गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

सूरतगढ़ में करोड़ों के भूमि घोटालों में राजनेता


विशेष खबर- सबसे पहले- करणीदानसिंह राजपूत

चारे घोटाले से कई गुणा बड़ा है सूरतगढ़ का भूमि घोटाला

राजस्थान उच्च न्यायालय ने तहसीलदार राकेश न्यौल के स्थानान्तरण आदेश पर रोक लगाई

सूरतगढ़, 3 अक्टूबर। सूरतगढ़ तहसील के भूमि घोटालों में राजनेताओं की ईच्छानुसार करोड़ों की जमीन का गैर कानूनी रूप से पुख्ता आवंटन की कार्यवाही के लिए रिपोर्ट नहीं करने वाले राजस्व तहसीलदार राकेश न्यौल को यहां से एपीओ कर दिया गया था,लेकिन राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने राज्य सरकार के उस आदेश पर स्टे कर दिया है।

उच्च न्यायालय में वकील रामावतार चौधरी ने रिट लगाई जिसमें अखबारों को पेश किया जिनमें यह समाचार प्रकाशित हुआ था। यह रिट आज ही लगाई गई थी।

इस स्टे की सूचना यहां मिली तब राकेश न्यौल ने दफ्तर में सूचना देदी लेकिन खबर है कि स्थानान्तरित होकर आए हुए तहसीलदार ने चार्ज रिज्यूम कर लिया। कानून विदों का मानना है कि इसमें राज्य सरकार का आदेश ही रोक दिया गया है।

    बिहार का चारा घोटाला देश का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है,लेकिन सूरतगढ़ में कई घोटाले हैं तथा हरेक घोटाला बिहार के घोटाले से बड़ा है। सूरतगढ़ शहर और शहरी सीमा में भूमि की कीमतें बढऩे से राजनेताओं व बड़े लोगों ने विशाल कॉलोनियों के निमार्ण के लिए जमीनें हड़पनी शुरू की है। जमीन का एक एक घोटाला सौ सौ दो दो सौ करोड़ का है।

राजनेताओं को जमीनें दिलवाने में पटवारी किशोरसिंह का खास नाम है और यह पटवारी बेताज बादशाह कहलाता है।
इस पटवारी को यहां से पहले हटा दिया गया था,लेकिन यह अपनी बनाई संपत्ति के लिए यहां वापस आना चाहता था। राजनेताओं से संपर्क कर उनको जमीनें उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर तक रिस्क उठाने में माहिर माने जाने वाले इस पटवारी को यहां बदली करवा कर लाया गया और सूरतगढ़ हल्का दिया गया,लेकिन पटवारी का इस बार का दांव चक्र में उलझ गया। पटवारी की संपति बेशुमार बताई जाती है।
असल में चुनाव से पहले जमीनें हड़पी जाने की ताबड़तोड़ जल्दबाजी में यह मामला पकड़ में आया।
नाव के बाद अगर
चु सीबीआई जांच करवाई गई तो कितने ही राजनेताओं का हाल लालू यादव से बदतर होगा।

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करोड़ों की जमीनों में गिरता राजनीतिज्ञों का ईमान

नेताओं की जमीनों का फर्जीवाड़ा नहीं किया तो तहसीदार को बदल दिया

जमीनें पीछे थी मगर उनको राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर लग आए
मुख्यमंत्री का कार्यालय भी दागी हुआ

खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़ के शहरी क्षेत्र में और पास की जमीनों के रेट करोड़ों रूपए होने के कारण अस्थाई कास्त वाली जमीनों को गरीबों से जैसे तैसे हथिया कर उनका पुख्ता आवंटन कराने में नेताओं का ईमान गिरता जा रहा है। पुख्ता आवंटन के लिए कब्जा कास्त की रिपोर्ट  तहसीलदार देता है तब संभागीय कमिश्रर  पुख्ता आवंटन करता है। नेता खासकर कांग्रेसी सत्ताधारी और उनके साथ रहने वाले चाटुकार भाजपाई पिछले सालों से जमीनों की हेराफेरी में लगे हुए हैं। जमीनों को खरीदने के बाद उच्च मार्ग पर लाने का फर्जीवाड़ा चलता है।
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने ही वाली है इसलिए सत्ताधारी नेता जल्दी से जल्दी जमीनों का पुख्ता आवंटन कराने को लालायित हो रहे हैं तथा राजस्व कर्मचारियों व अधिकारियों से झूठी रिपार्टें चाहते हैं। अधिकारियों को झूठी रिपोर्ट देने से बाकी का जीवन कोर्ट कचहरी व जेल में दिखाई देता है। सूरतगढ़ के राजस्व व अन्य अधिकारी झूठी रिपोर्ट से बचना चाहते हैं।
ऐसे ही एक मामले में राजस्व तहसीलदार राकेश न्यौल ने झूठी रिपोर्ट देने से इन्कार का दिया तो नेताजी ने मुख्यमंत्री कार्यालय से उनका स्थानान्तरण करवा दिया। तहसीलदार को आए हुए केवल 2 माह ही हुए थे।

मामला है राष्ट्रीय उच्च मार्ग के पास की मोहनी देवी की जमीन का। भरतजी को  इस जमीन में लगाव हुआ और यह जमीन पीछे से खिसका कर उच्च मार्ग पर ला दी गई। पहले किसी प्रयाग वाल्मिकि की जमीन सडक़ के पास थी उसे पीछे कर दिया गया। पटवारी ने गोल मोल रिपोर्ट दी कि आसपास के लोगों से पूछने पर मालूम हुआ कि मोहनीदेवी कब्जा कास्त है। इस रिपोर्ट को राजस्व तहसील से जिला कलक्टर के पास भिजवा दिया गया। कलक्टर कार्यालय से फाइल वापस आ गई। स्पष्ट लिखा जाए कि विक्रमी संवत 2042 से अब तक कब्जा कास्त है। अब यह रिपोर्ट दी जाए तो साफ साफ जेल दीखती है। पुराने रिकार्ड की ना जाने कितनी नकलें ली जा चुकी है,उसमें झूठी रिपोर्ट को जगह जगह इन्द्राज कैसे किया जाए?
राजस्व तहसीलदार पर दबाव बनाया जाता है। लेकिन तहसीलदार कह देता है कि सीधे तो रिपोर्ट नहीं करता। गिरदावर से पहले करवा दी जाए। गिरदावर हाल ही में पदोन्नत हुआ। वह कहता है कि मुझे क्यों मरवा रहे हो? मैं यह नहीं करता।
राजस्व तहसीलदार दबाव बनाया जाता है। विधायक जी के भ्राता तहसीलदार के पास में पहुंचते हैं। तहसीलदार को जिला कलक्टर कार्यालय में पहुंच कर मुख्यमंत्री की ऑन लाइन बैठक में भाग लेना होता है। आदर सत्कार कर तहसीलदार निकल जाता है।
तहसीलदार को नेता ही लाए थे और वह काम नहीं करे। मुख्यमंत्री के कार्यालय में ना जाने क्या क्या कहा जाता है और वहां से निर्देश कि अपीओ कर दिया जाए।
तहसीलदार के स्थानान्तरण की खबर से हलचल शुरू होती है और शनिवार को ही काफी लोग तहसील में पहुंच जाते हैं। तहसीलदार जी के मुंह से सच्च फूट कर बाहर निकलने लगता है। वहां पर खड़े कई लोग पुष्टि करते हैं। तहसीलदार को फोन पर कहा जाता है कि भरत जी आए थे और आपने उनका आदर सत्कार नहीं किया। तहसीलदार कहते हैं कि भरत जी आए ही नहीं। विधायक जी के दो भाई आए थे और उनका पूरा आदर सत्कार किया गया था।
बस आदर सत्कार वह बाकी रहा कि जमीनों के पुख्ता करने के लिए फर्जी रिपोर्ट नहीं की गई। यह एक जमीन नहीं। कितनी और जमीनें हैं। शहर में सन सिटी के पीछे उच्च मार्ग के पास में जहां पर सात पत्रकारों को भी प्लाट दिए जा चुके हैं। अभी उसका पुख्ता आवंटन नहीं हुआ है। इसके
अलावा घग्घर डिपे्रशन की जमीनें जिन पर कुछ नेताओं की नजरें हैं लेकिन उन पर रिपोर्ट हो नहीं सकती। राज बदलना निश्चित है और उसके बाद में ना जाने कितने प्रकरण खुलेंगे और फर्जीवाड़े में कौन कौन घेरे में आऐंगे।

सोमवार, 30 सितंबर 2013

नरेन्द्र मोदी टाइगर पावर और सामने डॉग पावर:मुकाबला हो ही नहीं सकता:

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी बेजान दारूवाला ने कहा

राहुल गांधी नहीं बन सकते प्रधानमंत्री

खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, जी चैनल पर 28 सितम्बर 2013 की रात में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी बेजान दारूवाला का इंटरव्यू चल रहा था। एंकर को दारूवाला ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। कांग्रेस में गांधी परिवार का अस्तित्व चार पांच साल में खत्म हो जाएगा। दारूवाला ने एक पुस्तक दिखलाते हुए कहा कि यह आज नहीं कह रहा हूं कई साल पहले लिख चुका हूं।

दारूवाला ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के चांस ज्यादा हैं।

दारूवाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस से भाजपा का भविष्य बेहतर है।

नरेन्द्र मोदी के सामने चल रहे प्रधानमंत्री उम्मीदवार नाम के बारे में कहा कि नरेन्द्र मोदी टाइगर की पावर है और सामने डॉगी पावर वाला है। दोनों की पावर ही अलग अलग है तो मुकाबला हो ही नहीं सकता। कोई डॉग यानि कि कुत्ता किसी टाइगर यानि कि किसी शेर का मुकाबला कैसे कर सकता है?

एंकर ने कहा कि आप तो बहुत खुले बोलते हो। हालांकि एंकर ने अपने वाक्यों में सुधारते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी में अधिक ताकत है और सामने वाले में कम ताकत है।

30.9.2013.


मंगलवार, 17 सितंबर 2013

सफाई कर्मचारी नियुक्ति अवैध का ओरोप:हाईकोर्ट में रिट दायर:अपडेट:


कोर्ट ने 16 सितम्बर को प्रतिपक्ष ईओ,अध्यक्ष व अन्य को नोटिस जारी कर 26 सितम्बर को हाजिर होने का आदेश जारी किया।

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 17 सितम्बर। नगरपालिका में नियुक्त 148 सफाई कर्मियों की नियुक्ति को नियम विरूद्ध बतलाते हुए सूची को निरस्त करने,ताजा नई नियुक्तियां करने की यायिका राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर की गई है। याचिका में चयन समिति को भी नियम विरूद्ध अवैध बताया गया है। वाल्मिकि समाज के वरिष्ठ पार्षद को चयन समिति में लेने के बजाय मनोनीत जूनियर पार्षद को लिया गया,तीन से अधिक संतानों वाले अपात्रों को चुना गया व पात्र लोगों को नियुक्त नहीं किया गया।

    उच्च न्यायालय जोधपुर में यह रिट पांच लोगों विनोद पुत्र चरणदास,सुनीतादेवी पुत्री कालूराम,राकेश पुत्र दुलाराम,दीपक कुमार पुत्र मोहनलाल,प्रेमकुमार पुत्र बंशीलाल की ओर से पेश की गई।

रिट में राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग के सचिव,नगरपालिका ईओ,नगरपालिका अध्यक्ष व हाल ही में नियुक्त सफाई कर्मचारियों संजय पुत्र भंवरलाल,अशोक पुत्र कालूराम, बुधराम पुत्र भागुराम,दर्शनादेवी पत्नी भरतकुमार,राजकुमार पुत्र चम्पालाल,और रेखा पत्नी राजकुमार,मंजु पत्नी छोटू राम,किशोर कुमार पुत्र फूसाराम,सीता राम पुत्र नत्थूराम,श्रवण कुमार पुत्र लाल मणि,कमल कुमार पुत्र राजेन्द्र कुमार को प्रतिपक्षी बनाया गया है।

    रिट में लिखा गया है कि नगरपालिका ने मई 2012 में 90 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का विज्ञापन प्रकाशित करवाया। इसके बाद संशोधन होते रहे व 148 कर्मचारी नियुक्त किए गए। राजस्थान सरकार की ओर से 3 मई 2013 को नियुक्तियों के लिए समस्त पालिकाओं के लिए गाईड लाइन जारी की। जिसमें 5 सदस्यीय चयन समिति बनाने के लिए निर्देश था। उसमें चयन समिति का अध्यक्ष नगरपालिका का अध्यक्ष,वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी,वरिष्ठ सफाई निरीक्षक,एक सदस्य वाल्मिकि समुदाय का जो चुना हुआ वरिष्ठ पार्षद या मनोनीत पार्षद हो व अधिशाषी अधिकारी।

    रिट में लिखा गया है कि नत्थूराम भाटिया नवम्बर 2009 में निर्वाचित हो पार्षद बना व रामनिवास को 8 जून 2010 को राज्य सरकार ने मनोनीत किया। इसमें नत्थूराम भाटिया के होते हुए रामनिवास को अवैधानिक तरीके से चयन समिति का सदस्य लिया गया। इस तरह से यह चयन समिति अवैधानिक है और इसका चयन भी अवैधानिक है।

यह लिखा गया है कि 1-6-2002 के बाद तीन से अधिक संतानों होने वालों का चयन असंवैधानिक बताया गया। जिसमें उनके राशनकार्डों का हवाला दिया गया है जिनमें परिवार के समस्त सदस्यों के फोटो हैं। इसके अलावा कमल कुमार की आयु 18 वर्ष से कम होना बताया गया है। यह लिखा गया है कि याचिकाकर्ता पात्र होते हुए भी चुने नहीं गए।

 याचिका में लिखा गया है कि चयन समिति ही असंवैधानिक है तब उसका चयन भी अपने आप में अवैध हो जाता है सो उस चयन सूची को निरस्त का आदेश देते हुए नियमानुसार ताजा नई नियुक्तियां किए जाने का आदेश प्रदान किया जाए।

इस याचिका के नोटिस जारी होने के समाचार ने यहां खलबली मचा दी है। इन नियुक्तियों को लेकर कुछ दिन पालिका प्रांगण में धरना प्रदर्शन हुए। अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल का पुतला फूंका गया। उसके बाद विधायक के पुत्र महेन्द्र मील ने धरना देने वालों के बीच में जाकर कहा कि पालिकाध्यक्ष ने उनको बताए बगैर यह नियुक्ति सूची जारी कर दी है। यह आश्वासन दिया कि इस सूची को निरस्त कराया जाएगा। विधायक पुत्र महेन्द्र मील प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी हैं। इसके बाद विधायक गंगाजल मील ने आश्वासन देकर धरना व जूस पिला कर अनशन खत्म करवाया। लेकिन इसके बाद कुछ भी नहीं हुआ।

अब पात्र लोगों ने राजस्थान उच्च न्यायालय में यायिका दायर की है।

राजस्थान उच्च न्यायालय में  सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति को नियम विरूद्ध बतलाते हुए एक और रिट पेश की गई है।
यह रिट पार्षद नत्थूराम भाटिया व 7 अन्य की ओर से पेश की गई है जिसमें पालिका अध्यक्ष,तत्कालीन ईओ,राजस्थान सरकार सहित कुल 15 जनों को प्रतिपक्षी बनाया गया है। इस रिट की तारीख भी 26 सितम्बर दी गई है।

 

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मंगलवार, 10 सितंबर 2013

पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा का आमरण अनशन मुख्यमंत्री ने खत्म कराया


राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी   की मांग को लेकर यह आमरण अनशन 15 अगस्त स्वाधीनता दिवस से चल रहा था

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 10 सितम्बर 2013. पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त से राजापार्क आर्य समाज के परिसर में आमरण अनशन शुरू किया और वह अनशन चिकित्सालय ले जाए जाने के उपरांत वहां भी जारी रहा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार उनसे मिल कर अनशन त्याग करने की अपील करते रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि छाबड़ा जैसे कुछ लोग ही बचे हैं तथा उनका जीवन अनमोल है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छाबड़ा को अनशन त्यागने के लिए मनाया और दिनांक 9 सितम्बर 2013 को फलों का रस अपने हाथों से पिला कर अनशन समाप्त करवाया।

छाबड़ा अब अपने रामनगर स्थित पुत्र गौरव के आवास पर है। मेरी उनसे दिन में 12-45 बजे बात हुई है।



मुख्यमंत्री से कई बातों का आग्रह किया गया है जो 15 सूत्री है। इसके कुछ महत्वपूर्ण सूत्र यहां प्रदर्शित हैं।

शनिवार, 31 अगस्त 2013

राजाराम मील व 2 विधायकों पर मुकद्दमा-अदालत के आदेश


डीडवाना विधायक रूपराम डूडी व सूरजगढ़ विधायक श्रवणकुमार के नाम

नेछवा थाने में दर्ज मुकद्दमें में पुलिस अधिकारियों के नाम

खबर- करणीदानसिंह राजपूत


यह मुकद्दमा नेछवा थाने में अदालत के आदेश पर दर्ज हुआ है,जिसमें आरोप लगाया गया है कि मनीष आर्य की हत्या के भगोड़े आरोपी सीताराम को पकड़े जाने के बाद नेछवा थाने में से दबाव डाल कर छुड़वा दिया गया। अदालत में मनीष आर्य के पिता शुभकरण ने इस्तगासा पेश किया था जिस पर अदालत ने मुकद्दमा दर्ज कर अनुसंधान करने के आदेश दिए हैं। नेछवा थाने में यह प्रकरण दर्ज होने के बाद सीआईडी सीबी को जांच सौंप दी गई है।

घटनाक्रम के अनुसार 2 वर्ष पूर्व 17 अप्रेल 2010 को सुजानगढ़ में मनीष आर्य की हत्या हुई जिसमें कई लोगों पर मामला दर्ज हुआ था। एक आरोपी सीताराम निवासी गांधी बस्ती सुजानगढ़ भी था जिसे अदालत ने 18 मई 2010 को भगौड़ा घोषित कर स्थाई वारंट जारी कर दिया था।

नेछवा थाने के प्रभारी महावीरसिंह ने सीताराम को नाकाबंदी करके 14 अगस्त 2010 को पकड़ लिया। थानाधिकारी ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी।  इसके बाद दबाव डाल कर सीताराम को छुड़वा दिया गया।

अदालत के आदेश पर पुलिस थाना नेछवा में जिन लोगों के विरूद्ध मुकद्दमा दर्ज हुआ है उनमें राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील और डीडवाना विधायक रूपराम डूडी व सूरजगढ़ विधायक श्रवणकुमार के नाम भी आरोपियों में हैं।

इनके अलावा उस समय के पुलिस अधिकारियों

पुलिस महानिरीक्षक मोहन लाल लाठर जयपुर रेंज,

एस.पी. एस.एन.खीची चुरू

एएसपी अनिल क्याल

एस.पी. नितेश आर्य सुजानगढ़,

एएसपी पृथ्वीराज मीणा सीआईड सीबी जयपुर

थाना प्रभारी राजेश बिश्रोई सुजानगढ़

के नाम हैं।

मुकद्दमें में विधायकों के नाम होने से प्रक्रियानुसार यह जांच सीआइडी सीबी को सौंपी गई है।


शनिवार, 13 जुलाई 2013

पूर्व विधायक हरचंदसिंह हीरो:विधायक गंगाजल मील राज में भ्रष्टाचार


नगरपालिका को करोड़ों रूपयों के भूखंडों की नीलामी रोकनी पड़ी:

पूर्व विधायक का आरोप था कि जमीनें बेच बेच कर धन का कर रहे हैं दुरूपयोग:

अधिषाषी अधिकारी पृथ्वीराज मील को सूरतगढ़ से स्थानान्तरित कर दिया गया:

पालिकाध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार की कार्यवाही शुरू हो गई।

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-

सूरतगढ़, पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग के साथ आमरण अनशन का नोटिस दिया था,जिस पर सरकार ने सख्त कार्यवाही शुरू की। अत्यंत गंभीर आरोप था कि पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल और अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ पालिका की करोड़ों रूपयों की जमीने बेच कर प्राप्त धन का दुरूपयोग करने में लगे हैं। इसके कई तथ्य भी दिए गए। नगरपालिका का 115 करोड़ रूपयों का बीकानेर नगर विकास न्यास से भी अधिक का बजट केवल सात आठ मिनट में पारित कर दिए जाने का भी उल्लेख था। सडक़ पर सडक़ बनाने आदि के आरोप भी थे। बैनरों पर प्रचार पर अनापशनाप रकम खर्च किए जाने का आरोप भी था।

सचिवालय के निर्देश पर कार्यवाही शुरू हुई और अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ को यहां से स्थानान्तरित कर दिया गया।

इसके साथ ही बेशकीमती जमीनों की नीलामी को रोका गया। अब नीलामी करने से पहले राज्य सरकार की स्वीकृति लेनी होगी।

नगरपालिका ने 11,12 और 15 जुलाई को की जाने वाली नीलामी रोकी। इसमें बीएसएनएल के पीछे राजीव गांधी मार्केट,सैनी गार्डन के पश्चिम में राजीव गांधी आवासीय योजना,सदर थाने के पूर्वी दिशा में भूखंडों की नीलामी रोकी गई। नगरपालिका में आने जाने वाले ठेकेदारों को तो बहुत पहले ही राज्य सरकार का आदेश आते ही मालूम पड़ गया था। आम लोगों के लिए नगरपालिका ने राजस्थान पत्रिका में एक छोटा सा विज्ञापन छपवाया जो 11 जुलाई 2013 के अंक में छपा।

सचिवालय की ओर से सिद्धु की शिकायत कार्यवाही के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भिजवा दी गई है,जिसमें प्राथमिक जांच के बाद मुकद्दमें भी होंगे।

बुधवार, 3 जुलाई 2013

कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में महिलाओं के उत्पीडऩ अपराध बढ़े :


भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की बैठक में श्रीमती राजेश सिडाना ने भाग लिया:

खबर- करणीदानसिंह राजपूत-






सूरतगढ़, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश मंत्री श्रीमती राजेश भाग लेकर आई हैं और उन्होंने बताया कि इस बैठक में उत्तराखंड में आई आपदा में सहायता भिजवाने के साथ ही महिलाओं की संगठनात्मक भूमिका और प्रदेश में कांग्रेस राज में महिलाओं की दयनीय हालत पर विचार व्यक्त किए गए।

बैठक का उदघाटन श्रीमती वसुंधरा राजे ने दीप प्रज्जवलित कर किया। वे मुख्य अतिथि के रूप में पधारी थीं। राजे ने उत्तराखंड में आई आपदा पर प्रदेश के सभी जिलों में महिला मोर्चा को कम से कम दस हजार रूपए एकत्रित कर भिजवाने का आह्वान किया। राजे ने कहा कि कांग्रेस राज में प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार बहुत बढ़े हैं। इसके अलावा महंगाई के कारण हर परिवार का बजट गड़बड़ा गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में अपनी ताकत लगा कर कांग्रेस को जड़ों से उखाड़ फेंके। महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सरोज पाण्डेय ने अपने उदबोधन में संगठन की मजबूती का आह्वान किया।प्रदेशाध्यक्ष सुमन शर्मा ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। महिला उत्पीडऩ में प्रदेश आगे हो रहा है और इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की है।भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरण माहेश्वरी एवं राष्ट्रीय महामंत्री दर्शना जरदोष ने भी महिलाओं की संगठनात्मक शक्ति पर विचार रखे। महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री सरोज प्रजापत ने राजनैतिक प्रस्ताव पढ़ा जिसे सर्व सम्मति से पारित किया गया। यह बैठक 24 जून को जयपुर में सम्पन्न हुई जिसके कुछ फोटो यहां प्रस्तुत हैं।


बुधवार, 26 जून 2013

सोनिया गांधी जैसी हस्ती से बहुत मामूली सा स्टेडियम निर्माण का नामकरण समारोह करवाया गया:


मामला अत्यन्त गंभीर:जांच से सामने आएगा सच्च।

विपक्ष जांच की मांग करे कोई सवाल पैदा करे,उससे पहले ही कांग्रेस की उच्च स्तरीय जांच शुरू करवा देने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए।

                                  खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

 

सूरतगढ़, 27 जून 2013.विधायक गंगाजल मील के राज में नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सभापति श्रीमती सोनिया गांधी से पद की गरिमा से बहुत ही मामूली कार्य स्टेडियम निर्माण का नामकरण समारोह करवाया गया। सूरतगढ़ में पिछले कुछ महीनों से निर्माण चल रहे स्टेडियम के एक द्वार पर एक पत्थर लगाया गया है,जिसे देखने मात्र से ही आश्चर्य होता है कि क्या  सच्च में सोनिया गांधी ने यह कार्य सम्पन्न किया था। सोनिया गांधी के पति स्व.राजीव गांधी का नाम स्टेडियम से जुड़ा होने के कारण साधारण नजर में तो यही लगता है कि सोनिया जी ने किया होगा। लेकिन लोगों को इसका मालूम पत्थर देखने से लगा है।
सोनिया गांधी सूरतगढ़ थर्मल में 20 जून को क्रिटिकल तकनीकी की 2 इकाईयों के शिलान्यास के लिए आई थीं जिनकी लागत फिलहाल 7920 करोड़ रूपए आंकी हुई है। सोनिया गांधी जो हजारों करोड़ों रूपए वाली परियोनाओं का शिलान्यास,उदघाटन या लोकार्पण करने की गरिमा रखती हैं,उनसे चार पांच करोड़ रूपए की संपूर्ण लागत के स्टेडियम का केवल नामकरण समारोह करवाना कौनसी चतुरता है। 

राजीव गांधी स्टेडियम का निर्माण तो कई महीनों से चल ही रहा था और उसका उदघाटन विधायक गंगाजल मील पर चुके थे। उसका नाम तो पहले से तय ही था फिर सोनिया गांधी जैसी हस्ती से नामकरण समारोह करवाना या उसका पट्ट लगवाना बड़ा गंभीर मामला है और इसकी जांच से ही मालूम पड़ सकेगा कि इसके पीछे किसका हाथ रहा है और इससे लाभ लेने की कोई चाल है या कुछ और मामला है?

    सोनिया गांधी का मिनट टू मिनट कार्यक्रम तय था। उसका उल्लेख सरकारी रिकार्ड में है। अखबारों में भी वह कार्यक्रम छपा है। सोनिया के आने के समाचारों में और उसके क्रिटिकल इकाईयों के शिलान्यास व इसी शिलान्यास बाबत स्टेडियम में सभा के समाचारों में कहीं भी इस समारोह का समाचार नहीं है। स्टेडियम के सभा मंच पर भी क्रिटिकल इकाईयों के शिलान्यास का ही लिखा हुआ था। 

 

नगरपालिका की हर कार्य की समाचार विज्ञप्ति जारी होती रही है,लेकिन इस समारोह की कोई विज्ञप्ति जारी नहीं हुई। सोनिया ने इस समारोह में जहां पत्थर लगाया गया है वहां पर कितने मिनट लगाए और कौन उसमें शामिल थे? इस शुभ कार्य में पंडिताई किसने की,किसने पूजा अर्चना करवाई? पालिका के पार्षदों तक को इसका मालूम नहीं। समारोह था तो उनको निमंत्रण क्यों नहीं था? सरकार के शिलान्यास,उदघाटन एवं लोकार्पण आदि समारोह ता होते देखे गए हैं लेकिन नाम रखने का समारोह पहली बार ही सामने आया? किसी ने कहीं देखा हो या सुना हो या पढ़ा हो कि इतनी बड़ी हस्ती से पहले  कहीं ऐसा कार्य करवाया गया हो? मेरे ध्यान में नहीं आता। लेकिन सूरतगढ़ में यह करवा लिया गया जो पत्थर कहता है।

इस समारोह के नाम पर नगरपालिका का कितना धन खर्च होना दिखलाया जाएगा? वह कई लाख का तो निश्चित ही होगा।नगरपालिका में निर्वाचित मंडल है। उसके हर सदस्य का हक है, अधिकार है। उनको मालूम नहीं हुआ। इस कार्यक्रम के कोई निमंत्रण पत्र नहीं छपवाए गए। अगर नामकरण जरूरी ही था तो विधिवत मंडल की बैठक में सब की सहमति से या बहुमत से करवाया जाता,लेकिन सदस्यों को तो मालूम ही नहीं। जैसे देश की लोकसभा की कीमत है,उसके सदस्यों के हक हैं अधिकार हैं,ठीक उसी तरह से नगरपालिका मंडल की भी नगरीय क्षेत्र में तो पूरी कीमत है,उसके भी अधिकार हैं। उनके अधिकारों को किसी भी तरीेके से छीना नहीं जा सकता और दबाया नहीं जा सकता।
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    कितनी चतुराई हुई होगी कि इसमें राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष चन्द्रभान तक का नाम है। इसी में सांसद भरतराम मेघवाल का नाम घुसेड़ा हुआ है। इसी पत्थर पर विधायक गंगाजल मील और नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल का नाम भी है। यहां पर राजनैतिक लाभ किसको मिलने वाला है,या सोनिया के नाम से किसने लाभ उठाने की यह कोशिश की है? संभव है जांच के बाद लाभ मिलने के बजाए कोई दंड मिल जाए?

इस मामले की गंभीरता और आगे आने वाले परिणाम को स्थानीय विधायक गंगाजल मील और नगरपालिका अध्यक्ष अभी तो समझ नही पाए हैं। इसकी जांच की मांग विपक्ष निश्चित रूप से करेगा। यह मामला सोनिया गांधी से जुड़ जाने के कारण गंभीर हो गया है,इसलिए यह भी संभव है कि कांग्रेस ही पार्टी स्तर पर इसकी जांच करवाले। चुनाव के चंद महीनों पहले हुए इस मामले की विपक्ष जांच की मांग करे कोई सवाल पैदा करे,उससे पहले ही कांग्रेस की उच्च स्तरीय जांच शुरू करवा देने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए।

 



गुरुवार, 20 जून 2013

सोनिया गांधी ने थर्मल पावर की दो सुपर क्रिटिकल इकाईयों का शिलान्यास किया:


सूरतगढ़ में सोनिया व अशोक गहलोत ने आम सभा को संबोधित किया

सुपर क्रिटिकल इकाइयों की क्षमता 660-660 मेगावाट


खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-


सूरतगढ़, 20 जून। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने बीस जून को सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 2 सुपर क्रिटिकल सातवीं और आठवीं इकाईयों का शिलान्यास किया। समारोह की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने की।


    थर्मल में इस समारोह के बाद श्रीमती सोनिया गांधी ने सूरतगढ़ के स्टेडियम मैदान पर आम सभा को संबोधित किया। उन्होंने देश की प्रगति पर भाषण देते हुए कहा कि तोडफ़ोड़ करने में भी कुछ ताकतें लगी हुई है जिससे विकास की गति कम होती है। विकास रूकता है। सोनिया ने मंच से उतरते ही भीड़ की ओर आगे बढ़ कर अभिवादन स्वीकार किया व हाथ लहराते हुए पंडाल में चक्कर लगाया। कुछ ज्ञापन सोनिया को भीड़ में से सौंपे गए। पंडाल में चक्कर लगाते समय मुख्यमंत्री अयाोक गहलोत व अन्य नेता तथा एसपीजी के जवान साथ थे।

सभा को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी संबोधित किया व अपने कार्यकाल में बहुत विकास किए जाने का दावा किया।

विधायक गंगाजल मील ने अंत में धन्यवाद दिया। मील ने कांग्रेस के इतिहास का ब्यौरा देते हुए कहा कि भाजपा के राजा महाराजा लूटते रहे। उन्होंने वसुंधरा राजे पर भी कटाक्ष किया कि पिछले चार सालों में लूटा हुआ धन एडजस्ट करती हुई वो अब जनता में आई हैं। मील ने भाजपा को भी कोसा। मील ने कहा कि सिंगरासर माइनर स्वीकृत होने के बाद उस पर काफी बजट स्वीकृत हुआ है जिससे आगे का कार्य संचालित होगा। मील ने बिजली की क्रिटिकल इकाइयों के शिलान्यास को सौगात बतलाया। मील ने कहा कि इलाका सूर्य की तरह चमक रहा है। मील ने कहा कि इलाके पर सोनियाजी व अशोक गहलोत का आशीर्वाद है।

     इस सभा में 1 लाख लोगों की भीड़ जुटाने का निर्धारित किया हुआ था लेकिन लोगों का अनुमान है कि करीब 25 हजार लोग आए जिनमें महिलाएं भी शामिल थी। लोगों का अनुमान है कि एक मुरब्बे में फैले स्टेडियम मैदान में एक लाख लोगों की क्षमता है लेकिन उसके चौथे हिस्से में ही पंडाल डोम लगे हुए थे जिनमें अवरोधक व रास्ते भी थे।

इस भीड़ के लिए श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों के कांग्रेस पदाधिकारी व नेता कई दिनों से लगे हुए थे।।

सूरतगढ़ की सभा से पहले वे थर्मल में उस स्थल पर पहुंची जहां पर दोनों क्रिटिकल इकाईयों का प्लास्कि पंडाल लगा हुआ था। वहां पर शिलान्यास पट्ट का अनावरण किया। शिलान्यास स्थल पर वे हेलिकोप्टर से पहुंची और वहां से  हेलिकोप्टर से ही सूरतगढ़ सभा स्थल पर पहुंची। वे थर्मल में केवल शिलान्यास के समय तक ही पांच सात मिनट ही रूकी।

थर्मल के शिलान्यास स्थल पर एसपीजी की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी जिससे वहां पर अनुमति पत्रों के पास सहित पहुंचे पत्रकारों को काफी देर तक प्रवेश नहीं करने दिया गया। काफी देर बाद केवल पांच पत्रकारों को ही अनुमति दी गई। सुरक्षा में लगे एसपीजी के एक अधिकारी ने कारण बताया कि यहां पर पत्रकारों की पूर्व में व्यवस्था की हुई नहीं है,इसलिए प्रवेश नहीं दिया जा सकता। पत्रकारों ने बाद में तय किया व तीन चैनल वालों को,एक पत्रकार को व एक फोटोग्राफर को भिजवाया। कई अधिकारियों को भी पास हाने के बाद भी परिचयपत्र नहीं होने पर भीतर नहीं जाने दिया गया। 








 



सोमवार, 3 जून 2013

प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने जब फाइल जॉर्ज फर्नान्डीज पर फेंक दी थी


महत्वपूर्ण घटना एक साक्षात्कार  में राजस्थान पत्रिका में 3 जून को संपादकीय पृष्ठ पर छपी है


खास टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत


भारत के प्रधानमंत्री का आरोप होता है कि वे सदन और सरकार चलाने में प्रतिपक्ष से बेहतर रिश्ते चाहते हैं मगर प्रतिपक्ष इसमें सहयोग नहीं करना चाहता। यह आरोप या कथन बहुत गंभीर होता है और जनता को लगता है कि प्रतिपक्ष यानि कि एनडीए बाधा डालता है। इस विषय में

राजस्थान पत्रिका में 3 जून 2013 को संपादकीय पृष्ठ पर एनडीए के नेता सांसद यशवंत सिन्हा का एक साक्षात्कार छपा है जिसका शीर्षक है कोई भी पार्टी दूध की धुली नहीं। यह साक्षात्कार प्रसिद्ध पत्रकार विजय त्रिवेदी ने लिया था। इस साक्षात्कार में यशवंत सिन्हा ने सन 2004 की एक घटना उल्लेख किया है जिसमें वे व अन्य नेता प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के पास वित्त विधेयक पर चर्चा करने के लिए गए थे। प्रधानमंत्री को एक फाइल दी गई। प्रधामंत्री ने वो फाइल जॉर्ज फर्नान्डीज पर फेंक दी और कहा कि चर्चा सदन में करें।

सिन्हा ने साक्षात्कार में बतलाया है कि भारत के संसदीय इतिहास में 10 साल पहले प्रधानमंत्री द्वारा किए गए इस प्रकार के बर्ताव को वे आज तक नहीं भूले हैं। प्रधानमंत्री का यह व्यवहार तो वास्तव में ही दुर्भाग्यपूर्ण रहा था। इस व्यवहार का आम लोगों को मालूम ही नहीं पड़ता,अगर यह साक्षात्कार नहीं छपता। इसके छपने से यह व्यवहार लोगों के सामने आया है।

इस साक्षात्कार में इस घटना का उल्लेख प्रारंभ में ही किया गया है।

इसकी कटिंग यहां प्रकाशित की जा रही है, जिसमें नेताओं के नामों सहित घटना का उल्लेख है।

 


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