शनिवार, 18 अप्रैल 2026

भ्रष्टाचारियों का सजा काल,जेल में बुढापा.बुरे दिन!

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार करने वालों पर खुला लिखने की अनेक की आदत है। उनकी कोशिश यही रहती है कि घटनाओं की फोटो लगाई जाए, तथ्य लगाए जाएं, तथ्य दिए जाएं,दस्तावेज भी हों उनका उल्लेख भी हो,और यह  लगभग रिपोर्ट में होता है।

*नेता लोग जो अपनी-अपनी दुकानें चलाते हैं, वे भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों पर चुप रहते हैं। उनकी दुकान जिस तरीके से चले केवल उस एक सब्जेक्ट को अपनी जरूरत के हिसाब से लेते हैं। उसे जोड़ते हैं बाकी जनता का अहित होता रहे, भ्रष्टाचारी लोग जनता को लूटते रहें, उस विषय पर उन घटनाओं पर समाचारों पर नेता चुप रहते हैं। 


 किसी भी पार्टी  का नेता हो नेतियां हों भ्रष्टाचार पर चुप ही रहते हैं।उनके रवैये से ऐसा महसूस होता है कि उनका गरीब और पीड़ित से कोई लेना-देना नहीं है। पीड़ित की सेवा करना, समाज सेवा करना जो कुछ कहते हैं वह केवल हवाई बातें हैं। 

कोई ठोस कार्य किया हो भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई हो तो नेताजी की डायरी पूरी तरह से खाली मिलती है। जनता की पीड़ाओं पर नेता और नेतियां किसी दफ्तर में साथ नहीं जाते,काम नहीं करवाते। उनके भरोसे पीड़ित गरीब चक्कर काट काट करके थक जाता है। नेताओं को गरीबों के मंच चाहिए। गरीब पीड़ाओं में जब मंच लगता है, धरना लगाता है,प्रदर्शन करता है तब अचानक कोई नेता और कोई नेता वहां जरूर पहुंच जाते हैं। अनेक धरना और प्रदर्शन तो ऐसे होते हैं जिनके विषय के बारे में नेता नेतियों को पूरा पता नहीं होता लेकिन वे वहां एक साथ अनेक भी पहुंच जाते हैं। विभिन्न पार्टियों के एक साथ पहुंच जाते हैं। जब सवाल आता है कि अगले दिन किसी दफ्तर में जाना है, किसी अधिकारी से मिलना है, किसी अधिकारी के भ्रष्टाचार पर उसको फटकारना है तो नेताओं का बहाना होता है कि उनका काम निकल आया और वे शहर से बाहर चले गए। गरीब के साथ लगभग ऐसा होता रहता है। गरीब पीड़ित के साथ दफ्तरों मैं बैठे अधिकारी कर्मचारी तो ठगी करते ही हैं लेकिन नेता नेतियां भी ठगी करते शर्म नहीं करते।

गरीब को लूटने वाले गरीब को ठगने वाले धोखा देने वाले भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध लिखना अनेक चाटुकारों को बुरा लगता है लेकिन आश्चर्य यह है कि उनको भ्रष्टाचार करना बुरा नहीं लगता और भ्रष्टाचारी भी बुरा नहीं लगता। अनेक मामलों में नेता नेतियां भ्रष्टाचारियों के साथ खड़े होकर फोटो खिंचवाने में अपने आप को आनंदित महसूस करते हैं। 

* यह प्रमाणित मानकर चलना चाहिए कि राजस्थान में लगभग रोजाना ही कोई ना कोई भ्रष्टाचारी रंगे हाथों भ्रष्टाचार निरोधक टीम के द्वारा किसी न किसी जगह पकड़ा जाता है।

* भ्रष्टाचार का अंत निश्चित रूप से होता है। भ्रष्टाचारी के अंतिम दिन जो लगभग अधेड़ अवस्था या वृद्धावस्था में होते हैं वे दिन जेल के अंदर बीतते हैं और बहुत बुरे हालातो में बीतते हैं। अब जो भ्रष्टाचार कर रहे हैं। जनता को पीड़ित कर रहे हैं। वे चाहे स्त्री हों या पुरुष हों, किसी भी पद पर हों उनका अंत भी किसी न किसी दिन अवश्य आएगा। कभी ना कभी वे निश्चित रूप से गिरफ्तार होंगे, तब उनको रोना आएगा और उनके चाटुकार हैं वे एक भी उनके पास नहीं आएंगे।

भ्रष्टाचारी किसी भी पद पर हो आय से अधिक संपत्ति में पकड़ा जाता है। उसकी जांच होती है तो वर्षों का खाया पिया लूटा हुआ धन एकदम से उजागर हो जाता है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जांच में कभी कमी नहीं रखता। वह छुपाए हुए हर चल अचल संपत्ति को खोज ही लेता है। उसे जब्त कर लेता है। भ्रष्टाचारी अपने आप को बहुत शातिर समझते हैं, बुद्धिमान समझते हैं, भ्रष्टाचार में पैसे लेने के नए-नए तरीके आजमाते हैं,लेकिन फिर भी पकड़ लिए जाते हैं।

 आज जो अपनी कुर्सियों पर बैठे भ्रष्टाचार करते हुए इतराते हैं। अपने जाति और वर्ग के कुछ लोगों का समर्थन देख इतराते हैं,उनका भविष्य भी  बुरे दिनों की ओर बढ़ रहा है।०0०

18 अप्रैल 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 62 वां वर्ष,

स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत आजीवन) सूरतगढ़.

94143 81356.

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