बालक को मार डालने की कोशिश. पिता व दादा को आजीवन कारावास की सजा.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 29 मार्च 2026.पत्नी पर शक था कि उससे उत्पन्न बालक किसी और का है और इसी शक में बालक को मार डालने की कोशिशें हुई।
एक कोशिश सूरतगढ़ में की गई। बालक के पिता और दादा ने बाईपास पर सदरथाना भवन के कुछ दूर बालक को ईंट से चोटें पहुंचाई और मरा जान कर बालू में दबा कर चले गये। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था घायलावस्था में पड़ा बालक बचा लिया गया और उसके पिता और दादा आजीवन जेल की सजा में चले गये।
मानवता को झकझोर देने वाले मासूम बालक की हत्या के प्रयास के बहुचर्चित प्रकरण में अपर जिला एवं सेशन न्यायालय सूरतगढ़ ने आरोपियों को कठोर दंड देते हुए पिता और दादा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
यह भयानक घटना 17 मार्च 2022 की है। सूरतगढ़ में बाईपास रोड पर रेत के टीलों में एक 7–8 वर्षीय बालक के दबे होने की सूचना पुलिस थाना सूरतगढ़ शहर को टेलीफोन के माध्यम से प्राप्त हुई।
*सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो देखा कि एक मासूम बालक गंभीर घायल अवस्था में मिट्टी में दबा हुआ पड़ा था। उसके होंठ फटे हुए थे, मुंह पर गंभीर चोटें थीं, जीभ कटी हुई थी तथा पूरा चेहरा बुरी तरह सूजा हुआ था।
पुलिस ने तत्काल बालक को रेत से बाहर निकालकर राजकीय चिकित्सालय सूरतगढ़ में भर्ती कराया। बालक की हालत अत्यंत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे श्रीगंगानगर रेफर कर दिया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे पीबीएम अस्पताल बीकानेर भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने कई ऑपरेशन कर बालक का जीवन बचा लिया। उस समय बालक बोलने की स्थिति में नहीं था और,आसपास के किसी भी थाने में कोई गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं थी। उसकी पहचान नहीं हो पा रही थी। पुलिस ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सहायता ली ताकि बालक की पहचान हो सके।
इस प्रकरण में सूचना प्राप्त करने वाले पुलिसकर्मी रामकुमार चौधरी तथा जांच अधिकारी मोटाराम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए तत्परता से कार्य किया और मामले की जांच को आगे बढ़ाया। पुलिसकर्मी रामप्रताप, देवीलाल, धर्मेन्द्र, टीकमचंद और हनुमानराम ने भी बालक के उपचार और देखभाल में संवेदनशीलता दिखाते हुए सराहनीय प्रयास किए।
पुलिस के प्रयासों से सफलता मिली।
बालक की पहचान सूरतगढ़ के खटीक मोहल्ले में किराए पर रहने वाले परिवार का बालक माधव चौधरी पुत्र श्रवण चौधरी निवासी दरभंगा (बिहार) था।
पुलिसजांच में सामने आया कि माधव की मां एक भोली-भाली महिला थी तथा उसके पिता श्रवण चौधरी और दादा रामराशी चौधरी ने शक किया कि यह बच्चा उनका नहीं किसी और व्यक्ति का है। किसी अन्य का बच्चा होने का संदेह करते हुए क्रूरता की पराकाष्ठा करते हुए उस बालक को मारने का प्रयास किया और सुनसान रेत के टीलों में घायल अवस्था में दबाकर छोड़ दिया।
पुलिस ने मामले में सभी साक्ष्य एकत्रित कर बालक के बयान लिए जो बड़े राज खोलने वाले रहे।पुलिस ने चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय में अपर लोक अभियोजक संजय सोडा ने पैरवी करते हुए 18 गवाह और 71 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए।
* मासूम बालक के बयान*
बालक की माता के दर्द भरे बयान हुए।
अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश मोहम्मद आसिफ अंसारी ने इस संवेदनशील और चर्चित मामले में आरोपियों रामराशी चौधरी पुत्र गोपी चौधरी निवासी दरभंगा (बिहार) तथा श्रवण चौधरी पुत्र रामराशी चौधरी हाल निवासी कालका माता मंदिर सूरतगढ़ को दोषी ठहराते हुए धारा 307/34 भारतीय दंड संहिता के तहत आजीवन कारावास व ₹50,000 जुर्माना, धारा 325 आईपीसी में 7 वर्ष का कठोर कारावास व ₹15,000 जुर्माना तथा धारा 323 आईपीसी में ₹1,000 जुर्माने से दंडित किया।
निर्णय में न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पिता और दादा पर बच्चे के पालन-पोषण और सुरक्षा की पवित्र जिम्मेदारी होती है, लेकिन आरोपियों ने न केवल इस जिम्मेदारी का त्याग किया बल्कि मासूम के साथ अमानवीय क्रूरता कर सामाजिक विश्वास को भी तोड़ा। न्यायालय ने कहा कि यह अपराध केवल परिवार के विरुद्ध नहीं बल्कि मानवता और विश्वास के विरुद्ध भी है, इसलिए अभियुक्तों को ऐसा दंड दिया जाना आवश्यक है जो अपराध की गंभीरता को दर्शाए और समाज में विधि के शासन को सुदृढ़ करे।
अपर लोक अभियोजक संजय सोडा ने बताया कि इस घटना के दौरान कुछ संवेदनशील नागरिकों ने भी मानवता का परिचय दिया। बालक की स्थिति देखकर महिलाओं, चाय के होटल संचालकों तथा सजग अध्यापक शार्दुल कौशिक ने संवेदनशीलता और सजगता दिखाते हुए मदद की और अपने नागरिक कर्तव्य का पालन किया।
संजय सोडा ने न्यायालय के इस निर्णय को मानवता और न्याय की जीत बताते हुए कहा कि यह फैसला समाज में आपराधिक मानसिकता के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।०0०