रविवार, 20 नवंबर 2022

राजस्थान में भाजपा टिकट का बड़ा आधार सर्वे और काम होगा।चयन विधि सख्त होगी।

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

राजस्थान में सन् 2023 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का राज आने की अधिकतम संभावना को मानते हुए भारतीय जनता पार्टी की टिकटों के लिए इस बार हर सीट पर अधिक टिकटार्थी होंगे और अधिक कसमकस चलेगी। 

यह निश्चित है कि इस बार अनेक विधायकों को टिकट मिलने की संभावना नहीं है। भारतीय जनता पार्टी में टिकट के लिए सख्त दिशा निर्देश होंगे जिसमें अनेक विधायक और अनेक कार्यकर्ता उन नियमों तक  पहुंच ही नहीं पाएंगे। भारतीय जनता पार्टी में टिकट के लिए सबसे बड़ा पैमाना होगा जनता में टिकट मांगने वालों की छवि और उपस्थिति कितनी  रही है? जनता के बीच पार्टी खुद सर्वे करवाएगी और अन्य एजेंसियों से भी  सर्वे करवाएगी। 

उन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नाम पैनल तक पहुंचेंगे। पैनल में नाम होने से ही टिकट मिलना संभव होगा। जनता के बीच जिन लोगों को जीत की संभावना होगी, जिन लोगों के जनसंपर्क के अलावा संघर्ष की कार्यप्रणाली रही होगी, उनके नाम पैनल तक पहुंचेंगे। सामान्यतया 3 लोगों के नामों का पैनल बनाने की परंपरा ही रही है। राजस्थान में 2023 के चुनावों के लिए पैनल में 3 नाम ही होंगे। दस पन्द्रह नेता कार्यकर्ता हर सीट पर टिकट मांगने वाले हैं। इन 10-15 टिकटार्थियों  में सर्वे महत्वपूर्ण होगा और इसके साथ ही उनके काम को भी देखा जाएगा। वैसे तो जनता के बीच में होने वाले सर्वे में वे नेता और कार्यकर्ता ही आगे रहेंगे जो घर से बाहर जनता के बीच में किसी न किसी संघर्ष में किसी मांग में कहीं ना कहीं अपने क्षेत्र में काम करने वाले होंगे। जनता में जो व्यक्ति लोकप्रिय होगा उसी की पैनल में पहुंचने की मजबूत स्थिति होगी। कोई यह समझे कि घर में बैठे ही टिकट मिल जाएगी, बिना काम किए ही टिकट मिल जाएगी और क्षेत्र में वर्ष 2022 के बाद चुनाव के मौके पर ही मुंह  निकालेंगे तो ऐसी स्थिति में टिकट मिलने की संभावना 0% ही रहेगी। मतलब की टिकट किसी भी हालत में नहीं मिलेगी।चाहे कोई कितना ही बड़ा नेता हो या कार्यकर्ता हो घर बैठे टिकट नहीं ले पाएगा। आम लोग घर बैठे टिकटार्थी का नाम सर्वे में नहीं दिखाते।सर्वे में वही नाम लिखाया जाता है जो जनता के बीच में कहीं ना कहीं काम करता हुआ रहा हो।  ऐसी स्थिति में हर सीट पर जो लोग टिकट मांगने की कोशिश में है या 2023 के शुरू होने पर टिकट मांगेंगे तो उनको किसी भी हालत में टिकट मिलने की संभावना नहीं होगी।

भारतीय जनता पार्टी अब बहुत मजबूत पार्टी है लेकिन फिर भी उसकी कांग्रेस से टक्कर रहेगी। कोई यह समझे कि भारतीय जनता पार्टी की टिकट मिलते ही जीत होने की संभावना 100% होगी तो उसका विचार या सोच बिल्कुल गलत है। भाजपा की टिकट मिलते ही अगर जीत होती है तो राजस्थान में सभी 200 सीटें भारतीय जनता पार्टी की हो जाएगी। लेकिन ऐसा संभव नहीं है। कांग्रेस को कमजोर समझें चाहे लेकिन वह बहुत अधिक कमजोर नहीं है इसलिए राजस्थान में टिकटों का बंटवारा बहुत सोच और समझ करके किया जाएगा और उसमें जनता का सर्वे बहुत बड़ा परीक्षा का बिंदु रहेगा। 

* जो लोग टिकते मांगते हैं उन्हें अपना खुद का भी निजी सर्वे अपने क्षेत्र में कर लेना चाहिए।खुद का सर्वे कड़ाई वाला होना चाहिए।इस सर्वे में जो नंबर खुद को देने हैं वह सख्ती से देकर और कम से कम नंबर देकर के आकलन करें कि वह स्वयं जनता में कितने लोकप्रिय हैं? जनता उनका कितना समर्थन सर्वे में करेगी? जो लोग खुद को अधिक से अधिक नंबर देना चाहते हैं और जनता के बीच में जिन्होंने कुछ भी कार्य नहीं किया है, उनको यह मान लेना चाहिए कि टिकट मिलने की संभावना पूरी तरह से शून्य रहेगी ।

 विधायक और पूर्व विधायक जो यह समझते हैं कि उनका नाम लोकप्रियता में है तो वह नाम केवल सत्ता में रहने के कारण है या फिर पूर्व विधायक होने के कारण है। इनको भी चुनावी सन् 2018 से अब  2022 तक की स्थिति की स्वयं समीक्षा करनी चाहिए। चुनाव चाहे लोकसभा के हों चाहे विधानसभा के हों उनकी स्थिति ऐसे नहीं होती कि चलो घूमते फिरते चुनाव लड़ लेंगे और जीत जाएंगे। चुनाव के लिए काम करना होता है। कोई कहे कि टहलते टहलते ही टिकट मांग लेंगे और टिकट मिल जाएगी तो उनकी सोच ऐसी मानी जानी चाहिए कि वह पत्थर पर अपना सिर मार रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में संघ के महत्वपूर्ण कार्य कर रहे सज्जन से मेरी 15 मिनट से अधिक समय तक हुई बातचीत में जनता के बीच का सर्वे टिकट के लिए सबसे बड़ा आधार बताया गया। उन्होंने कहा कि सर्वे के आधार पर ही पैनल में नाम शामिल होगा। सर्वे हर सीट का होगा और संपूर्ण राजस्थान में कितनी सीटें आ सकती है पर आधारित होगा।

* फिलहाल उम्र का कोई पैमाना नहीं है। हिमाचल और गुजरात के चुनाव परिणाम बहुत अच्छे रहे तो उम्रदराज को टिकट मिलना कठिन होगा। संभावना सख्ती की रहेगी और 70 वर्ष के टिकटार्थियों को पार्टी का संगठन का मार्गदर्शन करते रहने के लिए स्वयं को ही कहना होगा। अपना वजूद रखने के लिए यह होगा। हिमाचल गुजरात चुनाव में पार्टी की शानदार जीत होने पर राजस्थान में 70 वर्ष वाले टिकट मांगना खुद ही छोड़ देंगे। यह स्थिति ही पक्की मानते हुए कार्यकर्ताओं को लोकप्रिय नये चेहरों में ही अपनी पसंद के किसी एक को  विधायक मानते हुए मजबूत के साथ लग जाना होगा। जब चुनना नये चेहरे में से है तो पुराने चेहरों का नाम भी सर्वे में कोई नहीं लेगा।०0०

* रविवार 20 नवंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

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