रविवार, 25 जनवरी 2026

पूर्वराज्यमंत्री कासनिया की उपस्थिति में उठाया धरणा.तय क्या हुआ?

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 25 जनवरी 2026.

पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया से आज 25 जनवरी को एक बार फिर निवेदन कर महाराणा प्रताप चौक पर लाया गया तथा उनका आश्वासन बताते हुए  वार्ड नं 3 और 26 में अतिक्रमण के पट्टे दिए जाने की मांग को लेकर  चल रहा धरना खत्म कर दिया गया। एक वीडियो वायरल हो रहा है। पट्टों की मांग को लेकर धरणा देने वाली सूरतगढ़ विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रमोद ज्याणी बोल रहे हैं कि पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया के आश्वासन पर धरणा स्थगित किया है, और जरूरत हुई तो फिर धरणा लगाया जा सकता है। यह भी बोल रहे हैं कि वार्ड नं 3 और 26 में पट्टे दिलाने में कासनिया जी मदद करेंगे,  हालांकि साफा और मालाएं पहने  रामप्रताप कासनिया सुनते हुए दिख रहे हैं कुछ भी बोलते हुए नहीं। प्रमोद ज्याणी ने धरणा स्थगित करने का कहा है लेकिन भावी नगरपालिका के संभावित चुनाव अप्रैल 2026 तक तो दुबारा धरणा लगाना आसान नहीं। स्पष्ट है कि कासनिया से बातचीत कर एक रास्ता निकाल कर किसी तरह से आज बैक टू पैवेलियन यानि मैदान से घर वापसी हुई है जिसमें कुछ लोगों के प्रयास हुए हैं। धरणा आदि में ऐसी परिस्थियां पूर्व में भी आती रही है कि संघर्ष के महीने दो महीने में सफलता नहीं मिलने पर किसी मौखिक आश्वासन लेकर संघर्ष खत्म किए गये और भाषण स्थगित करने के दिए गये। धरणा 37-38 दिन चला यह भी कुछ ताकत रही है।

* सूत्रानुसार कासनिया से बातचीत दुबारा हुई इसमें स्पष्ट स्थिति आई कि नगरपालिका प्रशासन पट्टे देने की स्थिति में नहीं है या देना नहीं चाहता, क्योंकि जमीन, दस्तावेज, पात्रता आदि में स्थिति उलझी हुई है। यह कहा गया है कि कासनिया की ओर से डीएलबी जयपुर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। 

* वार्ड नं 3 और 26 में अतिक्रमण नियमन इसलिए नहीं हो रहा कि जमीन का मालिकाना अधिकार नगरपालिका का स्पष्ट नहीं हो रहा है। यह हालात जिला कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट में लिखा हुआ है। 

* नगरपालिका प्रशासन में खासकर अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा ही जमीन के बिना एक भी पट्टे पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं है, जिसे साफ कहा जाए तो वह गलत और अस्पष्ट स्थिति में एक भी पट्टा देना नहीं चाहती। जब नगरपालिका की जमीन ही स्पष्ट नहीं है तब भारतीय प्रशासनिक सेवा के नगरपालिका प्रशासक उपखंड अधिकारी भरत जयप्रकाश मीणा तो एक भी हस्ताक्षर नहीं कर सकते और ऐसे धरणा प्रदर्शन से उनके कोई फर्क भी नहीं पड़ता। हालात तो यह बने हैं कि जिन सरकारी कर्मचारियों ने अतिक्रमण किए हैं उन पर कार्वाई हो सकती है और अतिक्रमण ध्वस्त हो सकते हैं। ईओ पूजा शर्मा ऐसे मामलों को कब तक छुपाएगी बचाएगी।

** अब बात आती है पूर्वराज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया की। जब ईओ और प्रशासक की जब तक हां नहीं होती तब तक कासनिया भी कुछ भी नहीं करा सकते इसलिए यह डीएलबी से आग्रह करने की बात है। 

*** नगरपालिका प्रशासन अभी जल्दी में पट्टे देता हुआ लग नहीं रहा। जब जमीन की स्थिति स्पष्ट हो जाए तब जितने पट्टे प्रथम वरियता में मिलने की उम्मीद हो वे ले लेने में आवेदकों की समझदारी रहेगी। यह भी स्पष्ट हो गया है कि धरणा प्रदर्शन और उत्तेजित भाषाओं  आदि के दबाव से भी कुछ नहीं हो सकता। जिसको कोसा जाता है और उसी के पास जाना पड़़ जाता है। 👍 इस धरणा प्रदर्शन से भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं नेतियों की पावर भी फुस्स होने और कुछ भी पावर नहीं होने की हालत भी उजागर हो गई।


👍 चलते चलते: संदीप कासनिया को स्कूल की भूमि कितने संघर्ष से मिली और करोड़ों कीमत देने के बाद ही मिली और हर दस्तावेज पूरे करने पर ही मिली।०0०







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