किसकी बनेगी एसीबी न्यूज! इस शहर में!!
* करणीदानसिंह राजपूत *
दूर की गिरफ्तारी पर खुश शहर के नागरिक मीडिया बुद्धिमान लेकिन अपने ही शहर में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर सभी चुप। बस, यह एक कारण यानि यह एक मृतजीवन ने शहर का बेड़ा गर्क कर दिया है। भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों पर नहीं बोलने,विरोध नहीं करने पर भ्रष्टाचार बढ रहा है और भ्रष्टाचारी अधिकारियों की मनमानी बढ रही है जिससे आम आदमी लुट रहा है। आम आदमी के काम रुक रहे हैं। आम आदमी की फाईलों को अधिकारी कर्मचारी दबा देते हैं और पूछने पर अनेक चक्कर काटने पर फाईल नहीं मिलने का जवाब मिलता है। बार बार चक्कर काटने पर कह दिया जाता है कि काम नहीं होगा। कोई नियम नहीं बताते कि क्यों नहीं होगा? बस नहीं होगा। जरूरतमंद पीड़ित भी कहाँ जाए? नेता नेतियां मरे हुए वे कभी साथ नहीं देते। गरीब का काम कराना हो तो वे दिन में दस बारह बार मर जाते हैं। नेता नेतियां काम कराने के लिए साथ नहीं जाते बल्कि फोन भी नहीं करते। मरे हुए हों तब फोन कैसे करें? युवाओं में जोश होता है और वे भ्रष्टाचारियों से भिड़ जाते हैं लेकिन इस शहर में युवाओं की हालत तो बुड्ढों से बदतर है। नेताओं नेतियों के कुछ रूप कागजी जोश के हैं। उनके जोश कागजी हैं तो उनके भाषण संघर्ष आदि भी कागजी ही हैं जिन पर पीड़ित भरोसा कैसे करे कि इनके कहने से कभी काम तो होगा नहीं। पीड़ित जरूरतमंद का तब एक बड़ा सहारा उसकी जेब ही होता है। आम आदमी के काम रिश्वत देने पर हो पाते हैं।
👍 मरे नेताओं नेतियों वाले शहर में कोई ऐसा भी होता है जो मरना नहीं चाहता। वह एसीबी की तरफ आगे बढता है तब कभी कभी एसीबी की कार्वाई और भ्रष्टाचारी की गिरफ्तारी की न्यूज बन जाती है। ऐसी न्यूज का इंतजार है। किसकी न्यूज बनेगी? हां,अपने शहर में बनेगी। ( अपने शहर का नाम सोच लें,भ्रष्टाचारी का नाम भी सोच लें)
17 अप्रैल 2026.
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