* करणीदानसिंह राजपूत *
राजस्थान में शहरी निकायों में अभी चुनी हुई सरकार/ बोर्ड नहीं है ऐसे में ( नये बोर्ड गठन तक)स्वायत्त शासन विभाग जयपुर ने 2 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी किया है कि अधिशाषी अधिकारी आयुक्त अपने एकल हस्ताक्षर से पट्टे जारी कर सकते हैं। (यह आदेश यहां दे रहे हैं।) इस आदेश को कतिपय नगरपालिकाओं में ईओ/ आयुक्त नहीं मान रहे और पट्टे नहीं दे रहे। ( सूरतगढ़ नगरपालिका में अधिशासी अधिकारी नहीं मान रही और एक भी पट्टा नहीं दिया) यदि कोई शंका हो तो सरकार से मार्ग दर्शन मांग सकते हैं। लेकिन मार्गदर्शन भी नहीं मांग रहे, जिसका कारण यह है कि आदेश स्पष्ट है और मार्ग दर्शन मांगे तो उलटा पड़ सकता है।
* इससे पहले डीएलबी के दो आदेश भी नहीं मान रहे।
1- सफाईकर्मियों को किसी अन्य कार्यों पर नहीं लगाया जा सकता। आदेश कि ऐसा है तो वापस अधिकृत स्थान पर ही लगाएं। वेतन नहीं देने का भी था। नगरपालिका ईओ आयुक्त से प्रमाणपत्र भी लिया गया कि सफाई कर्मचारी अन्य कार्यों पर नियुक्त नहीं है। ये भी फर्जी हो गये। (सूरतगढ़ में ईओ ने झूठा भेजा। सफाई कर्मचारी अन्य कार्यों पर लगे हुए हैं। यहां तो सफाईकर्मियों ने मांग पत्र भी ईओ और एसडीएम प्रशासक को दिया कि अन्यत्र कार्य कर रहे सफाई कर्मियों को असली ड्युटी पर लगाया जाए। इस पर भी कार्य नहीं हुआ।)
2- दमकल अग्निशमन कर्मचारियों को अन्यत्र नहीं लगा सकते। सरकार का आदेश है लेकिन ईओ आयुक्त को कोई परवाह नहीं है।
( ईओ आयुक्त आदि ने अपने नजदीकी किसी स्वार्थ से,अपने रिश्तों के महिला/पुरूष कर्मचारियों को फील्ड से हटाकर ए.सी. कमरों में अन्य कार्यों पर लगा रखा है। वे नहीं मानते सरकारी आदेश। आदेश नहीं मानने वालों की डीएलबी को विधिवत शिकायत नहीं होती कि कौनसा अधिकारी आदेश नहीं मान रहा है। सफाई युनियनें,उनके पदाधिकारी अध्यक्ष सचिव आदि अधिकारियों से अपने स्वार्थों उचंती अवकाशों आदि के कारण मिले हैं तो वे शिकायत नहीं करते।)
* सरकार के आदेश सत्ता धारी दल के स्थानीय नेताओं को लागू करवाने चाहिए लेकिन अधिकांश अधिकारियों के साथ विभिन्न लाभों के कारण चुप रहते हैं। शहर की सफाई अग्निशमन आदि जाए भाड़ में।कोई मरे कोई जिए। अपने अपने शहरों के दोगले नेताओं को जानलें पहचान लें, वैसे जानते भी हैं। यहां बड़ा प्रश्न यह है कि सत्ता धारी पार्टी के स्थानीय नेता नेतियां अधिकारियों से मिले हैं तो अन्य पार्टियों के नेता शिकायत लिखें। वे भी नहीं लिखते।
* बात लौट कर पट्टों पर है तो पट्टा आवेदक स्वयं आगे बढे और आदेश का हवाला देते फोटो प्रति भी लगाए और ईओ आयुक्त को लिखित में दे। जबानी कुछ भी नहीं करे। यदि शहरी अभियान में कोई पट्टा रह गया तो भी लिखित में इस आदेश का हवाला देकर दे और रसीद भी ले ताकि अधिकारी की जवाब देही बने। शहरी अभियान का पट्टा अब आगे अभियान शुरू होने पर ही बनेगा ऐसा कोई नियम निर्देश नहीं है। कोई ईओ आयुक्त यह मौखिक उत्तर देता है तो वह गलत उत्तर है जिसकी शिकायत भी की जा सकती है।
०0०
०0०





