सोमवार, 14 नवंबर 2016

पाँच वर्षीय माधव उपाध्याय का चंचल मन करता चित्रकारी


-रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़। बचपन की चंचलता में बच्चे खेलकूद चित्रकारी गायन नृत्य नाटक जो उनके सामने आता है उस ओर खिंचते जाते हैं। उनको शिक्षा संस्थान में चाहे घर पर और चाहे टीवी आदि में दृश्य के रूप में जो बात दिल को छू जाती है उसी को करने की ठान लेते हैं। इसी प्रकार के बचपन से निकले कलाकार बाद में नाम कमाते हैं और लोगों के दिल दिमाग में बस जाते हैं। उनको यह परवाह नहीं होती कि उनके बचपन की इन कलाकारियों को लोग किस मन से देखते हैं। वे अपनी धुन में खोए हुए काम करते हैं।
ऐसे ही एक बालक माधव उपाध्याय पर मेरी नजर पड़ी। वह बड़ी तन्मयता से अपने सामने के चित्र को देख कर रेखांकन करता और उनमें रंग भरता जा रहा था।
श्रीमती पूजा एवं दीपक उपाध्याय का पाँच वर्षीय पुत्र माधव सरस्वती उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में अपनी धुन में रमा था। उसकी चित्रकारी को देखकर पूछा तो उसने बताया कि वह कक्षा दो में पढ़ता है। उसके जवाब से मालूम पड़ा कि चित्रकारी करना और उनमें रंग भरना अपने आप मन में ही उपजा। किसी ने उसको खास खास चित्र बनाना और उनमें खास खास रंग भरना नहीं सिखलाया और न ऐसा करने को कहा। माधव के दादा अध्यापक राजेन्द्र शर्मा ने भी कहा कि उसके मन में आता है उसी का चित्र बनाता है और रंग भरता है।
बालमन में उपजा यह चित्रकारी का शौक उसे किस और ले जाएगा। यह वक्त बताएगा। फिलहाल उसके कुछ रंग भरे हुए चित्र यहां पर प्रकाशित किए जा रहे हैं। 



24-1-2016.
Update 14-11-2016.
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रविवार, 6 नवंबर 2016

दिल्ली में जानलेवा खतरनाक धुंद से बचाओ वास्ते चेतावनी नासा ने धुंद के फोटो जारी किए

- करणीदान सिंह राजपूत नोएडा से -
खतरनाक धुंध से बचाव के लिए दिल्ली सरकार ने कई कदम उठाने की घोषणा की है। इन कदमों के तहत दिल्ली के समस्त स्कूल 3 दिन के लिए बंद करने की घोषणा हुई है।दिल्ली के भीतर समस्त निर्माण कार्य 5 दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली में एक बार फिर  सम विषम वाहनों के चलाने की योजना है। इसके अलावा कृत्रिम वर्षा कराने की योजना है। दिल्ली के मथुरा रोड पर बदरपुर ताप बिजलीघर  को 10 दिन के लिए बंद करने की योजना बनाई जा रही है। इस बिजलीघर में   कुल 705 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है अगर इसको बंद किया जाता है तो बिजली का संकट भी पैदा होगा। दिल्ली के अलावा आसपास का जो इलाका है नोएडा और गाजियाबाद उसमें भी खतरनाक धुंध का असर बना हुआ है। दिल्ली के मुख्यमंत्री दिल्ली क्षेत्र में कृत्रिम वर्षा कराने के लिए सोच रहे हैं। दिल्ली में मुख्य कारण पड़ोसी राज्य हरियाणा से चावलों की पराली घास के जलाए जाने का धुआँ भी है। जो हवा के साथ निरंतर दिल्ली की ओर बढ़ रहा है। नासा ने दिल्ली पर मंडराते हुए धुंध के चित्र प्रसारित किए हैं। 


मेडिकल दुकानों में जहां फेस मास्क मिल रहे हैं वहां खरीदारों की भीड़ लगी हुई है। हर परिवार अपने बच्चों के लिए फेस मास्क खरीदना चाहता है। दिल्ली के बड़े निजी चिकित्सालय का मानना है दमें व श्वांस रोगियों की संख्या करीब तीन गुनी हो गई है।

पूनम अंकुर छाबड़ा का आमरण अनशन शनिवार को समझौते के बाद खत्म हुआ

 - करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। राजस्थान में संपूर्ण शराब बंदी और सशक्त लोकपाल की  नियुक्त किए जाने की मांग को लेकर शहीद गुरुशरण छाबड़ा के साथ सरकार द्वारा किए समझौते को लागू किए जाने की मांग को लेकर छाबड़ा जी की पुत्रवधू पूनम अंकुर छाबड़ा ने 3 नवंबर को जयपुर में  शहीद स्मारक पर आमरण अनशन शुरू किया था।  5 नवंबर शनिवार शाम को राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में पूनम अंकुर छाबड़ा से अनशन स्थल पर आबकारी आयुक्त ओ पी यादव अतिरिक्त आबकारी आयुक्त रश्मी गुप्ता संयुक्त सचिव एमके जुनेजा ने वार्ता की और लिखित में विश्वास दिया। उसके बाद पूनम अंकुर छाबड़ा का आमरण अनशन खत्म हुआ।   3 नवंबर 2015 को पूर्व विधायकी गुरुशरण छाबड़ा का आमरण अनशन के दौरान स्वर्गवास हो गया था। राज्य सरकार ने गुरुशरण छाबड़ा के साथ पूर्व में शराबबंदी को लेकर कुछ समझौते किए थे। जिनके लागू न होने पर गुरुशरण छाबड़ा ने आमरण अनशन शुरु किया था। अब गुरुशरण छाबड़ा के साथ हुए समझौते लागू कराने के लिए छाबड़ा जी की पुत्रवधू पूनम छाबड़ा और पूजा छाबड़ा अलग अलग दो टीमें बना कर अभियान चला रखे हैं। 

कथावाचक मोरारजी बापू ने धरती धोरां री गीत को भजन बताते हुए और महान बना दिया-

- करणी दान सिंह राजपूत -
राजस्थान की धरती को अमर साहित्यकार कन्हैयालाल जी सेठिया ने धरती धोरां री गीत लिखकर इस धरती के कण-कण को साहित्य में और जनमानस में अमर कर दिया। इस धरती की अनूठी व्याख्या कन्हैयालाल जी ने की वैसी व्याख्या अन्य कोई साहित्यकार आज तक नहीं कर पाया। धरती धोरां को रणबांकुरे और देवी देवताओं की रमण करने वाली धरती बताया गया। इसके कण-कण में लोगों के विश्वास और जीवन पर गीत के रूप में कन्हैयालाल जी ने जो संदेश दिया वह बहुत व्यापक है। उस पर सही रूप में व्याख्या की जाए तो हजारों पृष्ठ कम पड़ जाएंगे। कन्हैयालाल जी ने सरल राजस्थानी में यह गीत लिखा जो आज संपूर्ण भारत देश में और अन्य देशों में समारोह में गाया जाता है। इस गीत से समारोह में जान आकर प्रसिद्धि बढ जाती है। राजस्थान के अंदर राष्ट्रीय समारोह पर व अन्य समारोहों में धरती धोरां री गीत का प्रस्तुतीकरण विशेष रुप से कराया जाता है। यह गीत और इसके रचनाकार कन्हैयालाल जी सेठिया दोनों ही अमर हो गए। इस गीत को महान कथावाचक मोरारजी बापू ने भजन की उपमा देकर जनमानस में और महान तथा अमर बना दिया। मोरारजी बापू रामदेवरा में कथा वाचन कर रहे थे तब उन्होंने श्रद्धालुओं से विशेष अनुरोध किया कि सभी लोग इस गीत धरती धोरांं री को गायें यह तो भजन है। सच में यह गीत इस रूप में समारोहों में गाया जाता है। उससे यही प्रमाणित होता है। मोरारजी बापू ने जो उपमा दी है वह अक्षरक्ष: सत्य है।

राजस्थान में भी छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है- ध्यान रखने योग्य बातें-

- करणीदानसिंह राजपूत -
छठ पूजा का पर्व राजस्थान में भी धूमधाम से मनाया जाता है जहां पर पूर्वांचल के लोग बसे हुए हैं। वे लोग छठ पूजा करते हैं और राजस्थान के स्थानीय निवासी उनका भरपूर सहयोग करते हैं तथा इस धार्मिक आयोजन में शामिल भी होते हैं। छठ पूजा का पर्व सूरतगढ़ क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि सूरतगढ़ इलाके में भारत भर के लोग बसे हुए हैं। सूरतगढ़ क्षेत्र को मिनी भारत भी कहां जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। छठ पूजा का पर्व 4 नवंबर को शुरू हुआ है और यह 4 दिन चलेगा। इस धार्मिक आयोजन में भाग लेने वाले और व्रत करने वालों के लिए कुछ खास ध्यान में रखने योग्य नियम हैं जिनका पालन किया जाए तो छठ पूजा का लाभ अत्यधिक मिल सकता है,क्योंकि यह आयोजन धार्मिक है इसलिए इसमें पूजा-पाठ और  व्रत का मनाने का तरीका महत्वपूर्ण है। इस धार्मिक त्यौंहार में किन-किन बातों का ध्यान रखा जाए जरा इन पर गौर करें।
 ये नियम यहां दिए जा रहे हैंं।
इस साल 2016 में चार दिनों तक चलने वाली छठ पूजा 4 नवंबर से शुरू हो गई है। बिहार में छठ पर्व को  हिंदू धर्म में मान्यता है कि छठ देवी सूर्यदेव की बहन हैं इसलिए इस पर्व पर छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव को खुश किया जाता है। 
महापर्व के दौरान हिंदू धर्मावलंबी भगवान भास्कर (सूर्य देव) को जल अर्पित कर आराधना करते हैं। ऋग्वैदिक काल से सूर्योपासना होती आ रही है।
छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ का व्रत करते समय व्रतियों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
छठ पूजा के दौरान इन नियमों ध्यान में रखना चाहिए।
– रसोई स्थान में प्याज और लहसुन बिल्कुल नहीं रखना चाहिए।

– व्रत रखने वाली महिलाओं को बिस्तर नहीं सोना चाहिए। व्रती महिला को जमीन पर सोना चाहिए

– छठ व्रतियों को पूजा में शराब या सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए।

– पूजा का सामान इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। किसी का पैर पूजा के सामान पर नहीं लगना चाहिए।

– व्रत के दौरान घर में मांसाहारी खाना बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए।

– व्रत में साधारण नमक का सेवन नहीं किया जाए।सिर्फ सेंचार दिनों तक चलने वाली छठ पूजा 4 नवंबर से शुरू हो गई है। बिहार में छठ पर्व को विशेष महत्व दिया जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि छठ देवी सूर्यदेव की बहन हैं इसलिए इस पर्व पर छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव को खुश किया जाता है। छठ महापर्व के दौरान हिंदू धर्मावलंबी भगवान भास्कर (सूर्य देव) को जल अर्पित कर आराधना करते हैं। ऋग्वैदिक काल से सूर्योपासना होती आ रही है। छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ का व्रत करते समय व्रतियों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
छठ पूजा के दौरान इन बातों को रखें खास ख्याल
– किचन में प्याज और लहसुन बिल्कुल नहीं रखना चाहिए।

– व्रत रखने वाली महिलाओं को बेड पर नहीं सोना चाहिए। व्रती महिला को जमीन पर सोना चाहिए

– छठ व्रतियों पूजा में शराब या सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए।

– पूजा का सामान इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। जिससे की किसी का पैर पूजा के सामान पर नहीं लगना चाहिए।

– व्रत के दौरान घर में मांसाहारी खाना बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए।

– व्रत में साधारण नमक का सेवन कतई न करें। आप  सेंधा नमक खाना चाहिए।
सूर्यदेव की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप करें

नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्।

दिवीकरं रविं भानुं मार्तण्ड भास्करं भगम्।।

इन्दं विष्णु हरिं हंसमर्क लोकगुरूं विभुम्।


त्रिनेत्रं र्त्यक्षरं र्त्यडंग त्रिमूर्ति त्रिगति शुभम्।।
हिन्दू धर्म के पंच देवों में से एक सूर्य देव की पूजा से ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता, प्रसिद्धि आदि की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन पूजा करने से व्यक्ति में आस्था और विश्वास पैदा होता है। सूर्य की पूजा मनुष्य को निडर और बलवान बनाती है। इससे अंहकार, क्रोध, लोभ, इच्छा, कपट और बुरे विचारों का नाश होता है। मानव परोपकारी स्वभाव का बनता है तथा आचरण कोमल और पवित्र होता है।धा नमक खा सकते हैं।
सूर्यदेव की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप करें

नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्।

दिवीकरं रविं भानुं मार्तण्ड भास्करं भगम्।।

इन्दं विष्णु हरिं हंसमर्क लोकगुरूं विभुम्।

त्रिनेत्रं र्त्यक्षरं र्त्यडंग त्रिमूर्ति त्रिगति शुभम्।।
हिन्दू धर्म के पंच देवों में से एक सूर्य देव की पूजा से ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता, प्रसिद्धि आदि की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन पूजा करने से व्यक्ति में आस्था और विश्वास पैदा होता है। सूर्य की पूजा मनुष्य को निडर और बलवान बनाती है। इससे अंहकार, क्रोध, लोभ, इच्छा, कपट और बुरे विचारों का नाश होता है। मानव परोपकारी स्वभाव का बनता है तथा आचरण कोमल और पवित्र होता है।

गुरुवार, 3 नवंबर 2016

संघ की राजस्थान सरकार का आचरण नैतिकता और गुरुशरण छाबड़ा का शराबबंदी को लेकर बलिदान

- करणीदान सिंह राजपूत -
संघ के प्रमुख सदा नैतिकता और शुद्ध आचरण पर सीख देते रहे हैं। मैं उनकी किसी भी सीख पर कोई कटाक्ष नहीं करना चाहता लेकिन जहां जहां संघ के सहयोग से  सरकारें बनी हैं

नशाबंदी अनशन में शहीद गुरुशरण छाबड़ा की याद में सूरतगढ़ में कार्यक्रम।

-  राजकीय चिकित्सालय के समीप गुरुशरण छाबड़ा की प्रतिमा पर माल्यार्पण -
- करणीदान सिंह राजपूत -
सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर जयपुर में शहीद स्थल पर आमरण अनशन शुरू किया था ।पुलिस उनको जबरन उठाकर ले गई और राजकीय चिकित्सालय में भर्ती करा दिया था। राजकीय चिकित्सालय एसएमएस में भी उनका आमरण अनशन जारी उसी दौरान 3 नवंबर 2015 को भोर में छाबड़ा जी का निधन हो गया। उनकी शहादत पर अब राजस्थान भर में अनेक स्थानों पर यह मांग प्रबल रूप से उठ रही है कि राजस्थान सरकार ने छाबड़ा जी के साथ जो वादे किए थे उनको पूरा करें । सूरतगढ़ में गुरुशरण छाबड़ा जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के साथ ही छाबड़ा जी की मांगों को पूरा करने के लिए वक्तव्य दिए गए छाबड़ा जी के प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व विधायक सरदार हरचंद सिंह सिद्धू पूर्व विधायक अशोक नागपाल बलराम वर्मा बसपा नेता जिला परिषद सदस्य डूंगर राम गेदर बसपा के  शहर अध्यक्ष पवन सोनी व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष ललित सिडाना पूर्व पार्षद पूर्णचंद्र कवातङा श्याम मोदी पार्षद श्रीमती राजेश सिडाना एडवोकेट भागीरथ बिश्नोई एडवोकेट एनडी सेतिया समाजसेवी रमेश चंद्र माथुर क्रांतिकारी महावीर प्रसाद भोजक प्रसिद्ध व्यवसायी जनकराज गुंबर  पार्षद सत्यनारायण छींपा राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी सहित अनेक लोगों ने भाग लिया।

बुधवार, 2 नवंबर 2016

देश का हृदय दिल्ली मलमुत्र की गंदगी और कचरे से भरा

- करणीदान सिंह राजपूत-
 देश का हृदय दिल्ली मलमुत्र की गंदगी और कचरे की सड़ांध से भरा है।
 यहां खुले में शौच करते और मुत्र त्याग करते लोगों को देखा जा सकता है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संपूर्ण भारत के  स्वच्छ भारत मिशन को दिल्ली ही नहीं मान रही।दिल्ली प्रशासन की व्यवस्था इतनी लचर है की पूरे देश के संदेश को यहां लागू करने में नाकामी मिल रही है। दिल्ली लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को जानबूझकर खराब किया जा रहा है यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन दिल्ली राज के जो अधिकारी हैं वे देश के स्वास्थ्य और स्वच्छता मिशन को चलाने में असफल हैं।दिल्ली के अनेक इलाकों में सड़कों पर फैली गंदगी को कचरे के ढेरों को देखा जा सकता है। सड़कों पर लगे कचरा पात्रों पात्रों के भर जाने पर तुरंत कचरा ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग कचरा पात्रों के बाहर कचरा फेंक देते हैं यह लोगों की मजबूरी है। दिल्ली के स्टेशन और किशनगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर तथा आसपास कचरा गंदगी मलबे के ढेर लगे हुए देखे जा सकते हैं। उनको देखने से मालूम पड़ता है कि इन कचरा ढेरों को लगे हुए महीनों बीत चुके हैं। रेलवे लाइनों पर भयानक गंदगी प्लास्टिक का कचरा बिखरा हुआ सफाई संदेशों को चिढ़ाता है। रेलवे ओवरब्रिज के आसपास की बस्तियों वाले पुलों के पास रेल लाइन पर कचरा डालते हैं जिन को रोकने टोकने और दंडित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। रेल लाइनों के पास बसे झुग्गी झोपड़ी वाले निवासी सुबह सवेरे और रात्रि में रेल लाइनों के आसपास ही मलमुत्र त्यागते हैं। सुबह सवेरे जो रेलें दिल्ली में प्रवेश करती हैं उनके यात्रियों को मल मूत्र त्याग करते लोगों के दृश्य देखने पड़ते हैं। दिल्ली के आसपास के इलाके हरियाणा व उत्तर प्रदेश के हैं उनमें भी भयानक गंदगी पड़ी है और उसको हटाने की कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को देशभर में लागू करने की अपील को राज्य सरकारों ने छोटे छोटे कस्बों में घरों में और सार्वजनिक स्थानों पर लागू कराने की व्यवस्था की। छोटे गांव में भी शौचालयों का निर्माण करवाया गया।लेकिन आश्चर्य है कि देश की राजधानी दिल्ली देश के हृदय स्थल दिल्ली और आसपास के हरियाणा उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक इलाकों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण नहीं करवाया गया। इसी कारण से दिल्ली और आसपास के इलाकों में मल मूत्र और कचरे की सङांध वाली हवा में लोगों को मजबूरी में सांस लेना पड़ रहा है। इस गंदगी और सङांध से जो बीमारियां फैल रही है। दिल्ली से बीमारियां लेकर लोगबाग अन्य राज्यों में जा रहे हैं उनको रोकना संभव नहीं है।

दिल्ली और आसपास के व्यावसायिक इलाकों की गंदगी और कचरे के ढेरों पर एक मजाक किया जा सकता है यहां के मलमुत्र मैं सुगंध और कचरे के ढेरों में सजावट इसलिए यहां के राज चलाने वाले इस सुगंध को और सजावट को दूर करना नहीं चाहते

मंगलवार, 1 नवंबर 2016

आपातकाल के जिंदा शहीद भाजपा की सरकार में कीड़े मकोड़े पशु समान:


लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सेनानियों की कुर्बानियों पर सत्ता में आई भाजपा के मंत्री करते तिरस्कार:
सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर पर विशेष लेख-

करणीदानसिंह राजपूत=

आपातकाल के अत्याचारों को झेलते हुए जिन लोगों ने स्वतंत्रता व लोकतंत्र की रक्षा में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने की मंशा लेकर अत्याचारी कांग्रेस की इंदिरा सरकार का मुकाबला किया। वे लोग जेलों में बंद रहे और उनके परिवार भी यात्नाएं झेलते रहे।उन लोकतंत्र सेनानियों में अब चंद लोग जीवित बचे हैं। राजस्थान में आपातकाल के जिंदा शहीदों की यह संख्या अब पांच सौ भी नहीं है। इन जीवित शहीदों में अनेक लोगों की उम्र 80 से 90 वर्ष के करीब है। वैसे भी साठ की आयु पार करने के बाद कोई काम करने वाली उम्र नहीं रहती लेकिन अनेक इस उम्र में अपने जीवन यापन के लिए मजदूरी चौकीदारी जैसे कार्य करने को मजबूर हैं। इस मेहनत में भी दो हजार से तीन हजार रूपए तक की मजदूरी मिल पाती है जिसमें पेट भरने को आटा ले पाते हैं और इसी रकम में वृद्धावस्था की रोज रोज की स्थाई बिमारियों का ईलाज कर पाते हैं। चाहे कैसी भी दुरावस्था हो इन लोकतंत्र के जीवित शहीदों से मरा भी नहीं जाता।
सन् 1975 के आपातकाल में अपनी कुर्बानियां देने वाले लोकतंत्र सेनानियों व लोकतंत्र शहीदों के कारण ही राज में आए लोग आज आपातकाल के जीवित लाशों के रूप लिए शहीदों का तिरस्कार करते हुए जरा भी शर्म नहीं करते।
राजस्थान की भाजपा सरकार ने आपातकाल में रासुका व मीसा बंदी रहे लोगों को पेंशन व ईलाज सुविधा के प्रतिमाह पेंशन के 13 हजार 200 रूपए देने शुरू किए। आपातकाल में शांतिभंग में पकड़े गए लोगों को भी जेलों में बंद कर दिया गया था व सजाएं दी गई थी। उनके घर परिवार भी अत्याचार सहने वालों में थे व बरबाद हुए थे। वसुंधरा राजे की सरकार ने उनक लिए पेंशन के नियम नहीं बनाए। या तो किसी को भी पेंशन नहीं दी जाती और दी जाने लगी तो शांतिभंग में बंदी रहे इन जीवित शहीदों को टालना नहीं था। सरकार पर खर्च का कोई भार नहीं होता। सरकार करोड़ों रूपए अनेक कार्यक्रमों में लगाती है।
लेकिन इन जीवित शहीदों ने जब जब सरकार से पेंशन के लिए आवेदन किया या समूह के रूप में मिले तब तब तिरस्कार झेलना पड़ा।  राजस्थान में अब आपातकाल के जीवित शहीद बचे हैं उनकी संख्या पांच सौ भी नहीं है। सरकार चाहे तो गृहमंत्रालय दो चार दिनों में ही संपूर्ण आंकड़े प्राप्त कर सकता है।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शांतिभंग में बंदी रहे कार्यकर्ताओं को भी पेंशन दिए जाने बाबत एक प्रावधान तैयार करवाया था वह रिपोर्ट फाईल राजे के पास पड़े हुए दो साल होने वाले हैं। उस पर निर्णय नहीं किया जा रहा है।
आपातकाल में शांतिभंग में जेलों में बंदी रहे देशभक्त प्रतिफल व तोहफे के रूप में पेंशन मांगते तो 1977-78 में जनता पार्टी राज में ही मांग लेते। आप विचार करें कि आज कई लोग 80-90 आयु के हो चुके हैं और काम कर नहीं सकते। क्या उनके घरों में दो वक्त की रोटी भी नहीं होनी चाहिए?
आज चपरासी का वेतन उस पेंशन से अधिक है जो आपातकाल वालों को मिल रही है। इस देश में मंत्रियों सांसदों विधायकों को प्रतिमाह लाखों रूपए वेतन मिलना चाहिए और उनको कई कई हजार रूपए पेंशन भी मिलनी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों को अच्छा खासा वेतन और तीस चालीस हजार रूपए पेंशन मिलनी चाहिए। मिल ही रही है। चाहे जब वेतन भत्ते बढ़ाते रहते हैं।
आपातकाल के बदियों की पेंशन तो चपरासी के वेतन से भी कम है कुल प्रतिमाह 13,200 है। उस पर भी एतराज है। देश भक्ति के प्रतिफल शब्द का उपयोग ही गलत है और तोहफा शब्द और ज्यादा गलत। क्या सरकार को अपनी तरफ से ही उनके शेष जीवन के बारे में नहीं सोचना चाहिए? अनेक लोग संसार छोड़ गए और उनकी पत्नियां 60 से अधिक आयु में है,उनके बारे में सोचा है?स्वतंत्रता सेनानियों को पेंशन आदि दी जाने लगी तो क्या वह प्रतिफल व तोहफे में दी जा रही है?
अब आगे बात रह गई सम्मान की तो कभी सोचा कि जिन लोगों ने सब कुछ दांव पर लगा दिया कभी उनको भी याद किया जाए?
आपातकाल में शांतिभंग में जेलों में बंद रहे बचे हुए इन जीवित शहीदों की कुर्बानियों को कम नहीं समझना चाहिए व इनकी पेंशन तुरंत शुरू किए जाने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए।
शांतिभंग में बंदी रहे लोग जब जब मंत्रियों से मिले हैं तब तब उनको तिरस्कार मिला है। जिनकी कुर्बानियों के कारण आज राज भोगने वालों को असल में राज का तोहफा मिला हुआ है और वे इस राज में खोए सद् आचरण करना भी भूल गए।
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-करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़
94143 81356.

श्री बिजयनगर को श्रीविजनगर नहीं लिखा जा सकता।

-करणी दान सिंह राजपूत -
श्री बिजय नगर को नगर पालिका के विज्ञापनों में श्रीविजयनगर छपवाया जा रहा है जो कानूनी गलत है। नगरपालिका के अध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी दोनों पर कानूनी कार्य वाही हो सकती है। बीकानेर रियासत के काल में राजकुमार बिजयसिंह के नाम पर इसका नाम करण किया गया था। नाम राज्य सरकार ही बदल सकती है। कोई भी व्यक्ति विज्ञापनों का भुगतान रुकवा सकता है। पालिका को संशोधन छपवाना चाहिए। दीपावली के विज्ञापनों में अभी ताज़ा गलती हुई है।

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