सोमवार, 28 मई 2012

कीड़ा नगरी पर आवास दुकान:हर समय संकट में घिरे होने की आशंका-खास खबर करणीदानसिंह राजपूत-


सूरतगढ़, कीड़ा नगरी उस जगह को कहा जाता है जहां पर धरती में लाखों कीड़े रहते हैं। कीड़ा नगरी को नष्ट करना या वहां मकान दुकान आदि बनाना भी कीड़ा नगरी को नष्ट करने में ही माना जाता है। कीड़ा नगरी पर मकान अथवा दुकान या किसी भी प्रकार का अन्य निर्माण करना मतलब वहां लाखों कीड़ों की मौत। संभव है कि इतने कीड़ों के जीवन को बचाने के लिए यह मान्यता गढ़ी गई हो कि उजाडऩे वाला व्यक्ति और उसका परिवार संकट में घिरे हुए रहेंगे। कीड़ा नगरी को सींचने का कर्म वर्षों से हो रहा है। कीड़ा नगरी स्थल पर आटा,दलिया, या अन्य अन्नाज व शक्कर कीड़ों को खाने के लिए डालने की परंपरा आज भी है।
कीड़ा नगरी को उजाडऩे पर संकट की बात को सही अथवा गलत माना जाए या नहीं, लेकिन आशंका पर सोचा जाए तो सब कुछ सामने आता है कि कीड़ा नगरी पर आवास या व्यावसायिक निर्माण कराने वाले परेशान रहे हैं या फिर परिवार जन असामयिक मौतों जैसे भयानक खतरों को झेलते रहे हैं। जीवन पर और सम्पति पर इस प्रकार के उतार चढ़ाव आए हैं कि करोड़ों की सम्पति जीर्ण शीर्ण हो रही है या उनके दुबारा निर्माण नहीं हो रहे हैं।
एसबीबीजे के पीछे का इलाका जहां पर मोदी सिनेमा होता था। वहां पर बड़े बड़े नोहरे इस समय खाली पड़े हैं और उनमें घास फूस ऊग रहे हैं। मालिक चाहते हुए भी दुबारा निर्माण नहीं करवा पा रहा।
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रविवार, 1 अप्रैल 2012

गंगाजल मील के नाम से अतिक्रमण आखिर किसने दर्ज करवाए और क्यों करवाए? :खास रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत:


मील उस समय तो विधायक भी नहीं थे-
सूरतगढ़ में गुजर रहे राष्ट्रीय उच्च मार्ग न.15 पर मील के नाम की जगह पर अब कौन काबिज है? मील ने अतिक्रमण की जांच करवाने की मांग की है-
सूरतगढ़, 1 अप्रेल 2012. राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 पर दोनों ओर अतिक्रमणों की दो सूचियां बनी थी जिनमें मील के अलावा अनेक प्रभावशाली लोगों व राजनीतिज्ञों के नाम से करोड़ों रूपयों की जमीन पर अतिक्रमण बताए गए थे। एक पत्रकार कृष्ण सोनी आजाद की लोकायुक्त को की गई शिकायत पर यह जांच हुई थी। इसमें राजस्व तहसीलदार की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई जिसमें उच्च मार्ग के इंजीनियर, पालिका के इंजीनियर आदि व पटवारी आदि थे।
इस जांच में उच्च मार्ग की परिधि को सीमा माना गया व उसके बीच में से नाप लिया गया था। यह सूची 2007 में बनी थी। उस समय गंगाजल मील विधायक नहीं थे, मगर सूरतगढ़ में निवास शुरू हो चुका था।
इस सूची के बारे में ईओ मनीराम सुथार ने यह कहा था कि वे किसी भी रूप में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करके कोई पंगा नहीं लेना चाहते।
यह भी कहा था कि सूची में जिन लोगों के नाम आए हैं उनको पालिका की ओर से नोटिस जारी कर पूछा गया है कि वे किस अधिकार से इस भूमि पर काबिज हैं। ईओ ने बताया था कि कुछ लोगों ने जवाब दिया है, लेकिन दस्तावेज केवल दो जनों ने ही दिए हैं।
अब सवाल यह पैदा हो रहे हैं
1. गंगाजल मील का नाम सूची में था तो नोटिस उनके नाम से आवश्य जारी हुआ होगा?
उस नोटिस का उत्तर क्या आया था? या उत्तर आया नहीं था। इसके अलावा अन्य लोगों के क्या उत्तर आए थे?
2. गंगाजल मील के नाम से जिन स्थानों पर अतिक्रमण बतलाए गए थे, उन स्थानों पर वर्तमान में कौन काबिज हैं? ये लोग कब से काबिज हैं?
3.इस सूची के समाचार आने लगे तब गंगाल मील विधायक बन चुके थे। नगरपालिका कर्मचारियों को मील साहेब के सामने उसी समय यह तथ्य सामने लाए जाने चाहिए थे कि आपके नाम से अतिक्रमण दर्ज हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मील ने चुनाव जीतने के बाद और नगरपालिका में बनवारीलाल का पहला बोर्ड बनने के बाद स्वयं ने घोषणा की थी कि वे अतिक्रमण के खिलाफ हैं। इतना होते हुए भी नगरपालिका ने उनको यह क्यों नहीं बतलाया? यह मामला केवल गंगाजल मील का नहीं अन्य लोगों का भी है? कई लोगों ने तो पालिका में यह लिख कर दिया कि किराएदारों ने अतिक्रमणों पर आने नाम सर्वे में लिखवा दिए थे। कितना महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि सरकारी जमीन को लोगों ने अतिक्रमण करके आगे किराए पर भी चढ़ा दिया और जमीन की मालिक नगरपालिका सोई हुई रही।
4. इयहां पर एक और महत्वपूर्ण सवाल मील पर ही पैदा हो रहा है। मील साहेब ने अपने अतिक्रमण के आरोप को असत्य बतलाते हुए जांच की मांग की है। लेकिन उन्होंने अतिक्रमणों को तुरंत तुड़वाने का नहीं लिखा। अगर अतिक्रमणों को तुड़वाने का लिखा होता तो वह पत्र सराहा जाता और उससे मील की शक्ति ही बनती। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर केवल आवासीय अतिक्रमण नहीं हैं जिनके पट्टे जारी किए जा सकें, इंदिरा सर्किल से मानकसर तक करोडों रूपयों के व्यावसायिक शो रूम बने हुए हैं। व्यावसायिक जगह का नियमन करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा जिनके नाम से अतिक्रमण दिखलाए गए वे लोग वहां रहते भी नहीं थे। उनकी रिहायश अन्यत्र रही और केवल चार दीवारियों को सर्वे में अतिक्रमण माना गया।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण वह रिपोर्ट है आखिर किस तरह से अतिक्रमण माने गए या लिखे गए? वह रिपोर्ट कोई एक दो पेज की नहीं होगी। इसका पूरा खुलासा होना चाहिए।

गुरुवार, 1 मार्च 2012

सूरतगढ़:राष्ट्रीय उच्च मार्ग के 500-600 करोड़ के अतिक्रमणों की सूची में से राजनीतिज्ञों प्रभावशाली लोगों के नाम किसने हटाए?-करणीदानसिंह राजपूत: करणी की बात- 16:


138 की सूची में से 103 नाम हटा दिए गए: अब 34 लोगों के नाम से 7 दिन का नोटिस जारी किया गया:

सूरतगढ़ में से गुजरता हुआ राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 प्रभावशाली पैसे वालों व राजनीतिज्ञों के लिए हीरों की खान साबित हुआ है तथा यहां पर बहुत बड़े बड़े व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बना लिए गए। प्रत्येक कॉम्लेक्स की कीमत एक दो करोड़ से चार पांच करोड़ तक हैं। यहां पालिका की नीलामी में छोटे से छोटी दुकानों के भूखंड बीस से पचीस लाख तक हैं। उच्च मार्ग पर एक भूखंड करीब अस्सी लाख से एक करोड़ तक का है। अतिक्रमण कारियों ने दुगने तिगुने से लेकर दस पन्द्रह गुना तक बड़े बड़े भूखंडों पर शापिंग कॉम्पलेक्स बना रखे हैं। चार दीवारियां बना रखी हैं। इंदिरा सर्किैल से मानकसर तक उच्च मार्ग पर कुल 138 अतिक्रमणों की सूची बनी थी। लोकायुक्त को पत्रकार कृष्ण सोनी आजाद की शिकायत के बाद यह सूची बनाई गई थी। राजस्व तहसीलदार की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी जिसने यह सूची तैयार करके नगरपालिका को सौंपी थी। संभागीय आयुक्त को निर्देश था कि अतिक्रमण हटाने के बाद लोकायुक्त को सुचित किया जाए। इस सूची पर नगरपालिका ने सभी को नोटिस दिया था कि आप संबंधित भूखंड पर किस अधिकार से काबिज हैं। उसका जवाब सात आठ ने दिया और दो तीन ने दस्तावेजी सबूत दिए। इसके बाद अतिक्रमण हटाने के बजाय पत्रावली ठंडे बस्ते में डाल दी गई। मनीराम सुथार ईओ के समय मैंने इस फाईल को देखा था। उस समय ईओ ने कहा था कि वह अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू कर कोई आफत नहीं लेना चाहता। सेवानिवृति होने वाली है। इसके बाद वे सेवानिवृति पर चले गए।
    आश्चर्य अब सामने आता है कि उस समय की सूची जिस पर जिला कलक्टर को स्वायत शासन निदेशालय से भी अतिक्रमण हटा कर पालना रिपोर्ट भिजवाने का आदेश था, रोक दी गई। मतलब की उसकी पालना ही नहीं हुई। अचानक अब सामने आया कि केवल 35 लोगों कूे अतिक्रमण हटाए जाऐंगे। उनमें से भी एक का पट्टा अवैध बना दिया गया है जिसको नोटिस तक नहीं दिया गया है। इस सूची में से 103 लोगों के नाम किसने हटाए, कब हटाए, किसके आदेश से हटाए? सब गोल माल हो गया है। सूरतगढ़ ही नहीं राजस्थान के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला। इसमें साफ है कि सत्ताधरियों का खुला खेल हुआ है।
    इतने बड़े घोटाले में कांग्रेस के विधायक तक का नाम सूची में था जो गायब है। इसके अलावा अनेक कांग्रेस वालों के नाम भी थे। भाजपा इसलिए नहीं बोल रही है कि उसके बड़े बड़े लोगों के नाम भी शामिल हैं।
पूरी सूची में हुए घोटाले के कारण हो सकता है कि मामला कोई नया रंग लाए। सूरतगढ़ से केवल 27 किलोमीटर दूरी पर पीलीबंगा कस्बा हे जहां मास्टर प्लान को नष्ट कर हुए अतिक्रमणों पर जेसीबी चलाई गई अतिक्रमणों को साफ कर दिया गया लेकिन यहां पर अतिक्रमण हटाने के बजाए सूची में से नाम हटा दिए गए।
हालांकि यह घोटाला दबने वाला नहीं है। हमने एक लेख में पहले लिखा था कि सन 2012 सूरतगढ़ के लिए करड़ा होगा तब लोगों ने इसे नहीं समझा। लेकिन इस घोटोले में सूची से हटाए गए भी आगे बच नहीं पाऐंगे।

करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
मोबा. 94143 81356
दिनांक- 1 मार्च 2012.
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देव वृक्ष पीपल की हाथ जोड़ वंदना करते हुए नन्ही सी गिलहरी:शब्द चित्र- करणीदानसिंह राजपूत-


यह चित्र 29 फरवरी 2012 शाम को जीनगर धर्मशाला में लिया गया जब वहां के गणेश मंदिर के सामने पीपल वृक्ष के आगे नमन करती हुई गिलहरी की यह भाव मुद्रा दिखाई दी थी।
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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

सूरतगढ़:लक्ष्मीनारायण मंदिर नई धान मंडी: दर्शन:रपट व फोटो- करणीदानसिंह राजपूत:








लक्ष्मी नारायण,शिव परिवार और हनुमन्त की भव्य प्रतिमाएं:

लक्ष्मीनारायण का यह भव्य मंदिर राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 पर सूरतगढ़ की नई धानमंडी में बना है जिसका शुभारंभ 24 फरवरी 2012 को हुआ है।
नई धान मंडी में सुंदर बगीचे के बीच में बने इस मंदिर और इसमें स्थापित प्रतिमाओं की भव्यता मन मस्तिष्क में दिव्य रस घोलती है आनन्दित करती है।
मंदिर में प्रवेश करते ही सामने लक्ष्मी और नारायण की प्रतिमाएं हैं। बाईं और हनुमन्त की प्रतिमा है। दाईं ओर शिव परिवार की प्रतिमाएं हैं जिनमें भगवान शिव नन्दी पर सवार हैं तो साथ में शेर पर पार्वती सवार हैं और उनके बीच में बिराज रहे हैं पुत्र गणेश। इसी जगह पर शिव लिंग और नन्दी की प्रतिमाएं भी हैं।
यह मंदिर व्यापार मंडल की ओर से बनवाया गया है।
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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

बाजीगर महिला से बलात्कार:पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल का मामला पत्रकार वार्ता में प्रभारी मंत्री विनोदकुमार के सामने आया:रपट करणीदानसिंह राजपूत:

पत्रकार सत्यपाल युवक ने कहा क्यों नहीं लगाई जा रही एफआर जब विधायक गंगाजल मील भी मामला झूठा बतला रहे हैं।
 विधायक जी पत्रकारों से तो कह रहे हैं वे एसपी को भी लिखें।
सूरतगढ़, 24 फरवरी, 2012.श्रीगंगानगर जिले के प्रभारी मंत्री विनोदकुमार की पत्रकार वार्ता  23 फरवरी को  हुई तब उसके समापन मोड़ पर पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल पर दर्ज बलात्कार के प्रकरण का मामला पत्रकार सत्यपाल युवक ने उठा दिया। सत्यपाल युवक वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से अध्यक्षजी का खून कम हो गया है और विधायक गंगाजल मील इस मामले को झूठा और साजिशपूर्ण बतला रहे हैं तो इस पर एफआर क्यों नहीं लगवाई जा रही। अध्यक्षजी को इस प्रकरण में क्लीनचिट दिलवाई जाए। देरी क्यों की जा रही है? पुलिस इसका निस्तारण क्यों नहीं कर रही है? प्रभारी मंत्री तो नहीं बोले, मगर विधायक गंगाजल मील ने पत्रकारों को एक बार पुन: कहा कि मामला झूठा है और साजिश है। प्रभारी मंत्री की इस प्रेस कान्फें्रस में पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल भी उपस्थित थे।
विधायक गंगाजल मील इस मामले को पहले भी झूठा और साजिश बतला चुके हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एसपी को इस बाबत क्यों नहीं कहा जा रहा और क्यों नहीं लिखा जा रहा? कानूनी पेचीदगी में सीधा क्लीनचिट का नहीं लिखा जा सकता्र मगर विधायक जी की पार्टी के हैं इसलिए उन पर तो कोई रोक नहीं है कि वे क्लीनचिट की मांग ना करें। वे इस मामले में जल्दी से फाईल के निस्तारण का लैटर तो एसपी को लिख ही सकते हैं। किसी मामले का जल्दी निस्तारण किए जाने की मांग विधायक द्वारा करना तो गलत नहीं बताया जा सकता। किसी मामले में देरी करना भी तो अन्याय है।
विधायक मील ने इससे पहले तीन दिसम्बर 2011 को सुबह 11-28 बजे मोबाईल फोन पर यह महत्वपूर्ण जानकारी दी कि बनवारीलाल निर्दाेष है। मील ने स्वयं कॉल करके उक्त जानकारी दी थी। उस समय भी विधायकजी से कहा गया कि बनवारीलाल निर्दोष है तो इस मामले का निस्तारण जल्दी से करवाएं। यह मामला रूका सा पड़ा है। बनवारीलाल निर्दाेष है तो फिर पुलिस ने बनवारीलाल पर तलवार क्यों लटका रखी है? यह तलवार उसके सिर के ऊपर से जल्दी से जल्दी हटाई जानी चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक से कह कर जांच का परिणाम आऊट करवाएं।
मील साहेब ने कहा कि वे इस बाबत एसपी से बात करेंगे और आपके सामने बात कर लेंगे।
यह प्रकरण अदालत के आदेश पर सूरतगढ़ सिटी थाने में 7 अक्टूबर 2010 को दर्ज हुआ था और उस समय भी मील साहेब  ने 12 अक्टूबर को प्रेस कान्फें्रस में बनवारीलाल मेघवाल को निर्दोष बताया था। मील ने कहा था कि बनवारीलाल को तो फंसाया गया है।
अब भी यही बात मील साहेब ने फिर से कही है।
पीडि़ता ने खुद ने ही अदालत में दायर किए अपने इस्तगासे में निष्पक्ष जांच का लिखा था। इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग बार बार दोहराई जाती रही है। भाजपा ने भी निष्पक्ष जांच करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था, और 3 जनवरी 2011 को धरना उठाने के बाद से उसके नेता चुप हैं तथा आगे कोई मांग नहीं कर रहे हैं। ऐसी हालत में बनवारीलाल निर्दाेष है तो सिर पर तलवार लटकाए रखना भी गलत है। विधायक जी पत्रकारों को जो कह रहे हैं वह एसपी से कहें तो मामला निस्तारित होने में जल्दी होगी।
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बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

देह शोषण जयपुर मुकद्दमें में 17 आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग प्रदर्शन:विशेष खबर-करणीदानसिंह राजपूत:











सूरतगढ़ में बिश्रोई महासभा का प्रदर्शन:उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम चेतावनी का ज्ञापन सौंपा:भंवरी प्रकरण में वृद्धा अमरीदेवी को सीबीआई की प्रताडऩा का भी विरोध:
सूरतगढ़,8 फरवरी 2012. देह शोषण के जयपुर के मामले में राजस्थान की राजनीति में भूचाल आया हुआ है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ व जयपुर में आक्रोष फैल रहा है कि वैशालीनगर थाना जयपुर में 21 नवम्बर सन 2011 को पीडिता ने प्रकरण संख्या 679 दर्ज करवाया जिसमें 17 लोगों के नाम है उनको आजतक गिरफ्तार नहीं किया गया है। बिश्रोई महासभा ने संगरिया में 27 जनवरी को प्रदर्शन किया और उसके बाद रायसिंहनगर, हनुमानगढ़ श्रीगंगानगर में एकजुटता दिखाते हुए आठ फरवरी को सूरतगढ़ में प्रदर्शन करते हुए उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया।
    भाजपा के एक कार्यकर्ता ओमप्रकाश गोदारा की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसका देह शोषण करवाया जिसमें उसकी ओर से दायर प्रकरण में सतरह नाम हैं जिनमें भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी हैं। एक आरोपी को तो मुख्यमंत्री के घर व कार्यालय तक आना जाना बताया जा रहा है।
    सूरतगढ़ के प्रदर्शन में अशोक गहलोत मुर्दाबाद और अशोक गहलोत तेरी कब्र खुदेगी नारे लगते हुए बिश्रोई समाज के लोग बाजारों में से होते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचे। उपखंड अधिकारी मदनलाल सिहाग को ज्ञापन दिए गए। माकपा नेता हेतराम बिश्रोई और संघर्ष समिति के सचिव इन्द्रजीत बिश्रोई ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देने के बाद कहा कि अशोक गहलोत सरकार के ईशारे पर एक तरफ तो भंवरी कांड में लोगों को प्रताडि़त किया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर सतरह आरोपियों के दर्ज मामले में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि आंदोलन के लिए विवश होना पड़ा तो उसकी समस्त जिम्मेवारी राज्य सरकार की होगी।
आरोपों में घिरे पति ओमप्रकाश गोदारा ने साफ शब्दों में खंडन कर दिया था कि ना तो पत्नी के अश£ील क्लिप लिए और ना ही किसी के पास में यौन शोषण करवाया।
  निहालचंद ने 22 नवम्बर 2011 को पूछने पर बताया -आरोपी किसी सीडी के होने का प्रचारित कर रहे हैं। अगर कोई सीडी है तो मीडिया से सामने ले आए। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। मैंने इस प्रकार के घटिया आरोप वाला कोई काम आज तक नहीं किया जिससे मेरी व पार्टी की छवि पर किसी प्रकार की आंच आए और कोई दाग लगे। जयपुर में बैठे कांग्रेस के एक वर्ग के नेता ये करवा रहे हैं और यह सब राजनैतिक द्वेषता से किया जा रहा है। ओमप्रकाश पार्टी का कार्यकर्ता है सो उसकी शादी में जरूर गया था लेकिन उसके बाद कभी उसके जयपुर आवास पर नहीं गया। उसके साथ कोई मोबाईल कॉल से बात भी नहीं हुई। मेरे और उनके मोबाइलों की कॉल डिटेल निकलवा कर जांच की जा सकती है।राधेराम से भी 22 नवम्बर 2011 को पूछने पर बताया - यह आरोप तो मंदिर में बकरा काटने जैसा गंभीर दोष मंढ़ा जा रहा है। आरोप झूठा है तथा कुछ लोग अपनी राजनैतिक गोटियां इधर उधर करने के लिए ये सब करने में लगे हैं, लेकिन इसकी सच्चाई जल्दी ही सामने आ जाएगी। 

राधेराम सूरतगढ़ तहसील में अमरपुराजाटान के निवासी हैं जिन्होंने जाट महासभा के कुछ नेताओं को चुनौती देते हुए करीब ढ़ाई साल पहले अलग झंडा उठा लिया था। उस अलग गठन कर लेने से चर्चित हो गए थे और पहले के कुछ  नेता अपने वर्चस्व पर चोट मानते हुए नाराज हुए। जिसमें वे लोग शामिल हैं जिन पर अभी इशारा हो रहा।   
    राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार के कार्यकाल में महिलाओं पर अत्याचार के आरोपों और पुलिस मुकद्दमों की बढ़ती संख्या से सरकार की छवि प्रभावित हो रही थी कि भंवरी नर्स की सीडी प्रकरण में आए भूचाल में सरकार की किरकिरी हुई व मंत्रिमंडल में परिवर्तन करना पड़ा। कुछ मंत्रियों को हटाया गया व उससे एक जाति वर्ग के लोग मुख्यमंत्री से नाराज भी हुए। अभी वह अशांत वातावरण थमा नहीं है कि,जयपुर के इस प्रकरण का तूफान बढ़ता जा रहा है।  इस मामले में भाजपा के नेताओं पर आरोप है लेकिन भाजपा के कुछ नेताओं ने इस मामले के उठते ही जोरदार खंडन कर दिया था,तथा आरोप लगाया था कि कांग्रेस की किरकिरी के बाद यह षडय़ंत्र हो रहा है। 

हालांकि इस पूरे प्रकरण की तस्वीर साफ  नहीं हो पाई है। भाजपा के एक कार्यकर्ता ओमप्रकाश गोदारा की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसका देह शोषण करवाया जिसमें उसकी ओर से दायर प्रकरण में सतरह नाम हैं जिनमें भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी उछाले जा रहे हैं।
    इस प्रकरण में जो भी सच्चाई है वो जनता के सामने आनी ही चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर है कि वे इस समय गृहमंत्री भी हैं। यह जांच आम जनता तो करवा नहीं सकती। सरकार ही करवा सकती है,तब इसको तेज गति से करवा कर दूध का दूध पानी का पानी सामने लाने में किस बात की हिचक हो रही है?
अशोक गहलोत की सरकार शुद्धता का अभियान चलाती रही है, जिसे शुद्ध के लिए युद्ध का नारा दिया गया। इस मामले में यह नारा क्यों नहीं लगाया जा रहा?
यहां पर एक और बहु चर्चित प्रकरण का उल्लेख करना उचित रहेगा। सूरतगढ़ में अनुसूचित  बाजीगर जाति की एक औरत ने कांग्रेस के नगरपालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर यौन शोषण के आरोप में मामला दर्ज करवा रखा है। उक्त पीडि़ता तीन बार अशोक जी के आवास पर मिल आई। फरियाद कर आई। कांग्रेस के विधायक गंगाजल मील मामला दर्ज होने से ही बनवारीलाल को निर्दाेष बता रहे हैं।

शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

बड़े भाई की मृत्यु के अगले दिन दूसरा व पांचवें दिन तीसरा भाई चल बसा: रिपोर्ट:करणीदानसिंह राजपूत:

-- छगनलाल स्वामी            बल्लुराम स्वामी      बजरंगदास स्वामी-

सूरतगढ़ में 20 जनवरी को छगनलाल स्वामी के निधन पर उसी के घर में आया छोटा भाई बजरंगदास स्वामी 21 को चल बसा: दोनों की चिताएं एक साथ ही जली:परिवार इस शोक में खोया था कि पांचवें दिन 24 जनवरी को एक और भाई बल्लुराम भी चल बसा: ईश्वर की लीला-विधि का विधान-
तीनों के मरणोपरांत किया गया नेत्रदान:

सूरतगढ़ 27 जनवरी 2012. ईश्वर कई बार चमत्कारिक खेल दिखलाता है। देवी देवता तक अनेक घटनाओं को विधि का विधान टाला नहीं जा सकता कहते हुए सहन करते रहे हैं। ऐसा ही विधि का विधान या ईश्वरीय लीला या खेल में स्वामी समाज में तीन सग्गे भाई एक एक कर पांच दिन में यह संसार छोड़ गए।
    यहां वार्ड नं 13 में 83 उम्र में छगनलाल स्वामी का 20 जनवरी की रात्रि में करीब 10-30 पर स्वर्गवास हो गया। अगले दिन 21 जनवरी को सुबह अंतिम यात्रा की तैयारी की जा रही थी। सभी उसी में व्यस्त थे कि अपने भाई की देह को देखते देखते छोटे भाई बजरंगदास स्वामी ने भी यह संसार छोड़ दिया। बजरंगदास स्वामी की वार्ड नं 4 के निवासी व 78 साल के थे। दोनों भाईयों की अर्थियां एक साथ उठी। दोनों को एक समय में ही मुखाग्रि दी गई। कल्याण भूमि में सैंकड़ों लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया। यह घटना शहर और आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बन गई। अपने अपने हिसाब से लोग बताने लगे। कितना प्यार प्रेम रहा दोनों में कि भाई की मृत्यु को दूसरा भाई सहन नहीं कर सका। ईश्वर के घर भाई के साथ ही चला गया। अभी इस घटना की चर्चा चल ही रही थी कि पांचवें दिन 24 जनवरी को दोपहर में करीब 1-30 बजे तीसरा भाई बल्लुराम भी यह संसार छोड़ दोनों भाईयों की राह पर निकल गया। बल्लुराम की उम्र करीब 80 वर्ष थी। वार्ड नं 13 में बड़े भाई छगनलाल स्वामी के घर के पास में ही घर बनाया हुआ।
    छगनलाल स्वामी राजकीय सेवा में सूरतगढ़ तहसील में जमादार के पद से सेवा निवृत हुए थे। बहुत लोकप्रिय थे। विशेष अवसरों पर साफा बंधवाने के लिए उनको आमंत्रित किया जाता था। उनका एक पुत्र तोला राम स्वामी धर्म प्रचारक के नाम से विख्यात है। तोला राम स्वामी धार्मिक आयोजनों मेले व जागरणों में,रक्तदान शिविरों आदि में उल्लेखनीय सेवाएं देने में अग्रणी है।
    धर्म प्रचारक तोला राम स्वामी इस संपूर्ण घटनाक्रम को ईश्वर की लीला और विधि का विधान मानते हुए सांसारिक कार्यों में लगे हैं जो मृत्यु के बाद समाज में निभाए जाते हैं। शोक व्यक्त करने वालों की संख्या अपार।
    तीनों भाईयों के मरणोपरांत नेत्रदान किया गया। महावीर इंटरनेशनल सूरतगढ़ प्रेरणा देने में अग्रणी।
    बड़े भाई छगनलाल स्वामी की मृत्यु के तुरंत बाद महावीर इंटरनेशनल की प्रेरणा से उनके पुत्रों जगदीश, तोलाराम,राजाराम व रविकांत ने उनके नेत्रदान की स्वीकृति दे दी। महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष नरेन्द्र चाहर ने उनके नेत्र उत्सारित किए।
    मध्यम भाई बल्लुराम जी की मृत्यु पर उनके पुत्रों महावीर, पृथ्वीराज, मांगीलाल,और चन्द्रेश की स्वीकृति के बाद नरेन्द्र चाहर ने ही उनके नेत्रों का उत्सारित किया। 
    बजरंगदास स्वामी की मृत्यु के बाद महावीर इंटरनेशनल की नेत्रदान कराने के लिए पुन: प्रेरणा रही। उनके पुत्रों राम स्वरूप, मनीराम,किशनलाल व लूणाराम की स्वीकृति के बाद नरेन्द्र चाहर ने नेत्र उत्सारित किए।
तीनों के नेत्रों को श्री जगदम्बा धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय श्रीगंगानगर भिजवा दिया गया।
ये कुल पांच भाई थे। जिनमें एक भाई करीब एक साल पहले चल बसा था।
पन्नाराम भी अपने तीन भाईयों को इस तरह से संसार छोड़ देने को ईश्वर की लीला और विधि का विधान ही मानते हैं।

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गुरुवार, 26 जनवरी 2012

कवि सम्मेलन में राजनेताओं की खूब उतारी गई आरती-रिपोर्ट: करणीदानसिंह राजपूत-




गुलाब से स्वागत और शॉल ओढ़ा कर किया गया सम्मान:
जय हिन्द लगाओ नारा:इतनी मिली आजादी कि कॉलर पकड़ कर नेताओं से होते हैं सवाल:
आज गधे भी मिलेंगे सरकार में:
सूरतगढ़, 26 जनवरी, 2012. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा में हुए कवि सम्मेलन में राजनेताओं जम कर आरती उतारी गई औा किसी को भी सूखा नहीं रहने दिया गया। कवियों ने प्रतातंत्र के गुणगान किए मगर देश की आजादी में जो कुछ हो रहा है, उसका चित्रण भी जम कर किया।
    संदेश त्यागी की कविताओं का रंग खूब जमा.....आज गधे भी मिलेंगे सरकार में। कविता यह थी कि विदेशों में कहीं कुत्तों को प्यार किया जाता है तो कहीं किसी और जानवर से। कवि ने बताया कि हिन्दुस्तान में सबसे अधिक प्यार किया जाता है कि गधे भी सरकार में मिलते हैं।
    रूपसिंह राजपुरी जिन्हें हास्य का कवि कहा जाता है। राजपुरी ने कहा कि पहले हर कवि सम्मेलन में उनको रात के बारह बजे ही बुलाया जाता था। उन्होंने कहा कि सरदार के आगे अ लगा दिया जाए तो वह असरदार हो जाता है। उन्होंने अध्यापक,महिलाओं, छात्रों, पुलिस व ग्रामीणों व राजनैतिक पार्टियों को खूब उछाला। दावे से कहा कि उनको पाजामा खेंच कर नीचे नहीं बैठाया जा सकता क्यों कि उन्होंने पाजामा ही नहीं पहना है।
    वरिष्ठ कहे जाने वाले कवि मोहन आलोक ने तीर तुकों पर बनी अपनी तीस साल पुरानी विधा राजस्थानी डांखले सुनाए। आलोंक ने पंजाबी में भी खूब डके तोड़े।
लाज पुष्प ने जय हिन्द लगाओ नारा से समा बांधा।
    राजेश चड्ढा के संयोजन में चले कवि सम्मेलन में दीनदयाल हास्य कवि ने भी खूब रंग जमाया। ओम पुरोहित कागद,सुरेन्द्र सुन्दरम, जनकराज पारीक,डा. अरूण सोहरिया,नन्द किशोर सोमानी ने अपनी रचनाएं सुनाई।
महाराजा मल्टीपलेक्स सिनेमा के शानदार हॉल में प्रशाशन की ओर से कवियों कर ही नहीं हर श्रोता का सवागत गुलाब के फूल भेंट कर स्वागत किया गया। कवियों का सम्मान श्रीफल व शॉल ओढ़ाकर किया गया।
इस अवसर पर विधायक गंगाजल मील, पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल,प्रशासन की ओर से एडीएम एस.के.बुडानिया,एसडीएम मदनलाल सिहाग,तहसीलदार कुंजबिहारी शर्मा, अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता व शहर की सामाजिक संस्थाओं व राजनैतिक सगठनों के पदाधिकारी कार्यकर्ता मौजूद थे। कवि सम्मेलन में शौर्य, श्रंगार,हास्य आदि सभी रसों को परोसा गया जिसमें गीत,कविताएं गजलें परोसी गई।
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गुरुवार, 19 जनवरी 2012

प्राचीन सूरतेश्वर महादेव मंदिर सूरतगढ़: विशेष लेख व चित्र- करणीदानसिंह राजपूत:











सूरतगढ़ के गढ़ के सामने यह मंदिर सूरतगढ़ की स्थापना के समय का बताया जाता है:
मंदिर का भवन और गर्भगृह आदि सब जीर्ण शीर्ण हो चुके हैं-जिनके जीर्णाेद्धार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सूरतगढ़ के गढ़ के सामने बना है सूरतेश्वर महादेव का मंदिर। इस मंदिर की प्राचीनता का इतिहास यह बताया जाता है कि गढ़ के निर्माण के साथ ही इस मंदिर का निर्माण हुआ था। पहले यह एक ही मंदिर था और इसी में स्थापित शिव लिंग पर लोग दुग्ध व जल का अभिषेक किया करते थे। इसी का पूजन अर्चन होता था। यह क्षेत्र बीकानेर रियासत में था। बीकानेर के महाराजा सूरतसिंह के नाम पर प्राचीन ग्राम सोढ़ल का नया नाम रखा गया था। बीकानेर महाराजा की तरफ से ही मंदिर के रखरखाव आदि के लिए माफी की कृषि भूमि भी दी गई थी। कुछ वर्ष पहले पुजारी के अभाव व स्थानीय रख रखाव में और कुछ विवाद के कारण दूर रहने के कारण यह सार संभाल देव स्थान विभाग के अधीन करदी गई।
    मंदिर के जीर्ण हालत में जाते रहने के कारण श्रद्धालुओं को मानसिक पीड़ा भी होने लगी और इसके जीर्णाेद्धार की मांग की जाने लगी। इसके समाचार रपटें समाचार पत्रों में छपी। सामाजिक संगठनों व श्रद्धालुओं ने यह मांग देव स्थान विभाग से की। इसका सुखद परिणाम आया। देव स्थान विभाग ने इसके जीर्णाेद्धार के लिए बजट निश्चित किया। यह जीर्णाेद्धार सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से होगा।
    मंदिर में शिवलिंग और नन्दी की प्रतिमाएं पुरानी व क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इनको हरद्वार में विसर्जित किया जाएगा। मंदिर के गर्भगृह के जीर्णाेद्धार के बाद नया शिवलिंग व नन्दी स्थापित होंगे व प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। यह कार्य यहां की समिति करेगी। इसके लिए श्रद्धालु जुट गए हैं। नई स्थापना के बाद में पुराने शिवलिंग व नन्दी की प्रतिमा को विर्सजन के लिए ले जाया जाएगा। अभी ये प्रतिमाएं शिव बगीची में ही एक पेड़ के नीचे विराजमान रहेंगी।
शिवलिंग व नन्दी की प्रतिमा को हटाए जाने से पूर्व पश्चाताप पूजा 18 जनवरी 2012 को यजमान महावीर प्रसाद सेखसरिया सूरतगढ़ ने की एवं यह पूजा पंडित जगदीश प्रसाद कौशिक हनुमानगढ़ जंकशन ने करवाई।
    मंदिर के जीर्णाेद्धार बाबत एक बैठक मंदिर प्रांगण में 19 जनवरी 2012 को हुई जिसमें देव स्थान विभाग के हनुमानगढ़ टाऊन स्थित कार्यालय के सेवागिर राजेन्द्रप्रसाद शर्मा भी उपस्थित थे। समिति के संयोजक दिलात्मप्रकाश जैन सहित इस बैठक में गणमान्य श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया। यह कार्य जल्दी ही आजकल में ही शुरू हो जाएगा।

- करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
मोबाईल  94143 81356

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