Saturday, July 23, 2016

वसुंधरा राजे की 160 पहियों वाली सुपरफास्ट की बैलगाड़ी सी चाल-व्यंग्य-



पहिये ज्यादा है। आपस में ही रगड़ खा रहे हैं। गनीमत यह की पटरी से नहीं उतरी:
-व्यंग्य- करणीदानसिंह राजपूत-
राजस्थान का सौभाग्य है?
भाजपा का सौभाग्य है?
वसुंधरा राजे का सौभाग्य है?
सभी का ही समझलो।
कई अपने ही परिवार के सदस्य और नाते रिश्तेदार पटरी की पिनें उखाडऩे में लगे हुए हैं,लेकिन अभी तक उनकी पार नहीं पड़ी है।
वसुंधरा राजे को चश्मा उतार कर इधर उधर नजरें घुमाते जरूर देखा होगा जो कहती रहती हैं-किसकी हिम्मत है?
अशोक महान इतिहास में समा गए। पीछे इतिहास पढऩे वाले ही रह गए। माँ बेटे वाली पार्टी में इतना दम ही नहीं है कि पटरी पर आगे आकर खड़े हो जाएं और बैलगाड़ी की गति की चाल वाली सुपरफास्ट को रोक कर दिखलादें।
इसे कहते हैं किस्मत। या यह भीतरवाली बात की एक धमकी दी और दिल्ली म्याऊं करना ही भूल गई या डर गई?

यह कार्टून व्यंग्य आपके समझ में आ गया है और इसे अपने मित्रों को भी दिखलाने को उत्सुक हैं तो शेयर/सांझा करें।

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