शनिवार, 24 मार्च 2018

उड़ादो फूंक से अत्याचारी सरकारें: कविता- करणीदानसिंह राजपूत,




एको राखो,

चेतो राखो,

शासन प्रशासन ने,

सेके राखो,

ना माने 

सरकार तो,

टेके राखो.

ताकतवर सरकारों को

हिलाने हटाने के लिए

यह आह्वान 

यह अपील

काफी है।

यह अपील

बहुत 

शक्तिशाली है।

अपने आपको

प्रचंड बहुमत से

शक्तिशाली

मानकर

नादिरशाही 

व्यवहार करने

वाली

अत्याचारी

सरकारें

जनता की

एकता की

फूंक से

उड़

जाती हैं।

इतिहास की

पुस्तकें

भरी हैं 

ऐसे

परिवर्तनों से।

तो फिर

झुको नहीं

रूको नहीं

पलट डालो

तख्त ताज

राजगद्दी

तानाशाही की।

लोकतंत्र में 

मत का

ताकतवर

हथियार

तुम्हारे

पास है।

करो

तैयारी

अब

सुदर्शन जैसा

कालचक्र

तुम्हें ही

चलाना है।

समय

आ पहंचा है

रणभेरी

बजाने का।

*****

करणीदानसिंह राजपूत,

सूरतगढ,

94143 81356.



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