रविवार, 30 अप्रैल 2023

सीवरेज घोटाले में अध्यक्ष कालवा को नोटिस:हाईकोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई.

 

* विशेष समाचार : करणी दान सिंह राजपूत *


सूरतगढ़ 30 अप्रैल 2023.

 नगर पालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा को सीवरेज घोटाले के मामले में प्रस्तुत हुई जांच रिपोर्ट के बाद स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से जवाब तलबी नोटिस जारी किया गया है। 24 अप्रैल को जारी इस नोटिस में 7 दिन का समय दिया गया है। माना जाता है कि नोटिस मिलने के दिन से 7 दिन शुरू होते हैं।

* सूचना है कि ओमप्रकाश कालवा के मेल आईडी पर उसी दिन नोटिस सेंड हो गया था।

** एक कॉपी रजिस्टर्ड पोस्ट डाक से भी भेजी गई।

***नोटिस की एक प्रति नगर पालिका सूरतगढ़ को भेजी गई जो कालवा को सौंपी जाने का आदेश था। सूचना है कि नगर पालिका की ओर से 29 अप्रैल को नोटिस ओमप्रकाश कालवा को सुपुर्द कर दिया गया। 7 दिन का समय कब से शुरू होगा और कब खत्म होगा?

 यदि इसे 29 अप्रैल भी माना जाए तो भी यह जवाब देने की लड़ाई कानूनी दांव पेंच में चलेगी।


👍 ओमप्रकाश कालवा के विरुद्ध नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष बनवारी लाल मेघवाल ने सीवरेज घोटाले में एक करोड़ 48 लाख रुपए का भुगतान  फर्जी रूप से मैनटो कार्लो कंपनी को किए जाने का आरोप लगाया था। आरोप था कि जो काम नहीं हुआ उसका भुगतान कर दिया गया।

*एक मुकदमा अदालत के आदेश से सूरतगढ़ सिटी थाने में दर्ज हुआ। ओमप्रकाश कालवा के विरुद्ध दर्ज उस मुकदमे में दो बार एफआर लगाने की कोशिश हुई। शिकायतें हुई और नए बिंदु बने जिन पर जांच की जानी थी।

*ओमप्रकाश कालवा उस फाइल को सीआईडी क्राइम में ले गए। वहां यह फाइल पड़ी है। * ओमप्रकाश कालवा इस मुकदमे की एफआईआर को निरस्त कराने के लिए पहले से ही हाईकोर्ट पहुंचे हुए हैं। नगर नगर पालिका की ओर से उसमें केविट लगवाई हुई है कि पालिका के वकील की मौजूदगी में ही सुनवाई होगी। 

 * बनवारी लाल मेघवाल की एक शिकायत पर जिला कलेक्टर ने फास्ट ट्रेक ब्रांच के आईएएस से जांच करवाई जो मार्च 10 मार्च 2023 को जिला प्रशासन ने स्वायतशासन विभाग को भेज दी थी। जिला कलेक्टर की जांच में नगर पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा अधिशासी अधिकारी विजय प्रताप सिंह लेखापाल सुनील और जिन अभियंताओं ने बिलों का सत्यापन किया था उन सब को दोषी माना गया। उस रिपोर्ट के अंदर गलत भुगतान की पुन: वसूली करने का भी लिखा गया। 

वह रिपोर्ट कई दिनों से स्वायत शासन विभाग में विचाराधीन पड़ी रही।

 उस रिपोर्ट का नोटिस ओमप्रकाश कालवा को 24 अप्रैल को जारी हुआ। कालवा इस नोटिस से पहले ही राजस्थान उच्च न्यायालय में पहुंच गए। जहां उनका आवेदन है कि राजनीतिक द्वेषता से उनको इस रिपोर्ट के बहाने सस्पेंड किया जा सकता है,हटाया जा सकता है। सरकार की इस कार्यवाही से बचाया जाए। यह सूचना नगरपालिका को सुनवाई तिथि से एक दिन पहले मिल गई। नगर पालिका प्रशासन को ओमप्रकाश कालवा के  इस प्रकरण में पहले से हाईकोर्ट पहुंचने का मालूम होते ही नगर पालिका की ओर से इसमें भी समय पर पहुंच कर केविट लगा दी गई। 

👍 यह सारा प्रकरण अब बड़ा रोचक कानूनी रूप ले रहा है। इसमें क्या कुछ होगा?यह जानने के लिए राजनीतिक लोग बहुत उत्सुक हैं।

* ओमप्रकाश कालवा पहले कांग्रेस के सदस्य थे। पूर्व विधायक गंगाजल मील से मील ग्रुप से बहुत अच्छी बनती थी। दोनों का रोजाना मिलना भी निश्चित होता था। ओमप्रकाश कालवा नगरपालिका के पट्टे आदि बनवाने में बांटने में 

 गंगाजल मील को प्राथमिकता देते थे।

 वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया ऐसे व्यवहार से  कार्यक्रमों में  जाते नहीं थे।

* राजनीति बड़ी विचित्र होती है ओमप्रकाश  कालवा के कार्यों पर मील आरोप लगाने लगे कि नगरपालिका में भ्रष्टाचार हो रहा है।

 * कालवा ने गंगाजल मील और  ग्रुप पर आरोप लगाया कि वे तंग करते हैं और गलत काम करवाना चाहते हैं। कालवा ने यह कहते हुए भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश कर लिया। 24 फरवरी 2023 को श्रीगंगानगर में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश कराया। रामप्रताप कासनिया और भाजपा के नेता उस समय मौजूद थे।

27 फरवरी 2023 को ओमप्रकाश कालवा को गाजे-बाजे के साथ समारोह जैसा माहौल बनाकर अध्यक्ष की कुर्सी पर फिर से बिठाया गया। ओमप्रकाश कालवा को भाजपा में लेने का भी अनेक कार्यकर्ताओं ने अच्छा नहीं माना।

अब ओमप्रकाश कालवा भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया के बहुत खास है।

 लेकिन रामप्रताप कासनिया ने 27 फरवरी को और उसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुले रूप से कहा कि ओमप्रकाश कालवा ने यदि भाजपा में आने से पहले कोई गलत काम किए हैं और उसमें दंड मिलता है तो भारतीय जनता पार्टी उसके लिए जिम्मेदार नहीं होगी,ओमप्रकाश कालवा ही कार्यवाही के जिम्मेदार होंगे। कासनिया ने यह भी कहा कि अब से नगरपालिका में हर काम ईमानदारी से होगा।

👍 नगर पालिका में इस झगड़े के कारण आम जनता का काम नहीं हो रहा है।जो पट्टे बनाने चाहिए थे उनका काम पूर्ण रूप से रुका हुआ है। आरोप लगाया जा रहा है कि ओमप्रकाश कालवा पट्टों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा।

* ओमप्रकाश कालवा का कहना है कि मेरे सामने कोई पट्टा रखा ही नहीं गया।  पट्टा रखा जाए तो हस्ताक्षर की बात हो।

* एक एंपावर्ड कमेटी की बैठक रिपोर्ट पर अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा के द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया जा रहा है। ओमप्रकाश कालवा से इस बाबत जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि 2 फरवरी को एंपावर्ड कमेटी की बैठक बताई गई है और मैं 2 फरवरी को सूरतगढ़ में नहीं था। ऐसी स्थिति में हस्ताक्षर करके मुझे मरना है? मैं हस्ताक्षर क्यों करूं?  लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अध्यक्ष नहीं था तब एंपावर्ड कमेटी की बैठक आयोजित कैसे हुई?अध्यक्ष के बिना तो उसका आयोजन भी नहीं हो सकता था। 

एक बार फिर पट्टों की बात करें राजस्थान सरकार ने स्पष्ट रूप से एक आदेश जारी किया कि नगर पालिका अध्यक्ष के पास पट्टे की फाइल पेश की जाए। यदि 3 दिन में हस्ताक्षर नहीं होते हैं तो अधिशासी अधिकारी हस्ताक्षर कर पट्टा जारी कर देगा। अगर ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष के नाते हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं तो अधिशासी अधिकारी के मार्फत यह पट्टा जारी करवाया जाना चाहिए। 

सच यह है कि आरोप-प्रत्यारोप में सब काम ठप्प हैं। भाजपा भी कामों के मामले में अनदेखी कर रही है। 

सच्च यह है कि ओमप्रकाश कालवा के पीछे गंगाजल मील और ग्रुप हाथ धोकर पीछे पड़ा हुआ है। कालवा अकेला ही भागदौड़ करने में लगा है।

 * यदि ओमप्रकाश कालवा को सरकार सस्पेंड करती है तो कांग्रेस के पार्षद को ही अध्यक्ष पद पर बैठाया जाएगा। कौन बैठाया जाएगा में पार्षद परसराम भाटिया हो सकते हैं।०0०

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