बुधवार, 10 जुलाई 2019

सूरतगढ़- राजकीय महाविद्यालय का नाम स्व.गुरु शरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय किया गया


 * मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बजट प्रस्तुत करते घोषणा *


^^विशेष समाचार करणी दान सिंह राजपूत ^^


 10 जुलाई 2019.

 राजस्थान सरकार के बजट 2019- 20 को प्रस्तुत करते समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ का नामकरण स्वर्गीय गुरुशरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय करने की घोषणा की।

 यह राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ में राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62 पर आकाशवाणी केंद्र के सामने स्थित है। विदित रहे कि सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरु शरण छाबड़ा ने प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर जयपुर में अनशन करते हुए 3 नवंबर 2015 में प्राण त्याग दिए थे।

 गुरूशरण छाबड़ा आपातकाल के बाद 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उस समय भैरों सिंह शेखावत जिस दिन मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए उसी रात्रि में 11 बजे विधायक गुरुशरण छाबड़ा,राजा राम कड़वासरा मानकसर (अब स्वर्ग वासी) पत्रकार करणी दान सिंह राजपूत भैरों सिंह जी से मिले। सूरतगढ़ में राजकीय महाविद्यालय खुलवाने की मांग रखते हुए बताया कि विधायक का चुनाव सूरतगढ़ में राजकीय महाविद्यालय खोले जाने की बात पर लड़ा गया है। जनता ने साथ दिया है इसलिए सूरतगढ़ में राजकीय महाविद्यालय खोला जाए। माननीय भैरों सिंह जी शेखावत ने तत्काल ही कहा कि प्रदेश में जब भी राजकीय महाविद्यालय खोले जाएंगे तब सूरतगढ़ प्रथम रहेगा। उसी घोषणा के तहत ही सूरतगढ़ में 1977 में राजकीय महाविद्यालय खोला गया। उस समय भवन निर्माण के लिए एक समिति का गठन सोहन लाल रांका की अध्यक्षता में हुआ।

पहले भवन निजी रूप से बना कर सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंपा गया और बाद में उसका विस्तार सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा समय-समय पर किया जाता रहा। इस राजकीय महाविद्यालय की नींव उस समय के गृहमंत्री प्रोफेसर केदार के कर कमलों से रखी गई थी। आज यह महाविद्यालय आसपास के हजारों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है। महाविद्यालय का नाम गुरु शरण छाबड़ा के नाम से किए जाने पर यह सदा के लिए एक महत्वपूर्ण यादगार रहेगी।

विदित रहे कि गुरु शरण छाबड़ा के स्वर्गवास के बाद उनकी  पुत्र वधु पूजा छाबड़ा पत्नी गौरव छाबड़ा ने भी शराबबंदी को लेकर आमरण अनशन किया था और राजस्थान सरकार ने उनसे एक समझौता किया जिसमें राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ का नाम स्वर्गीय गुरु शरण छाबड़ा के नाम से किए जाने का निर्णय हुआ था।

आज इस घोषणा के तुरंत बाद गुरु शरण छाबड़ा के बड़े पुत्र गौरव छाबड़ा से मेरी टेलीफोन पर बात हुई तब उन्होंने कहा कि छाबड़ा जी के प्राण न्योछावर करने के बाद हमारी महत्वपूर्ण मांग राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी की है उसके पूरा होने पर ही निश्चिंत था होगी।

(यहां पर राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ का चित्र दे रहा हूं।


स्वर्गीय गुरु शरण छाबड़ा की आदम कद प्रतिमा राजकीय चिकित्सालय के पास स्थित है उसके पास ही पुत्र वधु पूजा छाबड़ा का चित्र भी यहां दे रहा हूं।)

**********

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें