शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

राजनीतिक:गंगाजल मील की पुण्यतिथि सभा, रक्तदान और संभावित भविष्य.

  

* करणीदानसिंह राजपूत *

भाजपा नेता गंगाजल मील की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा और रक्तदान होगा। इसके लिए सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांवों चकों में पोस्टर सहित संपर्क किया जा रहा है।

 मील परिवार के सदस्य और मील के निकटतम लोग विभिन्न क्षेत्रों में पदाधिकारी चुने हुए नेता आदि इस संपर्क में लगे हैं।





 इस संपर्क से  गंगाजल मील की यह श्रद्धांजलि सभा और रक्तदान ऐतिहासिक व इलाके का रिकॉर्ड होगा। इसके दूरगामी परिणाम और चर्चा होगी जिसमें राजनैतिक परिणाम भी होगें। यह कहा जा सकता है कि ऐसे कार्यक्रम में राजनीति नहीं लेकिन जो व्यक्ति राजनीति में रहा हो और कुनबा अभी राजनीति कर रहा हो तो परिणाम राजनीति शामिल ही होंगे और राजनीति में असर डालने वाले भी। अभी विधानसभा के चुनाव 2028 में समय है लेकिन पंचायत समिति प्रधान पद पर मील परिवार का अधिकार है जहां हजारीराम मील हैं। सन् 2028 राजनैतिक दृष्टि से दूर नहीं है और आगे बढने के लिए यह अवधि उचित है। 

विधायक डुंगरराम गेदर अभी कांग्रेस पार्टी से सूरतगढ़ के विधायक हैं।डुंगरराम गेदर के जन्मदिन उत्सव पर 4 सितंबर 2023 को 1872 युनिट रक्त संग्रह हुआ लेकिन बाद में यह कम होता गया।  अब गंगाजल मील की पुण्यतिथि पर 17 फरवरी 2026 को रक्तदान इससे अधिक होगा। यह अधिक रक्तदान की संभावना जितनी अधिक होगी उतनी ही अधिक राजनैतिक पावर समझी जाएगी। सन् 2018 के विधानसभा चुनाव में मील कुटुंब के हनुमान मील कांग्रेस के प्रत्याशी रहे और भाजपा के रामप्रताप कासनिया से हार गये। सन् 2023 में कांग्रेस ने हनुमान मील को टिकट नहीं दी और इसके बाद मील कुटुंब के गंगाजल मील सहित दिग्गज भाजपा में प्रवेश कर गये तथा अभी भाजपा में हैं। सन् 2023 में भाजपा ने रामप्रताप कासनिया को टिकट दी और कासनिया डुंगरराम गेदर से पराजित हुए। अब कासनिया को 2028 में टिकट मिलनी संभव नहीं है। मील परिवार का दबदबा बढता है तो भाजपा टिकट मील परिवार में आने की बड़ी संभावना रहेगी। मील परिवार में हनुमान मील हैं जिनसे भाजपा  सूरतगढ़ पर पुनः अधिकार करने के व कांग्रेस को हराने के लिए यह दांव चल सकती है। कांग्रेस के पास वर्तमान विधायक डुंगरराम गेदर ही बड़े टिकट हकदार होंगे और मान कर ही चलें कि टिकट गेदर की होगी। डुंगरराम गेदर की टिकट नहीं कटेगी मगर गेदर 2023 की 50 हजार से अधिक वोटों की जीत के बाद राजनैतिक स्थिरता कायम नहीं रख पाए हैं और निरंतर पिछड़ रहे हैं। पार्टियों की इस स्थिति में इलाके के लोग अब कासनिया से हटकर भाजपा में बड़े चेहरे पावर चेहरे की आशा में हैं। वर्तमान में जो भाजपा चेहरे हैं उनमें दमखम नहीं है और जीवित होने का अहसास भी नहीं है।

7 फरवरी 2026.


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