सोमवार, 6 अप्रैल 2020

लाॅकडाउन के दौरान घर पर रहें- आदेशों के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान-जानेंं कानूनी धाराएं


* आपदा प्रबंधन कानून 2005 के तहत लाॅकडाउन को लागू किया गया है*

श्रीगंगानगर, 6 अप्रैल 2020.

 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने केंद्र और राज्य, केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कारगर कदम उठाने के आदेश दिए हैं। 

 जिला कलक्टर श्री शिवप्रसाद एम. नकाते ने बताया कि एनडीएमए के तहत दिशा-निर्देश जारी कर सख्ती से इसका पालन करने को कहा है। गाइड लाइंस में लाॅकडाउन के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान किया गया है। आपदा प्रबंधन कानून के तहत कोरोना वायरस के बारे में फेक न्यूज फैलाने पर भी सजा का प्रावधान है। आपदा प्रबंधन कानून के तहत अपराध और सजा आपदा प्रबंधन कानून की धारा 51-60 में अपराध और सजा की पूरी व्याख्या मौजूद है, जो कि लाॅकडाउन के उल्लंघन पर भी लागू होगा.।


काम में बाधा डालना (धारा 51)

 कोई किसी सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में अवरोध पैदा करते हैं, या केंद्र, राज्य सरकारें या एनडीएमए के दिशा-निर्देशों को मानने से इनकार करते हैं, यानी ना तो आप कोई जरूरी सामान खरीदने निकले ना ही किसी को ऐसी कोई वस्तु मुहैया कराने निकले. यहां तक कि किसी तरह का पूजा पाठ या कोई कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी घर से बाहर निकलना इस कानून के तहत अपराध माना जाएगा। सजा के तहत एक साल तक जेल व जुर्माना. अगर आपकी हरकत की वजह से किसी की जान चली जाती है, तो दो साल तक जेल व जुर्माना होगा।


झूठा डर फैलाना (धारा 54)

अगर कोई आपदा को लेकर मनगढ़ंत डर फैलाते हैं या लोगों को आपदा की तीव्रता को लेकर झूठी चेतावनी देते हैं और इससे भय का वातावरण पैदा होता है. सजा के तहत एक साल तक जेल या जुर्माना होगा।


मुआवजे का झूठा दावा (धारा 52)

 अगर कोई (सोशल मीडिया, लोगों के बीच या लिखित तौर पर) जानबूझकर ऐसा झूठा दावा करते हैं जिससे आपको केंद्र, राज्य सरकारों या एनडीएमए से किसी तरह की राहत, मदद, मरम्मत या दूसरा कोई फायदा मिले। सजा के तहत दो साल तक की जेल व जुर्माना होगा।


पैसे व सामग्री का दुरुपयोग (धारा 53)

 अगर कोई राहत के प्रयासों के लिए दिए गए पैसे या सामग्री का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं या इसकी कालाबाजारी करते हैं तो दो साल तक की जेल व जुर्माना होगा


ड्यूटीं नही करने वाले अधिकारियों के लिए (धारा 56)

अगर कोई सरकारी अधिकारी लाॅकडाउन से संबंधित किसी निर्देश का पालन करने से मना करता है या बिना इजाजत के अपनी जिम्मेदारी वापस लेता है तो एक साल तक की जेल या जुर्माना होगा।


अधिग्रहण से जुड़े आदेश की अवहेलना (धारा 57)

आपदा प्रबंधन कानून के तहत एनडीएमए को अधिकार है कि वो आपदा के हालात से निपटने के लिए किसी तरह के संसाधन, गाड़ी या मकान की मांग करे. अगर आप अधिग्रहण के ऐसे किसी आदेश की अवहेलना करते हैं, तो इसे अपराध माना जाएगा एक साल तक जेल व जुर्माना भरना होगा। अगर कोई सरकारी विभाग या कंपनियां ऐसे किसी अपराध के मामले में शामिल होती हैं तो उनके लिए खास प्रावधान हैं।


आईपीसी की धारा 188

लाॅकडाउन के उल्लंघन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत भी सजा मिलेगी जिसमें किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सरकारी अधिकारी का आदेश मानने से इन्कार करने पर सजा या उसकी संपत्ति पर कार्रवाई का प्रावधान है. सजा के तहत एक महीने तक जेल व 200 रुपये का जुर्माना होगा। अगर आज्ञा की अवहेलना से किसी इंसान की जिंदगी, सेहत या उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ती है तो 6 महीने तक जेल व 1000 रुपये का जुर्माना।

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