शनिवार, 24 अप्रैल 2021

राजस्थान में सरकार ने शादी कार्यक्रम का समय 3 घंटे कैसे क्यों किसकी राय लेकर निर्धारित किया?

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* सामयिक लेख - करणीदानसिंह राजपूत *

राजस्थान सरकार की 23 अप्रैल 2021 को जारी कोरोना गाइड लाईन में विवाह कार्यक्रम के लिए 3 घंटे निर्धारित किया है अर्थात 3 घंटे में समारोह पूरा करना है। यह समारोह भी एक ही स्थान पर करने का भी निर्देश है।

राजस्थान सरकार शादी ब्याह के समारोह का समय 3 घंटे आखिर कैसे तय किया?
सरकार को बताना चाहिए कि इस 3 घंटे के कार्यक्रम में क्या-क्या किया जा सकता है और प्रत्येक विधि में कितना कितना समय लगाना चाहिए ताकि 3 घंटे में समारोह पूरा हो जाए। इसमें वरमाला फेरे विदाई आदि सभी हो।

क्या राजस्थान सरकार ने यह तय करने से पहले राय ली थी। उस राय देने वालों में कौन थे? मंत्री और सचिव आदि।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 3 घंटे समय कैसे निर्धारित किया गया? यह कैसे तय किया गया कि 3 घंटे में सारे कार्यक्रम ब्याह के संपन्न हो जाएंगे।
किसी ने तो यह राय दी ही होगी। फिर इस पर चर्चा हुई होगी। चर्चा के बाद यह तय किया गया होगा कि 3 घंटे उचित है।
सरकार ने ब्याह कार्यक्रम तीन घंटे निर्धारित कर दिया। इन तीन घंटों पर किसी की प्रतिक्रिया अभी आज नहीं आई।
कितना समय होना चाहिए। यह समय कम है या ज्यादा है। फिलहाल कोई नहीं बोला। इस अवधि 3 घंटे पर कोई नहीं बोला। यदि सरकार समय 2 घंटा कर देती या एक घंटा कर देती फिर भी कोई नहीं बोलता। मतलब 2 घंटे और 1 घंटे में भी शादी ब्याह कार्यक्रम के लिए लोग तैयार हैं।
जो पंडित लोग ब्याह करवाते हैं।वे बताएं तो सही की 3 घंटे में केवल फेरे भी हो सकते हैं या नहीं हो सकते?
पंडित जी कौन कौन से मंत्र और कौन-कौन सी विधियां तरीके छोड़ेंगे ताकि कार्यक्रम इस  अवधि 3 घंटे में पूरा हो जाए।
लड़की वाले और लड़के वाले दोनों ही क्या 3 घंटे में सब कुछ शादी विवाह के शगुन से लेकर विदाई तक पूरा कर लेंगे?
यदि इतने समय में पूरा करना संभव नहीं है तो कम से कम सरकार को एक पत्र तो स्थानीय अधिकारी के माध्यम से भेज ही सकते हैं।
इस प्रकार की शादी जिसमें बहुत कुछ छोड़ कर के फेरे करवाने हैं क्या यह पूर्ण शादी कहलाएगी या विधि विधान के हिसाब से आधी अधूरी शादी कहलाएगी।  सरकारी रिकॉर्ड में तो रजिस्ट्रेशन करवाना होता है उसके हिसाब से तो कागजात में पूरी हो जाएगी।
आश्चर्य यह है कि किसी ने राजस्थान सरकार से पूछा नहीं कि सवाल नहीं किया कि आखिर आपने 3 घंटे समय तक कैसे किया ?
यह अवधि समय 3 घंटे किस तरह से सोच कर तय किया गया? यह सवाल महत्वपूर्ण है
और इसके लिए एक ही स्थान पर आयोजन होगा। चट मंगनी पट ब्याह का मुहावरा याद आएगा।
सोशल साइट्स पर बात बात में लिखने वाले चुप हैं। संस्कार और संस्कृति की बातें करने वाले भी चुप हैं।
सरकार को ब्याह कार्यक्रम के  निर्धारित समय में छूट देनी चाहिए और एक दिवस तो अवश्य ही करना चाहिए।0०0
सामयिक लेख-
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356.
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