रविवार, 26 अप्रैल 2026

कुत्तों से भी गये बीते हो गये.गंदगी में रहते हुए भी चुप.

  

* करणीदानसिंह राजपूत *

ना जाने कब से यह कहावत चल रही है कि कुत्ता भी साफ घूरी में रहना पसंद करता है। जिसने भी यह कहावत जब कभी भी किसी को कहनी लिखनी बोलनी शुरू होगी वह तो अब पता लगाना मुश्किल है लेकिन बात यह सटीक ही कही। जब कोई गंदगी में रहता है या गंदगी कचरा आसपास होता है तब यह ताना मारते हुए कही जाती है या सीख के लिए कही जाती है ानताकि सुनने के बाद वह व्यक्ति रहने वाली जगह को साफ सुथरा रखे। मैं जब आठ दस साल का था तब से यह कहावत किसी न किसी को कही जाते वक्त सुनता रहा हूं। मतलब करीब सत्तर साल से तो सुन ही रहा हूं। 

👍 आज कोई कहे कि कुत्तों से भी गये बीते हो गये हो तो समझ में आता है कि यह ताना या गाली  गंदगी में या गंदगी के माहौल में रहने के कारण कही जा रही है। आज के समय में अपने आसपास  गंदगी फैलने पर भी कोई न बोले न शिकायत करे तो यह ताना कभी न कभी सुनने को मिल सकता है। लेकिन लोग खानपान और ऐसी संगति में रहने लगे हैं और इतने निष्क्रिय हो गये हैं कि यह ताना सुन कर भी बोलेंगे नहीं। 26 अप्रैल 2026. 

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