Friday, November 1, 2013

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल का दुराचार प्रकरण पीडि़ता की जान को खतरा:मोबाइल पर फिर आई हत्या की धमकियां


पुलिस ने पहले की कॉल डिटेल निकलवाली मगर आरोपी के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज नहीं किया और अब नई धमकियां आ गई जिसकी अर्जी 31-10-2013 को और लगादी गई

सूरतगढ़, नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल और दो अन्यों के विरूद्ध दुराचार का मामला दर्ज कराने व लगातार लडऩे वाली पीडि़ता को जान का खतरा है।पुलिस धमकियां देने वाले के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर गिरफ्तार नहीं कर रही है और पीडि़ता को अपनी सुरक्षा के लिए रात को घर बदल बदल कर सोना पड़ रहा है।
पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,सिपाही रोहिताश व पार्षद पति ओम साबनिया के विरूद्ध अनुसूचित जाति की महिला के द्वारा बलात्कार और यौन शोषण के मामले में पुलिस ने तथ्यों को छुपाते हुए दो बार अंतिम रिपोर्ट अदालत में दी। अदालत ने दूसरी बार अंतिम रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए प्रथम दृष्टि में बलात्कार होना मानते हुए संज्ञान लिया व आगे की तारीख दी। इस अदालती कार्यवाही के बाद पीडि़ता के मोबाइल पर धमकियां आनी शुरू हुई।
पहले की अर्जी पर कॉल डिटेल में सिम हिंडौन से जारी होना पाया गया। लेकिन पुलिस ने उसका मुकद्दमा दर्ज नहीं किया।
अब दीपावली से ठीक पहले लगातार हत्या की धमकियां मिली और पहले एक मोबाइल से फिर दूसरे मोबाइल से।
पीडि़ता अपने वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु के साथ 31-10-2013 को सिटी थाने गई और सीआई रणबीर साई को लिखित में कार्यवाहीि करने की अर्जी दी जिसमें पहले वाली सिम हिंडौन का हवाला भी दिया।
अब दीपावली पर मिली नई धमकियों में जिन मोबाइल नम्बरों का इस्तेमाल हुआ है उनके नम्बर पुलिस को दी गई अर्जी में है जिसका फोटो यहां दिया जा रहा है।
पुलिस पीडि़ता के प्रकरण में तथ्यों को अनदेखा करते हुए दो बार फाइनल रिपोर्ट दे चुकी है। पीडि़ता ने दोनों बार चुनौती दी। अदालत ने संज्ञान लिया तब से पीडि़ता को धमकियां दी जाने लगी। आरोपियों में एक पुलिस का सिपाही होने के कारण पुलिस पीडि़ता की अर्जी पर कार्रूवाही नहीं करना चाहती।
अब नई अर्जी में लिखा गया है कि पीडि़ता की जान चली गई तो उसकी समस्त जिम्मेदारी पुलिस थाना सूरतगढ़ की होगी।


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