सोमवार, 21 मार्च 2016

लोगों की कड़तू कुटवा कर विधायक जी लगे मौज मस्ती में:


सिंगरासर माईनर विधायक जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है और यह जयपुर में बतलाते हैं। सूरतगढ़ में संघर्ष कर रहे लोगों को पुलिस ठोकती है तो यहां पर उनका मुंह नहीं खुलता:
- करणीदानसिंह राजपूत -
राजेन्द्रसिंह भादू को इलाके की जनता समझ नहीं सकी और अभी भी नहीं समझ रही,अगर भादू को सही मायने में समझ जाती तो उसकी कड़तू पुलिस नहीं कूट पाती। सिंगरासर माइनर की मांग को राजेन्द्र भादू ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में बताया है। यह बात विधायक ने यहां नहीं कही। विधायक ने यह बात जयपुर में राजस्थान पत्रिका को कही। इसका मतलब है कि इसको बनाने का विधायक जी का सपना है। इस सपने को पूरा कराने की मांग कर रही जनता की कड़तू कुटवाने का कौनसा ड्रीम प्रोजेक्ट है यह भी जनता को समझा दिया जाना चाहिए। 
ही इलाके की जनता को साथ लेकर 2007 में शुरू किया। 
यह बात लिखने का कारण है कि एक तरफ तो लोगों की कड़तू कुटवाने और उन पर मुकद्दमा बनाने वाली सरकार के विधायक जी मौज मस्ती में जुट गए। विधायक जी ने राजस्थान पत्रिका के मौज मस्ती वाले मेले का उदघाटन किया ।
राजेन्द्रभादू का ड्रीम प्रोजेक्ट और मौज मस्ती को समझना चाहिए कि इसके पीछे कितनी धूर्तता भरी है। 
राजेन्द्र भादू का विधायक बनने का सपना था और उसने सींगरासर माइनर का सपना इलाके के लोगों को दिखलाया। विधायक राजेन्द्र भादू ने अपना सपना तो पूरा कर लिया और जनता को सपना पूरा होने के बजाय कड़तू तुड़वानी पड़ी। इस घटना का विधायक ने कहीं भी दुख प्रगट नहीं किया। विधायक जी की सरकार ने कड़तू तो ठोकी साथ में सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाने का मुकद्दमा भी सैंकड़ों लोगों पर ठोक दिया। अपना सपना पूरा करने वाले विधायक राजेन्द्र ने मुकद्दमा निरस्त करवाने और गिरफ्तारियां नहीं होने देने की घोषणा नहीं की है। 
लोगों को सपना दिखलाकर राजेन्द्र भादू ने वोट बटोरे और विधायक बनने के बाद भूल गए। एक एक करके जब राजस्थान सरकार का तीसरा बजट आ गया और उसमें सिंगरासर माइनर के लिए एक पैसे की घोषणा नहीं हुई तो लोगों का संघर्ष जायज था। अब आगे कैसे विश्वास किया जा सकता है कि विधायक राजेन्द्र भादू इस माइनर के लिए वसुंधरा राजे से बात कर लेंगे और बजट भी रखवा लेंगे। वसुंधरा राजे से बात करते हुए मंत्रियों की हिम्मत नहीं होती वहां पर भादू कहां से अपनी बात रख देंगे और भादू को अपनी बात रखनी थी तो अब तक क्यों नहीं रखी? क्या लोगों की कड़तू कुटवाने का इंतजार था?
इसी माइनर के निर्माण का सपना दिखला कर गंगाजल मील ने 2008 के चुनाव में जीत हासिल की और विधायक बने। उन्होंने कागजी घोषणा करवाई और बाद में भूल गए। अब राकेश बिश्रोई के नेतृत्व में संघर्ष शुरू हो गया तब सभी को अपनी जमीन ख्सिकती नजर आने लगी और मांग के समर्थन में लग गए। लेकिन उसमें कितने शामिल हुए हैं? इसका प्रमाण कड़तू कुटवाने से हो सकता है कि इनकी यानि कि गंगाजल मील साहेब,पृथ्वी मील,गगनदीप विडिंग आदि किसी की कड़तू पर एक भी लठ नहीं पड़ा। जब लोगों की कड़तू पुलिस कूट रही थी तब ये महान नेता कहां पर थे?  
लोगों को अभी तक मालूम नहीं है कि मील में और राजेन्द्र भादू में कोई फर्क नहीं है। एक ही सिक्के के दो पहलू नहीं बल्कि समझना चाहिए कि एक ही सिक्का है। 
भादू को समझने के लिए एक और सबूत है। सूरतगढ़ अनूपगढ़ सड़क को निर्माण करवाने का सपना दिखलाया और जिन लोगों ने इस मंाग को उठाया उन पर मुकद्दमें बनवा दिए। इतना ही नहीं 31 दिसम्बर 2015 को तीन चार पत्रकारों को बुलाकर उनके सामने घोषणा तक कर डाली। भास्कर में 1 जनवरी 2016 को और पत्रिका में 2 जनवरी 2016 को सड़क निर्माण शुरू होने का समाचार छपा। विधायक जी ने इतना तक कहा कि 1 सप्ताह में टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। आजतक यह प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
लोगों को कुटवा कर, उन पर मुकद्दमें बनवा कर मौज मस्ती में खो जाने वाले विधायक आगे क्या क्या सलूक लोगों से करेंगे और प्रशासन से करवाऐंगे? लोगों को सावधान रहना चाहिए। यह आगे का दो साल का समय सतर्क रहने का है जाते जाते न जाने कौनसा सपना दिखा जाऐं?



सोमवार, 14 मार्च 2016

कानौर हैड पर लाठी-गोली कानून के विपरीत चलाई ~ पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू


कानौर हैड पर ऐटा-सिंगरासर माइनर की मांग कर रहे
निहत्थे निर्दोष किसानों पर लाठी व रबड़ गोली चलाई जाने की
घटना को वरिष्ठ वकील व पूर्व विधायक स. हरचंद सिंह सिद्धू ने
कानून की धाराओं के विपरीत बताया है। सिद्धू ने आरोप लगाया कि
राह चलते एक जने गोदारा पर रबड़ की गोली मार कर चोट
पहुंचाना पुलिस की गैर कानूनी कार्यवाही का पुख्ता प्रमाण है और
प्रशासन में कहीं भी कानून के प्रति जि मेवारी है तो इस अपराध
को दर्ज कर अनुसंधान करवाए व दोषियों को सजा दिलवाए।
पूर्व विधायक ने इस घटनाक्रम की निंदा करते हुए पुलिस प्रशासन
एवं जिला प्रशासन, कुछ कथित नेताओं की जिन्होंने भड़काऊ भाषण
दिए व पत्रकारों के आचरण को भी गैर जि मेदाराना बताया है
जिन्होंने अपने कैमरे प्रशासन को सौंप दिए। सिद्धू ने कहा है कि
जब नेता भड़काऊ भाषण दे रहे थे तब पुलिस व जिला प्रशासन ने
कार्यवाही क्यों नहीं की?
सिद्धू ने कहा है कि कैमरों के बाबत एतराज नहीं करके
पत्रकारों ने अपनी पत्रकारिता को  कलंकित किया है। पत्रकारों
को एतराज करना था व कैमरे जब्ती की फर्द बनवानी थी। पत्रकारों
की इस कार्यप्रणाली से पुलिस लाठीचार्ज की एक फोटो भी अखबारों
में नहीं आई। मीडिया कर्मियों का इस प्रकार का सहयोग
आपत्तिजनक है। सिद्धू ने सवाल उठाया है कि क्या बेगुनाह और अनजान
लोग पानी मांग कर गुनाह कर रहे थे। उन पर लाठीचार्ज घोर
आपत्तिजनक है।
सिद्धू ने सवाल किया है कि प्रशासन उन 2 व्यक्तियों को दोषी क्यों
नहीं ठहराता जिन्होंने सिंगरासर माइनर वास्ते लोगों को
आंदोलित किया व राजनीतिक रोटियां सेकी। एक पांच साल तक
विधायक रहे व उनकी पार्टी सत्ता में थी तब माइनर स्वीकृत क्यों
नहीं करवाई?
दूसरे व्यक्ति ढाई सालों से विधानसभा सदस्य हैं और उनकी पार्टी
का प्रचंड बहुमत है, फिर क्या कारण रहा है कि यह माइनर
स्वीकृत नहीं हुआ। वे किस मुंह से जनता को गुमराह कर रहे
हैं कि सिंगरासर माइनर मांग नहीं हमारा हक है। विधायक है
मगर जनता को हक दिलाने में असमर्थ हैं।
सिद्धू ने राजेन्द्र नाम संबोधन करते हुए साफ आरोप लगाया है और
सलाह दी है कि चंद चाटुकार अखबारों की बेबुनियाद खबरों को
भूल जाएं और जमीनी हकीकत को पहचानें वरना तुम्हारा हश्र भी
तुम्हारे परिवार की तरह होगा।

अपराध प्रशासन का और लाठी-गोली किसानों पर


करणीदान सिंह राजपूत
कानौर हैड पर आंदोलनकारी किसानों पर लाठियां गोलियां चलाने
की घटना पूरी तरह से प्रशासन और पुलिस की कत्र्तव्यहीनता और
लापरवाही का नतीजा थी। अपनी गलती और अपराध को छिपाने के लिए
किसानों को निशाना बनाया गया।
कानौर हैड पर राकेश बिश्रोई और सत्यप्रकाश सिहाग का
चढऩा और मर जाने की चेतावनी देना कोई बड़ा अपराध नहीं।
ऐसी कितनी ही घटनाएं विगत में हुई है लेकिन उनमें लाठी-गोली
चलाने की गलती नहीं हुई।
दोनों का कानौर हैड पर चढऩे का पूरा घटनाक्रम साबित
करता है कि प्रशासन पूर्ण रूप में दोषी है। प्रशासन ने हैड पर
अवरोधक लगाए जिन पर हजारों रुपये का खर्चा हुआ था। इसके
बावजूद वहां पर राकेश बिश्रोई व सत्यप्रकाश सिहाग कैसे पहुंच
गए? वहां पर अनेक अधिकारियों व सैकड़ों जवानों की ड्यूटी
थी। वे क्या कर रहे थे? इतनी घोर लापरवाही रही। इस
लापरवाही की सजा तो अधिकारियों को मिलनी चाहिए। बड़े पुलिस व
प्रशासन अधिकारी घटना स्थल से बीसियों किलोमीटर दूर थर्मल पावर
स्टेशन की आवासीय कॉलोनी परिसर में बने इरेक्टर हॉस्टल में
क्या कर रहे थे? अपने-अपने मु यालयों से रवाना होने के बाद
इन्हें सीधे घटनास्थल पर ही पहुंचना था। इरेक्टर हॉस्टल में
रहकर घटनास्थल पर नजर रखना उपयुक्त था या घटनास्थल पर
पहुंचकर नजर रखना उचित था?
अपनी आपराधिक त्रुटियों, बोखलाए अधिकारियों ने किसानों पर
लाठी-गोली चलवाई। ऐसा तो अंग्रेजी शासनकाल में भी नहीं हुआ
करता था।
असल में अपराध पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का रहा। प्रभावित
लोग या अन्य मुकदमा कराएं तो उनके पदों और नामों से करवाएं।
अभी तो सीधे मुकदमें दर्ज कराने की मांग की जा रही है। वह भी
मु यमंत्री वसुंधरा राजे से। जो दर्द दे उसी से इलाज कराने की
गुजारिश क्यों?



शुक्रवार, 11 मार्च 2016

पानी सच में नहीं? लाठी गोली सच में है:


- करणीदानसिंह राजपूत -
राजस्थान में पानी मांगने वालों के लिए सच में पानी नहीं है। सरकार की लाठी गोली सच में है। यह सच बार बार प्रमाणों के साथ सामने आता रहा है। यह सच श्रीगंगानगर जिले में पहले रावला घड़साना में कुछ साल पहले आया जिसमें 6 मौतें पुलिस कार्यवाही में हुई। उस समय राजस्थान में भाजपा का राज था और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे थी।
सूरतगढ़ तहसील में ऐटा सिंगरासर माइनर के लिए आँदोलन चल रहा है और लोगों को पानी की जगह पुलिस कार्यवाही मिली है। पानी नहीं हे लेकिन पुलिस की लाठी गोली है। यह सच एक बार फिर उजागर हो गया है।
इस मांग को सबसे पहले राजेन्द्र भादू ने सत्ता में आने की तड़प के लिए उठाया था जो अब विधायक बन चुके हैं लेकिन जनता से मीलों दूर चले गए हैं।
राजेन्द्र भादू ने जब यह मुद्दा उठा कर आँदोलन चलाया था तब भाजपा का राज था। सन 2008 में चुनाव में यह मुद्दा गंगाजल मील ने हड़प लिया और तेजी से प्रचार कर अपना मुद्दा बना लिया। मील जीत गए। उन्होंने कागजी कार्यवाही करवाई। जिसमें हेराफेरी रही। पहले पानी मांगा जा रहा था इंदिरागांधी नहर से। वहां से एक बूंद पानी मिलना संभव नहीं था और चल रहे पानी में से कोई भी सरकार एक बूंद पानी निकाल नहीं सकती थी। वह मामला केन्द्र सरकार की स्वीकृति से ही निपट सकता था।
राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने गोलमाल किया। इसे लघु सिंचाई का रूप देकर अपने स्तर पर ही मंजूर कर लिया। इंदिरागांधी नहर के बजाए पानी घग्घर बाढ़ की झीलों में उपलब्ध दिए जाने का निर्णय हो गया। पांच गांवों के लिए वह योजना बना दी गई जिसका खूब प्रचार किया गया।
उनका राज चला गया। राज भाजपा का आ गया और विधायक राजेन्द्र भादू बन गए। चुनाव से पहले भादू भी बोलते रहे। भादू इस मुद्दे को इन्कार भी नहीं कर सकते क्यों कि यह उनका ही शुरू किया हुआ था।
सवाल अभी भी कायम है कि क्या पानी उपलब्ध है?
मेंने मील के समय एक लेख लिखा था कि बिना दुल्हन के बयाह जैसी यह कार्यवाही है। बयाह हो जाने के बाद दुल्हल की तलाश होगी। लगता है कि बयाह भी अधूरा है और दुल्हन की तलाश भी है। नेता न जाने कब जनता के सामने सच बोलेंगे? 



इंदिरागांधी नहर: कानौर हैड पर आँदोलनकारियों पर पुलिस लाठी चार्ज:


सूरतगढ़ 11 मार्च 2016.
इंदिरागांधी नहर के कानौर हेड पर से आंदोलनकारियों को खदेडऩे के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया जिसमें कुछ लोगों के चोटें आने की सूचना है। सूरतगढ़ के राजकीय चिकित्सालय में भी घायल भर्ती है। एक बसपा नेता के अनुसार गंभीर घायल गंगानगर भेजे गए हैं। पुलिस की लाठी चार्ज के बाद आँदोलनकारियों को भाग कर अपने को बचाना पड़ा जिनमें सैंकडों की संख्या में साधारण ग्रामीण लोग ही थे। आसपास के खेतों में बनी ढाणियों में भी लोग छुप गए।
इंदिरागांधी नहर की बुर्जी नं 165 पर यह हैड है जहां पर ऐटा सिंगरासर माइनर की मांग करने वाले लोगों का 3 मार्च से बेमियादी धरना शुरू था। आंदोलनकारियों की संघर्ष समिति के संयोजक राकेश बिश्रोई की अगुवाई में यह धरना था और तीन चार दिनों से विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता जिनमें पूर्व विधायक आदि भी थे ने यहां पर भाषण भी दिए।
संयोजक व नेताओं का आरोप था कि भाजपा की सरकार ने बजट में इस माइनर के लिए कुछ भी घोषणा नहीं की। इस आक्रोश में 11 मार्च को महापड़ाव व कानौर हैड पर कब्जे का ऐलान किया हुआ था।
इस ऐलान के कारण प्रशासन ने वहां पर भारी पुलिस बंदोबस्त कर दिया था तथा कार्यपालक मजिस्ट्रेट भी लगा दिए थे। भारी पुलिस बंदोबस्त में भी आंदोलनकारी हैड पर पहुंच गए।
अभी पूरी सूचनाएं नहीं है।


लोकतंत्र रक्षा मंच प्रतिनिधि राज्यपाल से मिले:आपातकाल शांतिभंग बंदी पेंशन मामला:


जयपुर , 10 मार्च। लोकतंत्र रक्षा मंच ने राज्यपाल कल्याण सिंह से आग्रह किया है कि आपातकाल के दौरान मीसा एवं डीआईआर के अलावा 107 व अन्य धाराओं में बंद रहे सत्याग्रहियों को समान सुविधा दिलवाने के लिए राज्य सरकार से बात करें। प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात में यह आग्रह किया।
राज्यपाल ने भरोसा दिलाया है कि वे इस विषय को देखेंगे और उसके बाद सरकार से बात भी करेंगे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य आपातकाल विजय दिवस 20 मार्च को उदयपुर में मंच के प्रदेश सम्मेलन में राज्यपाल को मुख्य अतिथि के रूप में आने का आग्रह करने के लिए उनसे मिले थे। राज्यपाल ने प्रसन्नता जाहिर की कि मंच इस तरह का आयोजन कर रहा है। उन्होने कहा कि वे खुद भी लोकतंत्र सेनानी रहे है और उनकी इच्छा भी है कि वे इसमें हिस्सा लें लेकिन उसी दिन राष्ट्पति के राजस्थान दौरे के कारण आने में समर्थ नहीं रहेंगे। उन्होने प्रतिनिधिमंडल को आयोजन की शुभकामना दी। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम पारित किया है। ऐसा अधिनियम राजस्थान में भी पारित होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि वे अधिनियम की प्रति मंगवाकर उसका अध्ययन करेंगे और उसके बाद राजस्थान सरकार से बात करेंगे।
 राज्यपाल से मिलने वालों में मंच के प्रदेश मंत्री देवराज बोहरा, उपाध्यक्ष राजेन्द्र डेरेवाला, जिला अध्यक्ष बालगोपाल गुप्ता, कोटा संभाग प्रभारी बालचंद गर्ग, प्रवक्ता जुगल तापडिय़ा व राजेन्द्र राज शामिल थे। 



गुरुवार, 10 मार्च 2016

डिग्री फर्जी है.नजरें नीची रखें:तुम्हारे किसी भी फैसले से गड़बड़:


आरएसएस,आरपीएस,आइएएस कुछ भी बन जाओ.
डिग्री बी.एड,एम.एड हो.फर्जीवाड़े से ली गई सदा अपराध ही रहेगा जब भी पकड़ा जाए।
- करणीदानसिंह राजपूत -
डिग्री फर्जी है। नजरें नीची रखें। नजरें ही नहीं गरदन भी नीचे ताकि नजरें ऊपर उठ नहीं सके। नजरें आमने सामने किसी ऐसे से टकरा गई जो तुम्हारी गड़बड़ी को जानता होगा तो फिर अच्छे पद चाहे आरएसएस का हो चाहे आरपीएस का हो चाहे आइएएस का हो तुम वहां कुर्सी पर बैठ कर काम नहीं कर सकते। पद तो चाहे कितना ही ऊंचा हो चाहे कितना ही बड़ा हो उसकी पावर तुम्हारे में नहीं रहेगी। अपराध बोध तो सदा ही रहेगा। न जाने कब कोई शिकायत करदे? न जाने कब यह किसी सोशल मीडिया में आ जाए? कोई अखबार वाला न जाने कब भेद छाप डाले? गड़बड़ फर्जीवाड़ा भी ऐसा कि उसे किसी प्रकार से छुपाया नहीं जा सके और गायब भी नहीं किया जा सके। ऊंचे पर पावर फुल पद पर जाने के बाद अपराध बोध सताता ही रहेगा कि यह फर्जीवाड़ा क्यों किया? नौकरी कर सरकार के लाखों रूपए पचा लिए चाहे वे वेतन के रूप में मिले लेकिन जिस पद पर लगे वह डिग्री तो फर्जीवाड़े से हथियाई हुई थी। तुम कितने ही होशियार हो मगर अपराध तो कर ही लिया।
डिग्री फर्जीवाड़े से प्राप्त कर सरकारी नौकरी, एक पद से दूसरा पद  और ऊंचा अच्छा पद प्राप्त कर लिया हो चाहे आरएएस बन गए चाहे आइएएस बन गए।
तुम्हारे सामने भी लोगों के मामले आऐंगे। उनके निर्णय पर कोई भी नाराज होकर कभी भी तुम्हारा भेद खोल देगा। सभी के पक्ष में तो निर्णय दिए भी नहीं जा सकते?
तुम्हारा मामला भी कभी न कभी खुल जाएगा।
जितेन्द्र तोमर दिल्ली के कानून मंत्री आम आदमी पार्टी के राज के मंत्री तो बहुत बड़े थे। वे सामना नहीं कर पाए और कई दिनों तक जेल में रहने के बाद बड़ी मुश्किल से जमानत मिली। उनका प्रकरण 18 सालों तक छिपा रहा और जग जाहिर हुआ तो सामने केवल जेल ही थी। कानून मंत्री पद तो कम नहीं होता। कहां से कहां पहुंच गए?उनके पास में डिग्री फर्जीवाड़े से कबाड़ी हुई ही थी। जब वकालत के रजिस्ट्रेशन के लिए डिग्री पेश हुई तब किसी वकील ने शंका प्रगट की लेकिन उस समय गौर नहीं किया गया और वे वकालत करते करते आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक चुने जाने के बाद कानूनमंत्री बन गए।
कानूनमंत्री बनाए जाने के बाद वही पुरानी शिकायत चल पड़ी और एक के बाद एक जाँचें और गिरफ्तारी।
तुमने फर्जीवाड़ा कर यानि फर्जी दस्तावेज तैयार करवा कर एक डिग्री ली और उसकी नौकरी से सरकार को लाखों रूपए का चूना लगा दिया। वह डिग्री चाहे पांच साल पहले ली चाहे दस ग्यारह साल पहले। तुम चाहे नए पद पर पहुंच गए हों लेकिन तुम भी जितेन्द्र तोमर की तरह कब  गिरफ्त में आ जाओगे? किसी को भी मालूम नहीं? इसे स्थानीय बोलचाल की भाषा बोली में समझा देना चाहता हूं कि ना जाने कब झल जाओगे?
इसलिए नजरें नीची रखना। यह मजबूरी है।
ये तुम्हारे संगी साथी मीडिया वाले नहीं बचा पाऐंगे। इनकी भी आवाज कितनी है? ये भी तो दो हजार छाप कर दसियों हजार और उससे अधिक रिकार्ड में दिखाकर बताने वाले। तुम्हें न बचा पाऐंगे न कोई इमदाद कर पाऐंगे। इनकी बेचारों की कितनी पावर है। ये तो तुम्हारी पकड़ के फंसने के समाचार छापने में भी देरी नहीं करेंगे। इनको भी यह डर तो सताता ही रहेगा कि रिकार्ड तो ये भी फर्जी तैयार करते हैं।
बस इसलिए यह सीख है। नजरें नीची ताकि बवाल आने का वक्त टलता रहे। खत्म तो नहीं हो सकता। जितेन्द्र तोमर तो फर्जीवाड़े में बनना ही पड़ता है। खतरा तो ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद ही शुरू होता है।




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बुधवार, 9 मार्च 2016

गुलाब कोठारी का नवदम्पति रवि साक्षी को आशीर्वाद:


पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत के पुत्र रविप्रतापसिंह एवं साक्षी अरोड़ा की शादी:
सूरतगढ 9 मार्च 2016.
राजस्थान पत्रिका ग्रुप के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने रविप्रतापसिंह बैंस राजपूत एवं साक्षी जयसिंघानी अरोड़ा की शादी पर आशीर्वाद प्रदान किया है। रवि व साक्षी दोनों ही सोफ्टवेयर इंजीनियर हैं।
यह विवाह समारोह 5 मार्च की रात्रि में यहां के प्रसिद्ध सन सिटी रिसोर्ट में सम्पन्न हुआ। समारोह में दोनों के परिजनों के अलावा गण मान्य ने भाग लिया।
रवि के पिता करणीदानसिंह ने राजस्थान पत्रिका में करीब 35 सालों तक पत्रकारिता की थी।


 

सोमवार, 7 मार्च 2016

पत्रकार करणीदानसिंह के पुत्र रवि व साक्षी के वरमाला दृश्य:


रविप्रतापसिंह एवं साक्षी अरोड़ा की शादी 5 मार्च को हुई।
सूरतगढ 9 मार्च 2016.
रविप्रतापसिंह एवं साक्षी अरोड़ा की शादी 5 मार्च को हुई। रवि व साक्षी दोनों ही सोफ्टवेयर इंजीनियर हैं।
यह विवाह समारोह 5 मार्च की रात्रि में यहां के प्रसिद्ध सन सिटी रिसोर्ट में सम्पन्न हुआ। समारोह में दोनों के परिजनों के अलावा गण मान्य ने भाग लिया।






पत्रकार करणीदानसिंह के सुपुत्र रविप्रतापसिंह और साक्षी के विवाह की आनन्दमयी लहर

रवि प्रतापसिंह व साक्षी दोनों ही सोफ्टवेयर इंजीनियर हैं
करणीदानसिंह राजपूत एवं श्रीमती विनीता सूर्यवंशी परिवार जयसिंहानिया परिवार

सूरतगढ़। वरिष्ठ पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत एवं श्रीमती विनीता सूर्यवंशी के छोटे पुत्र रविप्रतापसिंह का विवाह सौभाग्यवती साक्षी पुत्री मीनाक्षी एवं स्व.राकेश अरोड़ा निवासी कोटा के संग सन सिटी रिसोर्ट सूरतगढ़ में भव्य समारोह में 5 मार्च 2016 को हर्षाेल्लास के साथ हुआ। सूर्यवंशी बैंस राजपूत परिवार और जयसिंहानिया अरोड़ा परिवार के इस रिश्ते के समारोह में गणमान्य ने भाग लिया। रवि प्रतापसिंह व साक्षी दोनों ही सोफ्टवेयर इंजीनियर हैं। दोनों के मित्रों व सहेलियों ने भी समारोह में जम्मू कश्मीर,दिल्ली,जयपुर बीकानेर से पहुंच कर भाग लिया। 

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