गुरुवार, 7 जनवरी 2021

राष्ट्रीय, राज्य और क्षेत्रीय राजनैतिक दल कौनसे हैं? यह कैसे तय होता है? महत्वपूर्ण जानकारी

 

* प्रस्तुति - करणीदानसिंह राजपूत*

भारत में फिलहाल तीन तरह की राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और क्षेत्रीय पार्टियां हैं। इस समय देश में कुल सात राष्ट्रीय पार्टियां हैं। 35 राज्य स्तरीय दल हैं और 329 क्षेत्रीय दल हैं। 

👍 राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए कुछ शर्तें हैं। इसके तहत तीन शर्तें तय हैं, जिनमें कम के कम एक शर्त पूरा करने पर किसी पार्टी को राष्ट्रीय होने का दर्जा मिलता है।


*पहली शर्त है कि कोई पार्टी तीन राज्यों के लोकसभा चुनाव में कम से कम 2 प्रतिशत सीटें जीती हो। 

**दूसरी शर्त यह है कि कम से कम चार लोकसभा सीटों के अलावा पार्टी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में छह प्रतिशत मत पाए हों। ***तीसरी शर्त यह है कि पार्टी की चार या इससे अधिक राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी के रूप में मान्यता हो। इन तीन शर्तों में जो पार्टी एक भी शर्त पूरा करती है उसे राष्ट्रीय पार्टी का स्तर मिल जाता है।


👍 राज्यस्तरीय पार्टी का स्तर पाने के लिए भी तीन शर्तें हैं। 

* पार्टी राज्य विधानसभा की कुल सीटों में तीन प्रतिशत सीटें या कम से कम तीन सीटें जीते। **लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कुल वैध वोटों में 6 प्रतिशत वोट प्राप्त करे। 

**साथ ही एक लोकसभा सीट या दो विधानसभा सीटें जीते। इनमें से किसी एक शर्त को पूरा कर कोई पार्टी राज्य स्तरीय दल का दर्जा पा सकती है। 

👍कोई पार्टी किसी राज्य में लोकसभा या विधानसभा चुनाव में भले ही कोई सीट न जीते लेकिन कुल वैध मतों में कम से कम 8 प्रतिशत वोट प्राप्त करे तब भी उसे क्षेत्रीय दल का दर्ज दिया जाता है।00

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ऋण वापस मांगना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, कोर्ट ने ख़ारिज किया मुकदमा.

 



* महत्वपूर्ण फैसला है*

 7 जनवरी 2021.

* न्यायमूर्ति विनय देशपांडे और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता रोहित नलवड़े केवल अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा था और उधार लेने वाले प्रमोद चौहान से इसे वसूल करने का प्रयास कर रहा था। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।*


बम्बई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी के खिलाफ ऋण चुकाने की मांग करने पर आत्महत्या के लिये उकसाने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी रद्द करते हुये कहा है कि यह कमर्चचारी के कर्तव्य का हिस्सा है। अदालत ने यह भी कहा कि इसे आत्महत्या के लिये उकसाने वाला कृत्य नहीं कहा जा सकता है।

न्यायमूर्ति विनय देशपांडे और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता रोहित नलवड़े केवल अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा था और उधार लेने वाले प्रमोद चौहान से इसे वसूल करने का प्रयास कर रहा था। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

लोन लेने वाले प्रमोद चौहान ने बाद में आत्महत्या कर ली थी। अपने सुसाइड नोट में याचिकाकर्ता पर ऋण की वसूली के लिये उसे बार-बार काल करने और परेशान करने का आरोप लगाया था। इस मामले में रोहित नलवड़े के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिये उकसाने वाला) के तहत मामला दर्ज किया गया था।


पीठ ने अपने ताजा आदेश में कहा, “आरोप केवल इस प्रभाव के हैं कि आवेदक (नलवडे) ने बकाया ऋण राशि की मांग की, फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी के नाते यह उसकी नौकरी का हिस्सा था ऋण की वसूली करना उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।”

पीठ ने कहा कि बकाया ऋण राशि की मांग करने को किसी भी प्रकार से आत्महत्या के लिये उकसाने वाला नहीं कहा जा सकता है। अभियोजन पक्ष ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रमोद चौहान ने ऋण समझौते के माध्यम से एक नया वाहन खरीदने के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विस लिमिटेड से ऋण लिया था।

8 अगस्त, 2018 को वाशिम के श्रीपुर में दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के अनुसार फाइनेंस कंपनी ने चौहान को 6,21,000 रुपये का ऋण मंजूर किया था। दोनों पक्षों में यह सहमति हुई थी कि वह चार साल में राशि का प्रति महीने 17,800 रुपये की मासिक किस्तों के माध्यम से भुगतान करेगा। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जब चौहान ऋण राशि नहीं चुका सका, तो उसने आत्महत्या कर ली।00






सोमवार, 4 जनवरी 2021

गोविंदसर के कुछ युवा क्यों और कैसे अपराध मार्ग पर चल पडे़?

 



* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ तहसील का गोविंदसर गांव कुछ युवकों के अपराध मार्ग पर चलने के कारण पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है।
लोगों को नौकरियां दिलाने की और कॉल गर्ल उपलब्ध कराने के नाम पर उपलब्ध कराने के नाम पर बहुत सुनियोजित जाल में लोगों को फंसाना और फिर रकम वसूल करना। रकम वसूल करने का तरीका बहुत ही शातिर कोई सीधा लेना देना नहीं।  फर्जी खाते में पैसे डलवाना पेटीएम से कहीं से निकलवाना से निकलवाना।
फर्जी सिम कार्ड से शुरु अपराध में अब  तक 15 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी है।गोविंद सर टीबा क्षेत्र का गांव है जहां के युवकों ने ने बेरोजगारी में ठगी के धंधे को अपना लिया। इसे धंधा तो नहीं कह नहीं कह सकते।अपराध सदा अपराध ही रहता है। यहां इस अपराध के होते एक अलग स्थिति पर दृष्टि डालें।
सूरतगढ़ शहर शिक्षक और कोचिंग के क्षेत्र में बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है और निरंतर प्रगति की ओर है। सूरतगढ़ से कोचिंग किए हुए युवा लड़के लड़कियां बहुत अच्छे अच्छे पदों पर सरकारी नौकरियों में चुने जा रहे है।  कंपटीशन परीक्षाओं में भी नाम रोशन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में अच्छे मार्ग पर बढ़ने के बजाय बजाय कुछ युवकों का अपराध मार्ग पर बढ़ने का समाचार पढ़ने वालों को और इलाके को दुखी करता है।
युवक बेरोजगार थे तो उन्हें भी अन्य युवाओं की तरह शिक्षा का लाभ उठाना चाहिए था।

पुलिस ने जिस तरह से इस अपराध को पकड़ा है और निरंतर अनुसंधान जारी है। उससे  स्पष्ट हो रहा है कि अपराध की कड़ियों को आरोपी युवकों ने बहुत ही तरीके से जोड़ा ताकि किसी भी सूरत में पकड़ में नहीं आए लेकिन अपराध कभी छुपता नहीं है। देर सवेर कहीं ना कहीं से पकड़ा जाता है।
मोबाइल सिम इंटरनेटवर्क में दुनिया को बहुत आगे और ऊंचा पहुंचाया है वहीं  इसके दुरुपयोग ने अपराधों में भी बढ़ोतरी की है की है।

अभिभावकों को अपनी संतानों के पास मोबाइल में समय-समय पर देखना चाहिए कि किन लोगों से संपर्क है किन किन संपर्क है किन किन लोगों के नंबर है किन नंबरों से कितनी कितनी बार बात हुई है है है बार बात हुई है है है। अपरिचित जो न रिश्तेदार है ना जानकार हैं तो उनके नंबरों पर अभिभावकों को गौर करना चाहिए।
युवा पुत्र की दिनचर्या क्या है।  यदि अपने गांव और शहर से कहीं बाहर रहते हैं तो भी उन पर देखरेख होती रहनी चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि संतानों के पास में मोबाइल तो है लेकिन अभिभावकों के पास में समय नहीं है कि वे देख सकें। युवाओं के शानशौकत का रहन सहन कैसे है और यह खर्च बेरोजगारों के पास कहां से आ रहा है?
यह एक बड़ा कारण है जिससे  युवा भटक रहे हैं और अपराध की दुनिया में में उनका जीवन आगे जाकर क्या होगा?00
करणी दान सिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार  (राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़.
94143 81356.
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शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

*इक्कीस में भी उग आया नया कांटा * काव्य- करणीदानसिंह राजपूत.

 



इक्कीस में भी उग आया नया कांटा

कांटा है तो चुभेगा ही.

हर साल कोई न कोई 

कांटा उग आता है और

उसे निकालने में

साल गुजर जाता है।


इक्कीस में भी उग आया नया कांटा

शुभकामनाओं के साथ कांटा।

हर कांटे की चुभन तीखी सहन की

परमात्मा का रहा आशीर्वाद।

विश्व के कल्याण की कामना के

मुंह से निकलते पूजन शब्द ही

रक्षा करते रहे हैं हर बार।


जीवन में फूल मांगे ही नहीं

तो फूलों की आशा भी नहीं

कांटो में चल रहे बरसों से

नित नये नये उगते रहे

एक एक निकालते भी रहे।


खुशियों मांगते सभी की

और स्वयं के लिए खुशी मांगना

स्मृति में ही नहीं होता

जब खड़े होते रहे तीर्थ मंदिर में

दाता प्रतिमा के आगे हाथ जोड़े।


इक्कीस में भी सभी का शुभ हो

सभी खुशियों में आनंदित होते रहें

यही कामना है परमात्मा से

नये कांटे को निकालने की

कोशिश में ईश्वर रहेगा साथ

निकल जाएगा यह कांटा भी

और फिर उग आएगा कोई नया कांटा।


जीवन में फूल मांगे ही नहीं 

चल रहे हैं बरसों से कांटों के बीच

कौन संगी कौन साथी होता है कांटों में

कांटे ही होते हैं संगी साथी और

इस साथ का अहसास कराती है

हर चुभन।


इक्कीस में भी उग आया नया कांटा

कांटा है तो चुभेगा ही.

हर साल कोई न कोई 

कांटा उग आता है और

उसे निकालने में

साल गुजर जाता है।

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1 जनवरी 2021.




 करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़. राजस्थान. भारत.

9414381356.

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सोमवार, 28 दिसंबर 2020

मशहूर इवेंट्स संचालक गोविंद छाबड़ा का निधन.

 



- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 28 दिसंबर 2020.
गोविंद जी छाबड़ा का आज सुबह जयपुर के एक  प्राइवेट हॉस्पिटल में सुबह करीब 7:30 बजे निधन हो गया गया।  गोविंदा छाबड़ा की की उम्र करीब 48 वर्ष थी। उनका अंतिम संस्कार कल दि. 29 दिसंबर 2020 को अरोड़वंश कल्याण भूमि में किया जाएगा।
सूरतगढ़ व्यापार मंडल के प्रमुख व्यापारी गोविंद के भाई सुरेंद्र छाबड़ा से जानकारी मिली। गोविंद छाबड़ा की लीवर की नली फटने की घटना दि. 16 दिसंबर को हुई जिससे खून बाहर निकलने लगा। उन्हें जयपुर के प्राइवेट हास्पीटल में भर्ती कराया गया जहां ईलाज चला। सुरेंद्र भी सूचना पर जयपुर पहुंचे और 26 को ही जयपुर से सूरतगढ़ लौटे। बीती रात को 11 बजे के करीब गोविंद से बात भी हुई कि हास्पीटल में कई दिन हो गए अब छुट्टी लें। सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। रक्तचाप बहुत गिर गया। वेंटिलेटर पर रखा गया। आज सुबह करीब साढे सात बजे निधन हो गया।
सूरतगढ़ निवासी गोविंद छाबड़ा कुछ वर्षों से जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र में निवास कर रहे थे। वही मकान लिया और एक समाचार पत्र झोटवाड़ा झोटवाड़ा टाइम्स निकाला लेकिन मुख्य कार्य इवेंट्स आदि का ही ही रहा जिसमें वे वे सिद्धहस्त थे।
सूरतगढ़ के सेठ रामदयाल राठी उ.मा.विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की थी।
सूरतगढ़ में खेलों के आयोजन में उनका नाम था। उनके कार्य पद्धति को देखकर राजस्थान पत्रिका ने उन्हें पत्रिका में स्थान दिया।
सूरतगढ़ में मेरे पत्रिका कार्यकाल में सूरतगढ़ में जोइनिंग हुई। सूरतगढ़ के बाद श्री गंगानगर और जयपुर में खूब काम किया और नाम कमाया।
सूरतगढ़ गंगानगर और उसके बाद जयपुर में बहुत अच्छे कार्यक्रम दिए गए उसके बाद उन्होंने पत्रिका छोड़ने के बाद कुछ वर्ष पहले अपने निजी कार्यक्रम शुरू किए जिनमें काफी सफल रहे।
मेरे साथ उनका कार्य बहुत अच्छा सराहनीय रहा था। सूरतगढ़ के पत्रकारों से भी अच्छा मेलमिलाप रहता था।
गोविंद छाबड़ा का अचानक संसार से जाना।। ईश्वर की ईच्छा।
याद रहेंगे।
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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ जिला श्री गंगा नगर.
94143 81356.
***** मेरी इंटरनेट साइट करणी प्रेस इंडिया पर बहुत मैटर है। उसे अवश्य ही देखते रहें।
करणी प्रेस इंडिया
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रविवार, 27 दिसंबर 2020

समाचारपत्रों का बंद होते जाना सभी के लिए आत्मघाती होगा

 


* करणीदानसिंह राजपूत *
कुछ साल पहले तक अपना समाचार पत्र प्रकाशित करने की होड़ लगी रहती थी।  नए-नए समाचार पत्रों का छोटे से छोटे कस्बों तक में प्रकाशित होने कि यह होड़ बहुत गजब की होती थी। आज समाचार पत्रों के बंद होने की चिंताजनक स्थिति है। एक के बाद दूसरा समाचार पत्र बंद होते बहुत कम संख्या में दैनिक साप्ताहिक और पाक्षिक बचे हैं।
कहना यह चाहिए कि जो बचे हैं वे समाचार पत्र जीवित रह पाने का संघर्ष कर रहे हैं। हालात बहुत नाजुक है।
आज जो पत्र प्रकाशित हो रहे हैं उनकी भी अधिकांश की आर्थिक हालत खराब और कर्जदार स्थिति में है।  उनमें से भी कितने जीवित बचेंगे यह अभी कहा नहीं जा सकता। समाचार पत्रों के प्रकाशन में पहले होड़ रहती थी  और आज बंद होने की स्थिति में भी वैसे ही हालात हैं। एक ने प्रकाशन बंद किया तो दूसरा भी बंद कर रहा है।
ये क्या परिस्थितियां हुई है जिनके कारण समाचार पत्रों और पत्रकारिता क्षेत्र में आने वाले लोग भयभीत होने लगे हैं।
पत्रकार और समाचार पत्र समाज का दर्पण कहलाते थे। आज स्थिति में इतना बदलाव हो गया है कि कोई भी इन दर्पणों में मुंह देखना नहीं चाहता। समाज के इस बदलाव से समाचार पत्र खरीदना उनमें विभिन्न प्रकार के विज्ञापन देना बंद से हो रहे हैं।
सरकार का बहुत बड़ा हाथ समाचार पत्रों के प्रकाशन में विज्ञापन देकर एक प्रकार से सहायता करने का रहा था जो अब केंद्र व राज्य सरकारों के उदासीन रुख के कारण खत्म हो गया है। केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां समाचार पत्रों को खत्म कर रही है।
अनेक लोग पत्रकारिता क्षेत्र में जीवन संघर्ष कर रहे हैं।
समाज और जनता समाचार पत्रों और पत्रकारों से सहयोग की इच्छा रखते हैं लेकिन बिना समाज के जनता के सहयोग के समाचार पत्र का प्रकाशन नहीं हो सकता। यह संयोग खरीद कर समाचार पत्र पढ़ना  और समाचार पत्र को विज्ञापन देने से ही संभव है।  राजनीतिक दल सामाजिक संगठन कर्मचारियों आदि के संगठन व्यापारिक संगठन समाचार पत्रों से हर समय अपने समाचार अपने संघर्ष अपनी मांगे ज्ञापन आदि के प्रकाशन की आशा रखते हैं और समाचार पत्र बढ़-चढ़कर सहयोग भी देते हैं। लेकिन वापसी में सहयोग के नाम पर समाचार पत्र को पत्रकार को जो सहयोग मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा।  सभी संगठन व जनता अपने समाचार  चित्र सहित समाचार पत्रों में देखना चाहते हैं,मगर साल में दो चार बार भी विज्ञापन आदि देकर सहयोग की इच्छा नहीं रखते।
समाचार पत्र का प्रकाशन केवल हवाई बातों से या पत्रकार से हेलो हेलो की दोस्ती से ही पूरा नहीं होता।
समाचार पत्रों के प्रकाशन की होड़ आज समाचार बंद होने की एक के बाद एक बंद होने की जो स्थिति पैदा हो गई है, उसमें राजनीतिक दलों सामाजिक संगठनों कर्मचारी संगठनों व्यापारिक संगठनों की यह उदासीनता अनदेखी भी बड़ा कारण है।
आखिर इस हालात में कैसे परिवर्तन किया जाए? कैसे वापस पुरानी स्थिति लाई जाए? इस पर गहन विचार किया जाना चाहिए। समाचार पत्र संचालकों पत्रकारों को भी इन  संगठनों के बीच यह चर्चा व्यापक रूप से शुरू करनी चाहिए ताकि प्रकाशन बंद होने के बदलाव को रोका जा सके। आज मोबाइल पर ही सबकुछ देखने पढने की ईच्छा बढ रही है लेकिन जब पत्रकार ही नहीं रहेंगे तब मोबाइल पर जानकारियां कहां से आएंगी? मोबाइल पर आने वाली हर जानकारी पर विश्वास भी नहीं होता। सोशल साइट्स पर जो जानकारियां सूचनाएं समाचार आते हैं उनमें से अनेक झूठी निकलती हैं और लोग अखबारों को टटोलते हैं। लेकिन अखबारों के दम तोड़ते जाने पर विश्वास वाली सूचनाएं कहां से मिलेंगी।
संगठनों के आंदोलनों को समाचारपत्रों से बड़ी शक्ति मिलती रही है और आज भी मिल रही है और इस शक्ति को खत्म कर दिया गया तो आत्मघाती होगा।00

दि. 27 दिसंबर 2020.

करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ जिला श्री गंगा नगर.
94143 81356.
***** मेरी इंटरनेट साइट करणी प्रेस इंडिया पर बहुत मैटर है। उसे अवश्य ही देखते रहें।
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शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

सूरतगढ़ गंगानगर में नौकरी का झांसा एवं सेक्स रैकेट चलाने वाले गिरोह के 10 आरोपी गिरफ्तार

 




श्रीगंगानगर 25 दिसंबर 2020.


जैतसर पुलिस ने नौकरी का झांसा एवं सेक्स रैकेट चलाने वाले गिरोह के 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें एक सिम देने वाला भी है। एक महीना पुलिस गुपचुप लगी रही खोज में*


श्रीगंगानगर जिला पुलिस को  एक ऐसे गिरोह का पर्दाफास करने में सफलता मिली है, जो काफी समय से युवाओं को नौकरी, झूठे प्रलोभन के साथ कॉलगर्ल उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें ब्लेकमेलिंग कर रूपये ऐंठता था।  जिला मुख्यालय पर जिला पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत ने प्रेसवार्ता कर इस गिरोह की गिरफ्ताारियों और अपराध का ब्यौरा दिया। 


 पुलिस ने गिरोह के 10 आरोपियों व सिम प्रोवाईडर को एण्ड्रोयड मोबाईल फोन व फर्जी सिमों के साथ गिरफ्तार किया है।


सूरतगढ़ में डीएसपी के सुपरविजन में डी.एस.टी. ने संगठित अपराधों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए जिला विशेष टीम श्रीगंगानगर द्वारा साईबर ठगों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।


 अब तक की जांच में सामने आया है कि श्रीगंगानगर व सूरतगढ में कुछ युवा लङकों द्वारा गिरोह बनाकार सोशल मीडिया की विभिन्न साईटों/एप्लिकेशन पर फर्जी एकांउट बनाकर सैक्स वर्कर उपलब्ध करवाने, नौकरी दिलाने के नाम पर काफी बङे पैमाने पर ठगी की जा रही थी।

 ये साईबर ठग फर्जी सिमों से फर्जी  वाट्सएप एकांउट, सोशल मीडिया पर प्रसारित कर लोगों को सैक्स वर्कर उपलब्ध कराने का झांसा देकर फर्जी पेटीएम एकांउट में ठगी की रकम डलवाकर ऐश उड़ाते थे। फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया एप्स के फर्जी एकांउट पर अपना फर्जी वाटसएप नम्बर देकर चौटिंग करके धोखाधङी से ब्लैकमेल कर पे-एटीएम के माध्यम से रुपये डलवाकर ठगी करने की शिकायतें मिल रही थी। 

पुुलिस की जिला विशेष टीम श्रीगंगानगर द्वारा फर्जी फेसबुक अकांउट, वाटसएप नंबर व पेटीएम के बारे में गहनता से विश्लेषण करते हुए विभिन्न एंगल व स्त्रोतों से पङताल की तो सामने आया कि गांव गोविन्दसर पुलिस थाना जैतसर (श्रीगंगानगर) में बेरोजगार युवकों की बड़ी तादाद आस-पास के कस्बों श्री बिजयनगर, जैतसर, सूरतगढ, श्रीगंगानगर में कमरे किराये पर लेकर (जंहा ईन्टरनेट सुविधाजनक हो) इसी ठगी के काम में लगे हुए है। ठगी के रुपयों से कस्बों में महंगे भूखण्ड, मकान व महंगे दो पहिया, चार पहिया वाहन खरीदकर ऐशो आराम की जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं। असल में गांव गोविन्दसर व आस-पास का एरिया टीब्बा क्षेत्र का ईलाका है, जहां आय के स्रोत बेहद कम हैं। 

इन ठगों द्वारा अन्य व्यक्ति की आई.डी. का दुरुपयोग कर उनकी बिना जानकारी के डुपलीकेट सिम किसी सिम वितरक की मिलीभगत से जारी करवाकर व फर्जी पे-एटीएम अकाउंट बनाकर चौटिंग के माध्यम से लोगों को लड़कियां उपलब्ध करवाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस व ब्लेकमेलिंग के माध्यम से अनजान लोगों के साथ रुपयों की ठगी की जा रही थी। 

बड़े स्तर पर चल रहे इस ठग गिरोह का भाण्डाफोड़ करने के लिये जिला विशेष टीम द्वारा विशेष अभियान चलाकर गिरोह के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई गई। उन्हें तत्परता से फर्जी सिम व मोबाईलों में फर्जी नंबरो के वाटसएप अकांउट सहित काबू किया गया। जप्त किये गये मोबाईलों में उपलब्ध चैट, फर्जी सिम एवं सोशल मीडिया के माध्यम से चौटिंग कर फर्जी पे-टीएएम अकाउंटों में रूपये डलवाकर ठगी करना पाया गया है। ठगी के शिकार पीड़ित युवक लोकलाज के कारण इनके विरुद्ध पुलिस में शिकायत नहीं कर पाते थे। इसी चुप्पी का फायदा उठाकर इन लोगों द्वारा ठगी की अनेक वारदातों को अंजाम देते हुए अवैध सम्पतियां अर्जित कर रखी थी। उक्त मामले की गहनता से जांच की जा रही है, जिसमें बडे़ स्तर पर चल रहे इस रैकेट के और अधिक खुलासे की संभावना है। फर्जी सिम उपलब्ध करवाने वाले दूकानदारों, एजेंटों की संलिप्तता पाये जाने पर उनकी भी गिरफ्तारी की जाकर आम लोगों को इस गिरोह से ठगी का शिकार होने से बचाने के लिये जिला विशेष टीम द्वारा इस संबंध में आगे भी लगातार विशेष अभियान जारी रखते हुए इस साइबर गिरोह का सफाया करने की बात भी प्रैसवार्ता में कही। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 384/120 बी मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।


पुलिस ने अभी 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

1.सुनील कुमार (21 वर्ष) पुत्र लाधुराम जाति नाथ निवासी दुर्गामाता मंदिर वार्ड नं. 8 सूरतगढ़।

2. शुभराम पुत्र रामकुमार जाति कुम्हार उम्र 27 साल निवासी गोविन्दसर पुलिस थाना जैतसर हाल मकान न. 133 सदभावना नगर शिवालिका द्वितीय श्रीगंगानगर।

3. सुभाष पुत्र प्रेमाराम जाति कुम्हार उम्र 28 साल निवासी वार्ड न0 4 गोविन्दसर पीएस जैतसर जिला श्रीगंगानगर।

4. रमेशकुमार पुत्र लालचन्द जाति जाट उम्र 31 साल निवासी वार्ड न0 11 गोविन्दसर हाल वार्ड न0 11 सूरतगढ जिला श्रीगंगानगर।

5. गोपीराम पुत्र बेगाराम जाति मेघवाल उम्र 24 साल निवासी राजाणा तहसील सूरतगढ थाना राजियासर हाल उदासर फांटा के पास बीकानेर जिला बीकानेर।

6.इन्द्रपाल पुत्र राम कुमार जाति कुम्हार उम्र 24 साल निवासी गोविन्दसर हाल मकान न. 133 सदभावना नगर शिवालिका द्वितीय श्री गंगानगर।

7.दीपाराम पुत्र मंगतुराम जाति सांसी उम्र 22 साल निवासी वार्ड न0 3 गोविन्दसर पीएस जैतसर जिला श्रीगंगानगर।

8.मोहित कुमार उर्फ मोनु पुत्र महेन्द्रपाल जाति अरोङा उम्र 31 साल निवासी मकान न. 57 वार्ड न. 9 तहसील रोङ श्रीबिजयनगर जिला श्रीगंगानगर।

9.संदीप बेनीवाल पुत्र जगदीश बेनीवाल जाति जाट उम्र 20 साल निवासी वार्ड न0 3 गोविन्दसर पीएस जैतसर जिला श्रीगंगानगर को गिरफ्तार किया गया है।


* पुलिस टीम में ये रहे शामिल *

 एएसआई पवन सहारण, हैड कांस्टेबल सुनील कुमार , हैड कांस्टेबल लखन सिंह , हैड कांस्टेबल कृष्ण कुलङिया, हैड कांस्टेबल बलविन्द्रसिंह, सिपाही हवासिंह, राजकुमार, राजेन्द्र कुमार, अजयप्रताप, पवन लिम्बा, संजय भार्गव साईबर सैल, ड्राईवर दिनेश कुमार, चन्द्र प्रकाश कानि. साईबर एक्सपर्ट (विशेष भूमिका) के द्वारा लगातार सोशल साईटों पर निगरानी व डाटा का विश्लेषण करते हुए कड़ी मशकत एवं लगन से साईबर ठगों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।00

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बुधवार, 23 दिसंबर 2020

👍 वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री काल मेें बारानी ( असिंचित)भूमि दो मुरब्बा तक किसानों को निशुल्क आवंटित की गई थी.




* करणीदानसिंह राजपूत *

लाखों किसानों ने राजस्थान में यह लाभ उठाया  जो 40 -50 सालों से अस्थाई रूप * (TC)से खेती कर रहे थे।
वसुंधरा राजे सरकार ने उन्हें निशुल्क मालिकाना अधिकार देखकर बहुत बड़ा कार्य किया जो पहले किसी भी मुख्यमंत्री के काल में नहीं हो पाया था।
यह फैसला ऐतिहासिक है और हमेशा याद किया जाता रहेगा कि बारानी खेती करने वालों को पुख्ता आवंटन करके हमेशा के लिए उनकी समस्या का हल किया गया।
*वसुंधरा राजे ने महिला होते हुए भी इंदिरा गांधी नहर शुरू से लेकर अंतिम सिरे तक भयानक गर्मी में यात्रा की ताकि नहर के जो समस्या और परेशानियां हो उन्हें दूर किया जा सके।
वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल में ही इंदिरा गांधी नहर की सफाई का कार्य भी करवाया गया था।
* उस समय सूरतगढ़ तहसील का बड़ा क्षेत्र पीलीबंगा विधानसभा क्षेत्र में था। उस समय रामप्रताप कासनिया पीलीबंगा के विधायक थे जिन्होंने टिब्बा क्षेत्र में करीब 7 हजार किसानों को निशुल्क पुख्ता आवंटन करवाया था। आज यह क्षेत्र सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में है।
* उस समय सूरतगढ़ विधायक अशोक नागपाल ने भी अपने इलाके में सूरतगढ़ तहसील में करीब 1 हजार किसानों को निशुल्क पुख्ता आवंटन करवाया था।

** बालिग पुत्र और अन्य आवंटन भी बहुत हुए थे*
** एक पत्रकार की नजर और ये सभी समाचार उस समय  राजस्थान पत्रिका में मेरे द्वारा प्रकाशित किए गए थे।

💐 आज 23 दिसम्बर किसान दिवस*

करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ जिला श्री गंगा नगर.
94143 81356.
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सोमवार, 21 दिसंबर 2020

👍 नगर पालिकाओं की बैठकें चर्चा और हंगामों तक सीमित रह जाती है- पार्षद बहुत कर सकते हैं।*

 


* करणीदानसिंह राजपूत *
नगर पालिकाओं की बैठकें सभापति के द्वारा रखे गए प्रस्तावों पर चर्चा और हंगामों के शोरगुल में महत्वपूर्ण मामलों को हल किए बिना समाप्त हो जाती है। अनेक मामले इसलिए बैठकों में आ नहीं पाते जो कस्बों व नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं मगर सभापति की उन पर रूचि नहीं होती या स्वयं पर किसी प्रकार की आपत्ति या संकट समझ कर एजेंडे में शामिल ही नहीं करते।

नगरपालिका बोर्ड की साधारण बैठकों में सभापति की ओर से रखे गए प्रस्तावों पर राय होती है तब पार्षद चर्चा जोरशोर से करते हैं और खूब ऊंचे स्वर में भी बोलते हैं तथा अपनी राय भी दे देते हैं। प्रस्ताव चर्चा के बाद पारित हुआ माना और लिख दिया जाता है। यदि प्रस्ताव पर पार्षदों की विपरीत राय है तो संशोधन करवाएं और अस्वीकार है तो चर्चा के बाद मत विभाजन करवाएं। इसके लिए पार्षद कहते नहीं। मत विभाजन के बाद स्थिति एक दम स्पष्ट हो जाए कि कितने पक्ष में कितने विरोध में मत हुए का मालूम हो और नोटिंग हो तब दूसरे प्रस्ताव को शुरू होने देना चाहिए।
प्रस्ताव पर नगरपालिका में क्या नियम है यह बैठक में स्पष्ट भी करवाया जा सकता है। बैठक में उपस्थित अधिशासी अधिकारी को नियम बताने और पुस्तक पेश करने का कहकर खुद पार्षद भी नियम पढ कर सही जानकारी ले सकते हैं। अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को प्रस्ताव बाबत नियम बताने ही होंगे। पार्षदों का इस पर ध्यान ही नहीं होता इसलिए सभापति और अधिशासी अधिकारी अपनी मनमर्जी से प्रस्ताव रखते हैं और पारित होना भी लिखते हैं।
* पार्षद / पार्षदों की ओर से भी प्रस्ताव रखा/ रखे जा सकते हैं। यह बैठक में और पहले पेश किए जा सकते हैं। सभापति की मंजूरी से ही इस प्रकार के प्रस्ताव एजेंडे में शामिल किए जाते हैं। सभापति एजेंडे में शामिल करे या नहीं करे,लेकिन इस प्रकार से रखना जरूर चाहिए।
इससे सभापति की  मनमर्जी पर काफी  रोक लगती है। सभापति नगर में अनावश्यक कार्य नहीं करवा सकता जिससे भ्रष्टाचार भी रुक सकता है। नगरपालिकाओं में कार्य सही हो सके के लिए कार्यों का विभाजन और राय के लिए समितियां बनाने का स्पष्ट नियम है। सभापति को 6 माह में इन समितियों का गठन करने का निर्देश भी है,लेकिन सभापति यह नहीं करते और सारी सत्ता को अपने कब्जे में ही रखते हैं। पार्षदों की ओर से इस पर गंभीरता नहीं होती। सभापति यह कार्य नहीं करे तो निदेशालय में शिकायत की जा सकती है। इसके लिए 6 माह से पहले मांग भी की जा सकती है। बैठक में भी प्रस्ताव लाया जा सकता है।
पार्षदों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे एजेंडे के प्रस्तावों पर एक दूजे पार्षदों से अच्छी तरह से अध्ययन और तैयारी कर बैठक में शामिल हों। 00
सामयिक लेख.
करणीदानसिंह राजपूत.
स्वतंत्र पत्रकार ( सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय, राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़.
94143 81356.
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रविवार, 20 दिसंबर 2020

सूरतगढ़ के जानलेवा सड़क मोड़ों पर संकेत जरूरी- दुर्घटनाओं में वंश खत्म हो चुके हैं

 


* करणीदानसिंह राजपूत *


तेज गति के वाहन और सूरतगढ़ की सड़कों के जानलेवा सड़क मोड़ हर माह दो चार जीवन का भख ले लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए तो जान जाने की संख्या 100 से ऊपर पहुंच चुकी है। 

सूरतगढ़ शहर से सटा मानकसर हनुमानगढ़ बाईपास का करणीमाता मंदिर के पास का मोड़। राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 62 पर श्री गंगानगर जाते आने वाला केन्द्रीय पशु प्रजनन केन्द्र के पास का मोड़ बहुत ही खतरनाक है और इस पर पचासों दुर्घटनाएं और मौतें हो चुकी है। 

इसी मार्ग पर सूरतगढ़ से बीकानेर जाते हैं तब करीब चार किमी पर हनुमानजी मंदिर के पास का मोड़ जो दोनों ओर है। राजपुरा पीपेरन गांव में मोड़। आगे खतरनाक ह़िदौर फांटा तथा राजियासर श्री बिजयनगर सड़क फांटा पर भी आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है और लोगों के प्राण जाते हैं। सूरतगढ़ शहर में से राष्ट्रीय राज मार्ग नं 62 निकलता है जो आबादी की क ई सड़कों को जोड़ता है,यह सारी लंबाई ही खतरे वाली है और सभी स्थानों पर संकेतक चाहिए। गुरूशरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय के पास सड़क पर संकेत लगाने की मांग  तो वर्षों से है।

इन स्थानों पर हुई दुर्घटनाओं में हुई मौतें अनेक परिवारों के वंश खत्म कर चुकी हैं।00







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