बाड़मेर के नृतकों के शानदार नृत्य. राजस्थानी संस्कृति की अनूठी छटा.


* करणी प्रेस इंडिया *
गैस सिलेंडर और सात मटकियों पर संतुलन साधकर भवाई, अग्नि नृत्य और चिरमी पर झूम उठा पूरा सभागार
श्रीगंगानगर, 28 सितंबर। राष्ट्रीय कला मंदिर के तत्वावधान में रविवार शाम चौधरी रामजस सहारण सदन (ऑडिटोरियम) में आयोजित भव्य राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या ने शहर के कला प्रेमियों को मरुधरा की जीवंत लोक परंपरा से रूबरू कराया। बाड़मेर के प्रसिद्ध नृतकों प्रेम मंडा और सोनू राजस्थानी ने दो घंटे तक एक से बढ़कर एक दुर्लभ नृत्य शैलियों का प्रदर्शन कर सभागार को राजस्थानी रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत होते ही दोनों कलाकारों ने मंच पर कदम रखते हुए पूरे माहौल को ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने भवाई नृत्य में सिर पर गैस सिलेंडर और सात मटकियां संतुलित रखते हुए नृत्य किया, जो दर्शकों के लिए अविश्वसनीय दृश्य बना। मटकी नृत्य, दहकती ज्वालाओं के बीच अग्नि नृत्य और घुटनों पर चक्कर काटते हुए घुटना चकरी जैसी कठिन शैलियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। ये प्रस्तुतियां राजस्थानी लोक गीतों और धार्मिक भजनों पर दी गईं।कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति चिरमी लोकगीत पर सबसे ज्यादा सराही गई। इस प्रस्तुति के दौरान न केवल कलाकार बल्कि बड़ी संख्या में दर्शक भी अपनी सीटों से उठकर झूमने लगे। राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद सहित कई कला प्रेमी मंच पर पहुंचे और कलाकारों के साथ ठुमके लगाए। पूरा सभागार तालियों और जयकारों से गूंज उठा।मुख्य अतिथि महावीर इंटरनेशनल संस्था के अध्यक्ष कमलकांत कोचर ने कलाकारों की मेहनत, संतुलन और राजस्थानी संस्कृति को जीवंत रखने के प्रयास की जमकर प्रशंसा की। महावीर इंटरनेशनल (गौरवी केंद्र) की ओर से श्रीमती मनोरमा बैद और श्रीमती शर्मिला कोचर ने कलाकारों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने महत्वपूर्ण घोषणा की कि गजल सम्राट पद्मविभूषण स्वर्गीय जगजीत सिंह की पुण्यतिथि पर 11 अक्टूबर को राष्ट्रीय कला मंदिर उनकी स्वरांजलि के रूप में एक बड़ा संगीतमय कार्यक्रम आयोजित करेगा।कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी निलयकांत छाबड़ा और कवित्री ऋतुसिंह ने किया। इस मौके पर कला प्रेमी मोहनलाल चितलांगिया, विमल बिहानी, अजय गुप्ता, सुनील अग्रवाल, शर्मिला कोचर, श्याम जैन, मनोरमा बैद, विनोद गोयल, विजयकुमार वासुदेव सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।०0०