बुधवार, 7 नवंबर 2018

सूरतगढ़ से कांग्रेसी टिकट गैरजाट चेहरे का दबाव:अन्य समुदायों के टिकटार्थी अधिक


सूरतगढ सीट पर पिछले चुनाव 2013 में कांग्रेस प्रत्याशी गंगा जल मील के विधायक रहते बहुत बुरी तरह से 30 हजार वोटों से हारने और तीसरे क्रम पर नीचे पहुंचने के कारण मील को टिकट नहीं देने का दबाव बढा है। मील को टिकट नहीं दिए जाने के लिए सैंकड़ों पेजों में अनेक कागजात दस्तावेज आदि पार्टी के उच्च नेताओं को सौंपे जाने के समाचार भी हैं। पिछली बार विधायक रहते गंगा जल को आसानी से टिकट मिल गई थी लेकिन इस बार प्रबल दावेदार कई हैं और उनका दबाव अधिक व मील की स्थिति कमजोर है।

सूरतगढ़ के पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस पार्टी की ओर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि इस सीट को जीता जा सके।

विभिन्न समुदायों के टिकटार्थियों की ओर से पिछले काफी समय से यहां मांग चल रही है कि जाट जाति में से कैंडिडेट खोजने के साथ ही अन्य जातियों में भी कैंडिडेट की खोज की जाए।

इस दबाव से कांग्रेस इस बार कोई दूसरा चेहरा चुनाव में उतारे तो आश्चर्य नहीं होगा।

भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कासनिया और वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू में ही किसी एक को टिकट मिलने की संभावना है। ये दोनों जाट समुदाय से हैं इसलिए भी कांग्रेस अपना प्रत्याशी अन्य समुदाय से उतारने को प्राथमिकता दे सकती है जिसके लिए राजनीतिक क्षेत्र के अलावा चर्चा सरगर्म है।


पार्टी सूरतगढ़ से अन्य समुदायों में सिख समुदाय, अरोड़ा, वणिक व ओबीसी कुम्हार व किसी अन्य  समुदाय में से टिकट दे सकती है।

पूर्व में यहां कांग्रेस की ओर से बिश्नोई जाट दो समुदायों को विशेष रूप से प्रमुखता दी जाती रही है।

 जाट समुदाय से यहां राजा राम साईं साईं चौधरी मनफूल सिंह भादू गंगाजल मील व बिश्नोई समुदाय से सुनील बिश्नोई और उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी बिश्नोई को प्रमुखता दी जाती रही है।

सुनील बिश्नोई ने 4 बार चुनाव लड़ा दो बार जीते दो बार हारे। विजयलक्ष्मी ने दो बार चुनाव लड़ा एक बार जीती एक बार हारी। एक ही परिवार ने 30 साल तक यहां क्षेत्र पर कब्जा जमाए रखा रखा।

 इससे पूर्व इस क्षेत्र में भादू परिवार का विशेष कब्जा रहा 1952 में मनफूल सिंह भादू व 1962 और 1967 में मनफूल सिंह भादू इस इलाके से विजयी रहे। 1957 में एक बार राजा राम साईं को विधायक चुना गया।

इस प्रकार से देखा जाए तो इस क्षेत्र में जाट और बिश्नोई परिवारों का ही वर्चस्व रहा था।

 सन 2008 में गंगाजल मील कांग्रेस की टिकट पर जीते लेकिन 2013 में जनता ने उन्हें तीसरे क्रम पर पहुंचा दिया। मील परिवार अभी भी टिकट की ट्राई करने में लगा हुआ है,मगर जनता गंगाजल मील के नाम पर उत्सुक नहीं है।

 गंगाजल मील ने 2003 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से पीलीबंगा सीट पर चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा से नाराज होकर स्वतंत्र रूप से लड़ने वाले रामप्रताप कासनिया से मात खाई।

 इस क्षेत्र में जो सूरतगढ़ तहसील कहलाती है लोगों ने भाजपा और कांग्रेस में रामप्रताप कासनिया गंगाजल मील और राजेंद्र सिंह भादू को ही 15  सालों से देखा है। ये तीनों एक दूसरे का विरोध भी नहीं करते चाहे जो विधायक रहे, हां चुनाव में जरूर एकदूसरे के विरोध में वोट मांगते हैं।

लोगों का मानस है कि कि कांग्रेस पार्टी इस बार अपनी सीट को हर हालत में जीतने के लिए टिकट में परिवर्तन करे जिसमें समुदाय का परिवर्तन भी हो और कोई नया या दूसरा चेहरा सामने आए। पिछले 15 सालों से जो लोग यहां चर्चा में रहे हैं, उनको जनता इस  2018 के चुनाव में देखने को उत्सुक नहीं है

चाहे भाजपा हो चाहे कांग्रेस हो।

दोनों पार्टियों में लोग नए या फिर दूसरे चेहरों को देखना चाहती है।

भाजपा की राजनीतिक स्थिति बहुत कमजोर नजर आती है ऐसी स्थिति में कांग्रेस का नया या.प्रभावशाली दूसरा चेहरा लोगों को प्रभावित कर सकता है।


राजस्थान के तीन उपचुनाव कांग्रेस ने जीते जो 17 विधानसभा क्षेत्र में हुए। इस परिवर्तन को नजर में रखते सूरतगढ़ पर नजर है। जयपुर दिल्ली में यह दबाव चल रहा है और उसके अनुसार टिकट के लिए प्रयास और दबाव शुरू है।

अन्य समुदायों में सिख में से 2 बारपीलीबंगा से विधायक रह चुके स.हरचंद सिंह सिद्धू,पूर्व प्रधान परमजीत सिंह रंधावा और युवक कांग्रेस के विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष गगनदीपसिंह वरिंग हैं। 

जैन समुदाय से विमलकुमार पटावरी ( जैन) ने प्रबल दावेदारी जताई है।ओबीसी में से बलराम वर्मा हैं जो कुम्हार समुदाय से कई चुनावों के अनुभवी कार्यकर्ता हैं। इनके अलावा अमित कड़वासरा भी हैं। इनके अलावा भी टिकटार्थी हैं।


 


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