मंगलवार, 16 जनवरी 2024
सोमवार, 15 जनवरी 2024
राजेंद्र उपाध्याय राजनीतिक क्षेत्र में भाग्य आजमाएंगे
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 15 जनवरी 2024.
पत्रकारिता व अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों के बाद राजेंद्र उपाध्याय अब सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में भाग्य आजमाएंगे। मक्कर संक्रांति के दिन आज यह घोषणा बातचीत में की।
उपाध्याय काटन सिटी सूरतगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष रह चुके हैं। सामाजिक सारोकार के तहत वर्तमान में सूरतगढ़ की मुख्य कल्याण भूमि प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं।
०0०
****
शुक्रवार, 12 जनवरी 2024
सफाई कर्मियों की फर्जी हाजिरी से गबन का आरोप:लाखों की गड़बड़.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 12 जनवरी 2024.
नगरपालिका में अनेक सफाई कर्मचारियों की फर्जी हाजिरी लगाकर गबन किए जाने का गंभीर आरोप अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के सूरतगढ़ शाखा अध्यक्ष मनोज धौल ने लिखित शिकायत में लगाए हैं। मनोज धौल की शिकायत 11 जनवरी 2024 में कुछ नाम भी लिखे हैं जिनके नामों की हाजिरी लगाई जा रही है। पिछले दो सालों से यह गड़बड़ी की जा रही है।
* मनोज धौल ने 12 अक्टूबर 2022 को भी शिकायत की थी मगर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ताजा शिकायत में चेतावनी दी गई है कि नगरपालिका प्रशासन जिम्मेदार होगा।
* शिकायत में कुछ ही नाम हैं लेकिन गड़बड़ी बड़ी है।
एक गैर सरकारी संस्था के मार्फत नगरपालिका में सफाई कर्मी लगाए हुए हैं लेकिन उनमें अनेक नामों की हाजिरी फर्जी लगाई जाती है। अनेक तो सूरतगढ़ में रहते भी नहीं है।अधिशासी अधिकारी की स्वीकृति से भुगतान होता है। शहर में सफाई के हालात बुरे हैं। शहर को गंदखाना बना दिया गया है।
इस गड़बड़ी का अनेक पार्षदों को,पार्षद प्रतिनिधियों को जो नगरपालिका में हर दिन मौजूद रहते हैं तथा ठेकदारी करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी मालुम है कि सफाई कर्मचारी आते नहीं है और लेकिन वे सैटिंग से चुप हैं। नगरपालिका पर किए जाने वाले धरना प्रदर्शन दिखावटी जिनमें असली मुद्दे तथ्य गायब रखे जाते हैं।
०0०
गुरुवार, 11 जनवरी 2024
सूरतगढ़:अतिक्रमण,भ्रष्टाचार,सफाईकर्मी ड्यूटी पर पार्षदों के मौन का राज?
* करणीदानसिंह राजपूत *
* नगरपालिका की सड़क की कीमती भूमि पर तोड़े गये अतिक्रमण पर दुबारा अतिक्रमण हो जाए तब अतिक्रमणकारी से सैटिंग दोस्ती या अन्य कारण से एकदम चुप्पी। वार्ड नं 26,1 के अतिक्रमण। समाचार सचित्र छपे मगर पार्षद चुप। वार्ड नं 26 के अतिक्रमण ( आवासन मंडल कालोनी जलदाय टंकी के सामने) पर आरोप लगाया गया था कि कालवा ने करवाया। अतिक्रमण तुड़वा भी दिया था लेकिन कालवा 24 जुलाई से नहीं है तो अब यह तोड़े गये अतिक्रमण पर किसने दुबारा अतिक्रमण करवाया। ईओ पवनकुमार और अतिक्रमण रोधी दस्ते के प्रभारी कालू सेन के ड्युटी में अतिक्रमण दुबारा हुआ और इन्होंने किसके दबाव में होने दिया और अब समाचार छपने के बावजूद तोड़ नहीं रहे। कालूराम सेन के नेतृत्व में 3 जनवरी 2023 को तुड़वाया था। कालूराम सेन की तरफ से ही पुलिस में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। पार्षद इस दुबारा हुए अतिक्रमण को तोड़ने की मांग नहीं कर रहे। पार्षद मांग नहीं करेंगे तब भी ईओ को अतिक्रमण तुड़वाना ही होगा जो जिम्मेदारी है। कालवा पर आरोप लगाने वाले और पार्षद चुप हैं।
आचार संहिता में रिंकु सिद्दिकी की शिकायत पर एक अतिक्रमण को रोका तोड़ा नहीं गया।
अतिक्रमण हटाने की मांग में भी गोलमाल कि अतिक्रमण का हवाला स्थिति फोटो नहीं देंगे। सबसे बड़े भ्रष्टाचार पर चुप।
* इसी बोर्ड के काल में लालचंद ने अपने रिटायरमेंट से कुछ दिन पूर्व ही अपने एकल हस्ताक्षर से करीब 70 पट्टे जारी कर दिए। उनका स्थान कहां था किस जगह के पट्टे जारी हुए। इस मामले में भी पार्षद चुप रहे।कोई नेता पार्टियों ने भी मुंह नहीं खोला।
* कालोनियां में अनियमितता पर भी पार्षद चुप रहे।
* फाईलें,भ्रष्टाचार से रूकी पड़ी रहे तो भी मौन।
* सफाईकर्मियों से अन्य काम लिए जाने पर शहर की सफाई चौपट होने पर भी चुप। युनियन के मनोज कुमार ने पहले लिखा और अब 11 जनवरी 2024 को फिर लिखा। लेकिन पार्षद चुप। कालवा ने आरोप लगाया था कि नगरपालिका के 3 कर्मचारी मील के निवास पर काम करते हैं और वेतन नगरपालिका से लेते हैं। मील ने खंडन नहीं किया और पार्षद इतने बड़े आरोप पर चुप रहे।
* सड़कों पर अतिक्रमण पर चुप।
* बीकानेर रोड पर नाले साफ नहीं होते। कारण अतिक्रमण। गौरव पथ जहां सीमेंट कंक्रीट का है, उसके नालों में वर्षा का पानी जा नहीं पाता।
* अधिकारी कार्यालय समय में आए नहीं और निवास में बैठे काम करें। पार्षद चुप।
👍 लोकसभा चुनाव की आचार संहिता अप्रैल मई लग जाएगी। यानि केवल तीन महीने हैं जिसमें कुछ कर सकेंगे। इसके बाद नवम्बर में नगरपालिका सूरतगढ़ के चुनाव की आचार संहिता सितंबर अक्टूबर में लग जाएगी। काम करने के लिए सारा जोड़ें तो चार महीने। नवंबर में चुनाव के बाद नये पार्षद और नया बोर्ड आ ही जाएगा।ढ
* प्रदेश में सरकार बदल गई। भाजपा की सरकार आ चुकी है तो अब किसको बोलना लिखना चाहिए? अपनी सरकार के आदेश और प्रभाव के लिए भाजपा पार्षदों को आगे बढ कर कार्यवाही करनी और ऊपर शिकायत व सही तथ्य बताने चाहिए या चुप रहना चाहिए तथा भ्रष्टाचार पर सैटिंग या दोस्ती रखनी चाहिए?०0०
*****
बुधवार, 10 जनवरी 2024
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने महावीर सैनी( सूरतगढ़) प्रशिक्षक को द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 10 जनवरी 2024.
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने खेल जगत की हस्तियों को विभिन्न क्षेत्रों के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को 9 जनवरी 2024 को दिल्ली में आयोजित समारोह में सम्मानित किया। राजस्थान से अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट कोच महावीर सैनी( सूरतगढ़) को द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया। इनके अलावा विभिन्न श्रेणियों के द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किए गए। महावीर सैनी को द्रोणाचार्य अवार्ड मिलने पर सूरतगढ़ में खुशी छाई है। महावीर सैनी ने धावक के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की और आज पूरे देश में नाम है।
द्रोणाचार्य पुरस्कार:
यह अवार्ड उत्कृष्ट प्रशिक्षकों को दिया जाता है. खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सक्षम बनाने हेतु यह अवार्ड प्रशिक्षकों को दिया जाता है.
द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता 2023 (नियमित श्रेणी)
क्र.सं.
कोच का नाम
खेल
* ललित कुमार कुश्ती
*आर बी रमेश शतरंज
*महावीर प्रसाद सैनी पैरा एथलेटिक्स
*शिवेन्द्र सिंह हॉकी
*गणेश प्रभाकर देवरुख मलखंब
*भास्करन कबड्डी
द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता 2023 (आजीवन श्रेणी)
क्र.सं.
कोच का नाम
खेल
जसकीरत सिंह ग्रेवाल
गोल्फ़
भास्करन ई
कबड्डी
जयन्त कुमार पुशीलाल
टेबल टेनिस
******
मंगलवार, 9 जनवरी 2024
राजस्थान:सफाई कर्मी अपने मूल पद पर काम करेंगे अन्यथा वेतन नहीं
* करणीदानसिंह राजपूत *
राजस्थान के नगर निकायों में सफाई कर्मचारी दूसरे किसी पद कार्य पर काम करते रहे हैं उनको तत्काल सफाई कर्मचारी के पद पर मूल पद पर ड्यूटी देने का आदेश जारी हुआ है। डीएलबी ने यह आदेश 9 जनवरी 2024 को जारी किया है कि सफाई कर्मचारी किसी अन्य पद पर कार्य करेगा तो उसे जनवरी माह का वेतन नहीं मिलेगा। सख्त कार्रवाई शुरू हुई है।
👍 विदित रहे कि सफाई कर्मचारी के पद पर किसी भी तरह से लग जाने के बाद सिफारिश आदि के बल पर सफाई कर्मचारी दफ्तर में विभिन्न शाखाओं में, कंप्यूटर पर या लिपिक आदि अन्य काम करते रहे हैं। सिफारिश के बल पर उनकी ड्यूटी सफाई कर्मचारी के हटाकर अन्यत्र लगाई जाती रही है। यहां तक की सफाई कर्मचारियों के बारे में शिकायतें मिलती रही है कि उनसे सरकारी अधिकारियों के यहां नेताओं के यहां पार्षदों आदि के घरों में काम लिया जाता रहा है।इससे सफाई कार्य प्रभावित होते रहे तथा नगरों में कचरा गंदगी बढती रही।
👍 राजस्थान सरकार के स्वायत शासन विभाग के आदेश पहले भी अनेक बार जारी हुए लेकिन शिकायतों समाचारों के बावजूद भी अधिशासी अधिकारी, आयुक्त आदि ने परवाह नहीं की और आदेश फाईलों में बंद होते रहे। शिकायतों का जवाब भी सरकार को यहां तक कि मुख्यमंत्री तक को झूठे भिजवाए जाते रहे।
* इस बार राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद मंत्री के ध्यान में यह गड़बड़ लाई गई तब उन्होंने विभाग को तुरंत कार्यवाही करने का निर्देश दिया।
भाजपा की सरकार में अब लगता है कि 9 जनवरी 2024 को जारी इस आदेश की पालना हर हालत में 10 जनवरी से पूरे राजस्थान में हो जाएगी। नगर निकाय के अधिकारी ने आदेश से सफाई कर्मचारी को अन्यत्र लगाया हुआ है तो उसे हर हालत में 10 जनवरी को मूल पद पर काम करने का आदेश जारी करना होगा।
* सफाई कर्मचारी को अन्यत्र लगाने में विभिन्न भ्रष्टाचार व रिश्वत आदि भी होते रहे हैं।
* कोई भी सफाई कर्मचारी किसी अधिकारी के कहने पर अन्य स्थान पर काम करेगा तब उसके विरुद्ध कार्यवाही होगी और जनवरी माह से वेतन मिलना बंद हो जाएगा। ०0०
सोमवार, 8 जनवरी 2024
रूपीन्द्र जीते:सुरेंद्रपाल'राज्यमंत्री' बैसाखी से दौड़े मगर गिर गए: बीकानेर संभाग की समीक्षा करे.
* करणीदानसिंह राजपूत *
राज्यमंत्री का पद और सरकार का साथ होते हुए सुरेंद्रपालसिंह की हार बड़े ऊंचे पहाड़ जैसी सोने के फ्रेम में मंढी है। रूपीन्द्रसिंह कुन्नर की जीत छोटी राई सी जनता के बनाए खुरदुरे कागज पर लिखी साधारण सी है। मगर श्रीकरणपुर की यह हार पांच साल तक भाजपा के रड़कती रहेगी।
* प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को यह सूचना जरूर दी गई होगी। कैसे किन शब्दों से बताया होगा कि सरकार की हार हो गई।दिल्ली से मंगवाई बैसाखी भी दौड़ा नहीं पाई। कोई अक्लमंद होता तो कह देता कि बैसाखी से तेज दौड़ा नहीं जाएगा और बीच में गिर पड़े तो जगहंसाई होगी। कम से कम सुरेंद्रपालसिंह तो चुनाव लड़ने के अच्छे अनुभवी थे लेकिन दिल्ली से आई बैसाखी से उनको यह लगा की जीत पक्की होगी। लेकिन दौड़ नहीं पाए गिर पड़े। जनता ने राई को साथ दिया और राज्यमंत्री नाम के पहाड़ पर उगा दिया। पांच साल तक यह राई की फसल पहाड़ की छाती पर रड़कती रहेगी।
👍 यह गोल्डन हार अकेले सुरेंद्रपालसिंह टीटी की नहीं है। उन सभी लोगों राजनेताओं मंत्रियों की है जिन्होंने रोड शौ किए मोदी गारंटी के भाषण दिए और भाजपा की जीत बताते रहे। मीडिया के बड़े पत्रकारों की है जो सरकार के साथ जाने की बात कहते रहे ताकि कोई आगे क्रोस कवश्चन ही नहीं हो। सच्च बताने से कतराते रहे कि टीटी को सच्च बताकर बुरे क्यों बनें। सरकार को भी सच्च बताकर छाप कर नजरों में क्यों आएं। वैसे तो यह व्यवहार उचित भी है कि बता देते तो क्या टीटी मान लेते? न टीटी मानते न भाजपा के नेता मानते।
👍 सट्टे के भाव टीटी की पक्की जीत बताते रहे। सट्टा अवैध गैरकानूनी होता है लेकिन फिर भी उसको अधिक सच्चा सटीक मान लेते हैं।( हम नहीं मानते सटे को) श्रीकरणपुर चुनाव में साबित हो गया कि सट्टा झूठ भी होता है। इस झूठ में कितने फंसे होंगे?
👍 राजस्थान में भाजपा की सरकार तो बनी है मगर श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों में चुनाव में जो जीत हार हुई है उससे आगे भी हालात अच्छे रहने वाले नहीं है। भाजपा के नेता जो जनता के साथ नहीं थे,उनको जनता ने मोदी गारंटी और मोदी जी के चुनाव सभा के भाषण के बाद भी हरा दिया।
👍 टीटी जनता के साथ पांच साल कहीं दिखाई नहीं दिए और परिणाम सामने है।
👍भाजपा मुगालते में रहेगी तो श्रीगंगानगर की लोकसभा सीट भी खतरे में रहेगी।अगर निहालचंद को उम्मीदवार बनाया तो पक्का प्रमाण मिलेगा। जनता से दूर होते बहुत दूर हो चुके हैं निहालचंद। श्रीगंगानगर से सूरतगढ़ के बीच साधारण यात्री गाडियां चलाने,लूप लाईन को अमृतसर व दूरी की गाड़ियों से जोड़ने की मांगे रही हैं। रायसिंहनगर से अनूपगढ़ नयी रेल लाईन डालने की मांग भी रही है लेकिन निहालचंद लगातार सांसद रहते हुए भी ये काम नहीं करवाए। उनकी रूचि भी नहीं देखी गई।
श्रीगंगानगर संसदीय क्षेत्र में भाजपा कितनी विधानसभा सीटों पर जीती? सांसद निहालचंद की भी हारी सीटों पर जिम्मेदारी होगी।
* बीकानेर संभाग में मूल ओबीसी को विधानसभा चुनाव में कितनी सीटों पर टिकट दिए? श्रीकरणपुर और पहले किनके हाथों में बागडोर रही तथा कितनी सीटों पर मूल ओबीसी लोगों को दूरी पर रखा गया? बीकानेर संभाग की श्रीगंगानगर,चुरू और बीकानेर संसदीय सीटों के हालात की समीक्षा की जाए। केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की भी समीक्षा जरूरी है।
8 जनवरी 2024.
०0०
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकारिता 60 वर्ष,
सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356.
******
रविवार, 7 जनवरी 2024
अर्पिता सोनी का स्थानांतरण:सूरतगढ़ एडीएम पद फिर खाली.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 7 जनवरी 2024.
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के 5 जनवरी 2024 को किए स्थानांतरण में यहां से अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्रीमती अर्पिता सोनी को बीकानेर नगर निगम उपायुक्त सैकिंड के पद पर भेजा है लेकिन यहां पद को खाली रख दिया है। सूरतगढ़ के साथ यह पहले भी ऐसा होता रहा है।
* अर्पिता सोनी ने यहां अतिरिक्त जिला कलेक्टर का पदभार पांच माह पहले 3 अगस्त 2023 को किया था। सोनी को सूरतगढ़ में बहुत कम समय मिला।
* सन् 2015 में पहली बार में ही इनका आर ए एस में चयन हुआ जिसमें 35 वां रैंक था। सोनी ने हिन्दी माध्यम अपनाया और इस सेवा के लिए तैयारी करने वालों को एक साक्षात्कार में अच्छा संदेश भी दिया कि जो माध्यम अच्छा लगे जिसमें अच्छे तरीके से परीक्षा दे सकें,वह माध्यम अपनाएं। यह साक्षात्कार यू ट्युब पर उपलब्ध है।
* अर्पिता सोनी के पति श्री पंकज सोनी यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक हैं और करीब 4 साल से सेवाएं दे रहे हैं।
👍 विशेष:अर्पिता सोनी अच्छी वक्ता हैं और इनके वक्तव्य प्रभावित करने वाले होते हैं।०0०
*****
बुधवार, 3 जनवरी 2024
श्रीकरणपुर चुनाव: राज्यमंत्री की कम,कुन्नर को श्रद्धांजलि चर्चा अधिक.क्या होगा?
* करणीदानसिंह राजपूत *
प्रथानमंत्री की ओर से राज्यमंत्री का गिफ्ट प्राप्त भाजपा उम्मीदवार सुरेन्द्रपालसिंह और कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता स्व.गुरमीतसिंह कुन्नर के बेटे रुपिंदर कुन्नर के बीच ही सन् 2023 के चुनाव में मुख्य टक्कर और परिणाम को लेकर धुकधुकी में दोनों पार्टियों में हैं। श्रीकरणपुर में कांग्रेस टिकट तो गुरमीत कुन्नर को ही मिला था लेकिन उनके निधन के बाद चुनाव स्थगित हो गये थे। कांग्रेस ने स्व.कुन्नर के बेटे को उम्मीदवार घोषित किया। अब 5 जनवरी को मतदान होगा।
* अब सुरेंद्र पाल सिंह को प्रधानमंत्री के उपहार "राज्यमंत्री पद" पर वोट मिलेंगे और रुपिंदर कुन्नर के पास पिता के श्रद्धांजलि वोट हैं। ( प्रधानमंत्री का उपहार इसलिए है कि राजस्थान में मंत्री उनकी स्वीकृति से बनाया गया है तो सुरेंद्र पाल सिंह को चुनाव के बीच में राज्य मंत्री पद उनकी स्वीकृति के बिना नहीं मिल सकता)
* श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र में हर ओर चर्चा एक ही है कि राज्यमंत्री पद के वोट जीतेगें या श्रद्धांजलि के वोट जीतेंगे? वर्षों से दोनों परिवारों में ही चुनाव समर होते रहे हैं।
* वोटों के हिसाब से कुन्नर ही भारी रहे हैं। सन् 2018 में कुन्नर जीते और मतदाताओं ने सुरेंद्रपाल को तीसरे क्रम पर धकेल दिया था।
सन्ः 2013 में सुरेंद्र पाल ने कुन्नर को हराया तो था लेकिन बहुत कम 3853 वोटों से और 2018 में कुन्नर ने सुरेन्द्र पाल को 29,797 वोटों से हराया था। 2018 के चुनाव में पृथीपाल संधु निर्दली दूसरे क्रम पर रहे जो इस चुनाव में भी हैं और इस बार आप के उम्मीदवार हैं।
*
सुरेन्द्रपालसिंह चुनाव जीते बिना ही राज्यमंत्री बना कर आम मतदाताओं को प्रमावित करने का देश में पहला उदाहरण है। क्या इससे सुरेंद्र पालसिंह को मजबूती मिल सकेगी? क्योंकि 2013 में जीतने के बाद वे राज्यमंत्री बने थे। उस समय कोई विशेष लाम श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों को दिलवाया हो,ऐसा कुछ ऐतिहासिक नहीं है। उस समय खनन विमाग इनके पास था। झुंझुनूं सीकर जिलों में पहाड़ों के अवैध खनन को रोकने के लिए आर ए सी को लगाने का समाचार था। उस समय सूरतगढ़ और घड़साना तहसीलों में जिप्सम का अवैध खनन खूब चल रहा था । समाचार भी छप रहे थे। इन क्षेत्रों में भी अवैध खनन को रोकने की मांग उठती रही लेकिन कुछ भी नहीं किया गया। 2018 से 2023 तक पांच सालों में अवैध खनन और माफिया के विरुद्ध कोई सक्रियता नहीं रही। आखिर यह चुप्पी भाजपा नेताओं में क्यों रही?
श्रीकरणपुर और आसपास मंडियों के लोग लम्बी दूरी की एक्सप्रेस और अमृतसर को ट्रेन से जोड़ने की मांग करते रहे। श्रीगंगानगर सूरतगढ़ के बीच में दो जोड़ी यात्री गाड़ियों की मांग करते रहे। रेलों की मांग में भी सुरेन्द्र पालसिंह जनता के साथ कहीं दिखाई नहीं दिए। पांच साल का काल जनता से दूरी क्यों रही? ये सवाल बहुत गंभीर और बड़े हैं। चुनाव में ऐसे सवाल पावर बनाते बिगाड़ते हैं।
भाजपा नेता मंचों पर कुछ भी कहते रहें लेकिन जनता से रही दूरी की कमजोरी को खत्म करने भुलाने के लिए राज्यमंत्री बनाया।ऐसा तो है नहीं कि भाजपा के नेता ही बुद्धिमान हैं और वे ही सोच सकते हैं। जनता में भी सोचने की बुद्धिमत्ता होगी।
* सुरेन्द्रपालसिंह को जिताने के लिए हर संभव कोशिशें हुई है तथा सरकार के मंत्री आते रहे हैं। इनका कितना प्रभाव रहेगा? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पीलीबंगा आए और भाषण दिया कमल को खिलाने का। लेकिन जनता ने पीलीबंगा में और चिपती हुई दो सीटों सूरतगढ़ व हनुमानगढ़ में कमल खिलने ही नहीं दिया। पीलीबंगा और सूरतगढ़ में कांग्रेस को तथा हनुमानगढ़ में निर्दलीय को जीत की माला पहना दी। प्रधानमंत्री मोदी की बात नहीं मानी। ऐसे में "राज्यमंत्री" पद से प्रभावित होने पर भी शंका है। राज्यमंत्री पद से अधिक चर्चा कुन्नर को श्रद्धांजलि की जूनून चढे जैसी हो रही है।
3 जनवरी 2024.
०0०
सदस्यता लें
संदेश (Atom)



















































