुख्यमंत्री कार्यालय के सक्षम अधिकारी से मुख्यमंत्री से मिलने का समय निर्धारित करवाया जाएगा और मुख्यमंत्री से पूजा छाबड़ा और उनके प्रतिनिधिमंडल की बात करवाई जाएगी। 

पूजा छाबड़ा के दबाव से सी एम ओ में आरती डोगरा के समक्ष पूजा छाबड़ा और प्रतिनिधिमंडल की प्रथम चरण की एक बैठक 3 मई को हो चुकी है। 

*पूजा छाबड़ा ने हर कदम बहुत तेजी से उठाया जितना कोई पुरुष भी उठाने में हिचक जाता है। 16 मई को उपखंड अधिकारी कार्यालय के आगे एक आम सभा हुई जिसमें पूजा छाबड़ा ने घोषणा की कि जब तक सूरतगढ़ जिला नहीं बनेगा तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेगी और उस पर तुरंत अमल भी शुरू कर दिया। 

* सूरतगढ़ जिला बनाओ समिति ने एक बिंदु तय किया था कि सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान में ग्रामीण जनता को जोड़ने के लिए गांवों में भी प्रचार किया जाए समिति तो नहीं कर पाई मगर पूजा छाबड़ा ने रथ बनाया और गांवों में प्रचार के लिए निकल पड़ी। 1 जून से उसने गांव में जाने लोगों के बीच में भाषण देने का अभियान चलाना शुरू किया। भीषण गर्मी में जब कोई अन्न ग्रहण नहीं करता हो ऐसी गंभीर स्थिति में जब शरीर कमजोर होता जाता हो तब भी गांव में जाकर लोगों के बीच में भाषण देना लोगों को बताना अपने साथ प्रेरित करना सब कुछ पूजा छाबड़ा करके दिखाने लगी।  

* 1 जुलाई को पूजा छाबड़ा भयानक गर्मी में गांव के अंदर भाषण दे रही तब अचानक तबीयत खराब हो गई और उन्हें 1 जुलाई की रात को सूरतगढ़ से जयपुर रेफर किया गया।

*2 जुलाई को जयपुर एस एम एस हॉस्पिटल में जांच और उपचार शुरू हुआ। उपचार के दौरान भी पूजा छाबड़ा ने अपना दबाव सरकार पर बना रखा है और जिला बनाओ अभियान के लिए मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए दबाव बनाया हुआ है।


👍 उधर दूसरी और सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान समिति अपने कार्यक्रम धीमी गति से कर रही है जो बोल्ड स्टेप तुरंत उठाने चाहिए उनके उठाने में हिचक रही है। 

👍 सूरतगढ़ में अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था। बार बार मांग भी उठी लेकिन समिति के लोग तय नहीं कर पाए।

 * वह कदम अभी भी डर से उठाने की घोषणा की है 2 जुलाई को निर्णय किया गया है कि 17 जुलाई को सूरतगढ़ बाजार धान मंडी शिक्षण संस्थाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद की जाएगी। इसमें भी 15 दिन का समय रख दिया।

 बहुत अच्छा होता कि यह कदम बोल्ड स्टेप सरकार के ऊपर दबाव डालने के लिए तीन-चार दिन के बीच में ही उठाया जाना चाहिए था। बोल्ड स्टेप उठाए बिना सरकार पर दबाव बनाया नहीं जा सकता।

 15 दिन का समय बहुत अधिक है सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान समिति को इस पर विचार करना चाहिए और दबाव के लिए तुरंत घोषणा करनी चाहिए और समय सीमा दो-तीन दिन से अधिक नहीं होनी चाहिए। सरकारें इतनी लंबी छूट से घबराती नहीं है।

* सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान के लिए तुरंत क्रांतिकारी कदम उठाने की आवश्यकता है। ऐसे कदम जब एक नारी पूजा छाबड़ा उठा सकती है तब बहुत बड़ी समिति क्रांतिकारी कदम उठाने में धीमी गति से क्यों चलती है? क्रांतिकारी कदम उठाने में समिति कतराती क्यों है?धीमी गति से कभी काम नहीं होता और प्रभाव नहीं पड़़ता। समिति को पहले उठाए कदमों और उनके प्रभाव पड़े नहीं पड़े की समीक्षा भी करनी चाहिए। सोचा जाना चाहिए कि प्रभाव क्यों नहीं पड़े?


सरकार पूजा छाबड़ा से कोई बात करती है कोई मंत्री अधिकारी मिलता है त़ो जन चर्चा पूजा छाबड़ा की बनती है। समिति से जुड़े लोगों को सभी तरह के बिंदुओं पर विचार करना चाहिए।



* सूरतगढ़ को जिला कोई भी बनवाऐ लाभ तो जनता को मिलना है लेकिन क्रांतिकारी कदमों की हमेशा सराहना होती है। यह समिति के बड़े नेताओं को समझना चाहिए.०0०

2 जुलाई 2023.

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