एसपी अमृता दोहन बदली के बाद क्या जिला कलेक्टर डा.मंजू!
* करणीदानसिंह राजपूत *
श्रीगंगानगर की एसपी अमृता दोहन की बदली यही से उदयपुर कर दी जाने पर कुछ सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह किया गया है। श्रीगंगानगर की जनता पूछ रही है। अमृता दोहन की बदली के पीछे क्या कारण रहा है, जबकि दोहन को यहां आए अभी 8 माह ही हुए थे। सोशल मीडिया पर यह सवाल उठा और यह प्रचारित किया गया कि श्रीगंगानगर में लोग गैंगस्टर की धमकियों से दहशत में जी रहे थे जो दहशत कम हुई। * अमृता दोहन का स्थानांतरण यहां हुआ तब सोशल मीडिया में ही कार्यभार ग्रहण किए जाने से पहले उनको सिंघम बताया गया। इसी सिंघम पर ही समीक्षा की जाए कि सिंघम जैसे कितने कार्य हुए? इसके भीतर ही उत्तर है कि ऐसा तो कुछ नजर नहीं आया। सिंघम का मतलब अपराधियों पर हर समय तूफान जैसा डर। नशा बेचने वालों का तो काम ही बंद नहीं हुआ। उनकी गिरफ्तारी नशा बरामद की घटनाएं तो यही साबित करती हैं कि सब होता रहा। अपराधों का इनवेस्टिगेशन केवल नशा न माने तो बाकी जो अपराध दर्ज हुए उनकी गति क्या तेज रही? अमृता दोहन सिंघम साबित नहीं हुई या लोगों ने ऐसा नहीं माना कि वे सिंघम जैसी थीं।
* सबसे प्रमुख बिंदु यह है कि वे आम लोगों को,वर्गों को किस तरह से तव्वजो दे रही थी। इसी बिंदु की रिपोर्ट गंभीर होती है जो किसी तरह सरकार के पास पहुंचती है या शिकायत के रूप में पहंचा दी जाती है। क्या सभी वर्गों की सुनी गई या नहीं सुनी गई?
👍 जिला पुलिस अधीक्षक अमृता दोहन के बाद जिला कलेक्टर डा.मंजू की भी बदली होगी? यह सवाल भी चर्चा में उठ रहा है। क्या जिले को संभाल पाई? क्या जनता के अभाव अभियोग पर निस्तारण तेजी से हुआ? सरकारी दफ्तरों में काम नहीं होने व अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों पर गौर नहीं हुआ। जनता की शिकायतें दबी रही। जिले के अधिकारी अपने अपने दफ्तरों में कितने बजे आते रहे, कितने बजे जाते रहे? कितनी फाईलें निपटाई और कितनी पेंडिंग बस्तों में बंद की जाती रही। जिले के नगरपालिका अधिकारी ही अनियंत्रित रहे।
एक बड़ा सवाल इस पद पर भी है कि जिला कलेक्टर का सभी वर्गों के प्रति क्या नजरिया रहा? जिले में कोई प्रभाव वाली बात नजर नहीं आई। सत्ता वाले भी कहीं खुश दिखाई नहीं दिए। 21 मार्च 2026.
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