सोमवार, 2 मार्च 2026

गंदगी से गरीब नहीं,नेता बीमार हो मरते हैं.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

गंदगी कचरे से गरीब नहीं मरते क्योंकि उनका शरीर बचाव की स्थिति निरंतर बनाता रहता है। गरीब लोग गंदगी को झेलते हुए शारीरिक मजबूत होते जाते हैं इसलिए बीमारियां असर नहीं करती। 

लेकिन गंदगी आलीशान भवनों में बंद रहने  वाले नेताओं,वी.आई.पी,धनाढ्य और बड़े लोगों पर जल्दी ही असर करती है। नेताओं पर गंदगी के असर से बीमारियां घेरती है और वे जल्दी मरणासन्न हो जाते हैं। अंदर अंदर रहने वालों को खुली हवा खुली धूप नहीं मिलती लेकिन कोठी के आसपास की नालियों की गंदगी और सड़कों के कचरे की बदबू बीमार करती है। गंदगी से बीमार होने वालों का शरीर बीमारियों से लड़ने में कमजोर रहता है इसलिए वे बीमार होने के बाद चाहे जो उपचार ईलाज करवाएं,दुबारा स्वस्थ नहीं हो पाते। वे पीड़ादायक हालत में अंतिम सांस लेते हैं। यह अंतिम सांस भी मांगने पर भी मिलती नहीं है।

सारांश यही है कि गंदगी से गरीब नहीं मरते,गंदगी से नेता और परिवार ही बीमार होकर मरते हैं। हां,ईलाज कराने के बाद स्वस्थ होने बच जाने का वहम तो होता है लेकिन यह कुछ दिनों या कुछ महीनों का ही होता है। गंदगी पर कभी कोई नेता और नेती मुंह तक नहीं खोलते। सफाई की व्यवस्था के लिए कोशिश नहीं करते। गंदगी फैलाने वाले निकम्मे सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों को फटकारते नहीं। जो नेता नेती मुंह नहीं खोलते उनसे लिखित शिकायत की तो आशा भी नहीं की जा सकती। अपने आसपास ही देखें ऐसे नेताओं को और उनके परिवारों को जो अस्वस्थ हैं, बीमार हैं।०0०

2 मार्च 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)

94143 81356.

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