गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

अन्न खरीद में सरकारी तानाशाही.अन्नदाता का खून चूंसना बंद हो.राजनैतिक दल सोचें.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

 सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं के खरीदने के बनाए नियम किसानों के लिए आफत बने हैं। किसानों को गेहूं तुलाई में परेशानी हो रही है।


 किसानों की मांगों पर सरकार यानि प्रभारी मंत्रियों अधिकारियों का कोई ध्यान ही नहीं है। 

सरकार जब भी नियम बनाती है तब किसान संगठनों और मंडी व्यापारियों के संगठनों से बातचीत करके एक राय और सुविधा पर सहमति नहीं लेती। 

किसानों व्यापारियों और कृषि उद्योग में काम करने वालों का बहुत बड़ा परिश्रम का भाग और रूपया मांगे मनवाने, नियम बदलवाने में व्यर्थ में खर्च हो जाता है। राष्ट्रीयता के भाषण तो दिए जाते हैं लेकिन इस राष्ट्रीय नुकसान पर कोई भी सरकार ध्यान नहीं देती।

* सरकार में आने के लिए राजनीतिक पार्टियां किसानों व्यापारियों के हर वर्ग,उत्पादक,मजदूर, कारखाने, फैक्ट्रियां, उद्योग आदि के बीच अनुनय विनय प्रार्थना करती हैं। राजनैतिक दलों के नेता तलवे चाटते हैं,लेकिन सरकार बन जाने के बाद सभी माईबाप बन जाते हैं और रवैया माईबाप से भी ऊपर तानाशाही बन जाता है। तानाशाही रवैये से बनाए नियमों से टकराव होता है। 

पहले तो किसानों को फसल पैदा करने के लिए सिंचाई पानी,उर्वरक के लिए बहुत बड़ा संघर्ष करना पड़ता है और जब उत्पादन हो जाता है तब खुशहाल होने के बजाय हर प्रकार से परेशानी में उलझ जाने को मजबूर हो जाता है।

* किसान को अन्नदाता कहते हैं लेकिन संपूर्ण कृषि से तो लगता है कि उनका खून चूंसा जाता है।  राजनैतिक दलों को इस पर विचार करना चाहिए और अपनी सरकार में किसानों के लिए एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।०0०

9 अप्रैल 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता का 62 वां वर्ष.

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

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