Wednesday, March 22, 2017

आपातकाल में लोकतंत्र सेनानियों ने प्रजातंत्र को बचाने का कार्य किया



लखनऊ 21 मार्च 2017.

 भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक ने लोकतंत्र सेनानियों के कार्यो को याद करते हुए कहा कि उनके त्याग से ही देश एक बार और गुलामी के बंधनसे बाहर निकला था। वे आज भाजपा मुख्यालय पर आपातकाल के 40 वर्ष पूरे होने पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में बतौर मुख्यअतिथि मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मनाया जा रहा है जिसमें केन्द्र सरकार के मंत्री एवं सांसदगण अपनी भागेदारी सुनिश्चित कर रहे है। उन्होंने कैबिनेट के उस ऐतिहासिक निर्णय को सामने रखा जिसमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली सिताबदियरा में स्मारक बनवाया जायेगा।


लोकतंत्र के इस काले अध्याय को याद करते हुए कहा कि यह आपात काल केवल इंदिरा गांधी की सरकार को बचाये रखने के लिए था न कि देश हित में। समाचार पत्र बंद हो चुके थे कही भी कोई सभा नहीं हो सकती थी जिसके ऊपर भी सरकार को शक होता था वो जेल भेज दिया जाता था ऐसे में जिन्होंने लोकतंत्र की लौ को जलाये रखा उन्हें शत-शत नमन। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोकतंत्र सेनानियों को यह विश्वास दिलाया कि उनकी बेहतरी के लिए भारत सरकार कटिबद्ध है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मांग किया कि आपातकाल लगाने के लिए कांग्रेस देश की जनता से सार्वजनिक रूप से मांफी मांगे। आज देश जय प्रकाश जी का एवं उन लोकतंत्र सेनानियों का ऋणी है जिन्होंने अपने सुख को तिलाजंली देकर लोकतंत्र को बचाया। डा0 बाजपेयी ने कहा जिन गांधी जी ने देश को आजादी दिलाई उन्ही गांधी के परम्परा पर चलने का ढोंग करने वाले कांग्रेसियों ने देश में आंतरिक आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या करनी चाही। उस समय के अधिकांश नेतागण एवं समाजिक कार्यकर्ता खोज-खोजकर जबरन जेलों में भर दिये गये जब सरकार का इससे भी पेट नहीं भरा तो उसने स्कूलों और कालेजो के छात्रों को भी जेल भेजा। गांधी का नाम बेचकर घोटाले दर घोटाले कर कांग्रेस ने विश्व पटल पर भारत की छवि को धूल धूसरित किया है।


डा0 बाजपेयी ने कहा कि यदि कांग्रेस गांधी जी के आर्दशों से दशांश भी प्रेरणा लेती है तो उसे कांग्रेस की समाप्ति कर देनी चाहिए। लेकिन बेहयाई का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कि उसके प्रवक्ता और नेतागण समय-समय पर सार्वजनिक मंचों पर आपातकाल को जायज ठहराते रहते हैं।  इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवलन एवं लोक नायक जयप्रकाश नारायण के चित्र पर माल्र्यापण किया गया। लोकतंत्र सेनानियों को डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी एंव श्रीपाद नाईक ने माला एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया जिनमें प्रमुख रूप से भारत दीक्षित, बृज किशोर मिश्र, रामाधीन सिंह, रमाशंकर त्रिपाठी, प्यारेलाल कनौजिया, राजेन्द्र त्रिपाठी, अनिरूद्ध यादव, राजेन्द्र गौण, महेन्द्र सिंह आदि रहे।


कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष मनोहर सिंह एवं संचालन मुकेश शर्मा ने किया। लालजी टण्डन ने आपातकाल के संस्मरण को याद करते हुए बताया कि लोगों को जबरिया दो दिनों तक थानों में बिठाये रखा गया सरकार यह तय नहीं कर पा रही थी कि इन्हे किन धाराओं में जेल भेजे लोगों के ऊपर फर्जी मुकदमें लगाये गये। जनसंघ एक मात्र ऐसा संगठन था जिसने कश्मीर से कन्या कुमारी तक राष्ट्र का पुनः जागरण किया ऐसा माहौल तैयार किया जिससे इंदिरा गांधी को आपातकाल वापस लेने पर मजबूर किया जो लोग जेल में थे उनसे कही कम उनका भी योगदान नहीं था जिन लोगों ने छुप-छुपकर गिरफ्तार हुए लोगों के परिवारों की चिंता की। आज राष्ट्र इनके प्रतिकृतज्ञ है एवं अपनी आने वाली पीढि़यों को लेकर आशान्वित है कि जब भी राष्ट्र को जरूरत होगी नौजवान बढ़-चढ़कर अपनी भागेदारी सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में प्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल टण्डन (विधायक), प्रदेश मंत्री वीरेन्द्र तिवारी, प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक, डा0 चन्द्रमोहन, हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनीष शुक्ला, राजेन्द्र तिवारी, अंनू मिश्र, राकेश श्रीवास्तव, श्रीमती सुषमा खर्कवाल, सुरेश श्रीवास्तव, सुरेश तिवारी, विन्ध्यवासिनी कुमार आदि लोग रहे।

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